सांसों पर संकट: ग्रेटर नोएडा में बढ़कर 326 पर पहुंचा एक्यूआई, दिल्ली-फरीदाबाद में भी बढ़ा प्रदूषण

दूसरी तरफ देश में रामनाथपुरम की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 21 रिकॉर्ड किया गया
नोएडा के गौतम बुद्ध नगर में सेक्टर 45 के एक हॉउसिंग प्रोजेक्ट में काम करती महिला मजदूर; फोटो: विकास चौधरी
नोएडा के गौतम बुद्ध नगर में सेक्टर 45 के एक हॉउसिंग प्रोजेक्ट में काम करती महिला मजदूर; फोटो: विकास चौधरी
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सारांश
  • देशभर में वायु गुणवत्ता तेजी से बिगड़ती दिख रही है, जहां 25 अप्रैल 2026 को ग्रेटर नोएडा 326 एक्यूआई के साथ सबसे प्रदूषित शहर बनकर उभरा और महज 24 घंटों में 32 अंकों की खतरनाक छलांग दर्ज की। यहां प्रदूषण का स्तर सुरक्षित सीमा से करीब 600 फीसद अधिक है, जिससे हालात बेहद गंभीर हो गए हैं।

  • एनसीआर के अन्य शहरों में भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है, दिल्ली और फरीदाबाद में भी प्रदूषण बढ़ा है, जबकि गाजियाबाद और सिंगरौली भी शीर्ष प्रदूषित शहरों में शामिल हैं।

  • देश के करीब आधे शहरों में हवा की स्थिति ‘चिंताजनक’ श्रेणी में पहुंच चुकी है, जहां पीएम10 और पीएम2.5 जैसे खतरनाक कण हावी हैं।

  • इसके उलट रामनाथपुरम में एक्यूआई महज 21 दर्ज किया गया, जो देश में सबसे साफ हवा का उदाहरण है, यानी ग्रेटर नोएडा की तुलना में हालात करीब 15 गुणा बदतर हैं। कुल मिलाकर, आंकड़े साफ संकेत देते हैं कि देश के अधिकांश हिस्सों में हवा जहरीली होती जा रही है और प्रदूषण का यह बढ़ता स्तर अब आम लोगों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन चुका है।

सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 25 अप्रैल 2026 को देश में ग्रेटर नोएडा सबसे अधिक प्रदूषित शहर रहा। इस दौरान यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 326 दर्ज किया गया, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है। गौरतलब है कि कल ग्रेटर नोएडा में वायु गुणवत्ता सूचकांक 294 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 32 अंकों का उछाल आया है।

रुझानों में यह भी सामने आया है कि ग्रेटर नोएडा की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम10) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।

ग्रेटर नोएडा में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 600 फीसदी अधिक है।

दूसरी तरफ देश में रामनाथपुरम की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 21 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर ग्रेटर नोएडा की तुलना रामनाथपुरम से करें तो वहां स्थिति 15 गुणा खराब है।

इससे पहले कल देश में मेरठ की स्थिति सबसे खराब थी, जब एक्यूआई 332 रिकॉर्ड किया गया था। हालांकि आज 38 अंकों के सुधार के साथ वहां सूचकांक 294 पर पहुंच गया है। मेरठ में वायु गुणवत्ता आज खराब बनी हुई है।

राजधानी दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 226 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 243 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां सूचकांक में 17 अंकों का उछाल दर्ज किया गया। इसके साथ ही दिल्ली में वायु गुणवत्ता आज भी खराब श्रेणी में बनी हुई है।

बता दें कि 2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 20 मार्च और आठ अप्रैल 2026 को दर्ज किया गया, जब एक्यूआई 93 पर पहुंच गया था। इसके बाद 01 अप्रैल को सूचकांक 113 दर्ज क्या गया। वहीं आज सूचकांक 114 रिकॉर्ड किया गया है। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।

दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 158 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 163 पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि वहां आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 25 अप्रैल 2026 को 240 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 9.6 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 40.8 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 49.6 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा चिंताजनक है।

कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 27.8 फीसदी का इजाफा हुआ है। दूसरी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में भी 12.5 फीसदी की कमी दर्ज की गई। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में कल से करीब 7.7 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। दूसरी तरफ खराब हवा वाले शहरों की गिनती में कल कोई बदलाव नहीं हुआ है और स्थिति जस की तस बनी हुई है।

आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में गाजियाबाद (316) दूसरे जबकि सिंगरौली (315) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह मेरठ (294) चौथे स्थान पर है। रोहतक- नोएडा में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 288 और 284 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।

बागपत (282) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में चरखी दादरी (281), बल्लभगढ़ (276) और मानेसर (269) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में उत्तर प्रदेश के पांच (ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, मेरठ, नोएडा, बागपत) शामिल हैं।

