मंगल ग्रह पर पानी की कहानी और भी जटिल निकली, वैज्ञानिकों को प्राचीन झील के मिले संकेत

मंगल पर मिली चट्टानों ने खोले पानी के तीन दौर के राज, वैज्ञानिकों को प्राचीन झील और गर्म भूमिगत पानी के मिले संकेत
वैज्ञानिकों को चट्टानों में पानी से हुए तीन अलग-अलग बदलावों के संकेत मिले, जो मंगल के जटिल जल इतिहास को दर्शाते हैं।
वैज्ञानिकों को चट्टानों में पानी से हुए तीन अलग-अलग बदलावों के संकेत मिले, जो मंगल के जटिल जल इतिहास को दर्शाते हैं।प्रतीकात्मक छवि, साभार: आईस्टॉक
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सारांश
  • पर्सिवियरेंस रोवर ने मंगल के जेजेरो क्रेटर में प्राचीन झील की बजाय मुख्यतः आग्नेय चट्टानें खोजीं, जिससे वैज्ञानिक हैरान हुए।

  • वैज्ञानिकों को चट्टानों में पानी से हुए तीन अलग-अलग बदलावों के संकेत मिले, जो मंगल के जटिल जल इतिहास को दर्शाते हैं।

  • कार्बोनेट और सिलिका की मौजूदगी से भूमिगत पानी तथा प्राचीन झील के पानी के प्रभावों के महत्वपूर्ण संकेत मिले हैं।

  • फ्लोराइट और कैल्शियम सल्फेट वाली खनिज नसें मंगल पर बाद में गर्म भूमिगत पानी के प्रवाह का संकेत देती हैं।

  • यह खोज मंगल के पुराने वातावरण, पानी की अवधि और संभावित जीवन के लिए अनुकूल परिस्थितियों को समझने में वैज्ञानिकों की मदद करेगी।

मंगल ग्रह पर जीवन की तलाश में जुटे नासा के पर्सिवियरेंस रोवर ने एक बार फिर वैज्ञानिकों को हैरान कर दिया है। सितंबर 2023 में रोवर जब मंगल के जेजेरो क्रेटर के अंदरूनी किनारे पर पहुंचा, तो वैज्ञानिकों को उम्मीद थी कि वहां उन्हें प्राचीन झील के तल में जमा हुई तलछटी चट्टानें मिलेंगी। लेकिन वहां जो मिला, वह उनकी उम्मीद से बिल्कुल अलग था।

इस इलाके को “मार्जिन यूनिट” कहा जाता है। यह उस जगह के पास है, जहां अरबों साल पहले एक झील हुआ करती थी। पृथ्वी पर झीलों और समुद्रों के किनारे बनने वाली तलछटी चट्टानें अक्सर पुराने जीवन के निशान सुरक्षित रख सकती हैं। इसलिए वैज्ञानिक इस इलाके को लेकर खास तौर पर उत्साहित थे।

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मंगल की कक्षा में घूम रहे यानों ने इस क्षेत्र में कार्बोनेट खनिजों के मजबूत संकेत भी देखे थे। पृथ्वी पर ऐसे खनिज अक्सर उथले पानी वाले झील या समुद्री वातावरण में बनते हैं। इससे वैज्ञानिकों को लगा था कि यहां मंगल की प्राचीन झील से जुड़ी चट्टानें मिल सकती हैं। यह शोध कम्युनिकेशन्स अर्थ एंड एनवायरनमेंट नामक पत्रिका में प्रकाशित किया गया है।

मिलीं ज्वालामुखीय मूल की चट्टानें

पर्सिवियरेंस ने जब इलाके की जांच की तो तस्वीर बदल गई। रोवर को यहां मुख्य रूप से आग्नेय चट्टानें मिलीं। ऐसी चट्टानें तब बनती हैं, जब पिघला हुआ मैग्मा धीरे-धीरे ठंडा होकर ठोस हो जाता है।

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मार्जिन यूनिट के ऊंचे हिस्सों में रोवर को मोटे दानों और बड़े खनिज क्रिस्टलों वाली चट्टानें मिलीं। इनमें ओलिवीन नाम का खनिज काफी मात्रा में था। वैज्ञानिकों का मानना है कि ये चट्टानें मंगल की सतह के काफी नीचे मैग्मा के एक बड़े पिंड से बनी थीं। मैग्मा के धीरे-धीरे ठंडा होने से खनिजों के बड़े-बड़े क्रिस्टल बने। बाद में ऊपर की जमीन के लंबे समय तक घिसने के कारण ये चट्टानें सतह पर दिखाई देने लगीं।

