सीफूड से आया वायरस: क्या इंसानों की आंखों के लिए उभर रहा नया खतरा

सीफूड से फैल रहा अनदेखा खतरा अब आंखों की नई बीमारी के रूप में सामने आ रहा है, जिसने चिंता बढ़ा दी है
प्रतीकात्मक तस्वीर: आईस्टॉक
प्रतीकात्मक तस्वीर: आईस्टॉक
Published on
सारांश
  • समुद्र से आया एक अदृश्य खतरा अब इंसानों की आंखों तक पहुंच चुका है।

  • नेचर माइक्रोबायोलॉजी में प्रकाशित इस स्टडी के मुताबिक, जलीय जीवों में पाया जाने वाला समुद्री वायरस कोवर्ट मोर्टेलिटी नोडावायरस (सीएमएनवी) अब आंखों की एक नई बीमारी 'पर्सिस्टेंट ऑक्युलर हाइपरटेंशन वायरल एंटीरियर यूवाइटिस (पीओएच-वीएयू)' से जुड़ रहा है, जिसके मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।

  • असुरक्षित सीफूड हैंडलिंग और बदलती जीवनशैली ने इस ‘वायरस स्पिलओवर’ के खतरे को और बढ़ा दिया है।

  • चौंकाने वाली बात यह है कि यह वायरस अब दुनिया के कई हिस्सों में फैल चुका है, जिससे यह सिर्फ एक मेडिकल खोज नहीं, बल्कि वैश्विक स्वास्थ्य के लिए उभरती चेतावनी बन गया है।

क्या आपकी थाली में परोसा 'सीफूड' आपकी आंखों के लिए खतरा बन सकता है? नई स्टडी ने इसको लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा किया है कि एक ऐसा वायरस, जो अब तक सिर्फ मछलियों और झींगों तक सीमित माना जाता था, वो अब इंसानों तक पहुंच चुका है और आंखों की लंबे समय तक रहने वाली एक गंभीर बीमारी की वजह बन रहा है।

वैज्ञानिकों के मुताबिक, जलवायु परिवर्तन और बदलती मानव गतिविधियों ने वन्यजीवों से इंसानों तक वायरस के फैलने यानी स्पिलओवर के खतरे को काफी बढ़ा दिया है।

नतीजन प्रकृति और इंसान के बीच बिगड़ता संतुलन अब सीधे हमारी सेहत पर असर डाल रहा है। अंतराष्ट्रीय जर्नल नेचर माइक्रोबायोलॉजी में प्रकाशित यह अध्ययन इसी उभरते खतरे की ओर इशारा करता है।

महंगे पड़ रहे प्रकृति से बिगड़ते रिश्ते

पिछले कुछ वर्षों में चीन में आंखों की एक रहस्यमयी बीमारी 'पर्सिस्टेंट ऑक्युलर हाइपरटेंशन वायरल एंटीरियर यूवाइटिस (पीओएच-वीएयू) के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी देखी गई।

यह भी पढ़ें
क्या जलवायु परिवर्तन से दुनिया में पैर पसार रहा है 'ब्रेन ईटिंग अमीबा'? अध्ययन ने खोला राज
प्रतीकात्मक तस्वीर: आईस्टॉक

इस बीमारी में आंखों का दबाव असामान्य रूप से बढ़ जाता है और लगातार सूजन बनी रहती है, जिससे दृष्टि पर गंभीर असर पड़ सकता है। हालांकि यह बीमारी कैसे होती है इसकी असली वजह अब तक रहस्य बनी हुई थी। डॉक्टरों के सामने एक बड़ा सवाल यह था कि मरीजों में इस बीमारी के लक्षण आंखों में होने वाले आम वायरस जैसे हर्पीज या शिंगल्स नहीं मिल रहे थे।

