

27 अगस्त को वैश्विक एमपॉक्स वैक्सीन भंडार की पहल शुरू हुई, सितंबर के अंत तक इसके संचालन की तैयारी है।
2022 से जुलाई 2026 तक 145 देशों और क्षेत्रों में 1,90,683 पुष्ट मामले दर्ज हुए, जबकि 529 लोगों की मौत हुई।
दुनिया में दर्ज एमपॉक्स मामलों में करीब दो-तिहाई मामले अफ्रीकी क्षेत्र से सामने आए, जिससे वहां संक्रमण की गंभीरता स्पष्ट होती है।
गावी के बोर्ड ने 2025 में वैक्सीन भंडार को मंजूरी दी, जिसे गावी वित्त देगा और आईसीजी इसका समन्वय करेगा।
नई व्यवस्था 2024 में बने वैक्सीन पहुंच तंत्र पर आधारित है, ताकि प्रकोप के दौरान देशों को समय पर समान वैक्सीन उपलब्ध हो।
एमपॉक्स से निपटने के लिए दुनिया ने एक बड़ा कदम उठाया है। 27 अगस्त को एमपॉक्स वैक्सीन का एक वैश्विक भंडार शुरू करने की पहल की गई। इसका उद्देश्य ऐसा स्थायी भंडार तैयार करना है, जिससे किसी भी देश में एमपॉक्स का प्रकोप होने पर जरूरत के समय वैक्सीन जल्दी उपलब्ध कराई जा सके। इस व्यवस्था के तहत सभी देशों को वैक्सीन तक पहुंच मिल सकेगी।
यह नया भंडार इस महीने के अंत तक काम करना शुरू कर सकता है। इससे उन देशों को खास मदद मिलने की उम्मीद है, जहां एमपॉक्स का प्रकोप अचानक बढ़ जाता है और समय पर वैक्सीन उपलब्ध कराना चुनौती बन जाता है।
गावी की मंजूरी के बाद शुरू हुई पहल
वैश्विक वैक्सीन संगठन गावी, द वैक्सीन अलायंस के बोर्ड ने इस भंडार को साल 2025 में मंजूरी दी थी। इसके लिए आर्थिक मदद गावी की ओर से दी जाएगी। भंडार के संचालन और वैक्सीन की व्यवस्था में इंटरनेशनल कोऑर्डिनेटिंग ग्रुप यानी आईसीजी की अहम भूमिका होगी।
आईसीजी के साथ विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ), यूनिसेफ, इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ रेड क्रॉस एंड रेड क्रिसेंट सोसाइटीज और मेडिसिन सां फ्रोंतिएर (एमएसएफ) जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय संगठन काम करेंगे। इन संगठनों का अनुभव आपात स्थिति में लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएं और जरूरी सामान पहुंचाने में है।
2024 की व्यवस्था को आगे बढ़ाया गया
यह नई पहल साल 2024 में बनाई गई उस व्यवस्था पर आधारित है, जिसे एमपॉक्स के अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य आपातकाल के दौरान शुरू किया गया था। उस समय देशों के बीच वैक्सीन के समान और सही तरीके से वितरण पर जोर दिया गया था।
अब नई व्यवस्था के जरिए इस काम को लंबे समय के लिए मजबूत किया जा रहा है। इसका मतलब है कि भविष्य में एमपॉक्स का प्रकोप होने पर वैक्सीन की तलाश और वितरण के लिए नई व्यवस्था बनाने में समय नहीं गंवाना पड़ेगा। पहले से मौजूद वैश्विक भंडार से जरूरतमंद देशों को मदद दी जा सकेगी।
अफ्रीका में सबसे ज्यादा मामले
एमपॉक्स आज भी दुनिया के कई हिस्सों में फैल रहा है। इसके कुल मामलों में करीब दो-तिहाई मामले अफ्रीकी क्षेत्र से सामने आए हैं। एक जनवरी 2022 से 31 जुलाई 2026 के बीच 145 देशों और क्षेत्रों ने मंकीपॉक्स के 1,90,683 पुष्ट मामलों की जानकारी दी। इस दौरान 529 लोगों की मौत हुई।
एमपॉक्स एक संक्रामक बीमारी है, जो मुख्य रूप से लोगों के बीच नजदीकी शारीरिक संपर्क से फैलती है। अफ्रीका के कुछ हिस्सों में जानवरों से इंसानों में भी इसका संक्रमण हो रहा है। इससे बीमारी के नए प्रकोप का खतरा बना हुआ है।
बच्चों और कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वालों को अधिक खतरा
एमपॉक्स से आमतौर पर त्वचा पर दाने, बुखार और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। कुछ लोगों में बीमारी गंभीर रूप भी ले सकती है। बच्चों और कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों में गंभीर बीमारी का खतरा ज्यादा माना जाता है।
वैक्सीन लोगों को संक्रमण और गंभीर बीमारी से बचाने में मदद करती है। जब अधिक जोखिम वाले लोगों को समय पर टीका लगाया जाता है, तो बीमारी के फैलने की गति कम की जा सकती है। इससे अस्पतालों पर दबाव भी घट सकता है और लोगों की जान बचाने में मदद मिल सकती है।
बच्चों के लिए भी अहम कदम
प्रेस विज्ञप्ति में यूनिसेफ की कार्यकारी निदेशक कैथरीन रसेल ने कहा कि एमपॉक्स बच्चों के लिए बहुत मुश्किल बीमारी हो सकती है। बीमारी का असर केवल शरीर पर नहीं पड़ता, बल्कि इसके कारण बच्चों को समाज में शर्मिंदगी, परिवार से अलग रहने और पढ़ाई छूटने जैसी परेशानियों का भी सामना करना पड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि नया वैश्विक भंडार बच्चों, परिवारों और उन समुदायों तक वैक्सीन तेजी से पहुंचाने में मदद करेगा, जिन्हें बीमारी का सबसे ज्यादा खतरा है।
बीमारी फैलने से पहले रोकने की कोशिश
विज्ञप्ति में विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस एडनॉम घेब्रेयेसस ने वैश्विक भंडार की शुरुआत को एमपॉक्स से निपटने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उनके अनुसार, स्थायी वैश्विक भंडार होने से देशों को जरूरत पड़ने पर वैक्सीन जल्दी मिल सकेगी।
इस पहल का सबसे बड़ा उद्देश्य बीमारी को फैलने के बाद रोकने के बजाय शुरुआत में ही नियंत्रित करना है। समय पर वैक्सीन मिलने से गंभीर बीमारी और मौत के मामलों को कम करने के साथ-साथ बड़े प्रकोप को रोकने में भी मदद मिल सकती है। दुनिया के लिए यह व्यवस्था भविष्य में मंकीपॉक्स जैसी स्वास्थ्य आपात स्थितियों से निपटने की तैयारी को और मजबूत कर सकती है।