

3सी 454.3 क्वासर में 433 दिन का नियमित प्रकाश पैटर्न मिला, जो अब तक का सबसे स्थायी ऑप्टिकल क्यूपीओ माना गया।
डब्ल्यूईबीटी के 19 वर्षों के आंकड़ों से वैज्ञानिकों ने ब्लेजर 3सी 454.3 में लंबे समय तक चलने वाला दोहराव पैटर्न पहचाना।
ब्लैक होल के आसपास जेट या अभिवृद्धि डिस्क गतिविधि इस 433 दिन के रहस्यमय चमक दोहराव का संभावित कारण मानी गई।
शोध में स्मार्टस और स्टीवार्ड ऑब्जर्वेटरी के आंकड़ों का उपयोग कर महत्वपूर्ण खगोलीय विश्लेषण किया गया।
वैज्ञानिकों का कहना है कि आगे की निगरानी से इस क्यूपीओ की वास्तविक उत्पत्ति और भौतिक प्रक्रिया स्पष्ट हो सकती है।
भारतीय और अंतरराष्ट्रीय खगोल वैज्ञानिकों की एक टीम ने एक बहुत दूर स्थित चमकदार क्वासर 3सी 454.3 में एक अजीब और दोहराने वाला चमक परिवर्तन पैटर्न खोजा है। यह पैटर्न लगभग 433 दिनों के अंतराल पर दोहराता है। इस खोज को ऑप्टिकल क्वासी-पीरियोडिक ऑस्सिलेशन (क्यूपीओ) कहा जाता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह अब तक ऑप्टिकल तरंगदैर्ध्य में पाए गए सबसे स्थायी और लंबे समय तक चलने वाले क्यूपीओ में से एक है।
यह अध्ययन होल अर्थ ब्लेजर टेलीस्कोप (डब्ल्यूईबीटी) के लगभग 19 वर्षों के आंकड़ों के आधार पर किया गया है, जिसमें भारत के आर्यभट्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ ऑब्जर्वेशनल साइंसेज (एआरआईईएस) के वैज्ञानिक के नेतृत्व में शोध हुआ। इस शोध में स्मार्टस टेलीस्कोप और स्टीवार्ड ऑब्जर्वेटरी के आंकड़ों का भी उपयोग किया गया। यह शोध एआरएक्सआइवी नामक पत्रिका में प्रकाशित हुआ है।
ब्लेजर और क्वासर क्या होते हैं
3सी 454.3 एक प्रकार का “ब्लेजर” है, जो एक बहुत ही सक्रिय आकाशगंगा के केंद्र में मौजूद सुपरमैसिव ब्लैक होल से जुड़ा होता है। यह ब्लैक होल अपने चारों ओर गैस और धूल को तेजी से खींचता है, जिससे बहुत तेज ऊर्जा निकलती है। इसी प्रक्रिया से “एक्टिव गैलेक्टिक न्यूक्लियस” (एजीइन) बनता है।
ब्लेजर की खास बात यह होती है कि इससे निकलने वाली शक्तिशाली जेट लगभग सीधे पृथ्वी की दिशा में होती हैं। इसी कारण यह बहुत चमकीले और बदलते हुए दिखाई देते हैं। इनकी रोशनी कभी तेज हो जाती है और कभी कम, जिससे वैज्ञानिक इनके व्यवहार को समझने की कोशिश करते हैं।
क्यूपीओ यानी क्या होता है
कई बार खगोल वैज्ञानिकों को दूर के तारों और ब्लैक होल से आने वाली रोशनी में एक तरह का दोहराव पैटर्न दिखाई देता है। इसे क्वासी-पीरियोडिक ऑस्सिलेशन कहा जाता है। इसका मतलब है कि रोशनी पूरी तरह नियमित नहीं होती, लेकिन एक अनुमानित समय के बाद बार-बार बढ़ती या घटती है।
पहले क्यूपीओ अधिकतर एक्स-रे तरंगों में पाए गए थे, जो ब्लैक होल के बहुत पास के क्षेत्र से आते हैं। लेकिन ऑप्टिकल क्यूपीओ, यानी सामान्य प्रकाश में यह पैटर्न, बहुत दुर्लभ माना जाता है।
3सी 454.3 में 433 दिन का चक्र
शोध में पाया गया कि 3सी 454.3 की रोशनी लगभग हर 433 दिन में एक बार समान पैटर्न दिखाती है। यह पैटर्न 2009 से 2018 के बीच लगातार देखा गया। इतने लंबे समय तक एक स्थिर दोहराव मिलना वैज्ञानिकों के लिए बहुत महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।
3सी 454.3 पहले से ही एक बहुत चमकीला और अच्छी तरह अध्ययन किया गया ब्लेजर है। यह पृथ्वी से बहुत दूर स्थित है और इसका रेडशिफ्ट 0.86 है। इसके केंद्र में मौजूद ब्लैक होल का द्रव्यमान लगभग 50 करोड़ से 230 करोड़ सूर्यों के बराबर माना जाता है।
इस पैटर्न का कारण क्या हो सकता है
वैज्ञानिक अभी पूरी तरह निश्चित नहीं हैं कि यह 433 दिन का दोहराव क्यों हो रहा है। उन्होंने दो मुख्य संभावनाओं पर विचार किया है। पहली संभावना यह है कि यह ब्लैक होल के चारों ओर मौजूद गैस और धूल की डिस्क से जुड़ा हो सकता है। इस डिस्क में किसी तरह की नियमित हलचल या संरचना बनने से रोशनी में दोहराव आ सकता है।
दूसरी और अधिक संभावित व्याख्या यह है कि यह ब्लैक होल से निकलने वाली जेट्स के कारण हो रहा हो। जेट में अगर कोई घूमने वाली गति, चुंबकीय संरचना या समय-समय पर ऊर्जा का उत्सर्जन हो, तो रोशनी में ऐसा पैटर्न दिखाई दे सकता है।
वैज्ञानिकों की सावधानी और भविष्य की उम्मीद
शोधकर्ताओं का कहना है कि अभी उपलब्ध आंकड़ों से यह तय करना मुश्किल है कि असली कारण क्या है। दोनों ही मॉडल कुछ हद तक इस घटना को समझा सकते हैं, लेकिन कोई भी पूरी तरह साबित नहीं हुआ है।
वैज्ञानिकों का मानना है कि अगर आगे और लंबे समय तक निगरानी की जाए, तो इस रहस्यमय पैटर्न का कारण बेहतर तरीके से समझा जा सकता है। इससे यह भी पता चल सकता है कि यह कोई स्थायी खगोलीय प्रक्रिया है या केवल कभी-कभी होने वाली यादृच्छिक (रैंडम) घटना।
3सी 454.3 में पाया गया 433 दिन का यह चमक दोहराव खगोल विज्ञान के लिए एक महत्वपूर्ण खोज है। यह न केवल दूर स्थित ब्लैक होल के व्यवहार को समझने में मदद करेगा, बल्कि यह भी बताएगा कि ब्रह्मांड में अत्यंत शक्तिशाली ऊर्जा स्रोत कैसे काम करते हैं। वैज्ञानिक अब इस रहस्यमय पैटर्न की गहराई से जांच जारी रखे हुए हैं।