इसी रहस्य को सुलझाने के लिए वैज्ञानिकों ने गहन जांच की और शक की सुई एक समुद्री वायरस कोवर्ट मोर्टेलिटी नोडावायरस (सीएमएनवी) की ओर गई, जो अब तक केवल जलीय जीवों में ही पाया जाता था।

सीफूड और जीवनशैली से जुड़ा संक्रमण का सुराग

2022 से 2025 के बीच 70 मरीजों पर किए अध्ययन में वैज्ञानिकों ने आंखों के टिश्यू में करीब 25 नैनोमीटर आकार के वायरस कण देखे। उन्नत एंटीबॉडी परीक्षण और जेनेटिक सीक्वेंसिंग जैसी उन्नत तकनीकों से जांच करने पर यह सामने आया कि यह कण जेनेटिक रूप से सीएमएनवी से 98.96 फीसदी तक मेल खाते हैं।

खास बात यह रही कि स्वस्थ लोगों में ऐसा कोई वायरस नहीं पाया गया। इससे इस संबंध को और मजबूती मिली। लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यह था कि यह समुद्री वायरस इंसानों तक कैसे पहुंचा?

यह भी पढ़ें
क्यों चमगादड़ों को नहीं होता कैंसर, क्या है उनकी लम्बी उम्र और सेहत का राज
प्रतीकात्मक तस्वीर: आईस्टॉक

इसका जवाब मरीजों की जीवनशैली में छिपा मिला। जब मरीजों की जीवनशैली का विश्लेषण किया गया, तो एक स्पष्ट पैटर्न सामने आया।

अधिकांश मरीज (75 फीसदी) या तो बिना किसी सुरक्षा के कच्चे सीफूड को संभालते थे, या बिना पकाए ही समुद्री जीवों का सेवन करते थे। यही आदतें इस संक्रमण का संभावित रास्ता बन गईं। इससे संकेत मिलता है कि असुरक्षित संपर्क और खानपान की आदतें इस संक्रमण के प्रमुख कारण हो सकती हैं।

दुनियाभर में फैल चुका है खतरा

वैज्ञानिकों ने यह भी सुनिश्चित किया कि यह वायरस सिर्फ मौजूद ही नहीं, बल्कि बीमारी का कारण भी है। इसके लिए उन्होंने लैब में कोशिकाओं और चूहों पर परीक्षण किए। परिणाम वही थे, संक्रमित चूहों में आंखों का दबाव बढ़ गया और सूजन विकसित हुई, यह लक्षण ठीक वैसे थे जैसे इंसानों में देखे गए थे।

यह भी पढ़ें
वैज्ञानिकों ने खोला येलो फीवर वायरस का रहस्य, पहली बार वायरस की हाई-रिजॉल्यूशन 3डी तस्वीरें की जारी
प्रतीकात्मक तस्वीर: आईस्टॉक

चिंता की बात यह है कि यह वायरस किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है। अध्ययन में पाया गया कि सीएमएनवी दुनिया के कई हिस्सों एशिया, अफ्रीका, यूरोप, अमेरिका और यहां तक कि अंटार्कटिका तक में 49 अलग-अलग प्रजातियों में मौजूद है।

यानी यह खतरा अब वैश्विक रूप ले चुका है। यह शोध साफ संकेत देता है कि बदलती जलवायु, बढ़ता इंसानी हस्तक्षेप और हमारी खानपान की आदतें मिलकर ऐसे नए खतरों को जन्म दे रही हैं, जिनका अंदाजा लगाना भी मुश्किल है।

ऐसे में सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है। कच्चे सीफूड को संभालते समय दस्ताने पहनना जरूरी है, अधपके या कच्चे समुद्री भोजन से परहेज करना समझदारी है, और आंखों में जलन, भारीपन या असामान्य दबाव महसूस होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना आपकी दृष्टि की सुरक्षा के लिए बेहद अहम कदम हो सकता है।

Related Stories

No stories found.
Down to Earth- Hindi
hindi.downtoearth.org.in