

भारत में सालाना लगभग 119.7 करोड़ किलोग्राम चाय का उपभोग होता है, जो घरेलू मांग की विशालता दिखाता है।
असम भारत का सबसे बड़ा चाय उत्पादक राज्य है, जहां 312,210 हेक्टेयर भूमि पर बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है।
पश्चिम बंगाल का दार्जिलिंग क्षेत्र विश्वप्रसिद्ध चाय उत्पादन केंद्र है, जो सुगंध और उच्च गुणवत्ता के लिए जाना जाता है।
तमिलनाडु और केरल दक्षिण भारत के प्रमुख चाय उत्पादक राज्य हैं, जो आर्थिक और रोजगार दोनों में योगदान देते हैं।
2026 की थीम “फॉस्टरिंग ग्रोथ एंड इंक्लूजन” चाय किसानों के सशक्तिकरण और टिकाऊ कृषि विकास पर जोर देती है।
हर साल 21 मई को अंतरराष्ट्रीय चाय दिवस मनाया जाता है। यह दिन दुनिया के सबसे लोकप्रिय पेय पदार्थों में से एक चाय को समर्पित है। संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2019 में इस दिवस को मान्यता दी थी और पहली बार इसे 2020 में वैश्विक स्तर पर मनाया गया।
इस दिन का उद्देश्य चाय किसानों का सम्मान करना, टिकाऊ खेती को बढ़ावा देना और चाय के सांस्कृतिक, आर्थिक तथा स्वास्थ्य संबंधी महत्व को उजागर करना है।
चाय केवल पेय नहीं, एक भावना
भारत सहित दुनिया के कई देशों में चाय लोगों की दिनचर्या का अहम हिस्सा है। सुबह की शुरुआत हो या दोस्तों के साथ बातचीत, चाय हर मौके पर लोगों को जोड़ने का काम करती है। भारत में “चाय” केवल एक पेय नहीं बल्कि सामाजिक परंपरा बन चुकी है। गांवों से लेकर बड़े शहरों तक चाय की दुकानों पर लोगों की भीड़ आसानी से देखी जा सकती है।
भारत में चाय आमतौर पर दूध, चीनी और मसालों के साथ बनाई जाती है। अदरक, इलायची, लौंग और दालचीनी वाली मसाला चाय लोगों को बेहद पसंद आती है। यही वजह है कि भारत दुनिया के सबसे बड़े चाय उपभोक्ता देशों में शामिल है।
अंतरराष्ट्रीय चाय दिवस 2026 की थीम
इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय चाय दिवस की थीम “फॉस्टरिंग ग्रोथ एंड इंक्लूजन” और “सस्टेनिंग टी, सपोर्टिंग कम्युनिटीज” यानी "विकास और समावेशन को बढ़ावा" और "चाय को बनाए रखना, समुदायों का समर्थन" रखी गई है। इन विषयों का उद्देश्य चाय उत्पादक समुदायों को मजबूत बनाना, किसानों को बेहतर अवसर देना और पर्यावरण के अनुकूल खेती को बढ़ावा देना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि टिकाऊ खेती और बेहतर श्रम व्यवस्था से चाय उद्योग और अधिक मजबूत हो सकता है। इससे किसानों की आय बढ़ेगी और आने वाली पीढ़ियों के लिए भी चाय उत्पादन सुरक्षित रहेगा।
भारत का चाय उद्योग
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चाय उत्पादक देश है। यहां उत्पादित चाय की गुणवत्ता पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। भारत में बनने वाली चाय का बड़ा हिस्सा देश के भीतर ही खपत हो जाता है। टी बोर्ड ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, देश में उत्पादित लगभग 83 प्रतिशत चाय घरेलू बाजार में ही इस्तेमाल होती है।
भारत हर साल लगभग 119.7 करोड़ किलोग्राम चाय का उपभोग करता है। यही कारण है कि चाय उद्योग देश की अर्थव्यवस्था और रोजगार में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है। लाखों लोग चाय की खेती, उत्पादन, पैकिंग और व्यापार से जुड़े हुए हैं।
असम बना देश का सबसे बड़ा चाय उत्पादक राज्य
असम भारत का सबसे बड़ा चाय उत्पादक राज्य है। यह दुनिया के प्रमुख चाय उत्पादन क्षेत्रों में भी शामिल है। असम की चाय अपने गहरे रंग और मजबूत स्वाद के लिए जानी जाती है। यहां लगभग तीन लाख से 12 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में चाय की खेती होती है और सालाना करीब 50.7 करोड़ किलोग्राम चाय का उत्पादन होता है।
असम के अलावा पश्चिम बंगाल भी चाय उत्पादन में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। दार्जिलिंग की चाय को पूरी दुनिया में खास पहचान मिली हुई है। दार्जिलिंग की ऊंचाई वाले क्षेत्रों में उगाई जाने वाली चाय अपने खास स्वाद और सुगंध के लिए प्रसिद्ध है।
दक्षिण भारत में भी चाय की बड़ी खेती
तमिलनाडु और केरल दक्षिण भारत के प्रमुख चाय उत्पादक राज्य हैं। तमिलनाडु के नीलगिरि क्षेत्र की चाय अपनी खुशबू के लिए जानी जाती है। वहीं केरल के मुन्नार और वायनाड क्षेत्रों में भी बड़े स्तर पर चाय की खेती की जाती है।
इसके अलावा त्रिपुरा, नागालैंड, अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम जैसे पूर्वोत्तर राज्यों में भी चाय उत्पादन तेजी से बढ़ रहा है। हिमाचल प्रदेश का कांगड़ा क्षेत्र भी अपनी विशेष चाय के लिए प्रसिद्ध है।
स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है चाय
विशेषज्ञों के अनुसार चाय में एंटीऑक्सीडेंट तत्व पाए जाते हैं जो शरीर को कई बीमारियों से बचाने में मदद करते हैं। चाय तनाव कम करने, पाचन सुधारने और शरीर को ताजगी देने में भी सहायक मानी जाती है। ग्रीन टी और हर्बल टी को स्वास्थ्य के लिए विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है।
किसानों और पर्यावरण के लिए जरूरी संदेश
अंतरराष्ट्रीय चाय दिवस केवल चाय पीने का उत्सव नहीं है, बल्कि यह चाय बागानों में काम करने वाले लाखों श्रमिकों और किसानों की मेहनत को सम्मान देने का भी दिन है। यह दिवस लोगों को पर्यावरण संरक्षण, टिकाऊ खेती और श्रमिकों के अधिकारों के प्रति जागरूक करने का संदेश देता है। चाय दुनिया को जोड़ने वाला ऐसा पेय बन चुका है जो स्वाद के साथ-साथ संस्कृति, रोजगार और परंपरा को भी आगे बढ़ा रहा है।