दूर की आकाशगंगा में ब्लैक होल का “ऑन-ऑफ” का खेल चालू, वैज्ञानिक हैरान

एक अनोखी आकाशगंगा की खोज: दूर आकाशगंगा में ब्लैक होल का चौंकाने वाला व्यवहार, कुछ महीनों में मंद पड़ा और फिर तेजी से फिर से सक्रिय होकर इसने वैज्ञानिकों को चौंकाया
ब्लैक होल एचई 1237−2252 में अचानक एक्स-रे चमक 17 गुना घटी, वैज्ञानिक इस तेज बदलाव से आश्चर्यचकित हैं
ब्लैक होल एचई 1237−2252 में अचानक एक्स-रे चमक 17 गुना घटी, वैज्ञानिक इस तेज बदलाव से आश्चर्यचकित हैंप्रतीकात्मक छवि, फोटो साभार: आईस्टॉक
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सारांश
  • ब्लैक होल एचई 1237−2252 में अचानक एक्स-रे चमक 17 गुना घटी, वैज्ञानिक इस तेज बदलाव से आश्चर्यचकित हैं

  • कुछ महीनों बाद ब्लैक होल फिर सक्रिय हुआ, एक्स-रे और अन्य तरंगदैर्ध्य में धीरे-धीरे चमक वापस लौटने लगी

  • आकाशगंगा में स्थित सुपरमैसिव ब्लैक होल ने टाइप 1 से टाइप 1.8 तक स्पेक्ट्रल बदलाव दिखाया

  • वैज्ञानिकों ने माना कि धूल नहीं, बल्कि एक्रीशन डिस्क में आंतरिक ऊर्जा परिवर्तन इस घटना का मुख्य कारण है

  • डिस्क में ठंडी और गर्म तरंगों के मॉडल से ब्लैक होल के ऑन-ऑफ व्यवहार की संभावित व्याख्या सामने आई

खगोल वैज्ञानिकों ने एक ऐसी दूर स्थित आकाशगंगा की पहचान की है, जिसमें मौजूद एक सुपरमैसिव ब्लैक होल ने ऐसा व्यवहार दिखाया है जिसे पहले बहुत कम देखा गया है। इस आकाशगंगा का नाम एचई 1237−2252 बताया गया है, जो पृथ्वी से लगभग 1.3 अरब प्रकाश वर्ष दूर है।

इस आकाशगंगा के केंद्र में मौजूद ब्लैक होल अचानक पहले बहुत मंद पड़ गया और फिर कुछ समय बाद तेजी से दोबारा सक्रिय हो गया। यह बदलाव वैज्ञानिकों के लिए एक बड़ा रहस्य बन गया है।

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ब्लैक होल कैसे काम करता है

आम तौर पर ब्लैक होल अपने आसपास मौजूद गैस और धूल को अपनी ओर खींचता है। यह पदार्थ जब ब्लैक होल के चारों ओर घूमता है, तो एक गर्म और चमकदार डिस्क बनाता है जिसे “एक्रीशन डिस्क” कहा जाता है। इसी डिस्क से बहुत तेज ऊर्जा निकलती है, खासकर एक्स-रे और प्रकाश के रूप में।

ऐसे सक्रिय ब्लैक होल को “एजीएन” यानी सक्रिय गैलेक्सीय केंद्रक कहा जाता है। ये आकाशगंगा के सबसे चमकीले हिस्सों में से एक होते हैं।

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अचानक चमक का कम हो जाना

वैज्ञानिकों के अनुसार, इस आकाशगंगा में ब्लैक होल की चमक लगभग 18 महीनों में 17 गुना तक कम हो गई। यह बदलाव विशेष रूप से एक्स-रे प्रकाश में देखा गया। इस गिरावट के बाद यह ब्लैक होल पहले से बहुत कमजोर अवस्था में पहुंच गया और इसके प्रकाशीय संकेत भी बदल गए।

