बिगड़ा हवा का रिपोर्ट कार्ड: बुलंदशहर में 277 पर पहुंचा एक्यूआई, चार अन्य शहरों में स्थिति 'खराब'

10 सितम्बर 2026 को 243 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 26.3 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 51.9 फीसदी में स्थिति संतोषजनक, जबकि 21.8 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं
भारत की 96 फीसदी आबादी यानी 133 करोड़ लोग ऐसी हवा में सांस लेने को मजबूर हैं जहां पीएम 2.5 का वार्षिक औसत स्तर डब्ल्यूएचओ द्वारा जारी मानकों से सात गुणा खराब है; फोटो: आईस्टॉक
भारत की 96 फीसदी आबादी यानी 133 करोड़ लोग ऐसी हवा में सांस लेने को मजबूर हैं जहां पीएम 2.5 का वार्षिक औसत स्तर डब्ल्यूएचओ द्वारा जारी मानकों से सात गुणा खराब है; फोटो: आईस्टॉक
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सारांश
  • देश के कई शहरों में हवा एक बार फिर बिगड़ने लगी है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के 10 सितम्बर 2026 के आंकड़ों के मुताबिक, 243 शहरों में से 64 यानी 26.3 फीसदी में हवा ‘बेहतर’ रही, जबकि 126 शहरों में वायु गुणवत्ता ‘संतोषजनक’ दर्ज की गई।

  • इसके विपरीत 48 शहरों में हवा ‘मध्यम’ और पांच शहरों में ‘खराब’ श्रेणी में पहुंच गई। यानी करीब 21.8 फीसदी शहरों में हवा अब चिंता बढ़ा रही है।

  • बुलंदशहर लगातार दूसरे दिन देश का सबसे प्रदूषित शहर रहा। यहां एक्यूआई 277 दर्ज हुआ, जो एक दिन पहले के 241 से 36 अंक अधिक है।

  • पानीपत 244 के एक्यूआई के साथ दूसरे और कुड्डालोर 221 के साथ तीसरे स्थान पर रहा। ग्रेटर नोएडा और बद्दी भी क्रमशः 219 और 201 के एक्यूआई के साथ ‘खराब’ श्रेणी में रहे।

  • दिल्ली में भी प्रदूषण बढ़ा और एक्यूआई 128 से बढ़कर 134 हो गया, जबकि फरीदाबाद में 149 से बढ़कर 183 पहुंच गया।

  • इसके उलट आइजोल में महज 15 और मुंबई में 44 एक्यूआई दर्ज हुआ।

  • आंकड़े बताते हैं कि साफ हवा वाले शहरों की संख्या में कल के मुकाबले 18.5 फीसदी की गिरावट आई है—यानी देश के कई हिस्सों में हवा फिर से सांसों पर दबाव बढ़ा रही है।

सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 10 सितम्बर 2026 को देश में एक बार फिर बुलंदशहर सबसे प्रदूषित रहा। इस दौरान वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 277 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (09 सितम्बर) को बुलंदशहर में वायु गुणवत्ता सूचकांक 241 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण 36 अंकों का इजाफा हुआ है, जोकि चिंता का विषय है।

रुझानों में यह भी सामने आया है कि बुलंदशहर की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम10) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।

बुलंदशहर में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 500 फीसदी अधिक है।

दूसरी तरफ देश में आइजोल की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 15 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर बुलंदशहर की तुलना आइजोल से करें तो वहां स्थिति 18.5 गुणा खराब है।

दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 128 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 134 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक में 6 अंकों की वृद्धि दर्ज की गई। इसके साथ ही दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है। 

2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 09 जुलाई को दर्ज किया गया, जब एक्यूआई 48 रिकॉर्ड किया गया। इसी तरह 08 जुलाई 2026 को सूचकांक 59 और 07-10 सितम्बर को 63 रिकॉर्ड किया गया। वहीं 04 अगस्त और 22 जुलाई 2026 को सूचकांक 64  दर्ज हुआ। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।

दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में वृद्धि हुई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 149 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 183 पर पहुंच गया। इसके साथ ही 34 अंकों के उछाल के साथ फरीदाबाद में आज भी एक्यूआई मध्यम श्रेणी में बना हुआ है।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 10 सितम्बर 2026 को 243 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 26.3 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 51.9 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 21.8 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।

कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 18.5 फीसदी की कमी आई है, जोकि चिंता का विषय है। इसी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में भी 12.5 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। रुझानों के मुताबिक मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में कल से 5.9 फीसदी की कमी आई है, जोकि राहत की खबर है। दूसरी तरफ खराब हवा वाले शहरों का आंकड़ा तीन से पांच हो गया है।

आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में पानीपत (244) दूसरे जबकि कुड्डालोर (221) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह ग्रेटर नोएडा (219) चौथे स्थान पर है। बद्दी (201) – नोएडा (184) में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो पांचवें और छठे पायदान पर हैं।

