सांसों पर संकट: हरियाणा-उत्तर प्रदेश में प्रदूषण ने डाला डेरा, मेरठ में 325 पर पहुंचा एक्यूआई

मेरठ में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 2,050 फीसदी अधिक है।
फोटो: सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट (सीएसई)
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सारांश
  • सांस लेना जीवन की पहली जरूरत है, लेकिन देश के कई शहरों में यही हवा अब सबसे बड़ा खतरा बनती जा रही है।

  • 13 जुलाई 2026 को जारी सरकारी आंकड़े बताते हैं कि मेरठ देश का सबसे प्रदूषित शहर बनकर उभरा, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 325 तक पहुंच गया। सिर्फ 24 घंटों में यहां प्रदूषण 65 अंक बढ़ा और हवा में पीएम2.5 का दबदबा इतना अधिक रहा कि प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से करीब 2,050 फीसदी ऊपर दर्ज किया गया।

  • उत्तर प्रदेश और हरियाणा के कई शहर—ग्रेटर नोएडा, मोदीनगर, मुजफ्फरनगर, हापुड़, पानीपत, जींद, गुरुग्राम और दिल्ली—भी खराब से बेहद खराब श्रेणी में रहे, जिससे साफ है कि पूरा क्षेत्र प्रदूषण की चपेट में है।

  • हालांकि दिल्ली और फरीदाबाद में पिछले दिन की तुलना में कुछ सुधार दर्ज किया गया, लेकिन हवा अभी भी स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित नहीं है।

  • दूसरी ओर, आइजोल और मदिकेरी जैसे शहरों ने साफ हवा का उदाहरण पेश किया, जहां एक्यूआई महज 22 रहा।

  • 241 शहरों के विश्लेषण से यह भी सामने आया कि लगभग एक-तिहाई शहरों की हवा अब भी चिंताजनक श्रेणी में है। यह रिपोर्ट साफ संकेत देती है कि प्रदूषण अब मौसमी नहीं, बल्कि स्वास्थ्य के लिए गंभीर संकट बन चुका है।

सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 13 जुलाई 2026 को देश में मेरठ सबसे प्रदूषित रहा। इस दौरान वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 325 दर्ज किया गया, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (12 जुलाई) को मेरठ में सूचकांक 260 दर्ज किया गया था। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां प्रदूषण के स्तर में 65 अंकों का भारी इजाफा हुआ है।

रुझानों में यह भी सामने आया है कि मेरठ की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।

मेरठ में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 2,050 फीसदी अधिक है।

दूसरी तरफ देश में आइजोल- मदिकेरी की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 22 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर मेरठ की तुलना आइजोल से करें तो वहां स्थिति 14.7 गुणा खराब है।

इससे पहले कल देश में ग्रेटर नोएडा की हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित थी, जब वायु गुणवत्ता सूचकांक 335 दर्ज किया गया था। हालांकि आज 32 अंकों के सुधार के साथ सूचकांक 303 दर्ज किया गया। मतलब की प्रदूषण में गिरावट के बावजूद वहां स्थिति बेहद खराब बनी हुई है।  

दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 261 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 246 पर पहुंच गया। मतलब की 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता में 15 अंकों का सुधार आया है। हालांकि इसके बावजूद दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता खराब श्रेणी में बनी हुई है।

2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 12 जुलाई को दर्ज किया गया, जब एक्यूआई 48 रिकॉर्ड किया गया। इसी तरह 12 जून 2026 को सूचकांक 73 और 30 मई को 85 रिकॉर्ड किया गया। वहीं 05 मई को सूचकांक 86, जबकि 04 मई को 88 दर्ज हुआ। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।

दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में कमी आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 184 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 150 पर पहुंच गया। इसके साथ ही 34 अंकों के सुधार के बावजूद फरीदाबाद में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 13 जुलाई 2026 को 241 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 15.4 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 49.8 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 34.8 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।

कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में करीब 11.9 फीसदी की गिरावट आई है। इसी तरफ संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में भी 6.3 फीसदी की कमी दर्ज की गई। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में कल से 16.1 फीसदी का उछाल देखा गया। दूसरी तरह खराब हवा वाले शहरों की गिनती में कल से 19 फीसदी की कमी आई है, जोकि राहत की खबर है।    

आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में ग्रेटर नोएडा (303) दूसरे जबकि मोदीनगर (291) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह मुजफ्फरनगर (284) चौथे स्थान पर है। पंचगांव (282)–हापुड़ (278) में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो पांचवें और छठे पायदान पर हैं।

पानीपत (276) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में जींद (253), गुरुग्राम (251) और दिल्ली (246) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में उत्तर प्रदेश के पांच शहर (मेरठ, ग्रेटर नोएडा, मोदीनगर, मुजफ्फरनगर, हापुड़) शामिल हैं।

