युवाओं में बढ़ रहा है दिल का खतरा, लक्षणों को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी

विश्व हृदय दिवस: आईसीएमआर के 729 मामलों के अध्ययन में 18-45 वर्ष के युवाओं में अचानक मौत से जुड़े खतरे सामने आए, परिवार में अचानक मौत का इतिहास अहम पाया गया
धूम्रपान, खराब खान-पान, शारीरिक निष्क्रियता, तनाव, मधुमेह और उच्च रक्तचाप युवाओं में हृदय संबंधी जोखिम बढ़ा सकते हैं।
धूम्रपान, खराब खान-पान, शारीरिक निष्क्रियता, तनाव, मधुमेह और उच्च रक्तचाप युवाओं में हृदय संबंधी जोखिम बढ़ा सकते हैं।फोटो साभार: आईस्टॉक
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सारांश
  • आईसीएमआर के अध्ययन में 18-45 वर्ष के 729 मामलों का विश्लेषण हुआ, जिनमें अचानक मौत से जुड़े कई खतरे सामने आए।

  • परिवार में अचानक मौत का इतिहास, पहले कोविड अस्पताल में भर्ती और नशे का सेवन अचानक मौत के जोखिम से जुड़े मिले।

  • विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, 2022 में हृदय संबंधी बीमारियों से दुनिया भर में करीब 1.98 करोड़ मौतें हुईं।

  • धूम्रपान, खराब खान-पान, शारीरिक निष्क्रियता, तनाव, मधुमेह और उच्च रक्तचाप युवाओं में हृदय संबंधी जोखिम बढ़ा सकते हैं।

  • विशेषज्ञ समय पर रक्तचाप, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल की जांच के साथ स्वस्थ जीवनशैली अपनाने पर जोर देते हैं।

हर साल 29 सितंबर को विश्व हृदय दिवस मनाया जाता है। इस बार ध्यान युवाओं में बढ़ते हृदय संबंधी खतरों और समय रहते इसके संकेत पहचानने पर है। विश्व हृदय महासंघ के 2026 अभियान “डोंट मिस अ बीट” का संदेश भी यही है कि दिल से जुड़े लक्षणों को नजरअंदाज न करें और जरूरत पड़ने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लें।

दिल की बीमारी को आमतौर पर उम्रदराज लोगों से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन अब कम उम्र के लोगों में भी हृदय संबंधी गंभीर समस्याएं सामने आ रही हैं। हालांकि उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि भारत में युवाओं में हार्ट अटैक की संख्या किसी निश्चित प्रतिशत से बढ़ी है। इसके लिए अलग और बड़े स्तर के आंकड़ों की जरूरत होगी।

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दुनिया में मौत का बड़ा कारण हृदय रोग

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, हृदय और रक्त वाहिकाओं से जुड़ी बीमारियां दुनिया में मौत का सबसे बड़ा कारण हैं। साल 2022 में हृदय संबंधी बीमारियों के कारण करीब 1.98 करोड़ लोगों की मौत हुई। ऐसे में दिल की सेहत को लेकर जागरूकता केवल बुजुर्गों के लिए नहीं, बल्कि युवाओं के लिए भी जरूरी हो गई है।

भारत में भी हृदय रोग गैर-संचारी बीमारियों के बड़े हिस्से में शामिल हैं। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) की रिपोर्ट में हृदय रोगों के बोझ और इनके खतरों को कम करने के लिए किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख किया गया है।

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युवाओं पर आईसीएमआर का अध्ययन क्या कहता है?

आईसीएमआर के नेतृत्व में किए गए एक बहुकेंद्रीय अध्ययन में 18 से 45 वर्ष की उम्र के लोगों में बिना स्पष्ट कारण होने वाली अचानक मौतों की जांच की गई। अध्ययन में देश के 47 बड़े अस्पताल शामिल थे। इसमें 729 मामलों की तुलना 2,916 समान लोगों से की गई।

अध्ययन में कुछ ऐसे कारण सामने आए जो अचानक मौत के अधिक खतरे से जुड़े थे। इनमें परिवार में पहले अचानक मौत का इतिहास, पहले कोविड-19 के कारण अस्पताल में भर्ती होना, ज्यादा मात्रा में शराब पीना और नशीले पदार्थों का इस्तेमाल शामिल था।

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धूम्रपान, खराब खान-पान, शारीरिक निष्क्रियता, तनाव, मधुमेह और उच्च रक्तचाप युवाओं में हृदय संबंधी जोखिम बढ़ा सकते हैं।

इस अध्ययन को समझना जरूरी है। यह युवाओं में हार्ट अटैक की दर बढ़ने का अध्ययन नहीं था। इसलिए इसके आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि कम उम्र में हार्ट अटैक कितने प्रतिशत बढ़े हैं। यह अध्ययन मुख्य रूप से बिना स्पष्ट कारण होने वाली अचानक मौत के खतरे को समझने पर केंद्रित था।

जीवनशैली के साथ दूसरे खतरे भी जिम्मेदार

डॉक्टरों के अनुसार, युवाओं में हृदय संबंधी समस्याओं के पीछे कई कारण हो सकते हैं। धूम्रपान, असंतुलित खान-पान, शारीरिक गतिविधि की कमी, लगातार तनाव, हाई ब्लड प्रेशर, मधुमेह और बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल इनमें शामिल हैं।

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धूम्रपान, खराब खान-पान, शारीरिक निष्क्रियता, तनाव, मधुमेह और उच्च रक्तचाप युवाओं में हृदय संबंधी जोखिम बढ़ा सकते हैं।

कई बार ये समस्याएं लंबे समय तक बिना किसी साफ लक्षण के बनी रहती हैं। युवा व्यक्ति खुद को स्वस्थ समझ सकता है, जबकि शरीर में रक्तचाप, शुगर या कोलेस्ट्रॉल जैसी समस्याएं धीरे-धीरे बढ़ रही हों।

परिवार का इतिहास भी महत्वपूर्ण है। आईसीएमआर के अध्ययन में 18 से 45 वर्ष के लोगों में परिवार में अचानक मौत का इतिहास अचानक मौत के अधिक खतरे से जुड़ा पाया गया।

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समय पर जांच और सावधानी जरूरी

आईसीएमआर की रिपोर्ट में 40 से 69 वर्ष की उम्र के भारतीयों के लिए अगले 10 वर्षों में हृदय संबंधी खतरे का आकलन करने से जुड़े प्रयासों का भी उल्लेख है। ऐसे आकलन से उन लोगों की पहचान करने में मदद मिल सकती है जिनमें भविष्य में हृदय रोग का खतरा अधिक हो सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि उम्र कम होने का मतलब यह नहीं है कि दिल की बीमारी का खतरा बिल्कुल नहीं है। खासकर जिन लोगों के परिवार में हृदय रोग या अचानक मौत का इतिहास रहा है, उन्हें अपने स्वास्थ्य को लेकर अधिक सतर्क रहना चाहिए।

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रक्तचाप, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल की समय-समय पर जांच, तंबाकू और नशीले पदार्थों से दूरी, नियमित शारीरिक गतिविधि और संतुलित भोजन दिल को स्वस्थ रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

विश्व हृदय दिवस का संदेश भी यही है कि दिल से जुड़े संकेतों को हल्के में न लें। युवावस्था सुरक्षा की गारंटी नहीं है। समय पर खतरे की पहचान, सही जांच और जरूरत पड़ने पर तुरंत इलाज दिल की सेहत को बेहतर बनाए रखने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

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