एचआइवी और सिफलिस पर विजय: डेनमार्क ने मांओं से बच्चों में संक्रमण को समाप्त कर रचा इतिहास

डेनमार्क का अनुभव बताता है कि जब राजनीतिक इच्छाशक्ति, भरोसेमंद डेटा सिस्टम और उच्च गुणवत्ता वाली देखभाल साथ हो, तो माओं से बच्चों में संक्रमण को फैलने से पूरी तरह रोका जा सकता है
प्रतीकात्मक तस्वीर: आईस्टॉक
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सारांश
  • डेनमार्क ने माओं से बच्चों में एचआईवी और सिफलिस संक्रमण को खत्म कर एक मिसाल कायम की है। डब्ल्यूएचओ द्वारा प्रमाणित यह उपलब्धि दशकों की मेहनत, समग्र मातृ–शिशु स्वास्थ्य सेवाओं और महिला अधिकारों के सम्मान का परिणाम है।

  • देश ने गर्भवती महिलाओं की उच्च जांच और समय पर उपचार के जरिए नवजातों में संक्रमण की दर न्यूनतम रखी, और अब इसका अनुभव पूरी दुनिया के लिए प्रेरणा बन गया है।

डेनमार्क ने माओं से बच्चों में होने वाले एचआईवी और सिफलिस संक्रमण को समाप्त कर इतिहास रच दिया। इसके साथ ही डेनमार्क, यूरोपियन यूनियन का पहला देश बन गया है जिसे विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने इस उपलब्धि के लिए प्रमाणित किया।

यह सिर्फ एक स्वास्थ्य सफलता नहीं, बल्कि दशकों की मेहनत, समान स्वास्थ्य पहुंच और हर गर्भवती महिला के अधिकारों के सम्मान का प्रतीक है। इसने सुनिश्चित किया है कि हर बच्चा इन खतरनाक बीमारियों से मुक्त जन्म ले।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के महासचिव डॉक्टर टेड्रोस एडनॉम घेब्रेयसस का कहना है, “माओं से बच्चों में एचआईवी और सिफलिस के संक्रमण का समाप्त होना डेनमार्क के लिए एक ऐतिहासिक स्वास्थ्य सफलता है। यह साबित करता है कि जब राजनीतिक इच्छाशक्ति, प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं में निवेश और मातृ–शिशु स्वास्थ्य का समग्र दृष्टिकोण हो, तो हर गर्भवती महिला और नवजात को सुरक्षित रखा जा सकता है।“

साझा जानकारी के मुताबिक डेनमार्क ने 2021 से 2024 के बीच सभी आवश्यक मानदंड पूरे किए, जिसमें गर्भवती महिलाओं की जांच और उपचार कवरेज और संक्रमण की न्यूनतम दर शामिल है। इसी को देखते हुए डब्ल्यूएचओ की क्षेत्रीय और वैश्विक जांच समितियों ने जून और अगस्त 2025 में इस उपलब्धि को मान्यता दी है।

दशकों की मेहनत का फल

डब्ल्यूएचओ यूरोप के क्षेत्रीय निदेशक डॉक्टर हांस हेनरी पी क्ल्यूगे का इस बारे में प्रेस विज्ञप्ति में कहना है, "डेनमार्क की यह सफलता उसके मजबूत मातृ स्वास्थ्य तंत्र और हर गर्भवती महिला तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता का परिणाम है।“

“संक्रमण को समाप्त करने का मतलब है कि 100 में से कम से कम 95 महिलाओं की जांच और उपचार किया जाए और नवजातों में संक्रमण की दर 50 प्रति 1,00,000 जन्म से कम हो। डेनमार्क ने इसे बेहतर देखभाल, भरोसेमंद डेटा सिस्टम और महिलाओं के अधिकारों के सम्मान के साथ हासिल किया है।"

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यह उपलब्धि दशकों की मेहनत और समर्पण का नतीजा है। डेनमार्क की स्वास्थ्य टीमों, दाईयों और स्वास्थ्य कर्मचारियों ने मिलकर सुनिश्चित किया कि हर गर्भवती महिला समय पर परीक्षण और देखभाल पाए। देश की समावेशी स्वास्थ्य प्रणाली, उत्कृष्ट आंकड़े और प्रयोगशाला क्षमता, और महिला अधिकारों का सम्मान इस सफलता के स्तंभ बने।

स्वास्थ्य मंत्री सोफी लोह्डे ने गर्व के साथ कहा, "डब्ल्यूएचओ द्वारा यह मान्यता डेनमार्क के लिए गर्व का क्षण है। यह हमारी स्वास्थ्य कर्मियों और दाईयों की दशकों की मेहनत का परिणाम है। हमारी स्वास्थ्य प्रणाली जो हर व्यक्ति को समान पहुंच देती है, इस उपलब्धि की नींव रही।“

दुनिया के लिए उदाहरण है डेनमार्क का मॉडल

“यूरोपियन यूनियन का पहला देश बनना केवल सम्मान नहीं, बल्कि जिम्मेदारी भी है। हम चाहते हैं कि हमारा अनुभव अन्य देशों को प्रेरित करे और हम हेपेटाइटिस बी को जोड़कर पूर्ण त्रिगुणीय समाप्ति की दिशा में भी काम करेंगे।"

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डेनमार्क का यह अनुभव दर्शाता है कि सही नीतियां, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं और मजबूत डेटा सिस्टम मिलकर माओं और बच्चों की सुरक्षा कर सकते हैं। यह मॉडल सिर्फ डेनमार्क ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए प्रेरणा है।

इस उपलब्धि के साथ डेनमार्क उन 22 देशों और क्षेत्रों में शामिल हो गया है, जिन्होंने एचआईवी, सिफलिस या हेपेटाइटिस बी के माओं से बच्चों में संक्रमण रोकने में सफलता पाई है। इस सूची में ब्राजील, मलेशिया, मालदीव, थाईलैंड और श्रीलंका जैसे देश शामिल हैं।

डेनमार्क की यह सफलता दिखाती है कि जब स्वास्थ्य और मानवाधिकारों को प्राथमिकता दी जाती है, तो बीमारियों को हराया जा सकता है और हर बच्चा स्वस्थ भविष्य की ओर कदम बढ़ा सकता है।

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