

डार्क मैटर प्रकाश से क्रिया नहीं करता, इसलिए पारंपरिक उपकरणों से इसकी पहचान अब तक वैज्ञानिकों के लिए अत्यंत कठिन रही है।
वैज्ञानिकों ने बहुत हल्के डार्क मैटर कणों की खोज के लिए क्वांटम सेंसर आधारित नई तकनीक प्रस्तावित की है।
इस विधि में कई डिटेक्टरों को जोड़कर डार्क मैटर की गति और दिशा मापने की संभावना दिखाई गई है।
क्वांटम सेंसर ऐरे पुराने तरीकों की तुलना में अधिक संवेदनशील और विभिन्न प्रकार के डार्क मैटर के लिए उपयोगी हैं।
हमारा ब्रह्मांड बहुत विशाल है और इसमें कई रहस्य छिपे हुए हैं। इन्हीं रहस्यों में से एक है डार्क मैटर (अदृश्य पदार्थ)। वैज्ञानिकों का मानना है कि ब्रह्मांड का लगभग 85 फीसदी पदार्थ डार्क मैटर से बना है, लेकिन आज तक इसे सीधे देखा या महसूस नहीं किया जा सका है। इसका कारण यह है कि डार्क मैटर न तो रोशनी छोड़ता है, न उसे अवशोषित करता है और न ही परावर्तित करता है। इसलिए सामान्य दूरबीनों या पारंपरिक उपकरणों से इसे पकड़ना लगभग असंभव है।
अब हाल ही में जापान के टोक्यो विश्वविद्यालय और चुओ विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने डार्क मैटर की खोज के लिए एक नया और रोमांचक तरीका सुझाया है। उन्होंने इस शोध में क्वांटम सेंसर नाम की अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग करने का प्रस्ताव रखा है। यह अध्ययन फिजिकल रिव्यू लेटर्स पत्रिका में प्रकाशित हुआ है।
डार्क मैटर या अदृश्य पदार्थ क्या है?
डार्क मैटर एक ऐसा पदार्थ माना जाता है जो बहुत कमजोर रूप से सामान्य पदार्थ के साथ क्रिया करता है। वैज्ञानिक इसे केवल इसके गुरुत्वाकर्षण प्रभावों से समझ पाते हैं, जैसे कि आकाशगंगाओं का घूमना या ब्रह्मांड की संरचना। अभी तक कोई यह नहीं जानता कि डार्क मैटर वास्तव में किससे बना है।
एक प्रमुख सिद्धांत के अनुसार, डार्क मैटर बहुत हल्के कणों से बना हो सकता है, जिनका द्रव्यमान 1 इलेक्ट्रॉन वोल्ट (ईवी) से भी कम होता है। इतने हल्के कण कणों की तरह कम और तरंगों की तरह अधिक व्यवहार करते हैं। इसी कारण इन्हें पकड़ना और भी मुश्किल हो जाता है।
अब तक की खोज की सीमाएं
अब तक वैज्ञानिक भारी डार्क मैटर कणों की खोज के लिए ऐसे डिटेक्टरों (पता लगाने वाला) का उपयोग करते रहे हैं, जिनमें डार्क मैटर के कण किसी परमाणु से टकराकर हल्की सी कंपन पैदा करते हैं। इससे उनके वेग का अनुमान लगाया जा सकता है।
लेकिन हल्के डार्क मैटर के मामले में यह तरीका काम नहीं करता, क्योंकि ये कण किसी एक बिंदु पर टकराने के बजाय पूरे क्षेत्र में फैली तरंग की तरह व्यवहार करते हैं। इससे उनकी गति और दिशा की जानकारी नहीं मिल पाती।
क्वांटम सेंसर का नया तरीका
इसी समस्या का समाधान ढूंढने के लिए वैज्ञानिकों की टीम ने एक नया विचार प्रस्तुत किया। उन्होंने सुझाव दिया कि एक ही डिटेक्टर पर निर्भर रहने के बजाय, कई छोटे-छोटे डार्क मैटर डिटेक्टरों को अलग-अलग स्थानों पर लगाया जाए। इन सभी डिटेक्टरों को मिलाकर एक क्वांटम सेंसर ऐरे बनाया जाए।
इन सेंसरों से मिलने वाले संकेतों को क्वांटम यांत्रिकी के नियमों का उपयोग करके एक साथ विश्लेषित किया जाएगा। इससे वैज्ञानिक यह जान सकेंगे कि डार्क मैटर किस दिशा से आ रहा है और उसकी गति कितनी है।
शोध पत्र में शोधकर्ता के हवाले से कहा गया है कि हल्के डार्क मैटर की गति को किसी लंबे ट्रैक को देखकर नहीं, बल्कि कई जगह फैले डिटेक्टरों से मिलने वाले संकेतों को जोड़कर माप सकते हैं।
इस नई विधि की सबसे बड़ी खासियत
यह डार्क मैटर के प्रकार पर बहुत अधिक निर्भर नहीं करती
यह पुराने तरीकों की तुलना में अधिक संवेदनशील है
यह क्वांटम तकनीक का उपयोग करके बहुत कमजोर संकेतों को भी पकड़ सकती है
पहले के कुछ तरीकों में लंबे डिटेक्टर या सामान्य (क्लासिकल) सेंसर ऐरे का उपयोग किया गया था, लेकिन वे सीमित थे। क्वांटम सेंसर इस क्षेत्र में एक बड़ा सुधार साबित हो सकते हैं।
भविष्य की संभावनाएं
यह शोध डार्क मैटर की खोज के लिए एक नई राह खोलता है। भविष्य में वैज्ञानिक इस तकनीक को और बेहतर बनाकर न केवल डार्क मैटर की गति और दिशा, बल्कि उसकी वितरण संरचना को भी समझने की कोशिश कर सकते हैं।
इसके अलावा, यह अध्ययन यह भी दिखाता है कि क्वांटम तकनीक केवल कंप्यूटर या संचार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उच्च-ऊर्जा भौतिकी जैसे क्षेत्रों में भी क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है।
डार्क मैटर आज भी विज्ञान की सबसे बड़ी पहेलियों में से एक है। टोक्यो और चुओ विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों द्वारा प्रस्तुत यह नया क्वांटम सेंसर आधारित तरीका इस पहेली को सुलझाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यदि भविष्य में यह तकनीक प्रयोगशालाओं में सफल होती है, तो हम ब्रह्मांड को पहले से कहीं अधिक गहराई से समझ पाएंगे।