विश्लेषण से यह भी पता चला है कि मेरठ, मोदीनगर, पंचगांव, जींद, गुरुग्राम, चरखी दादरी, भिवानी, बहादुरगढ़, कैथल, आरा, खोरा, अलवर, धारूहेड़ा, गुवाहाटी, फरीदाबाद, नारनौल, खैरथल, करनाल, जयपुर, चेन्नई, लखनऊ, यमुना नगर आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।

वहीं ग्रेटर नोएडा, मुजफ्फरनगर, हापुड़, पानीपत, दिल्ली, गाजियाबाद, बुलंदशहर, फतेहाबाद, नोएडा, सिरसा, हिसार, मुरादाबाद, चूरू, विशाखापत्तनम, रोहतक, अमरावती (आंध्रप्रदेश), बिलाईपाड़ा, हनुमानगढ़, देहरादून, मथुरा, भिवाड़ी, टोंक, सोनीपत, दौसा, झुंझुनू, तालचेर, अंबाला, कुरुक्षेत्र, खुर्जा, बागपत, जैसलमेर, मंडीदीप, सहरसा, पाली, जालौर, कटक, बारीपाड़ा, बाड़मेर, वातवा, बांसवाड़ा, सवाई माधोपुर, देवास, सीकर, सिरोही, कटनी, श्री गंगानगर, करौली, विरार, अंगुल, भीलवाड़ा, ब्यासनगर, गया, जोरापोखर, कोटा, राजसमंद, सूरत आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।

इन शहरों के विपरीत देश के 15.4 फीसदी यानी 37 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में कोयंबटूर, दमोह, डोंबिवली, गडग, जलगांव, कलबुर्गी, कोहिमा, कोल्हापुर, मछलीपट्टनम, मदिकेरी, महाद, मैहर, मीरा-भायंदर, नागांव, नासिक, नवी मुंबई, नेल्लोर, प्रयागराज, पुडुचेरी, रामनगर, रतलाम, सागर, शिवमोगा आदि शामिल हैं।

इसी तरह देश के 120 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें भागलपुर, भरतपुर, भावनगर, भिवंडी, भोपाल, भुवनेश्वर, ब्रजराजनगर, बूंदी, बक्सर, चंडीगढ़, चंद्रपुर, छाल, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, कुड्डालोर, धारवाड़, धौलपुर, धुले, दुर्गापुर, एलुरु, फिरोजाबाद, गांधीनगर, गोरखपुर, गुम्मिडीपूंडी, गुंटूर, ग्वालियर, हाजीपुर, हल्दिया, हिंगोली, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, झालावाड़, झांसी, जोधपुर, कडप्पा, कल्याण, कन्नूर, कानपुर, क्योंझर, खन्ना, कोलकाता, कोरबा, कुंजेमुरा, कुरनूल, लातूर, लुधियाना, मदुरई, मालेगांव, मंडी गोबिंदगढ़, मंगलौर, मेहसाणा, मिलुपारा, मोतिहारी, मुंबई, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, मैसूरु, नागौर, नागपुर, नलबाड़ी, नांदेड़, पलवल, पंचकुला, परभणी, पटियाला, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, पीथमपुर, प्रतापगढ़, पुणे, पूर्णिया, रायबरेली, रायपुर, रायरंगपुर, राजमहेंद्रवरम, राजगीर, राजकोट, राउरकेला, रूपनगर, सांगली, सतना, सिंगरौली, सोलापुर आदि शहर शामिल हैं।

इन शहरों के उलट आज देश के 65 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

इनमें अलवर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अंबाला, अंगुल, बागपत, बांसवाड़ा, बारीपाड़ा, बाड़मेर, भीलवाड़ा, भिवाड़ी, बिहार शरीफ, बीकानेर, बिलाईपाड़ा, ब्यासनगर, बर्नीहाट (मेघालय), चेन्नई, चूरू, कटक, दौसा, देहरादून, देवास, धनबाद, धारूहेड़ा, फरीदाबाद, गया, गुवाहाटी, हनुमानगढ़, हिसार, जयपुर, जैसलमेर, जालौर, झुंझुनू, जोरापोखर, करौली, करनाल, कटनी, खैरथल, खोरा, खुर्जा, कोटा, कुरुक्षेत्र, लखनऊ, मंडीदीप, मथुरा, मुरादाबाद, नारनौल, पाली, राजसमंद, ऋषिकेश, रोहतक, सहरसा, सवाई माधोपुर, सीकर, सिलीगुड़ी, सिरोही, सिरसा, सोनीपत, श्री गंगानगर, सूरत, तालचेर, टोंक, वातवा, विरार, विशाखापत्तनम, यमुना नगर आदि शामिल हैं।

