हर साल हजारों बच्चों की जान लेने वाली सिकल सेल बीमारी पर डब्ल्यूएचओ की बड़ी पहल

सिकल सेल से बच्चों की मौत रोकने की डब्ल्यूएचओ की पहल, नई गाइडलाइन, हाइड्रॉक्सीयूरिया और बच्चों के अनुकूल सस्ती दवाओं से इलाज की पहुंच बढ़ाने पर जोर
उप-सहारा अफ्रीका में सिकल सेल के करीब 80 प्रतिशत मामले हैं, इसलिए यहां इलाज और दवाओं की पहुंच बढ़ाना बेहद जरूरी है।
उप-सहारा अफ्रीका में सिकल सेल के करीब 80 प्रतिशत मामले हैं, इसलिए यहां इलाज और दवाओं की पहुंच बढ़ाना बेहद जरूरी है।
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सारांश
  • 2021 में सिकल सेल बीमारी से पांच साल से कम उम्र के करीब 81,100 बच्चों की मौत का के मामले सामने आए।

  • उप-सहारा अफ्रीका में सिकल सेल के करीब 80 प्रतिशत मामले हैं, इसलिए यहां इलाज और दवाओं की पहुंच बढ़ाना बेहद जरूरी है।

  • डब्ल्यूएचओ ने बच्चों और किशोरों में सिकल सेल के निदान, बचाव और इलाज के लिए नई गाइडलाइन जारी की।

  • हाइड्रॉक्सीयूरिया को 9 महीने से 19 वर्ष तक के सिकल सेल एनीमिया वाले बच्चों के लिए महत्वपूर्ण उपचार बताया गया है।

  • डब्ल्यूएचओ बच्चों के लिए गुणवत्ता वाली, सस्ती और आसानी से इस्तेमाल होने वाली हाइड्रॉक्सीयूरिया दवा उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दे रहा है।

सिकल सेल बीमारी बच्चों के लिए आज भी एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बनी हुई है। अनुमान के अनुसार, साल 2021 में पांच साल से कम उम्र के करीब 81,100 बच्चों की मौत सिकल सेल बीमारी के कारण हुई। इस बीमारी का सबसे ज्यादा असर उप-सहारा अफ्रीका में देखने को मिलता है, जहां दुनिया के सिकल सेल के करीब 80 प्रतिशत मामले पाए जाते हैं।

हालांकि इस बीमारी के इलाज और नियंत्रण के लिए प्रभावी दवाएं उपलब्ध हैं, लेकिन हर बच्चे तक इनका पहुंच पाना अब भी बड़ी समस्या है। इसी अंतर को कम करने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने बच्चों और किशोरों के लिए इलाज की नई गाइडलाइन और बेहतर दवाओं की उपलब्धता बढ़ाने की दिशा में कदम तेज किए हैं।

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बीमारी में लाल रक्त कोशिकाएं बदल जाती हैं

सिकल सेल एक आनुवंशिक बीमारी है, जिसमें शरीर में बनने वाली लाल रक्त कोशिकाओं का आकार सामान्य नहीं रहता। वे मुड़कर हंसिए या दरांती जैसी आकृति ले सकती हैं। ऐसी कोशिकाएं छोटी रक्त नलिकाओं में फंसकर रक्त के प्रवाह को रोक सकती हैं।

इसके कारण बच्चों को तेज दर्द, खून की कमी, संक्रमण, फेफड़ों से जुड़ी गंभीर परेशानी और स्ट्रोक जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। बीमारी गंभीर होने पर बच्चे की जान भी जा सकती है। इसलिए समय पर बीमारी की पहचान और नियमित इलाज बेहद जरूरी है।

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बच्चों के इलाज पर डब्ल्यूएचओ की नई गाइडलाइन

मई 2026 में डब्ल्यूएचओ ने पहली बार विशेष रूप से शून्य से 19 साल तक के बच्चों और किशोरों में सिकल सेल बीमारी के निदान, बचाव और इलाज के लिए वैश्विक गाइडलाइन जारी की। इसमें सात प्रमुख क्षेत्रों के तहत 15 सिफारिशें दी गई हैं।

