मैंगनीज युक्त पानी पी रहे हैं दुनिया के 22 करोड़ लोग, एशिया सबसे ज्यादा प्रभावित: रिपोर्ट

भूजल में बढ़ा मैंगनीज का खतरा, दुनिया के 22 करोड़ लोगों पर असर की आशंका, एशिया के घनी आबादी वाले क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित
गंगा-ब्रह्मपुत्र और अन्य नदी डेल्टा क्षेत्रों में भूजल प्रदूषण का खतरा सबसे अधिक पाया गया
गंगा-ब्रह्मपुत्र और अन्य नदी डेल्टा क्षेत्रों में भूजल प्रदूषण का खतरा सबसे अधिक पाया गयाफोटो साभार: आईस्टॉक
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सारांश
  • भूजल में मैंगनीज की अधिक मात्रा से बढ़ा स्वास्थ्य खतरा, दुनिया के करोड़ों लोग प्रभावित होने की आशंका

  • वैज्ञानिकों ने तैयार किया मैंगनीज खतरे का मानचित्र, एशिया के कई घनी आबादी वाले क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित

  • 18 से 22 करोड़ लोग पी सकते हैं मैंगनीज युक्त पानी, बच्चों के स्वास्थ्य पर गंभीर चिंता

  • गंगा-ब्रह्मपुत्र और अन्य नदी डेल्टा क्षेत्रों में भूजल प्रदूषण का खतरा सबसे अधिक पाया गया

  • मैंगनीज हटाने के लिए आसान जल उपचार संभव, लेकिन नियमित पानी जांच की जरूरत बढ़ी

पानी जीवन के लिए सबसे जरूरी चीजों में से एक है, लेकिन अब दुनिया के कई इलाकों में पीने के पानी की गुणवत्ता को लेकर नई चिंता सामने आई है। एक नए अध्ययन के अनुसार, दुनिया में लगभग 18 करोड़ से 22 करोड़ लोग ऐसा भूजल पीते हैं जिसमें मैंगनीज की मात्रा सुरक्षित सीमा से अधिक है। इसका सबसे ज्यादा असर एशिया के घनी आबादी वाले इलाकों में देखा गया है।

आमतौर पर लोग मैंगनीज की जरूरत भोजन से पूरी करते हैं। यह शरीर के लिए एक जरूरी सूक्ष्म तत्व है, लेकिन जब इसकी मात्रा बहुत अधिक हो जाती है तो यह स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। खासतौर पर छोटे बच्चों और शिशुओं के दिमागी विकास पर इसका बुरा प्रभाव पड़ने की आशंका जताई गई है।

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मैंगनीज को लेकर बढ़ी वैज्ञानिक चिंता

काफी समय तक पानी में मैंगनीज को केवल स्वाद और रंग बदलने की समस्या माना जाता था। अधिक मात्रा में मैंगनीज होने पर पानी का स्वाद खराब हो सकता है और कुएं या नल के आसपास काले रंग के दाग दिखाई दे सकते हैं।

हाल के वर्षों में वैज्ञानिकों ने पाया है कि ज्यादा मात्रा में मैंगनीज का सेवन स्वास्थ्य के लिए गंभीर समस्या पैदा कर सकता है। अध्ययनों से संकेत मिला है कि लंबे समय तक अधिक मैंगनीज वाला पानी पीने से तंत्रिका तंत्र यानी नर्वस सिस्टम पर असर पड़ सकता है।

शोध में कहा गया है कि 18 से 22 करोड़ लोग ऐसा पानी पीते हैं जिसमें मैंगनीज़ की मात्रा डब्ल्यूएचओ की गाइडलाइन वैल्यू से  ज्यादा होती है, और इनमें से 90 फीसदी लोग एशिया में रहते हैं।
शोध में कहा गया है कि 18 से 22 करोड़ लोग ऐसा पानी पीते हैं जिसमें मैंगनीज़ की मात्रा डब्ल्यूएचओ की गाइडलाइन वैल्यू से ज्यादा होती है, और इनमें से 90 फीसदी लोग एशिया में रहते हैं।स्रोत: नेचर वाटर पत्रिका
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इसी वजह से विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने 2021 में पीने के पानी में मैंगनीज की सलाह दी गई सीमा को 400 माइक्रोग्राम प्रति लीटर से घटाकर 80 माइक्रोग्राम प्रति लीटर कर दिया। यूरोप और स्विट्जरलैंड जैसे क्षेत्रों में यह सीमा और भी कम रखी गई है।

वैज्ञानिकों ने तैयार किया दुनिया का जोखिम मानचित्र

यह अध्ययन स्विट्जरलैंड के जल अनुसंधान संस्थान ईवाग के वैज्ञानिकों ने किया है। शोधकर्ताओं ने दुनिया भर से लगभग तीन लाख भूजल नमूनों के आंकड़े इकट्ठा किए। इन अध्ययन को नेचर वाटर नामक पत्रिका में प्रकाशित किया गया है।

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इन आंकड़ों को जलवायु, मिट्टी, चट्टानों की बनावट, जमीन की ऊंचाई और अन्य पर्यावरणीय जानकारियों के साथ जोड़ा गया। इसके बाद वैज्ञानिकों ने मशीन लर्निंग मॉडल की मदद से एक ऐसा नक्शा तैयार किया, जिससे यह पता लगाया जा सके कि किन क्षेत्रों के भूजल में मैंगनीज की मात्रा अधिक होने की संभावना है।