विश्लेषण से यह भी पता चला है कि मेरठ, रोहतक, चरखी दादरी, मानेसर, भिवाड़ी, जींद, यमुना नगर, बहादुरगढ़, पंचगांव, गुरुग्राम, सोनीपत, लखनऊ, आगरा, कैथल, खुर्जा, पंचकुला, वाराणसी, फरीदाबाद, मंडीदीप, नारनौल, जयपुर, चंद्रपुर, कानपुर, बिलासपुर, करनाल, ग्वालियर, अंबाला, महाद, अहमदाबाद, बर्नीहाट (असम), मुरादाबाद, पाली, बिहार शरीफ, कोटा, भागलपुर, नंदेसरी, पिंपरी-चिंचवाड़, हाजीपुर, नागपुर, भोपाल आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।

वहीं ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, सिंगरौली, नोएडा, बागपत, बल्लभगढ़, हापुड़, दिल्ली, बुलंदशहर, बद्दी, बारबिल, सीकर, मुजफ्फरनगर, बीकानेर, पानीपत, कुरुक्षेत्र, चुरू, टोंक, परभनी, करौली, श्री गंगानगर, मेहसाणा, नयागढ़, नागौर, नांदेड़, हनुमानगढ़, झुंझुनू, चित्तौड़गढ़, अगरतला, मंगुराहा, सहरसा, ब्रजराजनगर, कटनी, बेलापुर, वडोदरा, वृंदावन, जोधपुर, अंकलेश्वर, गया, गांधीनगर, पटियाला, दौसा, जैसलमेर, जलना, अलवर, पीथमपुर, भावनगर, वातवा, लुधियाना, उदयपुर, प्रतापगढ़, राजसमंद, सुआकाती, सासाराम, धनबाद, फिरोजाबाद, जोरापोखर, तुमडीह, अजमेर, विशाखापत्तनम, मुंबई, बिलीपाड़ा, नवी मुंबई आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।

इन शहरों के विपरीत देश के 9.6 फीसदी यानी महज 23 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में बैरकपुर, बेतिया, भिवानी, चामराजनगर, चेन्नई, एलुरु, कलबुर्गी, किशनगंज, कोलकाता, मछलीपट्टनम, मदिकेरी, मुंगेर, नेल्लोर, पंपोर, पेरुंदुरई, पुदुचेरी, रामनाथपुरम, रूपनगर, श्रीनगर, तिरुवनंतपुरम शामिल हैं।

इसी तरह देश के 98 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें बेगूसराय, बेंगलुरु, भिलाई, भिवंडी, भुवनेश्वर, बक्सर, चंडीगढ़, छाल, चिक्काबल्लापुर, कटक, देहरादून, देवास, धारवाड़, धौलपुर, धुले, डूंगरपुर, दुर्गापुर, गंगटोक, गोरखपुर, गुम्मिडीपूंडी, गुंटूर, गुवाहाटी, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जालंधर, जालोर, झांसी, कल्याण, कटिहार, क्योंझर, खन्ना, कोहिमा, कोल्हापुर, कोरबा, लातूर, मदुरै, मैहर, मालेगांव, मंडी गोबिंदगढ़, मंडीखेड़ा, मीरा-भायंदर, मोतिहारी, मुजफ्फरपुर, मैसूर, नागांव, नाहरलागुन, नासिक, पलवल, प्रयागराज, पुणे, पूर्णिया, रायपुर, रायरंगपुर, राजकोट, रामनगर, रतलाम, ऋषिकेश, राउरकेला, समस्तीपुर, सतना, शिलांग, शिवमोगा, सिलचर, सिलीगुड़ी, सिरोही, सिरसा, शिवसागर आदि शहर शामिल हैं।

इन शहरों के उलट आज देश के 98 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

इन शहरों में अगरतला, आगरा, अहमदाबाद, अजमेर, अलवर, अंबाला, अंकलेश्वर, औरंगाबाद (बिहार), बांसवाड़ा, बारां, बेलापुर, भागलपुर, भरतपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भोपाल, बिहार शरीफ, बीकानेर, बिलासपुर, बिलीपाड़ा, ब्रजराजनगर, बूंदी, बर्नीहाट (असम), चंद्रपुर, चित्तौड़गढ़, चुरू, दमोह, दौसा, धनबाद, फरीदाबाद, फिरोजाबाद, गांधीनगर, गया, गुरुग्राम, ग्वालियर, हाजीपुर, हल्दिया, हनुमानगढ़, जयपुर, जैसलमेर, जलगांव, जलना, झालावाड़, झुंझुनू, जोधपुर, जोरापोखर, कैथल, कानपुर, करौली, करनाल, कटनी, खुर्जा, कोटा, कुंजेमुरा, कुरुक्षेत्र, लखनऊ, लुधियाना, महाद, मंडीदीप, मंगुराहा, मेहसाणा, मुरादाबाद, मुंबई, मुजफ्फरनगर, नागौर, नागपुर, नांदेड़, नंदेसरी, नारनौल, नवी मुंबई, नयागढ़, पाली, पंचकुला, पानीपत, परभनी, पटियाला, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, पीथमपुर, प्रतापगढ़, राजगीर, राजसमंद, सागर, सहरसा, सासाराम, सवाई माधोपुर, सीकर, सोनीपत, श्री गंगानगर, सुआकाती, टोंक, तुमडीह, उदयपुर, वडोदरा, वाराणसी, वातवा, विशाखापत्तनम, वृंदावन आदि शामिल हैं।