फरीदाबाद (183) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में मानेसर (179), सोनीपत (176) और बल्लभगढ़ (167) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में हरियाणा के पांच शहर (पानीपत, फरीदाबाद, मानेसर, सोनीपत, बल्लभगढ़) शामिल हैं।

विश्लेषण से यह भी पता चला है कि पानीपत, फरीदाबाद, मानेसर, सोनीपत, बर्नीहाट (मेघालय), सासाराम, मेरठ, भिवाड़ी, यमुना नगर, पीथमपुर, गुरुग्राम, दिल्ली, गुम्मिडीपूंडी, चरखी दादरी, जींद, खोरा और पंचगांव आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं। वहीं बुलंदशहर, कुड्डालोर, ग्रेटर नोएडा, बद्दी, नोएडा, बल्लभगढ़, मंडी गोबिंदगढ़, गजरौला, गाजियाबाद, अंबाला, श्री गंगानगर, सीकर, विशाखापत्तनम, सागर, मुजफ्फरनगर, मोदीनगर, शामली, कैथल, अलवर, अमरावती (आंध्र प्रदेश), छपरा, सिरसा, बहादुरगढ़, फतेहाबाद, नारनौल, पाली, चंद्रपुर, कुरुक्षेत्र, वातवा, मुरादाबाद, देहरादून, मंडीदीप, दौसा, सवाई माधोपुर और टोंक आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।

इन शहरों के विपरीत देश के 26.3 फीसदी यानी 64 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में बदलापुर, बालासोर, बारबिल, बारीपदा, बैरकपुर, बेलापुर, बेतिया, भागलपुर, भिलाई, भिवंडी, भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, ब्रजराजनगर, ब्यासनगर, चामराजनगर, छाल, चिक्कमगलुरु, कोयंबटूर, डोंबिवली, फिरोजाबाद, गंगटोक, हल्दिया, हुबली, जालंधर, जलगांव, कलबुर्गी, कल्याण, करनाल, कारवार, क्योंझर, कोल्हापुर, कोरबा, कुंजेमुरा, लातूर, मदिकेरी, मीरा-भायंदर, मुंबई, मुजफ्फरपुर, नाहरलागुन, नांदेड़, नंदेसरी, नयागढ़, रायरंगपुर, राजगीर, राजकोट, राजसमंद, रामनगर आदि शामिल हैं।

इसी तरह देश के 126 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें अमृतसर, अनंतपुर, अंगुल, अंकलेश्वर, अररिया, आरा, आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बागपत, बांसवाड़ा, बरेली, बाड़मेर, बठिंडा, बीड, बेगूसराय, बेंगलुरु, भरतपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवानी, भोपाल, बीकानेर, बिलासपुर, बूंदी, बर्नीहाट (असम), चंडीगढ़, चेन्नई, चिक्काबल्लापुर, चित्तूर, कटक, देवास, धारवाड़, धौलपुर, धुले, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलूर, एलुरु, फतेहपुर सीकरी, गडग, गांधीनगर, गया, गुंटूर, गुवाहाटी, ग्वालियर, हाजीपुर, हनुमानगढ़, हिंगोली, हावड़ा, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जयपुर, जैसलमेर, जालोर, झालावाड़, झांसी, झुंझुनू, जोधपुर, जोरापोखर, कडप्पा, काकीनाडा, कानपुर, करौली, कटिहार, कटनी, खन्ना, किशनगंज, कोहिमा, कोलकाता, कोटा, कुरनूल, लखनऊ, मछलीपट्टनम, महाद, मालेगांव, मंगुराहा, मथुरा, मेहसाणा, मोतिहारी, मैसूरु, नागांव, नागौर, नागपुर आदि शहर शामिल हैं।

इन शहरों के उलट आज देश के 48 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

इनमें अलवर, अंबाला, अमृतसर, बद्दी, बल्लभगढ़, बेगूसराय, भागलपुर, भीलवाड़ा, भिवाड़ी, ब्रजराजनगर, चरखी दादरी, छपरा, कटक, दौसा, दिल्ली, फरीदाबाद, फतेहाबाद, गजरौला, गाजियाबाद, गुम्मिडीपूंडी, हापुड़, हिसार, जालंधर, जींद, कैथल, खैरथल, खोरा, मंडी गोबिंदगढ़, मानेसर, मेरठ, मोदीनगर, मुंगेर, मुजफ्फरनगर, नारनौल, नोएडा, पाली, पंचगांव, पीथमपुर, सासाराम, सवाई माधोपुर, शामली, सीकर, सिरसा, सोनीपत, श्री गंगानगर, तालचेर, टोंक, वातवा, विशाखापत्तनम, वृंदावन और यमुना नगर आदि शामिल हैं।