इनमें हाइड्रॉक्सीयूरिया दवा के इस्तेमाल को खास महत्व दिया गया है। डब्ल्यूएचओ ने सिकल सेल एनीमिया वाले नौ महीने से 19 वर्ष तक के सभी बच्चों और किशोरों के लिए, बीमारी की गंभीरता चाहे जैसी हो, हाइड्रॉक्सीयूरिया के इस्तेमाल की मजबूत सिफारिश की है। यह दवा बीमारी से होने वाली गंभीर जटिलताओं को कम करने में मदद कर सकती है।

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बच्चों के लिए दवा का रूप भी जरूरी

डब्ल्यूएचओ का कहना है कि केवल प्रभावी दवा उपलब्ध होना पर्याप्त नहीं है। दवा ऐसी भी होनी चाहिए जिसे छोटे बच्चे आसानी से ले सकें और जिसकी सही मात्रा देना आसान हो।

इसी उद्देश्य से सितंबर 2025 में डब्ल्यूएचओ और ग्लोबल एक्सेलेरेटर फॉर पीडियाट्रिक फॉर्मुलेशंस (जीएपी-एफ) ने सिकल सेल बीमारी के लिए पहला पेडियाट्रिक ड्रग ऑप्टिमाइजेशन अभ्यास किया। इसमें विशेषज्ञों ने बच्चों के लिए जरूरी दवाओं और उनके बेहतर रूपों की पहचान की। हाइड्रॉक्सीयूरिया को तत्काल प्राथमिकता वाली दवा माना गया।

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आसानी से दी जा सके ऐसी हाइड्रॉक्सीयूरिया

जुलाई 2026 में डब्ल्यूएचओ ने बच्चों के लिए हाइड्रॉक्सीयूरिया की दवा का टारगेट प्रोडक्ट प्रोफाइल जारी किया। इसमें बताया गया है कि बच्चों के लिए दवा किस तरह की होनी चाहिए। इसमें सही मात्रा देना आसान हो, वजन के अनुसार खुराक बदली जा सके और छोटे बच्चे दवा आसानी से ले सकें, इस पर जोर दिया गया है।

डब्ल्यूएचओ ने ऐसी दवा पर भी जोर दिया है जो सीमित संसाधनों वाले देशों में भी सुरक्षित तरीके से रखी और इस्तेमाल की जा सके। दवा की गुणवत्ता, पैकेजिंग, स्थिरता और कीमत को भी महत्वपूर्ण माना गया है।

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गुणवत्ता वाली और सस्ती दवा पहुंचाना लक्ष्य

डब्ल्यूएचओ ने सिकल सेल बीमारी की दवाओं के लिए पहली बार प्रीक्वालिफिकेशन एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट भी जारी किया है। इसका उद्देश्य ऐसी दवाओं के विकास और उपलब्धता को बढ़ावा देना है, जिनकी गुणवत्ता सुनिश्चित हो।

इस पहल में बच्चों के लिए उपयुक्त हाइड्रॉक्सीयूरिया फॉर्मुलेशन के साथ 500 मिलीग्राम की हाइड्रॉक्सीयूरिया कैप्सूल भी शामिल हैं। डब्ल्यूएचओ ने दवा बनाने वाली कंपनियों से इस प्रक्रिया में भाग लेने की अपील की है।

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जन्म की जगह इलाज का फैसला न करे

सिकल सेल बीमारी से लड़ाई में सबसे बड़ी जरूरत समान स्वास्थ्य सुविधा की है। अफ्रीका सहित कई निम्न और मध्यम आय वाले देशों में आज भी बीमारी की जल्दी पहचान, नियमित इलाज और जरूरी दवाओं तक पहुंच सीमित है।

डब्ल्यूएचओ का लक्ष्य है कि किसी बच्चे का जन्म किस देश या क्षेत्र में हुआ है, यह उसकी इलाज पाने की संभावना तय न करे। नई गाइडलाइन, बच्चों के अनुकूल दवाओं और गुणवत्ता सुनिश्चित करने की पहल के जरिए संगठन सिकल सेल बीमारी से होने वाली अनावश्यक मौतों को कम करना चाहता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, अगर समय पर बीमारी की पहचान हो, उचित देखभाल मिले और हाइड्रॉक्सीयूरिया जैसी प्रभावी दवाएं बच्चों तक नियमित रूप से पहुंचें, तो सिकल सेल बीमारी की गंभीर जटिलताओं को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

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