इसी तरह देश में अंगुल, बद्दी, बागपत, बहादुरगढ़, बल्लभगढ़, बारबिल, भिवाड़ी, बुलंदशहर, चरखी दादरी, दिल्ली, हापुड़, जींद, मानेसर, मेरठ, नोएडा, पंचगांव, रोहतक, यमुना नगर में स्थिति ‘खराब’ है। वहीं ग्रेटर नोएडा (326), गाजियाबाद (316), सिंगरौली (315) में स्थिति बेहद खराब दर्ज की गई है।   

क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 240 में से महज 23 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 98 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 24 अप्रैल को यह आंकड़ा 112 दर्ज किया गया था।

98 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।

दूसरे शहरों की तुलना में आज ग्रेटर नोएडा में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 326 दर्ज किया गया। गौरतलब है कि कल ग्रेटर नोएडा में वायु गुणवत्ता सूचकांक 294 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 32 अंकों का इजाफा हुआ है। इसके साथ ही वायु गुणवत्ता ‘खराब’ से ‘बेहद खराब’ हो गई है।  

इससे पहले कल देश में मेरठ की स्थिति सबसे खराब थी, जब एक्यूआई 332 रिकॉर्ड किया गया था। हालांकि आज 38 अंकों के सुधार के साथ वहां सूचकांक 294 पर पहुंच गया है। मेरठ में वायु गुणवत्ता आज खराब बनी हुई है।

दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 226 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 243 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां सूचकांक में 17 अंकों का उछाल दर्ज किया गया। इसके साथ ही दिल्ली में वायु गुणवत्ता आज भी खराब श्रेणी में बनी हुई है।

दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 158 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 163 पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि वहां आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।

प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 25 अप्रैल को नोएडा चौथे स्थान पर है, वहीं गाजियाबाद (316) दूसरे, जबकि सिंगरौली (315) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 151, गाजियाबाद में 316, गुवाहाटी में 86, गुरूग्राम में 197, नोएडा में 284, ग्रेटर नोएडा में 326 पर पहुंच गया है।

इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 107 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘मध्यम‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 190, चेन्नई में 39, चंडीगढ़ में 92, हैदराबाद में 80, जयपुर में 161 और पटना में 104 दर्ज किया गया।

इन शहरों में साफ रही हवा

देश के जिन 23 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें अमरावती (आंध्रप्रदेश), बालासोर, बैरकपुर, बेतिया, भिवानी, चामराजनगर, चेन्नई, एलुरु, कलबुर्गी, किशनगंज, कोलकाता, मछलीपट्टनम, मदिकेरी, मुंगेर, नेल्लोर, पंपोर, पेरुंदुरई, पुदुचेरी, रामनाथपुरम, रूपनगर, श्रीनगर, तिरुवनंतपुरम, विजयपुरा शामिल हैं।

वहीं अहमदनगर, आइजोल, अकोला, अंबरनाथ, अमरावती (महाराष्ट्र), अमृतसर, अनंतपुर, अररिया, आरा, आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बदलापुर, बागलकोट, बरेली, बारीपदा, बठिंडा, बेगूसराय, बेंगलुरु, भिलाई, भिवंडी, भुवनेश्वर, बक्सर, चंडीगढ़, छाल, चिक्काबल्लापुर, कटक, देहरादून, देवास, धारवाड़, धौलपुर, धुले, डूंगरपुर, दुर्गापुर, गंगटोक, गोरखपुर, गुम्मिडीपूंडी, गुंटूर, गुवाहाटी, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जालंधर, जालोर, झांसी, कल्याण, कटिहार, क्योंझर, खन्ना, कोहिमा, कोल्हापुर, कोरबा, लातूर, मदुरै, मैहर, मालेगांव, मंडी गोबिंदगढ़, मंडीखेड़ा, मीरा-भायंदर, मोतिहारी, मुजफ्फरपुर, मैसूर, नागांव, नाहरलागुन, नासिक, पलवल, प्रयागराज, पुणे, पूर्णिया, रायपुर, रायरंगपुर, राजकोट, रामनगर, रतलाम, ऋषिकेश, राउरकेला, समस्तीपुर, सतना, शिलांग, शिवमोगा, सिलचर, सिलीगुड़ी, सिरोही, सिरसा, शिवसागर, सोलापुर, सूरत, तालचेर, ठाणे, थूथुकुडी, त्रिशूर, तिरुमाला, उल्हासनगर, वापी, विजयवाड़ा, विरार, यादगीर आदि 98 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।

क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक

देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।

इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।

यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।

ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।

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