यमुना किनारे कचरा डंपिंग पर एनजीटी सख्त, एमसीडी से मांगी प्रगति रिपोर्ट

वहीं दिल्ली नगर निगम की ओर से दाखिल स्थिति रिपोर्ट में दावा किया गया कि राम घाट, श्याम घाट, काली घाट और हनुमान चौक समेत चिन्हित स्थानों से कचरा हटा दिया गया है
प्रतीकात्मक तस्वीर: आईस्टॉक
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सारांश
  • पर्यावरणीय उल्लंघनों के मामलों में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने सख्त रुख अपनाते हुए दो अहम मामलों में कार्रवाई तेज कर दी है।

  • दिल्ली में यमुना किनारे वजीराबाद और जगतपुर क्षेत्र के पास पुश्ता रोड तथा घाटों पर घरेलू, व्यावसायिक कचरा और मलबा डंप किए जाने के मामले में एनजीटी ने दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) से निर्माण एवं सफाई कार्यों की प्रगति पर विस्तृत हलफनामा मांगा है।

  • वहीं मध्य प्रदेश के डिंडोरी जिले के किसलपुरी गांव में कृषि भूमि पर चल रहे कथित अवैध स्टोन क्रशर के मामले में ट्रिब्यूनल ने संयुक्त जांच समिति गठित कर छह सप्ताह में तथ्यात्मक एवं कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।

  • दोनों मामलों में एनजीटी की सक्रियता यह संकेत देती है कि पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन और प्रशासनिक लापरवाही पर अब कड़ा रुख अपनाया जा रहा है।

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने 7 अप्रैल 2026 को वजीराबाद और जगतपुर गांव के पास पुश्ता रोड और यमुना के घाटों पर घरेलू, व्यावसायिक कचरे और मलबा डंप किए जाने के मामले पर संज्ञान लिया।

इस मामले में दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) की ओर से दाखिल स्थिति रिपोर्ट में दावा किया गया कि राम घाट, श्याम घाट, काली घाट और हनुमान चौक समेत चिन्हित स्थानों से कचरा हटा दिया गया है। साथ ही, फिक्स्ड कंपैक्टर ट्रांसफर स्टेशन के लिए एक जगह तय कर ली गई है और सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग ने कुछ शर्तों के साथ एनओसी (नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट) भी दे दी है।

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एमसीडी के वकील ने अदालत को जानकारी दी है कि फिक्स्ड कॉम्पैक्टर ट्रांसफर स्टेशन के निर्माण से पहले कुछ जरूरी अनुमति और एनओसी लेना बाकी है। इस पर एनजीटी ने निर्देश दिया कि एमसीडी का सक्षम अधिकारी हलफनामा दाखिल कर निर्माण कार्य की प्रगति और इसे तय समय में पूरा करने की योजना पेश करे।

वहीं, याचिकाकर्ता के वकील ने इस दावे पर सवाल उठाया कि कचरा पूरी तरह हटा दिया गया है। उन्होंने संबंधित साक्ष्यों के साथ जवाब दाखिल करने के लिए अदालत से समय मांगा है।

इस मामले में अगली सुनवाई 23 जुलाई 2026 को होनी है।

डिंडोरी: कृषि भूमि पर चल रहे अवैध स्टोन क्रशर पर एनजीटी की नजर, 6 हफ्ते में रिपोर्ट तलब

मध्य प्रदेश में डिंडोरी जिले के किसलपुरी गांव में चले रहे एक अवैध स्टोन क्रशर के खिलाफ एनजीटी ने जांच के निर्देश दिए हैं। 9 अप्रैल 2026 को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की केंद्रीय पीठ ने इस मामले में तीन सदस्यीय संयुक्त समिति गठित करने के निर्देश दिए हैं।

इस समिति में डिंडोरी के जिला कलेक्टर, मध्यप्रदेश भूविज्ञान एवं खनन विभाग तथा मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एक-एक प्रतिनिधि शामिल होंगे। ट्रिब्यूनल ने समिति को मौके का निरीक्षण कर छह सप्ताह के भीतर तथ्यात्मक एवं कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है।

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इस मामले में दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि संबंधित स्टोन क्रशर अवैध रूप से कृषि भूमि पर चल रहा है। इस यूनिट ने न तो भूमि उपयोग में बदलाव (डायवर्जन) की कानूनी अनुमति ली है और न ही पर्यावरण से जुड़ी आवश्यक मंजूरियां प्राप्त की हैं। याचिका के मुताबिक यह क्रशर वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981 और जल (प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण) अनिनियम, 1974 के तहत जरूरी ‘कंसेंट टू एस्टैब्लिश’ और ‘कंसेंट टू ऑपरेट’ के बिना चल रहा है।

साथ ही, इसके लिए पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 के तहत आवश्यक पर्यावरणीय स्वीकृति भी नहीं ली गई है।

आवेदन में कहा गया है कि स्टोन क्रशर के अनियंत्रित संचालन से क्षेत्र के पर्यावरण को गंभीर क्षति पहुंच रही है। इसके चलते इलाके में वायु एवं ध्वनि प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है और अत्यधिक धूल उत्सर्जन से वातावरण प्रभावित हो रहा है।

इससे आसपास की कृषि भूमि को नुकसान पहुंच रहा है, जबकि भूजल स्तर और उसकी गुणवत्ता पर भी प्रतिकूल असर पड़ा है। साथ ही स्थानीय निवासियों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है।

अब सभी की निगाहें जांच समिति की रिपोर्ट पर टिकी है, जो यह तय करेगी कि आरोप कितने सही हैं और दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाएगी। यह मामला पर्यावरणीय नियमों के पालन और ग्रामीण क्षेत्रों में अवैध औद्योगिक गतिविधियों पर नियंत्रण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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