यह नक्शा उन इलाकों की पहचान करता है जहां पानी की जांच उपलब्ध नहीं है, लेकिन वहां भूजल में मैंगनीज की मात्रा ज्यादा होने का खतरा हो सकता है।

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एशिया के नदी डेल्टा क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित

अध्ययन में पाया गया कि दुनिया के कई महाद्वीपों में मैंगनीज का खतरा मौजूद है, लेकिन दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के इलाके सबसे ज्यादा प्रभावित हैं।

भारत और बांग्लादेश के गंगा-ब्रह्मपुत्र डेल्टा क्षेत्र, वियतनाम का मेकांग डेल्टा, हनोई के पास रेड रिवर डेल्टा और पाकिस्तान के कुछ हिस्सों में जोखिम अधिक पाया गया है। अमेरिका में मिसिसिपी नदी के आसपास के क्षेत्रों में भी खतरे वाले इलाके सामने आए हैं।

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वैज्ञानिकों के अनुसार, इन क्षेत्रों में जमीन के नीचे मौजूद नई तलछटी मिट्टी में मैंगनीज ज्यादा पाया जाता है। जब जमीन के अंदर ऑक्सीजन की मात्रा कम होती है, तो सूक्ष्म जीव मैंगनीज को घोल देते हैं और यह भूजल में पहुंच जाता है।

प्रभावित लोगों में 90 प्रतिशत से अधिक एशिया में

शोधकर्ताओं ने मैंगनीज जोखिम वाले क्षेत्रों के नक्शे को आबादी और पीने के पानी की व्यवस्था से जोड़ा। इसके बाद अनुमान लगाया गया कि दुनिया में 18 करोड़ से 22 करोड़ लोग ऐसा पानी इस्तेमाल कर सकते हैं जिसमें मैंगनीज की मात्रा डब्ल्यूएचओ की सीमा से अधिक है।

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इन प्रभावित लोगों में 90 प्रतिशत से अधिक एशिया में रहते हैं। इसका एक बड़ा कारण यह है कि कई एशियाई देशों के ग्रामीण और घनी आबादी वाले इलाकों में लोग बिना उपचार किए सीधे भूजल का उपयोग करते हैं।

भारत और यूरोप की स्थिति

अध्ययन के अनुसार, स्विट्जरलैंड में मैंगनीज का खतरा बहुत कम है। यूरोप के ज्यादातर हिस्सों में भी स्थिति सुरक्षित है क्योंकि वहां पीने के पानी को आधुनिक तकनीक से साफ किया जाता है।

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हालांकि इटली के पो नदी डेल्टा और पोलैंड से पूर्वी जर्मनी तक कुछ क्षेत्रों में भूजल में मैंगनीज की अधिक मात्रा की आशंका जताई गई है। लेकिन इन क्षेत्रों में ज्यादातर लोगों को साफ और उपचारित नल का पानी मिलता है, इसलिए प्रभावित आबादी कम है।

पानी को साफ करना संभव

वैज्ञानिकों का कहना है कि मैंगनीज को पानी से हटाना बहुत कठिन काम नहीं है। जब मैंगनीज युक्त पानी हवा या ऑक्सीजन के संपर्क में आता है तो यह ठोस रूप में बदल जाता है, जिसे फिल्टर की मदद से हटाया जा सकता है।

साधारण जल उपचार व्यवस्था, जिसमें पानी में हवा मिलाई जाती है और फिर रेत के फिल्टर से गुजारा जाता है, मैंगनीज को कम करने में प्रभावी हो सकती है।

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सिर्फ आर्सेनिक की जांच काफी नहीं

शोधकर्ताओं ने मैंगनीज के खतरे की तुलना पहले तैयार किए गए आर्सेनिक के खतरों के मानचित्रों से भी की। उन्होंने पाया कि दोनों प्रदूषकों का खतरा एक जैसा नहीं है। केवल लगभग चार प्रतिशत अधिक खतरों वाले क्षेत्रों में आर्सेनिक और मैंगनीज दोनों की समस्या एक साथ पाई गई।

इसका मतलब है कि अगर किसी कुएं के पानी में आर्सेनिक नहीं मिला है, तो यह जरूरी नहीं कि वह पूरी तरह सुरक्षित हो। मैंगनीज की अलग से जांच भी जरूरी हो सकती है।

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भविष्य के लिए अहम कदम

वैज्ञानिकों का कहना है कि यह अध्ययन अंतिम प्रमाण नहीं बल्कि एक दिशा दिखाने वाला नक्शा है। वास्तविक स्थिति जानने के लिए स्थानीय स्तर पर पानी की जांच जरूरी है।

फिर भी यह अध्ययन सरकारों और जल प्रबंधन संस्थाओं के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। इसकी मदद से उन क्षेत्रों की पहचान की जा सकती है जहां पानी की जांच, निगरानी और शुद्धिकरण व्यवस्था की सबसे ज्यादा जरूरत है।

शोधकर्ताओं ने भूजल प्रदूषण से जुड़े कई वैश्विक नक्शे एक ऑनलाइन मंच पर उपलब्ध कराए हैं, ताकि दुनिया भर के विशेषज्ञ और अधिकारी उनका उपयोग कर सकें। यह अध्ययन आने वाले समय में सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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