

3 मार्च 2026 को पूर्ण चंद्र ग्रहण लगेगा, जिसे भारत के कई हिस्सों में चंद्रमा उदय के समय देखा जा सकेगा।
ग्रहण के दौरान चंद्रमा लाल दिखाई देगा, क्योंकि पृथ्वी के वातावरण से गुजरती लाल रोशनी चंद्रमा पर पड़ती है।
ग्रहण दोपहर 3:20 बजे शुरू होकर शाम 6:48 बजे समाप्त होगा, जबकि पूर्ण अवस्था 4:34 से 5:33 बजे तक रहेगी।
पूर्वोत्तर भारत और अंडमान-निकोबार क्षेत्रों में लोग पूर्ण अवस्था का अंतिम भाग भी स्पष्ट रूप से देख सकेंगे।
चंद्र ग्रहण को नंगी आंखों से देखना सुरक्षित है, इसके लिए किसी विशेष चश्मे या उपकरण की आवश्यकता नहीं होती।
तीन मार्च, 2026, मंगलवार को एक पूर्ण चंद्र ग्रहण लगेगा। भारत के कई हिस्सों में लोग इस खगोलीय घटना को देख सकेंगे। यह एक खास अवसर है क्योंकि अगला पूर्ण चंद्र ग्रहण 31 दिसंबर 2028 को दिखाई देगा। आइए समझते हैं कि चंद्र ग्रहण क्या होता है, यह क्यों होता है और इसे कैसे देखा जा सकता है।
चंद्र ग्रहण क्या होता है?
चंद्र ग्रहण एक खगोलीय घटना है। यह तब होता है जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है। इस स्थिति में पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है। चंद्र ग्रहण केवल पूर्णिमा के दिन ही हो सकता है, क्योंकि उसी समय सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक सीधी रेखा में आते हैं। जब चंद्रमा पूरी तरह पृथ्वी की गहरी छाया में चला जाता है, तब उसे पूर्ण चंद्र ग्रहण कहते हैं।
चंद्रमा लाल क्यों दिखाई देता है?
पूर्ण चंद्र ग्रहण के समय चंद्रमा लाल या नारंगी रंग का दिखाई देता है। इसे आम भाषा में “ब्लड मून” भी कहा जाता है। ऐसा पृथ्वी के वातावरण के कारण होता है। जब सूर्य की रोशनी पृथ्वी के वातावरण से होकर गुजरती है, तो नीली रोशनी ज्यादा बिखर जाती है और लाल रंग की रोशनी कम बिखरती है। यही लाल रोशनी चंद्रमा पर पड़ती है, जिससे वह लाल दिखाई देता है।
यह वही प्रक्रिया है, जिसके कारण सूर्योदय और सूर्यास्त के समय आकाश लाल दिखता है।
चंद्र ग्रहण के प्रकार
चंद्र ग्रहण तीन प्रकार के होते हैं -
1. पूर्ण चंद्र ग्रहण : जब चंद्रमा पूरी तरह पृथ्वी की गहरी छाया में आ जाता है, तो उसे पूर्ण चंद्र ग्रहण कहते हैं। इस समय चंद्रमा लाल रंग का दिखाई देता है।
2. आंशिक चंद्र ग्रहण : जब चंद्रमा का केवल कुछ हिस्सा पृथ्वी की गहरी छाया में आता है, तो उसे आंशिक चंद्र ग्रहण कहते हैं। इसमें चंद्रमा का एक भाग कटा हुआ सा दिखता है।
3. उपच्छाया चंद्र ग्रहण : जब चंद्रमा पृथ्वी की हल्की छाया से गुजरता है, तो उसे उपच्छाया चंद्र ग्रहण कहते हैं। यह बहुत हल्का होता है और कई बार इसे पहचानना मुश्किल होता है।
3 मार्च 2026 को किस समय लगेगा चंद्र ग्रहण?
पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अनुसार भारतीय समयानुसार, ग्रहण की शुरुआत दोपहर 3:20 बजे तथा पूर्ण अवस्था की शुरुआत शाम 4:34 बजे होगी। पूर्ण अवस्था का अंत शाम 5:33 बजे ग्रहण समाप्त शाम 6:48 बजे होगा।
भारत के अधिकतर जगहों पर लोग चंद्रमा के उदय के समय ग्रहण का अंतिम भाग देख सकेंगे।
भारत में कहां दिखाई देगा?
भारत के ज्यादातर हिस्सों में यह ग्रहण दिखाई देगा। हालांकि कई जगहों पर लोग केवल ग्रहण का अंतिम चरण ही देख पाएंगे, क्योंकि ग्रहण की शुरुआत चंद्रमा के उदय से पहले हो जाएगी। पूर्वोत्तर भारत और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में लोग पूर्ण अवस्था का अंतिम भाग भी देख सकेंगे। चेन्नई और कन्याकुमारी जैसे शहरों में ग्रहण लगभग 31 मिनट तक दिखाई दे सकता है।
क्या चंद्र ग्रहण देखना सुरक्षित है?
हां, चंद्र ग्रहण को नंगी आंखों से देखना पूरी तरह सुरक्षित है। सूर्य ग्रहण की तरह इसमें किसी विशेष चश्मे की जरूरत नहीं होती। आप इसे सीधे देख सकते हैं।
अगर आप ज्यादा साफ दृश्य देखना चाहते हैं, तो दूरबीन या छोटे टेलीस्कोप का उपयोग कर सकते हैं। खुले स्थान पर जाएं और जहां पूर्व दिशा साफ दिखाई दे, वहां से चंद्रमा का उदय देखें।
दुनिया में कहां-कहां देखेगा ?
दुनिया की लगभग 40 प्रतिशत आबादी इस पूर्ण चंद्र ग्रहण का कुछ हिस्सा देख सकेगी। यह एक बड़ी खगोलीय घटना है और खगोल विज्ञान में रुचि रखने वालों के लिए खास अवसर है।
पिछला और अगला चंद्र ग्रहण
भारत में पिछला चंद्र ग्रहण सात व आठ सितंबर 2025 को दिखाई दिया था, जो एक पूर्ण चंद्र ग्रहण था। अगला चंद्र ग्रहण छह -सात जुलाई 2028 को दिखाई देगा, जो आंशिक चंद्र ग्रहण होगा। इसके बाद 31 दिसंबर 2028 को अगला पूर्ण चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई देगा।
तीन मार्च, 2026 का पूर्ण चंद्र ग्रहण एक दुर्लभ और सुंदर आकाशीय घटना है। इसे देखने के लिए किसी विशेष उपकरण की आवश्यकता नहीं है। बस साफ आसमान और सही समय का ध्यान रखें।
यह प्रकृति का एक अद्भुत दृश्य है, जिसे परिवार और दोस्तों के साथ मिलकर देखा जा सकता है। इसलिए इस खास दिन को याद रखें और चंद्रमा के लाल रूप का आनंद लें।