भारत में टाइप टू डायबिटीज से पीड़ित हर चार में से एक व्यक्ति लिवर फाइब्रोसिस से पीड़ित

भारत में डायबिटीज के मरीजों में लिवर की बीमारी तेजी से बढ़ रही है, जो बिना लक्षण के नुकसान पहुंचाती है, इसलिए समय पर जांच और जागरूकता बेहद जरूरी है
लगभग 70 प्रतिशत डायबिटीज मरीजों के लिवर में फैट जमा होता है, जो समय के साथ सूजन और फाइब्रोसिस में बदल सकता है
लगभग 70 प्रतिशत डायबिटीज मरीजों के लिवर में फैट जमा होता है, जो समय के साथ सूजन और फाइब्रोसिस में बदल सकता हैफोटो साभार :आई-स्टॉक
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सारांश
  • डायबिटीज के हर चार में से एक मरीज में लिवर फाइब्रोसिस पाया गया, जो एक गंभीर और अक्सर अनदेखी समस्या बन रही है

  • लगभग 70 प्रतिशत डायबिटीज मरीजों के लिवर में फैट जमा होता है, जो समय के साथ सूजन और फाइब्रोसिस में बदल सकता है

  • लिवर की बीमारी बिना लक्षण के बढ़ती है, इसलिए अधिकतर मामलों में इसका पता देर से चलता है और स्थिति गंभीर हो जाती है

  • विशेषज्ञों ने लिवर रोग को डायबिटीज की चौथी बड़ी जटिलता बताया है, जिससे इसके प्रति जागरूकता और जांच की जरूरत बढ़ गई है

  • समय पर जांच और सही इलाज से लिवर फाइब्रोसिस को रोका जा सकता है और सिरोसिस या लिवर फेल होने का खतरा कम किया जा सकता है

हाल ही में द लैंसेट में प्रकाशित एक अध्ययन ने मधुमेह या डायबिटीज से जुड़ी एक ऐसी समस्या पर गौर करने को कहा है जिसे काफी हद तक नजरअंदाज किया जाता रहा है। यह समस्या है लिवर की बीमारी, खासकर लिवर में होने वाली फाइब्रोसिस यानी स्कारिंग की है।

यह अध्ययन बताता है कि टाइप टू डायबिटीज से पीड़ित लोगों में लिवर की समस्या बहुत आम है और यह पहले की सोच से कहीं ज्यादा गंभीर हो सकती है।

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एमएएसएलडी क्या है?

इस अध्ययन में एक नया शब्द का इस्तेमाल किया गया है 'मेटाबोलिक डिसफंक्शन-एसोसिएटेड स्टीटोटिक लिवर डिजीज (एमएएसएलडी)'। पहले इसे फैटी लिवर डिजीज कहा जाता था।

एमएएसएलडी तब होता है जब शरीर में मेटाबॉलिक गड़बड़ी जैसे मोटापा और इंसुलिन रेजिस्टेंस के कारण लिवर में ज्यादा फैट जमा हो जाता है। शुरुआत में यह खतरनाक नहीं लगता, लेकिन समय के साथ यह लिवर को नुकसान पहुंचाने लगता है।

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लिवर में क्या होता है?

जब लिवर में फैट जमा होता है, तो धीरे-धीरे उसमें सूजन आने लगती है। यह सूजन लंबे समय तक बनी रहे तो लिवर के टिश्यू खराब होने लगते हैं और उनकी जगह स्कार टिश्यू बनने लगता है। इसी को फाइब्रोसिस कहा जाता है। अगर यह प्रक्रिया आगे बढ़ती रहती है, तो यह सिरोसिस तक पहुंच सकती है, जो लिवर की गंभीर और खतरनाक स्थिति है।

चौंकाने वाले आंकड़े

अध्ययन के अनुसार, भारत में टाइप टू डायबिटीज से पीड़ित हर चार में से एक व्यक्ति में लिवर फाइब्रोसिस पाया गया है। वहीं हर बीस में से एक व्यक्ति में सिरोसिस की आशंका देखी गई है। इसके अलावा, लगभग 70 प्रतिशत डायबिटीज मरीजों के लिवर में फैट जमा होता है। यह दिखाता है कि यह समस्या बहुत आम है, लेकिन फिर भी इसे उतनी गंभीरता से नहीं लिया जाता।

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क्यों नजरअंदाज होती है यह बीमारी?

लिवर की बीमारी अक्सर बिना किसी लक्षण के धीरे-धीरे बढ़ती है। मरीज को शुरुआत में कोई दर्द या परेशानी महसूस नहीं होती, इसलिए वह जांच नहीं करवाता।

डायबिटीज के इलाज में भी ज्यादातर ध्यान ब्लड शुगर कंट्रोल करने पर दिया जाता है। आंखों, किडनी और नसों से जुड़ी समस्याओं की जांच तो होती है, लेकिन लिवर की जांच अक्सर नहीं की जाती।

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‘चौथी बड़ी जटिलता’ क्यों कहा जा रहा है?

अब विशेषज्ञों का मानना है कि लिवर की बीमारी को डायबिटीज की चौथी बड़ी जटिलता माना जाना चाहिए। अब तक दिल, दिमाग और किडनी से जुड़ी समस्याओं को ही ज्यादा महत्व दिया जाता था। लेकिन इस अध्ययन ने दिखाया है कि लिवर की बीमारी भी उतनी ही आम और खतरनाक है।

समय पर जांच क्यों जरूरी है?

अगर लिवर फाइब्रोसिस को शुरुआती चरण में पहचान लिया जाए, तो इसे रोका जा सकता है। सही इलाज और जीवनशैली में बदलाव से स्थिति को बिगड़ने से बचाया जा सकता है। डॉक्टर अब सलाह दे रहे हैं कि डायबिटीज मरीजों को नियमित रूप से लिवर की जांच भी करानी चाहिए।

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जांच के आसान तरीके

आजकल ऐसी तकनीक उपलब्ध है जिससे बिना दर्द और बिना सर्जरी के लिवर की स्थिति का पता लगाया जा सकता है। एक खास तरह की स्कैनिंग से लिवर की कठोरता मापी जाती है, जिससे फाइब्रोसिस का पता चलता है। यह जांच जल्दी और सुरक्षित होती है, इसलिए इसे नियमित जांच का हिस्सा बनाया जा सकता है।

भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह मुद्दा?

भारत में डायबिटीज के मरीजों की संख्या बहुत ज्यादा है। ऐसे में अगर लिवर की बीमारी पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाले समय में यह एक बड़ी स्वास्थ्य समस्या बन सकती है। कई लोग बिना जाने ही गंभीर लिवर बीमारी की तरफ बढ़ सकते हैं।

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यह अध्ययन हमें यह समझाता है कि डायबिटीज का इलाज सिर्फ ब्लड शुगर तक सीमित नहीं होना चाहिए। लिवर की सेहत पर भी उतना ही ध्यान देना जरूरी है। समय पर जांच, सही जानकारी और जीवनशैली में बदलाव से हम इस छिपी हुई समस्या को रोक सकते हैं और बेहतर स्वास्थ्य पा सकते हैं।

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