पानी ने बदली चट्टानों की कहानी

इन चट्टानों की सबसे दिलचस्प बात यह है कि पानी ने उन्हें सिर्फ एक बार नहीं, बल्कि कम से कम तीन अलग-अलग मौकों पर प्रभावित किया।

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रोवर ने पाया कि ऊंचाई वाले हिस्सों में मौजूद ओलिवीन चट्टानों पर पानी का बहुत कम असर हुआ था। लेकिन नीचे की ओर आते-आते चट्टानों की स्थिति बदल गई थी। ओलिवीन के दाने टूटे हुए थे और उनके बीच सिलिका मौजूद थी।

वैज्ञानिकों के अनुसार, पहली बार जब पानी इन चट्टानों तक पहुंचा, तो कार्बन डाइऑक्साइड से भरपूर भूमिगत पानी ने ओलिवीन के साथ प्रतिक्रिया की। इससे चट्टानों की दरारों में कार्बोनेट खनिज जमा हो गए। आज इन दरारों में भरे कार्बोनेट आसपास की नरम चट्टानों की तुलना में ज्यादा मजबूत हैं। इसलिए आसपास की चट्टान घिसने के बाद कार्बोनेट से भरी ये दरारें उभरी हुई दिखाई देती हैं।

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प्राचीन झील का भी हो सकता है असर

पानी के दूसरे दौर का संबंध जेजेरो क्रेटर की उस प्राचीन झील से हो सकता है, जो कभी इस इलाके में मौजूद थी।

वैज्ञानिकों को कुछ चट्टानों में सिलिका भी मिली है। ओलिवीन के पानी के साथ प्रतिक्रिया करने पर कार्बोनेट बनने के साथ सिलिका भी पीछे रह सकती है। रोवर को ऐसी सिलिका उन चट्टानों में ज्यादा मिली, जो कभी पानी की सतह के नीचे रही होंगी। इससे संकेत मिलता है कि इलाके की चट्टानों पर प्राचीन झील के पानी का भी असर पड़ा हो सकता है।

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बाद में आया गर्म पानी

चट्टानों की कहानी का तीसरा अध्याय और भी दिलचस्प है। मार्जिन यूनिट के पूर्वी हिस्से में रोवर को करीब 25 सेंटीमीटर मोटी खनिजों की नसें मिलीं। इनमें कैल्शियम सल्फेट और फ्लोराइट जैसे खनिज शामिल हैं।

फ्लोराइट का मिलना वैज्ञानिकों के लिए खास महत्व रखता है। यह खनिज अक्सर उस स्थिति में बनता है, जब गर्म पानी ज्वालामुखीय चट्टानों के बीच से होकर गुजरता है। इसलिए माना जा रहा है कि प्राचीन मंगल पर इस इलाके में बाद के किसी समय गर्म भूमिगत पानी का प्रवाह हुआ था।

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मंगल के पुराने वातावरण को समझने में मदद

पर्सिवियरेंस ने मार्जिन यूनिट में करीब 265 मीटर की ऊंचाई के अंतर वाले इलाके की जांच की और 185 से ज्यादा चट्टानी नमूनों का अध्ययन किया। इसके लिए रोवर के सुपरकैम उपकरण ने लेजर का इस्तेमाल किया। लेजर से चट्टान के छोटे हिस्से को गर्म कर बने प्लाज्मा की रोशनी का अध्ययन करके वैज्ञानिक उसकी रासायनिक संरचना का पता लगाते हैं।

वैज्ञानिक अभी इन तीनों पानी से जुड़ी घटनाओं की सही उम्र नहीं बता सकते। हालांकि वे यह समझने में सफल रहे हैं कि घटनाएं किस क्रम में हुईं।

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यह खोज बताती है कि मंगल पर पानी की कहानी सिर्फ एक प्राचीन झील तक सीमित नहीं थी। भूमिगत पानी, झील का पानी और बाद में आया गर्म पानी - इन सभी ने अलग-अलग समय पर इन चट्टानों को बदला।

वैज्ञानिकों के लिए ये चट्टानें मंगल के पुराने वातावरण की एक तरह की प्राकृतिक डायरी हैं। इनके अध्ययन से भविष्य में यह समझने में मदद मिल सकती है कि शुरुआती मंगल का मौसम कैसा था, वहां पानी कितने समय तक मौजूद रहा और क्या कभी वहां सूक्ष्म जीवन के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनी थीं।

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