बांग्लादेश में खसरे के प्रकोप से करीब 98 बच्चों के मौत की आशंका

बांग्लादेश के स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, देश में छह महीने से पांच साल तक के लगभग 6,476 बच्चों में खसरे जैसे लक्षण पाए गए हैं
बांग्लादेश में टीकों की कमी और टीकाकरण कार्यक्रम में देरी को इस खतरनाक प्रकोप का मुख्य कारण बताया जा रहा है।
बांग्लादेश में टीकों की कमी और टीकाकरण कार्यक्रम में देरी को इस खतरनाक प्रकोप का मुख्य कारण बताया जा रहा है।फोटो साभार: आईस्टॉक
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सारांश
  • बांग्लादेश में तीन हफ्तों में खसरे से कम से कम 98 बच्चों की मौत का संदेह, हजारों बच्चे प्रभावित हुए हैं।

  • छह महीने से पांच साल तक के 6,400 से अधिक बच्चों में खसरे जैसे लक्षण पाए गए, स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

  • टीकों की कमी और टीकाकरण कार्यक्रम में देरी को इस खतरनाक प्रकोप का मुख्य कारण बताया जा रहा है।

  • सरकार ने सबसे प्रभावित क्षेत्रों में आपातकालीन टीकाकरण अभियान शुरू किया, लाखों बच्चों को जल्द सुरक्षित करने का लक्ष्य रखा।

  • खसरा अत्यधिक संक्रामक बीमारी है, जिसका कोई विशेष इलाज नहीं, इसलिए समय पर टीकाकरण ही सबसे प्रभावी बचाव माना जाता है।

हाल ही में बांग्लादेश में खसरे (मीजल्स) का प्रकोप तेजी से बढ़ा है। बांग्लादेश के स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, पिछले तीन हफ्तों में कम से कम 98 बच्चों की मौत होने की आशंका जताई गई है। यह स्थिति काफी चिंताजनक है, खासकर इसलिए क्योंकि खसरा एक बहुत तेजी से फैलने वाली बीमारी है।

बच्चों पर सबसे ज्यादा असर

इस बीमारी का सबसे ज्यादा असर छोटे बच्चों पर पड़ रहा है। छह महीने से पांच साल तक के लगभग 6,476 से अधिक बच्चों में खसरे जैसे लक्षण पाए गए हैं। हालांकि, पुष्टि किए गए मामलों की संख्या कम है, क्योंकि कई बच्चों की जांच समय पर नहीं हो पाती। कुछ मामलों में तो बच्चों की मौत जांच से पहले ही हो जाती है।

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विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के आंकड़ों के अनुसार, संदिग्ध मामलों की अब तक की सबसे बड़ी संख्या 2005 में दर्ज की गई थी, जो 25,934 थी। उसके बाद के वर्षों में यह संख्या काफी कम हो गई थी, जब तक कि इस वर्ष इसमें फिर से वृद्धि नहीं हुई।

खसरा क्या है

खसरा एक संक्रामक बीमारी है जो एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में बहुत आसानी से फैलती है। जब कोई संक्रमित व्यक्ति खांसता या छींकता है, तो वायरस हवा में फैल जाता है और दूसरे लोग भी संक्रमित हो सकते हैं। यह बीमारी बच्चों में ज्यादा होती है और कई बार गंभीर रूप ले सकती है।

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खसरे के लक्षणों में तेज बुखार, खांसी, नाक बहना, लाल आंखें और शरीर पर चकत्ते शामिल हैं। गंभीर मामलों में यह बीमारी फेफड़ों के संक्रमण, दिमाग में सूजन और यहां तक कि मौत का कारण भी बन सकती है।

बीमारी बढ़ने के कारण

विशेषज्ञों के अनुसार, इस प्रकोप के पीछे कई कारण हैं। सबसे बड़ा कारण है टीकों की कमी। कई जगहों पर समय पर वैक्सीन उपलब्ध नहीं हो पाई। इसके अलावा, पिछले वर्षों में टीकाकरण कार्यक्रम भी सही तरीके से नहीं चल पाए।

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एक और बड़ा कारण यह है कि कई छोटे बच्चों को समय पर टीका नहीं लग पाया। आमतौर पर बच्चों को नौ महीने की उम्र में खसरे का टीका दिया जाता है, लेकिन इस बार कई संक्रमित बच्चे सिर्फ छह महीने के थे, जिन्हें अभी टीका नहीं मिला था।

टीकाकरण कार्यक्रम में बाधा

बांग्लादेश में पहले टीकाकरण के जरिए खसरे पर काफी हद तक नियंत्रण पा लिया गया था। लेकिन 2024 में होने वाला एक बड़ा टीकाकरण अभियान देश में राजनीतिक अशांति के कारण टाल दिया गया। इसका असर अब साफ दिखाई दे रहा है। टीकाकरण में कमी आने से बच्चों की सुरक्षा कमजोर हो गई और बीमारी को फैलने का मौका मिल गया।

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सरकार की कार्रवाई

स्थिति को देखते हुए सरकार ने तुरंत कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। देश के कई हिस्सों में सर्वे किया जा रहा है ताकि यह पता लगाया जा सके कि बीमारी कितनी फैली है। सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों की पहचान कर ली गई है।

राजधानी और अन्य प्रभावित क्षेत्रों में अब तेजी से टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि ज्यादा से ज्यादा बच्चों को जल्द से जल्द टीका लगाया जाए, ताकि इस बीमारी को फैलने से रोका जा सके।

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अंतरराष्ट्रीय मदद

इस अभियान में यूनिसेफ, डब्ल्यूएचओ और गावी जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं भी मदद कर रही हैं। बच्चों को बचाने के लिए बड़े स्तर पर टीकाकरण कार्यक्रम शुरू किया गया है। इसका उद्देश्य लाखों बच्चों को खसरे से सुरक्षित करना है।

इलाज और बचाव

खसरे का कोई खास इलाज नहीं है। एक बार बीमारी हो जाने पर केवल लक्षणों का इलाज किया जाता है। इसलिए बचाव ही सबसे अच्छा तरीका है। टीकाकरण ही इस बीमारी से बचने का सबसे प्रभावी उपाय है।

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डॉक्टरों का कहना है कि अगर समय पर टीका लग जाए तो खसरे से होने वाली मौतों को रोका जा सकता है। इसलिए सभी बच्चों का टीकाकरण बहुत जरूरी है।

बांग्लादेश में खसरे का बढ़ता प्रकोप एक बड़ी चेतावनी है। यह दिखाता है कि अगर टीकाकरण कार्यक्रम कमजोर पड़ जाए, तो पुरानी बीमारियां फिर से खतरनाक रूप ले सकती हैं।

जानकारी है कि इस स्थिति से निपटने के लिए सरकार, स्वास्थ्यकर्मी और आम लोग मिलकर काम कर रहे हैं। बच्चों की सुरक्षा के लिए समय पर टीकाकरण सुनिश्चित करना सबसे महत्वपूर्ण कदम है।

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