विश्व हीमोफीलिया दिवस: दुनिया में चार लाख से अधिक मरीज, 75% की अब तक पहचान नहीं

विश्व हीमोफीलिया दिवस: डब्ल्यूएफएच के मुताबिक 67 प्रतिशत हीमोफीलिया के मरीज गरीब देशों में रहते हैं, जहां जांच और इलाज की सुविधाएं काफी सीमित होती हैं।
सही समय पर इलाज और विशेष केंद्रों में देखभाल से हीमोफीलिया मरीजों की मृत्यु दर लगभग 40 प्रतिशत तक कम की जा सकती है।
सही समय पर इलाज और विशेष केंद्रों में देखभाल से हीमोफीलिया मरीजों की मृत्यु दर लगभग 40 प्रतिशत तक कम की जा सकती है।फोटो साभार: आईस्टॉक
Published on
सारांश
  • दुनिया भर में चार लाख से अधिक लोग हीमोफीलिया से प्रभावित हैं, जिनमें से लगभग 75 प्रतिशत की अभी तक पहचान नहीं हुई है।

  • हीमोफीलिया ए सबसे सामान्य प्रकार है, जो कुल मामलों का लगभग 80 से 85 प्रतिशत होता है और मुख्य रूप से पुरुषों को प्रभावित करता है।

  • वर्ष 2023 में वैश्विक प्रसार दर 3.75 प्रति 100000 थी, जो 2030 तक बढ़कर लगभग 4.87 प्रति 100000 होने का अनुमान है।

  • लगभग 67 प्रतिशत हीमोफीलिया मरीज गरीब देशों में रहते हैं, जहां जांच और इलाज की सुविधाएं काफी सीमित होती हैं।

  • सही समय पर इलाज और विशेष केंद्रों में देखभाल से हीमोफीलिया मरीजों की मृत्यु दर लगभग 40 प्रतिशत तक कम की जा सकती है।

विश्व हीमोफीलिया दिवस हर साल 17 अप्रैल को मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य हीमोफीलिया और अन्य आनुवंशिक रक्तस्राव विकारों के बारे में जागरूकता बढ़ाना है। इस दिवस की शुरुआत साल 1989 में की गई थी। यह दिन हीमोफीलिया से पीड़ित लोगों के जीवन को बेहतर बनाने और उन्हें सही इलाज दिलाने के लिए समर्पित है।

हीमोफीलिया क्या है?

हीमोफीलिया एक आनुवंशिक बीमारी है जिसमें खून सामान्य रूप से नहीं जमता। जब किसी व्यक्ति को चोट लगती है, तो उसका खून लंबे समय तक बहता रहता है। यह समस्या शरीर में क्लॉटिंग फैक्टर की कमी के कारण होती है। हीमोफीलिया के मुख्य दो प्रकार होते हैं-हीमोफीलिया ए और हीमोफीलिया बी। इनमें हीमोफीलिया ए अधिक सामान्य होता है।

यह भी पढ़ें
दुनिया भर में तीन लाख बच्चे थैलेसीमिया के लक्षणों के साथ पैदा होते हैं
सही समय पर इलाज और विशेष केंद्रों में देखभाल से हीमोफीलिया मरीजों की मृत्यु दर लगभग 40 प्रतिशत तक कम की जा सकती है।

साल 2026 की थीम है “डायग्नोसिस: फर्स्ट स्टेप टू केयर” यानी “पहचान ही इलाज की पहली सीढ़ी है।” इस थीम का मतलब है कि अगर बीमारी का समय पर पता चल जाए, तो मरीज को सही इलाज मिल सकता है और उसका जीवन बेहतर हो सकता है। कई लोग ऐसे हैं जिन्हें यह बीमारी है, लेकिन उन्हें इसका पता ही नहीं होता।

दुनिया भर में हीमोफीलिया की स्थिति

दुनिया भर में लाखों लोग हीमोफीलिया से पीड़ित हैं। करीब चार लाख से अधिक लोग इस बीमारी से जूझ रहे हैं। इनमें से बहुत से लोगों की अभी तक पहचान भी नहीं की गई है। यह बीमारी अधिकतर पुरुषों में पाई जाती है, जबकि महिलाएं इसके वाहक होती हैं।

यह भी पढ़ें
वैज्ञानिकों ने लाल रक्त कोशिका के लिए पहला हीट मैप किया विकसित, चिकित्सा में सुधार के लिए अहम
सही समय पर इलाज और विशेष केंद्रों में देखभाल से हीमोफीलिया मरीजों की मृत्यु दर लगभग 40 प्रतिशत तक कम की जा सकती है।