वहीं बुलंदशहर (277), पानीपत (244), कुड्डालोर (221), ग्रेटर नोएडा (219) और बद्दी (201) में स्थिति ‘खराब' है।

क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 243 में से 64 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 126 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 09 सितम्बर को भी यह आंकड़ा 144 दर्ज किया गया था।

48 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।

दूसरे शहरों की तुलना में आज एक बार फिर बुलंदशहर में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 277 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (09 सितम्बर) को बुलंदशहर में वायु गुणवत्ता सूचकांक 241 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण 36 अंकों का इजाफा हुआ है, जोकि चिंता का विषय है।

दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 128 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 134 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक में 6 अंकों की वृद्धि दर्ज की गई। इसके साथ ही दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है। 

दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में वृद्धि हुई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 149 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 183 पर पहुंच गया। इसके साथ ही 34 अंकों के उछाल के साथ फरीदाबाद में आज भी एक्यूआई मध्यम श्रेणी में बना हुआ है।

प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 10 सितम्बर को ग्रेटर नोएडा (219) चौथे स्थान पर है, वहीं पानीपत (244) दूसरे, जबकि ग्रेटर नोएडा (219) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 96, गाजियाबाद में 144, गुवाहाटी में 65, गुरूग्राम में 135, नोएडा में 184, ग्रेटर नोएडा में 219 पर पहुंच गया है।

इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 44 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘बेहतर‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 76, चेन्नई में 99, चंडीगढ़ में 75, हैदराबाद में 62, जयपुर में 94 और पटना में 71 दर्ज किया गया।

इन शहरों में साफ रही हवा

देश के जिन 64 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा। इन शहरों में अहमदनगर, आइजोल, अकोला, बदलापुर, बालासोर, बारबिल, बारीपदा, बैरकपुर, बेलापुर, बेतिया, भागलपुर, भिलाई, भिवंडी, भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, ब्रजराजनगर, ब्यासनगर, चामराजनगर, छाल, चिक्कमगलुरु, कोयंबटूर, डोंबिवली, फिरोजाबाद, गंगटोक, हल्दिया, हुबली, जालंधर, जलगांव, कलबुर्गी, कल्याण, करनाल, कारवार, क्योंझर, कोल्हापुर, कोरबा, कुंजेमुरा, लातूर, मदिकेरी, मीरा-भायंदर, मुंबई, मुजफ्फरपुर, नाहरलागुन, नांदेड़, नंदेसरी, नयागढ़, रायरंगपुर, राजगीर, राजकोट, राजसमंद, रामनगर, रतलाम, ऋषिकेश, राउरकेला, सहरसा, सांगली, शिवमोगा, सिलचर, सिलीगुड़ी, शिवसागर, सूरत, त्रिशूर, तुमडीह, उल्हासनगर और विरार शामिल हैं।

वहीं अगरतला, आगरा, अहमदाबाद, अजमेर, अंबरनाथ, अमरावती (महाराष्ट्र), अमृतसर, अनंतपुर, अंगुल, अंकलेश्वर, अररिया, आरा, आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बागपत, बांसवाड़ा, बरेली, बाड़मेर, बठिंडा, बीड, बेगूसराय, बेंगलुरु, भरतपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवानी, भोपाल, बीकानेर, बिलासपुर, बूंदी, बर्नीहाट (असम), चंडीगढ़, चेन्नई, चिक्काबल्लापुर, चित्तूर, कटक, देवास, धारवाड़, धौलपुर, धुले, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलूर, एलुरु, फतेहपुर सीकरी, गडग, गांधीनगर, गया, गुंटूर, गुवाहाटी, ग्वालियर, हाजीपुर, हनुमानगढ़, हिंगोली, हावड़ा, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जयपुर, जैसलमेर, जालोर, झालावाड़, झांसी, झुंझुनू, जोधपुर, जोरापोखर, कडप्पा, काकीनाडा, कानपुर, करौली, कटिहार, कटनी, खन्ना, किशनगंज, कोहिमा, कोलकाता, कोटा, कुरनूल, लखनऊ, मछलीपट्टनम, महाद, मालेगांव, मंगुराहा, मथुरा, मेहसाणा, मोतिहारी, मैसूरु, नागांव, नागौर, नागपुर, नासिक, नवी मुंबई, नेल्लोर, पलवल, पंचकुला, परभणी, पटियाला, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुडुचेरी, पुणे, पूर्णिया, रायबरेली, रायपुर, राजमहेंद्रवरम, रोहतक, सतारा, सतना, सिरोही, सोलापुर, श्रीनगर, टेन्सा, ठाणे, तिरुवनंतपुरम, थूथुकुडी, तिरुमाला, तिरुपति, उदयपुर, उज्जैन, वडोदरा, वापी, वाराणसी, विजयवाड़ा और वृंदावन आदि 126 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।

क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक

देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।

इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।

यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।

ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।

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