स्कूलों में एस्बेस्टस की छतों पर सरकार सख्त, राज्यों को सुरक्षा नियमों के पालन के निर्देश

स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए शिक्षा मंत्रालय ने एस्बेस्टस की छतों के रखरखाव, इस्तेमाल और कचरे के सुरक्षित निपटान के लिए राज्यों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं।
प्रतीकात्मक तस्वीर: आईस्टॉक
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सारांश
  • स्कूलों की छत बच्चों के लिए सुरक्षा का साया होनी चाहिए, स्वास्थ्य का खतरा नहीं। इसी चिंता को देखते हुए शिक्षा मंत्रालय के स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग (डीएसईएल) ने देशभर के स्कूलों में सीमेंट-एस्बेस्टस की छतों को लेकर राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को सख्त सुरक्षा निर्देश दिए हैं।

  • 7 सितंबर 2026 को एनजीटी में दाखिल एक्शन टेकन रिपोर्ट में बताया गया है कि स्कूलों में एस्बेस्टस शीट के रखरखाव, इस्तेमाल और कचरे के सुरक्षित निपटान के लिए मौजूदा सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य रूप से किया जाए।

  • सरकार ने निर्देश दिया है कि एस्बेस्टस की छतों को अच्छी स्थिति में रखा जाए और उनकी दोनों सतहों पर पेंट या चूने की सुरक्षात्मक परत लगाई जाए, ताकि हानिकारक कण हवा में न फैलें। नई शीट लगाने या पुरानी शीट हटाने के दौरान निर्धारित मानकों का पालन करना होगा। टूटी या खराब शीट को खुले में फेंकने के बजाय अधिकृत स्थान पर सुरक्षित तरीके से निपटाना होगा।

  • राज्यों से इन निर्देशों को लागू करने के लिए रोडमैप और एक्शन टेकन रिपोर्ट भी मांगी गई है। अब चुनौती इन निर्देशों को कागज से निकालकर देश के हर स्कूल तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने की है।

जिन छतों के नीचे बच्चे अपने सुनहरे भविष्य के सपने बुनते हैं, वे खुद उनके स्वास्थ्य के लिए खतरा न बन जाएं, इसी गंभीर चिंता को देखते हुए शिक्षा मंत्रालय के स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग (डीएसईएल) ने देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को एक बेहद महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किया है।

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में दाखिल अपनी एक्शन टेकन रिपोर्ट में सरकार ने साफ कर दिया है कि स्कूलों में सीमेंट-एस्बेस्टस की छतों को लेकर अब रत्ती भर भी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

7 सितंबर 2026 को दाखिल इस रिपोर्ट के मुताबिक स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने स्कूलों में लगी सीमेंट-एस्बेस्टस की छतों को लेकर सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को जरूरी सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन करने की सलाह दी है।

गौरतलब है कि यह रिपोर्ट एनजीटी के 30 अक्टूबर 2025 के फैसले और 24 जुलाई 2026 के बाद जारी आदेशों के पालन को सुनिश्चित करने के लिए दाखिल की गई है। बता दें कि एनजीटी ने सरकार से स्कूलों, घरों और इमारतों में एस्बेस्टस शीट्स के इस्तेमाल की समीक्षा करने के साथ श्रमिकों और आम लोगों की सुरक्षा के लिए ठोस नीतियां और नियम बनाने के निर्देश दिए थे।

सभी स्कूलों में सुरक्षा उपाय लागू करने के निर्देश

रिपोर्ट से पता चला है कि स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग ने 13 फरवरी 2026 को सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के शिक्षा सचिवों को एडवाइजरी जारी की थी। इसमें उनसे अपने अधीन आने वाले सभी स्कूलों में सीमेंट-एस्बेस्टस की छतों से जुड़े मौजूदा नियमों और सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करने को कहा गया।

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सरकार ने खास तौर पर निर्देश दिए हैं कि एस्बेस्टस की छतों को अच्छी स्थिति में रखा जाए। एहतियात के तौर पर इन छतों के दोनों तरफ पेंट या चूने की सुरक्षात्मक परत लगाई जाए, ताकि हानिकारक कण हवा में न घुल सकें। साथ ही नई शीट लगाने या पुरानी शीट को संभालने के दौरान निर्धारित मानकों का पालन हो। इसके लिए IS:11769 (पार्ट 1) सहित संबंधित दिशानिर्देशों का पालन जरूरी होगा।

टूटी या खराब एस्बेस्टस शीट को खुले में न फेंका जाए। ऐसी शीट को नियमों के अनुसार अधिकृत स्थान पर ही सुरक्षित तरीके से निपटाया जाए।

राज्यों से मांगा गया रोडमैप

डीएसईएल ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से अपने अधिकार क्षेत्र के सभी स्कूलों में इन निर्देशों को लागू करने के लिए उचित कदम उठाने को कहा है। साथ ही, उन्हें इस दिशा में तैयार रोडमैप और की गई कार्रवाई की रिपोर्ट जल्द से जल्द शिक्षा विभाग को सौंपने के निर्देश दिए हैं।

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पर्यावरण मंत्रालय से एसओपी और एक्शन प्लान मांगा

एनजीटी ने मामले में एस्बेस्टस की छतों को लेकर एक स्पष्ट मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी), दिशा-निर्देश और एक्शन प्लान तैयार करने की जरूरत बताई थी। इसके बाद डीएसईएल ने पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से इस संबंध में तैयार या जारी किए गए एसओपी, एक्शन प्लान और दिशानिर्देश साझा करने का अनुरोध किया है।

इन दस्तावेजों को सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों तक पहुंचाकर स्कूलों में उनका सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाएगा।

बच्चों की सुरक्षा सबसे जरूरी

स्कूल सिर्फ ईंट-पत्थर की इमारत नहीं होते। इन्हीं कमरों और छतों के नीचे बच्चों का बचपन और भविष्य आकार लेता है। ऐसे में सरकार का यह कदम इस बात की ओर इशारा करता है कि स्कूलों में किसी भी संभावित स्वास्थ्य और सुरक्षा जोखिम को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

अब असली चुनौती इन निर्देशों को कागजों से निकालकर हर स्कूल तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने और लागू करने की है।

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