युवाओं में बढ़ता कैंसर: क्या 50 से पहले ही बूढ़ा हो रहा है शरीर?

रिसर्च में खुलासा हुआ है कि युवाओं की कोशिकाएं कैलेंडर की उम्र से कहीं ज्यादा तेजी से बूढ़ी हो रही हैं, यही वजह है कि आज की पीढ़ी समय से पहले कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी की चपेट में आ रही है
फोटो: आईस्टॉक
फोटो: आईस्टॉक
Published on
सारांश
  • युवाओं में तेजी से बढ़ते कैंसर के मामलों के पीछे एक चौंकाने वाली वजह सामने आई है।

  • नए अध्ययन में खुलासा हुआ है कि, आज की युवा पीढ़ी की जैविक उम्र (बायोलॉजिकल एज) उनकी वास्तविक उम्र से कहीं अधिक तेजी से बढ़ रही है। यानी शरीर की कोशिकाएं और अंग समय से पहले बूढ़े हो रहे हैं, जिससे कम उम्र में कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।

  • 1.54 लाख से अधिक लोगों के स्वास्थ्य आंकड़ों के विश्लेषण पर आधारित इस अध्ययन में पाया गया कि इम्यून सिस्टम और वसा ऊतकों का समय से पहले बूढ़ा होना क्रमशः फेफड़ों और कोलोरेक्टल कैंसर के बढ़ते जोखिम से जुड़ा है।

  • वैज्ञानिकों का कहना है कि मोटापा, असंतुलित खान-पान, प्रदूषण, तनाव, शराब का सेवन और निष्क्रिय जीवनशैली इस तेजी से बढ़ती जैविक उम्र के प्रमुख कारण हो सकते हैं।

  • विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते सामान्य रक्त परीक्षणों से शरीर की जैविक उम्र का आकलन किया जाए, तो कई युवाओं में कैंसर के खतरे की समय रहते पहचान कर बचाव संभव हो सकता है।

कैंसर को हमेशा से उम्रदराज लोगों की बीमारी माना जाता रहा। एक ऐसा रोग जो जीवन के अंतिम पड़ाव पर तब दस्तक देता है, जब शरीर की कोशिकाएं थक जाती हैं और बरसों का नुकसान आगे नहीं ढो पातीं। लेकिन आज हमारे सामने एक बेहद कड़वी और भावुक कर देने वाली सच्चाई खड़ी है।

आज की युवा पीढ़ी, हमारे बच्चे और नौजवान, अपने माता-पिता और दादा-दादी की तुलना में कहीं तेजी से गंभीर बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है कि जो उम्र सपनों को उड़ान देने की होती है, वह अस्पतालों के चक्कर काटने में बीत रही है?

जवानी का भ्रम या कोशिकाओं की थकान: समय से पहले बूढ़ा होता शरीर

इस रहस्य से पर्दा उठाने के लिए वाशिंगटन यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन के वैज्ञानिकों ने एक नया अध्ययन किया है, जिसके नतीजे बेहद चौंकाने वाले हैं। प्रतिष्ठित जर्नल नेचर मेडिसिन में छपी स्टडी रिपोर्ट के मुताबिक, आज की युवा पीढ़ी समय से पहले बूढ़ी हो रही है। उनकी उम्र कैलेंडर पर भले ही कम हो, लेकिन उनके शरीर के अंदर के अंग और कोशिकाएं अपनी वास्तविक उम्र से कहीं ज्यादा बूढ़ी हो चुकी हैं।

विज्ञान की भाषा में इसे 'बायोलॉजिकल एजिंग' यानी जैविक बुढ़ापा कहते हैं। बता दें कि जैविक उम्र यह बताती है कि उसके शरीर के अंग और कोशिकाएं वास्तव में कितनी बूढ़ी हो चुकी हैं।

यह भी पढ़ें
दुनिया में बढ़ रहा कैंसर का खतरा: 2050 तक तीन करोड़ मामले, 1.86 करोड़ मौतों का अंदेशा
फोटो: आईस्टॉक

अपने इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने यूके बायोबैंक से 1.54 लाख से अधिक लोगों और अमेरिका के ऑल ऑफ अस रिसर्च प्रोग्राम से 10,000 से ज्यादा प्रतिभागियों के स्वास्थ्य, जीवनशैली और जैविक आंकड़ों का विश्लेषण किया है।

इस अध्ययन के दौरान वैज्ञानिकों ने खून में मौजूद जैव-रासायनिक संकेतकों, प्रोटीन और मेटाबॉलिज्म से जुड़े संकेतकों की मदद से यह आंका कि शरीर और उसके अलग-अलग अंग कितनी तेजी से बूढ़े हो रहे हैं।

अध्ययन के मुताबिक, नई पीढ़ी में जैविक उम्र उनकी वास्तविक आयु की तुलना में अधिक तेजी से बढ़ रही है और यही बदलाव कम उम्र में कैंसर के बढ़ते मामलों की एक अहम वजह हो सकता है।

शरीर के कौन से अंग सबसे पहले हो रहे हैं बूढ़े?

