रिकॉर्ड में ‘नदी’ नहीं, ‘नाला’: गायत्री गंगा की दुर्दशा पर एनजीटी में बड़ा खुलासा

सरकारी रिकॉर्ड में ‘नाला’ दर्ज होने और सीवेज टेपिंग की व्यवस्था न होने से गायत्री गंगा में बिना उपचार के लगातार गंदा पानी गिर रहा है। इससे पहले भी उत्तर प्रदेश में ही ऐसा एक और मामले का पता चला था
प्रतीकात्मक तस्वीर: आईस्टॉक
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सारांश
  • हमीरपुर में बहने वाली गायत्री गंगा की बदहाल स्थिति पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में दाखिल रिपोर्ट ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के हलफनामे के मुताबिक नदी में गिरने वाले सभी नाले बिना टेपिंग के सीधे इसमें मिल रहे हैं और गंदे पानी के उपचार के लिए फाइटोरिमेडिएशन या बायोरिमेडिएशन जैसी कोई अस्थाई व्यवस्था मौजूद नहीं है।

  • हैरानी की बात यह है कि सरकारी रिकॉर्ड में गायत्री गंगा को ‘नदी’ के बजाय ‘नाले’ के रूप में दर्ज किया गया है, जिसके चलते इसकी सफाई और संरक्षण की दिशा में जरूरी कदम नहीं उठ पाए।

  • संयुक्त समिति के निरीक्षण में अतिक्रमण और अव्यवस्थित सीवेज प्रबंधन भी सामने आया है, जिससे साफ है कि फिलहाल यह नदी बिना उपचार के गिरते गंदे पानी के कारण लगातार प्रदूषण का बोझ झेल रही है।

उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले में बहने वाली गायत्री गंगा की हालत पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) को सौंपे अपने हलफनामे में बताया है कि गायत्री गंगा में गिरने वाले सभी नाले बिना टेपिंग के सीधे नदी में मिल रहे हैं।

इतना ही नहीं, गंदे पानी को अस्थाई रूप से साफ करने के लिए फाइटोरिमेडिएशन या बायोरिमेडिएशन जैसे कोई इंतजाम भी मौके पर मौजूद नहीं हैं। 12 दिसंबर 2025 को दिए आदेश पर तैयार यह रिपोर्ट 27 फरवरी 2026 को एनजीटी में दाखिल की गई है।

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एनजीटी के निर्देश पर हमीरपुर के जिलाधिकारी ने एक संयुक्त समिति का गठन किया था। समिति ने 3 से 5 फरवरी 2026 के बीच स्थलों का निरीक्षण किया।

सरकारी रिकॉर्ड में ‘नदी’ नहीं, ‘नाला’ दर्ज

निरीक्षण रिपोर्ट, जिसे राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) ने तैयार किया, उसमें स्पष्ट रूप से पाया गया कि सभी नालों को बंद नहीं किया गया है और गंदे पानी के उपचार की फाइटोरेमेडिएशन या बायोरेमेडिएशन जैसी कोई अस्थाई व्यवस्था नहीं है।

जिला प्रशासन ने यह भी जानकारी दी कि सरकारी रिकॉर्ड में गायत्री गंगा को ‘नाले’ के रूप में दर्ज किया गया है। संयुक्त समिति ने पांच स्थानों पर अतिक्रमण भी पाया है, जिन पर कार्रवाई शुरू करने का प्रस्ताव है।

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बांदा क्षेत्र के यूपीपीसीबी के क्षेत्रीय अधिकारी ने हमीरपुर नगर पालिका परिषद के अधिशासी अधिकारी को निर्देश दिया है कि वे नाला टेपिंग, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) निर्माण और अस्थाई उपचार उपायों की वर्तमान स्थिति की जानकारी उपलब्ध कराएं।

इस पर नगर पालिका परिषद, हमीरपुर के अधिशासी अधिकारी ने बताया कि एसटीपी के लिए जमीन चिन्हित कर ली गई है और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जा रही है। जब तक एसटीपी चालू नहीं हो जाता, तब तक कुछ महीनों में अस्थाई रूप से फाइटोरिमेडिएशन/बायोरिमेडिएशन व्यवस्था शुरू करने का आश्वासन दिया गया है।

हालांकि, फिलहाल स्थिति यह है कि गायत्री गंगा में बिना उपचार के गंदा पानी गिर रहा है। सवाल यह है कि योजनाएं कागज से जमीन पर कब उतरेंगी और नदी को प्रदूषण से वास्तविक राहत कब मिलेगी।

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