पेपर मिलों के कचरे से यूपी के गांवों में संकट

भारी वाहनों से रोजाना कचरा लाने और उसे खुले में जलाने के आरोपों के बीच एनजीटी ने कागज मिलों समेत संबंधित विभागों से जवाब मांगा है।
देश में कचरे के पहाड़ तेजी से बढ़ रहे हैं और डंपिंग ग्राउंड पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। ऐसे ही एक मामले में उत्तर प्रदेश के कानपुर स्थित भाउपुर कचरा डंपिंग ग्राउंड में लगी आग; फोटो: पुनीत तिवारी
देश में कचरे के पहाड़ तेजी से बढ़ रहे हैं और डंपिंग ग्राउंड पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। ऐसे ही एक मामले में उत्तर प्रदेश के कानपुर स्थित भाउपुर कचरा डंपिंग ग्राउंड में लगी आग; फोटो: पुनीत तिवारी
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सारांश
  • देश के गांवों में पर्यावरणीय संकट की तस्वीर केवल प्रदूषण या जलस्रोतों के सूखने तक सीमित नहीं है। कहीं कचरे के कथित अवैध निपटान और खुले में जलाने से हवा, मिट्टी और स्वास्थ्य पर खतरा मंडरा रहा है, तो कहीं अतिक्रमण और प्राकृतिक जल प्रवाह में रुकावट से सदियों पुराने जलस्रोत अपना अस्तित्व खो रहे हैं।

  • उत्तर प्रदेश के दो मामलों में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के हालिया आदेश इस संकट के अलग-अलग पहलुओं को सामने लाते हैं।

  • मुजफ्फरनगर के मखियाली गांव में कागज मिलों से निकलने वाले मिश्रित कचरे को भारी वाहनों से लाकर जमा करने और प्लास्टिक, रबर व ई-कचरे समेत अन्य कचरे को खुले में जलाने के आरोप लगाए गए हैं।

  • आवेदक ने इन आरोपों के समर्थन में तस्वीरें और समाचार रिपोर्टें भी पेश की हैं। मामले में एनजीटी ने कागज मिलों, सीएक्यूएम, उत्तर प्रदेश सरकार और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड समेत संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अगली सुनवाई 9 दिसंबर 2026 को होगी।

  • दूसरी ओर, प्रयागराज के कटहुला गौसपुर गांव में करीब 0.265 हेक्टेयर के सरकारी तालाब पर अतिक्रमण और उसके प्राकृतिक रिचार्ज चैनल बाधित होने से जलस्रोत के सूखने का मामला सामने आया।

  • एनजीटी ने नगर निगम को तालाब को उसके मूल स्वरूप में बहाल करने और पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप उसके संरक्षण के निर्देश दिए हैं। हालांकि, नगर निगम के 16 सितंबर के हलफनामे में पुनर्जीवन योजना या डीपीआर पेश नहीं की गई।

  • निगम ने अगली सुनवाई से पहले डीपीआर दाखिल करने का आश्वासन दिया है। मामले की अगली सुनवाई 7 दिसंबर 2026 को होगी।

उत्तर प्रदेश में मुजफ्फरनगर जिले के मखियाली गांव और उसके आसपास कागज मिलों से निकले कचरे के कथित अवैध निपटान का मामला नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) तक पहुंच गया है। मामले की सुनवाई 21 सितंबर 2026 को हुई। ट्रिब्यूनल ने मामले में संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

आवेदक योगेश कुमार ने आरोप लगाया है कि मखियाली और आसपास की कागज मिलों के निर्देश पर रोजाना भारी वाहनों से बड़ी मात्रा में बिना छंटाई के मिला जुला कचरा गांव के आसपास लाया जाता है।

उनके मुताबिक, इसमें प्लास्टिक, पॉलीथिन, रबर, नगर निगम का ठोस कचरा और ई-कचरा तक शामिल है।

आरोप है कि इस कचरे को नगर निकाय के कचरे के नाम पर गांव के आसपास जमा किया जाता है या फिर खुले में जला दिया जाता है। आवेदक ने यह भी आरोप लगाया कि गाजीपुर से निकलने वाले कचरे को भी कथित तौर पर मखियाली की ओर भेजा जा रहा है।