वैज्ञानिकों ने पाया कि हमारे जीने के साल (क्रोनोलॉजिकल एज) और हमारे शरीर की असली अंदरूनी उम्र (बायोलॉजिकल एज) के बीच का फासला जितना ज्यादा होगा, कैंसर का खतरा उतना ही बढ़ जाएगा। उदाहरण के लिए, अमेरिका में 1990 के दशक में पैदा हुए युवाओं का शरीर, 1960 के दशक में पैदा हुए लोगों की तुलना में बहुत तेजी से बूढ़ा हो रहा है।

यही वजह है कि आज 55 साल या उससे कम उम्र के युवाओं में फेफड़ों, पेट और गर्भाशय के कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।

यह भी पढ़ें
50 से कम उम्र के लोगों को तेजी से निशाना बना रहा कैंसर, तीन दशकों में 79 फीसदी बढ़े मामले
फोटो: आईस्टॉक

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक कैंसर एक न होकर बीमारियों का एक समूह है, जो शरीर के करीब-करीब किसी भी अंग या ऊतक में शुरू हो सकती है। इस बीमारी के दौरान असामान्य कोशिकाएं शरीर के विभिन्न हिस्सों में अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगती हैं।

जब यह अनियंत्रित तरीके से बढ़ती कोशिकाएं अपनी सामान्य सीमाओं से परे चली जाती हैं और अन्य अंगों में फैल जाती हैं, तो इस फैलाव को मेटास्टेसिस कहा जाता है। जो कैंसर से होने वाली मौतों का प्रमुख कारण है। कैंसर के अन्य नामों में नियोप्लाज्म और घातक ट्यूमर शामिल हैं।

यह भी पढ़ें
भारत में मुंह के कैंसर के 62 फीसदी मामलों के लिए जिम्मेदार है खैनी, जर्दा, तम्बाकू और शराब
फोटो: आईस्टॉक

लैंसेट में प्रकाशित एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक, 2050 तक कैंसर के मामले तीन करोड़ तक पहुंच सकते हैं और 1.86 करोड़ मौतों का खतरा है। इसका मतलब है कि अगले 25 वर्षों में 2050 तक कैंसर के नए मामलों में 60.7 फीसदी जबकि मौतों में 74.5 फीसदी की वृद्धि होने का अंदेशा है।

क्या जीवनशैली बना रही है युवाओं को बीमार?

यह अध्ययन सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि यह हमारे बदलते पर्यावरण और जीवनशैली की एक दर्दनाक दास्तां बयां करता है। जब शोधकर्ताओं ने शरीर के अलग-अलग अंगों की जांच की, तो बेहद परेशान कर देने वाले तथ्य सामने आए।

हमारा इम्यून सिस्टम यानी रोगों से लड़ने की ताकत, जो हमारे शरीर की सुरक्षा कवच होती है, अगर वह समय से पहले बूढ़ी हो जाए, तो युवाओं में फेफड़ों का कैंसर पनपने लगता है। वहीं, अगर हमारे शरीर के फैट टिश्यू यानी वसा कोशिकाएं समय से पहले बूढ़ी हो जाएं, तो यह युवाओं को बड़ी आंत (कोलन) या मलाशय के कैंसर (कोलोरेक्टल कैंसर) की ओर धकेल देती हैं।

यह भी पढ़ें
2050 तक स्तन कैंसर के मामलों में 38 फीसदी की वृद्धि का अंदेशा, हर घंटे हो रही 76 महिलाओं की मौत
फोटो: आईस्टॉक

वैज्ञानिकों ने चेताया है कि मोटापा, खराब खान-पान, शराब का सेवन, प्रदूषण, देर तक बैठे रहना और तनावपूर्ण आधुनिक माहौल, ये सब मिलकर युवाओं के शरीर को अंदर ही अंदर खोखला कर रहे हैं।

शोधकर्ताओं ने स्पष्ट किया है कि अध्ययन यह साबित नहीं करता कि तेजी से बढ़ती जैविक उम्र ही कैंसर का सीधा कारण है। लेकिन दोनों के बीच एक मजबूत संबंध जरूर सामने आया है। अध्ययन की खास बात यह है कि इसमें केवल कैंसर कोशिकाओं पर नहीं, बल्कि पूरे शरीर में समय के साथ होने वाले जैविक बदलावों को समझने की कोशिश की गई है।

2050 तक और भयावह हो सकती है तस्वीर

गौरतलब है कि ब्रिटिश मेडिकल जर्नल की एक रिपोर्ट में सामने आया है कि 1990 के बाद से दुनिया भर में 50 वर्ष से कम उम्र के लोगों में कैंसर के नए मामलों में करीब 79 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। चिंता की बात है कि इस दौरान 50 से कम उम्र के लोगों में कैंसर से होने वाली मौतों में भी 27.7 फीसदी की वृद्धि हुई है।

यह भी पढ़ें
पुरुषों में बढ़ते कैंसर के मामले, 84 फीसदी की वृद्धि के साथ 2050 तक दो करोड़ बन सकते हैं शिकार
फोटो: आईस्टॉक

इस नए अध्ययन का नेतृत्व करने वाली डॉक्टर यिन काओ का कहना है, उनका अंतिम मकसद डराना नहीं, बल्कि बचाना है। अगर हम समय रहते खून के कुछ सामान्य टेस्ट के जरिए यह पहचान लें कि किस युवा का शरीर अंदर से तेजी से बूढ़ा हो रहा है, तो हम कैंसर होने से पहले ही उसे बचा सकते हैं।

कैंसर ग्रैंड चैलेंजेस के निदेशक डॉक्टर डेविड स्कॉट प्रेस विज्ञप्ति में कहते हैं कि दुनिया भर में युवाओं में बढ़ते कैंसर की कोई एक वजह नहीं है, बल्कि यह हमारे पूरे शरीर में आ रहे एक बड़े बदलाव का संकेत है।

यह अध्ययन सचेत करता है कि हम अपनी आने वाली पीढ़ी को केवल एक आधुनिक दुनिया नहीं दे रहे, बल्कि अनजाने में उन्हें एक थका बीमार शरीर भी सौंप रहे हैं। अब वक्त आ गया है कि हम जागें, अपनी जीवनशैली को बदलें और अपने युवाओं के कल को सुरक्षित करें, इससे पहले कि बहुत देर हो जाए।

Down to Earth- Hindi
hindi.downtoearth.org.in