

वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य कर्मियों की संख्या 7 करोड़ के पार पहुंची, 20 सालों में घनत्व में 52% की बढ़ोतरी।
यूरोपीय क्षेत्र में अफ्रीकी क्षेत्र की तुलना में डॉक्टरों की उपलब्धता 13 गुना और नर्सों की संख्या 6 गुना अधिक।
दुनिया भर में लगभग 25% और अमीर देशों में 33% डॉक्टर 55 वर्ष से अधिक उम्र के, जल्द होंगे सेवानिवृत्त।
वर्ष 2030 तक दुनिया भर में 1.11 करोड़ स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की भारी कमी होने का गंभीर अनुमान लगाया गया।
आंकड़ों के संग्रहण में 20 गुना सुधार हुआ, 90% से अधिक डब्ल्यूएचओ सदस्य देशों ने साझा की अपनी स्वास्थ्य रिपोर्ट।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने अपनी वार्षिक श्रृंखला की पहली रिपोर्ट 'नेशनल हेल्थ वर्कफोर्स एकाउंट्स: हेल्थ वर्कफोर्स लेवल्स एंड ट्रेंड्स 2026' जारी कर दी है। यह रिपोर्ट दुनिया भर में स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की स्थिति, उनकी संख्या में आए बदलावों और भविष्य की प्रमुख चुनौतियों की सबसे व्यापक और सटीक तस्वीर पेश करती है।
अधिकारिक वैश्विक आंकड़ों पर आधारित इस अध्ययन से पता चलता है कि पिछले दो दशकों में स्वास्थ्य क्षेत्र में काफी प्रगति हुई है, लेकिन इसके साथ ही गंभीर क्षेत्रीय असमानताएं और कार्यबल के बूढ़े होने का एक नया संकट भी सामने आया है।
दो दशकों में स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की संख्या में भारी उछाल
रिपोर्ट के आंकड़ों के अनुसार, बीते बीस वर्षों में वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं का घनत्व 52 प्रतिशत तक बढ़ गया है। साल 2006 में प्रति 10 हजार लोगों पर स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की संख्या 44.8 थी, जो साल 2025 में बढ़कर 67.9 हो गई है। इस आंकड़े में डॉक्टर, नर्स, दाई, दंत चिकित्सक और फार्मासिस्ट शामिल हैं।
वर्तमान में दुनिया भर में स्वास्थ्य और देखभाल क्षेत्र से जुड़े कर्मचारियों की कुल संख्या सात करोड़ से अधिक हो चुकी है। इसके अलावा आंकड़ों के संग्रह में भी जबरदस्त सुधार हुआ है, जिसके तहत 2025 में 90 प्रतिशत से अधिक सदस्य देशों ने अपने स्वास्थ्य संबंधी आंकड़े साझा किए हैं।
अमीर और गरीब देशों के बीच गहरी असमानता
वैश्विक स्तर पर संख्या में हुए सुधार के बावजूद यह प्रगति हर जगह एक समान नहीं है। रिपोर्ट इस बात का खुलासा करती है कि स्वास्थ्य सुविधाओं के मामले में दुनिया के अमीर और गरीब देशों के बीच बहुत बड़ी खाई है। उदाहरण के तौर पर, यूरोपीय क्षेत्र में डॉक्टरों का घनत्व अफ्रीकी क्षेत्र की तुलना में 13 गुना अधिक है।
वहीं, नर्सों और दाइयों की बात करें तो यूरोप में उनकी संख्या अफ्रीका से छह गुना ज्यादा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अधिकारियों का कहना है कि स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं का घनत्व सीधे तौर पर किसी देश की राष्ट्रीय आय से जुड़ा हुआ है, जिससे कमजोर आय वाले देशों में बुनियादी इलाज भी लोगों तक सही समय पर नहीं पहुंच पा रहा है।
बुढ़ापा बना स्वास्थ्य सेवा प्रणाली के लिए नया खतरा
इस साल की रिपोर्ट का विशेष ध्यान स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की उम्र और बढ़ती आबादी पर है। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि डॉक्टरों का बूढ़ा होना आने वाले समय में स्वास्थ्य सेवाओं को पूरी तरह प्रभावित कर सकता है। आंकड़ों के अनुसार, दुनिया में लगभग चार में से एक डॉक्टर की उम्र 55 वर्ष से अधिक है और वे अगले एक दशक में सेवानिवृत्त होने वाले हैं।
उच्च आय वाले अमीर देशों में यह स्थिति और भी गंभीर है, जहां लगभग हर तीसरा डॉक्टर सेवानिवृत्ति के करीब है। एक तरफ जहां बुजुर्गों की संख्या बढ़ने से चिकित्सा सेवाओं की मांग बढ़ रही है, वहीं दूसरी तरफ अनुभवी डॉक्टरों के रिटायर होने से भारी कमी पैदा हो रही है।
वर्ष 2030 तक लाखों स्वास्थ्य कर्मियों की भारी कमी का अनुमान
रिपोर्ट के दूरगामी अनुमानों के अनुसार, वर्ष 2030 तक दुनिया को लगभग 1.11 करोड़ स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की भीषण कमी का सामना करना पड़ सकता है।
इतना ही नहीं, दुनिया के 67 देश ऐसे होंगे जिनके पास अपनी आबादी की बुनियादी स्वास्थ्य जरूरतों को पूरा करने के लिए भी पर्याप्त डॉक्टर और नर्स उपलब्ध नहीं होंगे। विशेषज्ञ इसे एक छिपा हुआ दोहरा संकट मान रहे हैं, जो एक तरफ बढ़ती हुई बुजुर्ग आबादी और दूसरी तरफ घटते हुए युवा स्वास्थ्यकर्मियों के कारण पैदा हो रहा है।
बेहतर भविष्य और नीति निर्माण के लिए भारी निवेश की जरूरत
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, इस संकट से निपटने के लिए दुनिया के सभी देशों को तुरंत ठोस और भविष्य को ध्यान में रखकर नीतियां बनानी होंगी। स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार केवल नए अस्पतालों के निर्माण से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए स्वास्थ्यकर्मियों की शिक्षा, रोजगार, प्रशिक्षण और उनकी सुरक्षा में भारी निवेश करना अनिवार्य है।
संगठन ने जोर देकर कहा है कि अगर दुनिया को 'सभी के लिए स्वास्थ्य' का लक्ष्य हासिल करना है, तो इस क्षेत्रीय विषमता को दूर करना होगा और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के संरक्षण तथा नए पेशेवरों की भर्ती पर ध्यान देना होगा।