

बांस के अंकुर पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं, कम कैलोरी में प्रोटीन, फाइबर, विटामिन और खनिज प्रदान करते हैं।
वैज्ञानिक अध्ययन बताते हैं कि बांस का सेवन रक्त शर्करा नियंत्रण और हृदय स्वास्थ्य सुधारने में सहायक हो सकता है।
बांस में मौजूद प्राकृतिक फाइबर पाचन तंत्र को मजबूत करता है और आंतों की कार्यक्षमता बेहतर बनाता है।
एंटीऑक्सीडेंट और सूजन-रोधी गुण कोशिकाओं को नुकसान से बचाकर उम्र बढ़ने और बीमारियों के जोखिम घटाते हैं।
कच्चा बांस हानिकारक हो सकता है, लेकिन सही तरीके से उबालकर खाने पर यह सुरक्षित और फायदेमंद होता है।
हाल ही में वैज्ञानिकों ने बांस के अंकुर या कोंपल (बैम्बू शूट्स) को भोजन के रूप में लेकर एक महत्वपूर्ण अध्ययन किया है। यह पहली बार हुआ है जब वैज्ञानिकों ने यह समझने की कोशिश की कि बांस खाने से हमारे शरीर पर क्या प्रभाव पड़ता है। एडवांस इन बैम्बू साइंस नामक पत्रिका में प्रकाशित इस अध्ययन के नतीजे बताते हैं कि बांस के अंकुर सेहत के लिए कई तरह से फायदेमंद हो सकते हैं।
बांस एक बहुत ही खास पौधा है। यह दुनिया का सबसे तेजी से बढ़ने वाला पौधा माना जाता है। कुछ प्रजातियां एक दिन में लगभग 90 सेंटीमीटर तक बढ़ सकती हैं। चीन और भारत जैसे देशों में बांस का उत्पादन बहुत अधिक होता है और वहां बांस के अंकुर सदियों से खाए जाते रहे हैं। लेकिन दुनिया के बाकी हिस्सों में इसे अब तक ज्यादा महत्व नहीं मिला था।
पोषण से भरपूर भोजन
बांस के अंकुर पोषण के मामले में काफी अच्छे माने जाते हैं। इनमें प्रोटीन की मात्रा अच्छी होती है, जबकि वसा (फैट) बहुत कम होती है। इसके अलावा इनमें फाइबर मौजूद होता है, जो पाचन के लिए जरूरी है।
बांस के अंकुरों में कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं, जैसे -
आवश्यक अमीनो एसिड
पोटैशियम और सेलेनियम जैसे खनिज
विटामिन बी1 (थायमिन), बी3 (नायसिन), बी6
विटामिन ए और विटामिन ई
कम कैलोरी और ज्यादा पोषण होने के कारण इसे सेहतमंद भोजन माना जा सकता है।
रक्त शर्करा और हृदय स्वास्थ्य में मदद
इस अध्ययन में शामिल कुछ लोगों पर किए गए परीक्षणों से पता चला कि बांस के अंकुर खाने से रक्त शर्करा (ब्लड शुगर) को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। यह मधुमेह (डायबिटीज) से पीड़ित लोगों के लिए उपयोगी हो सकता है।
इसके अलावा, बांस खाने से शरीर में वसा (लिपिड प्रोफाइल) में सुधार देखा गया, जो हृदय स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है। अच्छे लिपिड स्तर दिल की बीमारियों के खतरे को कम कर सकते हैं।
पाचन तंत्र के लिए लाभकारी
बांस के अंकुरों में मौजूद फाइबर पाचन तंत्र को बेहतर बनाने में मदद करता है। इनमें सेल्यूलोज, हेमीसेल्यूलोज और लिग्निन जैसे रेशे पाए जाते हैं। ये रेशे आंतों की सफाई में मदद करते हैं और कब्ज जैसी समस्याओं को कम कर सकते हैं। अध्ययन में यह भी पाया गया कि बांस खाने से आंतों की कार्यक्षमता में सुधार होता है और पेट से जुड़ी समस्याएं कम हो सकती हैं।
कोशिकाओं की सुरक्षा और एंटीऑक्सीडेंट प्रभाव
वैज्ञानिकों ने यह भी देखा कि बांस के सेवन से शरीर में एंटीऑक्सीडेंट और सूजन-रोधी गतिविधियां बढ़ती हैं। एंटीऑक्सीडेंट शरीर की कोशिकाओं को नुकसान से बचाते हैं और उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा करने में मदद कर सकते हैं।
बांस के सेवन से कोशिकाओं की सेहत में सुधार और विषैले प्रभावों में कमी देखी गई। यह लंबे समय में कई बीमारियों से बचाव में सहायक हो सकता है।
भोजन उद्योग में संभावित उपयोग
एक रोचक बात यह भी सामने आई कि बांस के कुछ तत्व खाना पकाने के दौरान बनने वाले हानिकारक रसायनों को कम कर सकते हैं। जैसे तलने या भूनने पर बनने वाले एक्रिलामाइड और फ्यूरान नामक विषैले पदार्थ। इसका मतलब है कि भविष्य में बांस का उपयोग खाद्य उद्योग में भी किया जा सकता है।
सावधानी बहुत जरूरी
हालांकि बांस के कई फायदे हैं, लेकिन इसे गलत तरीके से खाने से नुकसान भी हो सकता है। कच्चे बांस के अंकुरों में ऐसे रसायन हो सकते हैं जो शरीर में साइनाइड बना सकते हैं, जो बहुत खतरनाक है।
अध्ययन में यह भी पाया गया कि बांस में कुछ तत्व थायरॉयड हार्मोन को प्रभावित कर सकते हैं, जिससे घेंघा (गोइटर) की समस्या हो सकती है। लेकिन यह खतरा तब नहीं रहता जब बांस के अंकुरों को अच्छे से उबालकर खाया जाए।
वैज्ञानिकों के अनुसार, बांस के अंकुर एक स्वास्थ्यवर्धक और टिकाऊ भोजन हो सकते हैं। लेकिन अभी इस विषय पर बहुत कम मानव अध्ययन हुए हैं। इसलिए भविष्य में और शोध की जरूरत है। सही तरीके से पकाकर खाए जाने पर बांस के अंकुर आने वाले समय में एक उपयोगी और सेहतमंद भोजन बन सकते हैं।