कई गरीब देशों में इलाज की सुविधा कम होने के कारण मरीजों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। सेंटर फॉर डिजीज कण्ट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) के अनुसार, साल 2023 में वैश्विक प्रसार दर प्रति 1,00,000 पर 3.75 थी, जो 2030 तक बढ़कर लगभग प्रति 1,00,000 पर 4.87 होने का अनुमान है।

फेडरेशन ऑफ हीमोफिलिया (डब्ल्यूएफएच) के अनुसार, लगभग 67 प्रतिशत हीमोफीलिया मरीज गरीब देशों में रहते हैं, जहां जांच और इलाज की सुविधाएं काफी सीमित होती हैं। सही समय पर इलाज और विशेष केंद्रों में देखभाल से हीमोफीलिया मरीजों की मृत्यु दर लगभग 40 प्रतिशत तक कम की जा सकती है।

यह भी पढ़ें
खून की पांच बूंदों से पता चलेगी सटीक जैविक आयु, एआई मॉडल का कमाल
सही समय पर इलाज और विशेष केंद्रों में देखभाल से हीमोफीलिया मरीजों की मृत्यु दर लगभग 40 प्रतिशत तक कम की जा सकती है।

हीमोफीलिया के मुख्य लक्षण

हीमोफीलिया के कुछ सामान्य लक्षण होते हैं जिन्हें पहचानना जरूरी है। छोटी चोट लगने पर भी खून का लंबे समय तक बहना इसका एक प्रमुख संकेत है। शरीर पर बिना कारण बड़े-बड़े नीले निशान या चोट के निशान दिखना भी एक लक्षण हो सकता है। इसके अलावा जोड़ों में सूजन और दर्द होना भी आम बात है। कुछ गंभीर स्थितियों में सिरदर्द, धुंधला दिखना या अत्यधिक कमजोरी भी हो सकती है, जो खतरनाक संकेत हैं।

इलाज और देखभाल

हीमोफीलिया का अभी तक कोई स्थायी इलाज नहीं है, लेकिन इसे नियंत्रित किया जा सकता है। इसका सबसे सामान्य इलाज फैक्टर रिप्लेसमेंट थेरेपी है। इसमें शरीर में कमी वाले क्लॉटिंग फैक्टर को इंजेक्शन के माध्यम से दिया जाता है। इससे खून बहने की समस्या को रोका जा सकता है।

यह भी पढ़ें
बड़ी सफलता: अब खून की जांच से लगेगा अल्जाइमर का पता
सही समय पर इलाज और विशेष केंद्रों में देखभाल से हीमोफीलिया मरीजों की मृत्यु दर लगभग 40 प्रतिशत तक कम की जा सकती है।

मरीजों को अपनी दिनचर्या में सावधानी बरतनी चाहिए। हल्की-फुल्की एक्सरसाइज जैसे चलना या तैरना फायदेमंद होता है। चोट लगने से बचना बहुत जरूरी है। साथ ही बिना डॉक्टर की सलाह के दवाइयां नहीं लेनी चाहिए, खासकर ऐसी दवाइयां जो खून को पतला करती हैं।

समय पर पहचान का महत्व

समय पर बीमारी की पहचान होना बहुत जरूरी है। कई बार यह बीमारी बिना किसी पारिवारिक इतिहास के भी हो सकती है। अगर बच्चे में बार-बार खून बहने की समस्या दिखे, तो तुरंत डॉक्टर से जांच करानी चाहिए। जल्दी पहचान होने से इलाज शुरू किया जा सकता है और गंभीर समस्याओं से बचा जा सकता है।

यह भी पढ़ें
क्या आपका रक्त समूह बता सकता है लिवर रोग का खतरा?
सही समय पर इलाज और विशेष केंद्रों में देखभाल से हीमोफीलिया मरीजों की मृत्यु दर लगभग 40 प्रतिशत तक कम की जा सकती है।

जागरूकता की आवश्यकता

आज भी बहुत से लोग हीमोफीलिया के बारे में सही जानकारी नहीं रखते। इसी कारण मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पाता। जागरूकता फैलाने से लोग इस बीमारी को समझ पाएंगे और समय पर कदम उठा सकेंगे। सरकार और स्वास्थ्य संस्थानों को भी इस दिशा में काम करना चाहिए ताकि हर मरीज तक इलाज पहुंच सके।

विश्व हीमोफीलिया दिवस हमें यह याद दिलाता है कि सही जानकारी और समय पर पहचान से जीवन बचाया जा सकता है। हमें इस दिन के माध्यम से समाज में जागरूकता फैलानी चाहिए और उन लोगों की मदद करनी चाहिए जो इस बीमारी से जूझ रहे हैं। सही इलाज और देखभाल से हीमोफीलिया के मरीज भी एक सामान्य और स्वस्थ जीवन जी सकते हैं।

Related Stories

No stories found.
Down to Earth- Hindi
hindi.downtoearth.org.in