आमतौर पर ऐसी कमी बहुत लंबे समय में होती है, लेकिन यहां यह बदलाव बहुत तेजी से हुआ, जिससे वैज्ञानिक चौंक गए। यह शोध अरक्षिव (arXiv) प्रीप्रिंट सर्वर में प्रकाशित किया गया है।

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फिर से सक्रिय हुआ ब्लैक होल

कुछ समय बाद स्थिति फिर बदलने लगी। वैज्ञानिकों ने देखा कि ब्लैक होल की एक्स-रे चमक केवल कुछ महीनों में वापस आने लगी। इसके बाद धीरे-धीरे पराबैंगनी, अवरक्त और दृश्य प्रकाश भी सामान्य होने लगे। करीब तीन साल के अंदर यह ब्लैक होल फिर से पहले की तरह सक्रिय हो गया और इसकी चमक वापस लौट आई।

इस दौरान वैज्ञानिकों ने यह भी देखा कि इसके प्रकाश में एक विशेष तरह का “दो-शिखर” पैटर्न दिखाई दिया, जो गैस के घूमने के नए तरीके की ओर संकेत करता है।

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आखिर ऐसा क्यों हुआ

वैज्ञानिकों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि यह बदलाव क्यों हुआ। शुरुआत में यह माना गया कि शायद कोई धूल का बादल ब्लैक होल के सामने आ गया होगा, जिससे प्रकाश छिप गया हो।

लेकिन बाद के आंकड़ों ने इस विचार को कमजोर कर दिया। क्योंकि यदि केवल धूल होती, तो एक्स-रे और अन्य तरंगों पर इतना प्रभाव नहीं पड़ता। अब वैज्ञानिक मानते हैं कि यह बदलाव ब्लैक होल के अंदरूनी भोजन चक्र यानी “एक्रीशन डिस्क” में हुआ वास्तविक परिवर्तन है।

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डिस्क में लहर जैसी प्रक्रिया का सिद्धांत

एक प्रमुख सिद्धांत के अनुसार, ब्लैक होल के चारों ओर मौजूद गैस डिस्क में कभी-कभी ठंडी और गर्म लहरें चलती हैं। पहले एक ठंडी लहर आती है, जो ऊर्जा उत्पादन को कम कर देती है और ब्लैक होल “सुस्त” हो जाता है। इसके बाद एक गर्म लहर आती है, जो फिर से डिस्क को सक्रिय कर देती है और ब्लैक होल “जाग” उठता है। इसी प्रक्रिया के कारण यह “ऑन-ऑफ” जैसा व्यवहार देखा गया होगा।

वैज्ञानिकों के लिए महत्व

यह खोज बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पता चलता है कि ब्लैक होल हमेशा स्थिर नहीं होते। वे कभी-कभी बहुत कम समय में भी अपनी गतिविधि बदल सकते हैं। यह अध्ययन यह भी बताता है कि आकाशगंगाओं के केंद्र में होने वाली प्रक्रियाएं कितनी जटिल और गतिशील होती हैं।

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भविष्य की उम्मीदें

वैज्ञानिक अब ऐसे और भी “चेंजिंग-लुक” ब्लैक होलों की खोज कर रहे हैं। उनका मानना है कि यदि ऐसे कई उदाहरण मिलते हैं, तो यह समझने में मदद मिलेगी कि ब्लैक होल वास्तव में कैसे काम करते हैं और उनकी ऊर्जा कैसे बदलती रहती है। नियमित निगरानी और बेहतर तकनीक के साथ आने वाले समय में इस तरह की घटनाओं को और करीब से समझा जा सकेगा।

एचई1237−2252 आकाशगंगा में देखा गया यह बदलाव हमें दिखाता है कि ब्रह्मांड कितना जीवंत और बदलता हुआ है। एक विशाल ब्लैक होल का अचानक मंद पड़ना और फिर दोबारा सक्रिय हो जाना खगोल विज्ञान में एक बड़ी खोज है, जो आने वाले वर्षों में कई नए रहस्यों को उजागर कर सकता है।

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