इसी तरह आरा, बहादुरगढ़, भिवानी, बुलंदशहर, चरखी दादरी, दिल्ली, फतेहाबाद, गाजियाबाद, गुरुग्राम, हापुड़, जींद, कैथल, मोदीनगर, मुजफ्फरनगर, नोएडा, पंचगांव, पानीपत में स्थिति खराब, जबकि ग्रेटर नोएडा (303), और मेरठ (325) में बेहद खराब दर्ज की गई है।

क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 241 में से 37 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 120 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 12 जुलाई को यह आंकड़ा 128 दर्ज किया गया था।

65 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।

दूसरे शहरों की तुलना में आज मेरठ में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 325 दर्ज किया गया, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (12 जुलाई) को मेरठ में सूचकांक 260 दर्ज किया गया था। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां प्रदूषण के स्तर में 65 अंकों का भारी इजाफा हुआ है।

इससे पहले कल देश में ग्रेटर नोएडा की हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित थी, जब वायु गुणवत्ता सूचकांक 335 दर्ज किया गया था। हालांकि आज 32 अंकों के सुधार के साथ सूचकांक 303 दर्ज किया गया। मतलब की प्रदूषण में गिरावट के बावजूद वहां स्थिति बेहद खराब बनी हुई है।  

दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 261 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 246 पर पहुंच गया। मतलब की 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता में 15 अंकों का सुधार आया है। हालांकि इसके बावजूद दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता खराब श्रेणी में बनी हुई है।  

दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में कमी आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 184 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 150 पर पहुंच गया। इसके साथ ही 34 अंकों के सुधार के बावजूद फरीदाबाद में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 13 जुलाई को मुजफ्फरनगर (284) चौथे स्थान पर है, वहीं ग्रेटर नोएडा (303) दूसरे, जबकि मोदीनगर (291) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 87, गाजियाबाद में 243, गुवाहाटी में 151, गुरूग्राम में 251, नोएडा में 216, ग्रेटर नोएडा में 303 पर पहुंच गया है।

इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 60 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘संतोषजनक‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 106, चेन्नई में 114, चंडीगढ़ में 52, हैदराबाद में 52, जयपुर में 137 और पटना में 61 दर्ज किया गया।

इन शहरों में साफ रही हवा

देश के जिन 37 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें अहमदनगर, आइजोल, अंकलेश्वर, अररिया, बद्दी, बरेली, भिलाई, बोइसर, चामराजनगर, कोयंबटूर, दमोह, डोंबिवली, गडग, जलगांव, कलबुर्गी, कोहिमा, कोल्हापुर, मछलीपट्टनम, मदिकेरी, महाद, मैहर, मीरा-भायंदर, नागांव, नासिक, नवी मुंबई, नेल्लोर, प्रयागराज, पुडुचेरी, रामनगर, रतलाम, सागर, शिवमोगा, सिलचर, शिवसागर, श्रीनगर, वापी, विजयपुरा शामिल हैं।

वहीं अगरतला, आगरा, अहमदाबाद, अकोला, अमरावती (महाराष्ट्र), अमृतसर, आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बागलकोट, बालासोर, बारां, बारबिल, बैरकपुर, बठिंडा, बीड, बेगूसराय, बेलापुर, बेंगलुरु, भागलपुर, भरतपुर, भावनगर, भिवंडी, भोपाल, भुवनेश्वर, ब्रजराजनगर, बूंदी, बक्सर, चंडीगढ़, चंद्रपुर, छाल, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, कुड्डालोर, धारवाड़, धौलपुर, धुले, दुर्गापुर, एलुरु, फिरोजाबाद, गांधीनगर, गोरखपुर, गुम्मिडीपूंडी, गुंटूर, ग्वालियर, हाजीपुर, हल्दिया, हिंगोली, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, झालावाड़, झांसी, जोधपुर, कडप्पा, कल्याण, कन्नूर, कानपुर, क्योंझर, खन्ना, कोलकाता, कोरबा, कुंजेमुरा, कुरनूल, लातूर, लुधियाना, मदुरई, मालेगांव, मंडी गोबिंदगढ़, मंगलौर, मेहसाणा, मिलुपारा, मोतिहारी, मुंबई, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, मैसूरु, नागौर, नागपुर, नलबाड़ी, नांदेड़, पलवल, पंचकुला, परभणी, पटियाला, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, पीथमपुर, प्रतापगढ़, पुणे, पूर्णिया, रायबरेली, रायपुर, रायरंगपुर, राजमहेंद्रवरम, राजगीर, राजकोट, राउरकेला, रूपनगर, सांगली, सतना, सिंगरौली, सोलापुर, सुआकाती, टेन्सा, ठाणे, तिरुवनंतपुरम, थूथुकुडी, तिरुमाला, तिरुपति, तुमडीह, उदयपुर, उज्जैन, उल्हासनगर, वडोदरा, वाराणसी, विजयवाड़ा, वृंदावन, यादगीर आदि 120 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।

क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक

देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।

इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।

यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।

ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।

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