अपने दावों के समर्थन में आवेदक ने ट्रिब्यूनल के समक्ष पेश की तस्वीरें

ऐसे में अगर ये आरोप सही पाए जाते हैं, तो गांव के लोगों के लिए यह सिर्फ कचरे का सवाल नहीं, बल्कि हवा, मिट्टी और स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर खतरा बन सकता है।

खासकर प्लास्टिक, रबर और ई-कचरे को खुले में जलाने से जहरीला धुआं और प्रदूषक आसपास के वातावरण में फैल सकते हैं। गौरतलब है कि आवेदक के वकील ने अपने आरोपों के समर्थन में तस्वीरें और समाचार पत्रों में छपी रिपोर्टें ट्रिब्यूनल के समक्ष पेश की हैं।

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मामले की गंभीरता को देखते हुए एनजीटी ने कागज मिलों के साथ-साथ राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आसपास के क्षेत्रों के लिए बनाए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम), उत्तर प्रदेश सरकार और उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सहित अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है।

अब सभी संबंधित पक्षों के जवाब के आधार पर मामले में आगे की कार्रवाई होगी। इस मामले में अगली सुनवाई 9 दिसंबर 2026 को होनी है।

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प्रयागराज: अतिक्रमण से सूखे तालाब को फिर मिलेगा जीवन, एनजीटी ने नगर निगम को दिए कड़े निर्देश

प्रयागराज के कटहुला गौसपुर गांव में सरकारी जमीन पर मौजूद तालाब के अस्तित्व पर संकट के मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने प्रयागराज नगर निगम को तालाब के पुनर्जीवन के लिए सभी जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। ट्रिब्यूनल ने कहा है कि तालाब की बहाली पूरी तरह पर्यावरण संबंधी नियमों को ध्यान में रखते हुए की जानी चाहिए।

21 सितंबर 2026 को दिए अपने आदेश में एनजीटी ने कहा कि नगर निगम को तालाब को उसके मूल स्वरूप में बहाल करने और उसके संरक्षण के लिए प्रभावी कदम उठाने होंगे।

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मामला प्रयागराज की सदर तहसील के कटहुला गौसपुर गांव में स्थित करीब 0.265 हेक्टेयर क्षेत्र में मौजूद तालाब से जुड़ा है। आवेदन में बताया गया है कि यह तालाब सरकारी जमीन पर दर्ज है। आरोप है कि तालाब के पानी के प्राकृतिक रिचार्ज चैनल को रोककर उसकी जमीन पर अतिक्रमण किया गया, जिससे धीरे-धीरे तालाब सूख गया।

आवेदन के मुताबिक, तालाब की जमीन पर निर्माण भी किए गए हैं। वहीं शिकायत किए जाने के बावजूद इस मामले में प्रभावी कार्रवाई नहीं होने का भी आरोप लगाया गया है।

एनजीटी के आदेश के बावजूद नहीं पेश हुई पुनर्जीवन योजना

गौरतलब है कि इस मामले में एनजीटी ने 1 जुलाई 2026 को प्रयागराज नगर निगम के आयुक्त को तालाब के पुनर्जीवन की योजना पेश करने का निर्देश दिया था। लेकिन नगर निगम की ओर से 16 सितंबर 2026 को दाखिल हलफनामे में पुनर्जीवन से जुड़ी योजना शामिल नहीं थी।

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हालांकि नगर निगम ने अपनी रिपोर्ट में एक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार किए जाने का उल्लेख जरूर किया, लेकिन वह डीपीआर भी ट्रिब्यूनल के समक्ष रिकॉर्ड पर पेश नहीं की गई।

सुनवाई के दौरान नगर निगम की ओर से पेश वकील ने एनजीटी को बताया कि अगली सुनवाई से पहले डीपीआर दाखिल कर दी जाएगी। इस मामले में अगली सुनवाई 7 दिसंबर 2026 को होनी है। इस दौरान प्रयागराज नगर निगम के आयुक्त भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई में मौजूद रहेंगे और ट्रिब्यूनल की सहायता करेंगे।

एनजीटी ने स्पष्ट किया कि तालाब का पुनर्जीवन केवल कागजों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप जमीन पर लागू किया जाना जरूरी है।

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