एनजीटी के कटघरे में उत्तरपाड़ा की रेल वैगन फैक्ट्री, पर्यावरण नियमों को ताक पर रखने का आरोप

याचिका में आरोप लगा है कि फैक्ट्री द्वारा खतरनाक कचरे के अनुचित निपटान से मिट्टी, जल स्रोत और आसपास की आबादी के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा हो गया है।
प्रतीकात्मक तस्वीर: आईस्टॉक
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सारांश
  • पश्चिम बंगाल के उत्तरपाड़ा में रेल वैगन निर्माण करने वाली फैक्ट्री पर खतरनाक कचरे के अनुचित निपटान के जरिए पर्यावरण नियमों के गंभीर उल्लंघन का आरोप लगा है, जिस पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने सुनवाई शुरू कर दी है।

  • याचिका में कहा गया है कि फैक्ट्री से निकलने वाले विषैले कचरे ने आसपास की मिट्टी और जल स्रोतों को प्रदूषित कर दिया है, जिससे स्थानीय आबादी, खासकर बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर खतरा मंडरा रहा है।

  • वहीं, अमृतसर में चबल रोड पर अवैध कचरा डंपिंग के मामले में भी एनजीटी ने सख्त रुख अपनाते हुए पंजाब सरकार और संबंधित एजेंसियों से जवाब तलब किया है।

  • दोनों ही मामले औद्योगिक गतिविधियों और शहरी कचरा प्रबंधन में लापरवाही के चलते बढ़ते पर्यावरणीय संकट और जनस्वास्थ्य के खतरे को उजागर करते हैं, जिस पर अब न्यायिक सख्ती देखने को मिल रही है।

पश्चिम बंगाल के उत्तरपाड़ा में रेल वैगन और उनके पुर्जों का निर्माण करने वाली एक उद्योग इकाई पर पर्यावरण नियमों के गंभीर उल्लंघन का आरोप लगा है।

इस संबंध में दायर एक याचिका पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने एक अप्रैल 2026 को सुनवाई की। याचिका में आरोप लगाया गया है कि टीटागढ़ वैगन्स लिमिटेड जिसे अब टीटागढ़ रेल सिस्टम्स लिमिटेड के नाम से जाना जाता है, उसके द्वारा खतरनाक कचरे का निपटान पर्यावरण नियमों को ताक पर रख किया जा रहा है।

आरोप है कि कंपनी, अपनी मैन्युफैक्चरिंग के दौरान वेस्ट (मैनेजमेंट एंड ट्रांसबाउंड्री मूवमेंट) रूल्स, 2016, और वॉटर (प्रिवेंशन एंड कंट्रोल ऑफ पॉल्यूशन) एक्ट, 1974 का पूरी तरह से उल्लंघन करते हुए खतरनाक कचरे को हैंडल और डिस्पोज कर रही है।

खतरनाक कचरे के निपटान पर उठे सवाल

जानकारी मिली है कि उद्योग द्वारा ऐसा कचरा पैदा हो रहा है जो इन नियमों की अनुसूची-I के अंतर्गत खतरनाक श्रेणी में आता है। इसमें प्रोसेस वेस्ट, अवशेष (रेजिड्यू), स्लज तथा खतरनाक रसायनों और सॉल्वेंट से दूषित खाली ड्रम और कंटेनर शामिल हैं।

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इस कचरे में नॉन-हैलोजेनेटेड हाइड्रोकार्बन जैसे थिनर और पेंट सॉल्वेंट, हैलोजेनेटेड हाइड्रोकार्बन जैसे क्लोरीन युक्त डिग्रीसिंग रसायन, पिगमेंट और वार्निश के अवशेष, तथा एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट से निकलने वाला स्लज शामिल है, जिसमें भारी धातुएं, विषैले ऑर्गेनिक पदार्थ, इमल्शन, तेल और इस्तेमाल किए जा चुके रसायन मौजूद होते हैं।

रिहायशी इलाके के पास मिला खतरनाक कचरा

आवेदन में कहा गया है कि इस खतरनाक कचरे का सही तरीके से निपटान न होने के कारण आसपास की मिट्टी और जल स्रोत दूषित हो गए हैं, जिससे स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है। फैक्ट्री के पूर्व दिशा में रेलवे ट्रैक के उस पार घनी आबादी वाला इलाका है, जहां ट्रैक के पास खतरनाक कचरा और रसायनिक अवशेष पाए गए हैं।

इससे स्थानीय निवासियों, विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों में सांस और त्वचा संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ गया है।

आवेदन में यह भी आरोप लगा है कि उद्योग द्वारा वायु और ध्वनि प्रदूषण किया जा रहा है, जिससे क्षेत्र के लोगों का जीवन प्रभावित हो रहा है।

अब निगाहें एनजीटी के फैसले पर टिकी हैं, जो तय करेगा कि पर्यावरणीय नियमों के इस कथित उल्लंघन पर उद्योग के खिलाफ क्या कार्रवाई होती है और प्रभावित लोगों को राहत मिल पाती है या नहीं। देखा जाए तो यह मामला केवल एक फैक्ट्री तक सीमित नहीं, बल्कि औद्योगिक विकास और पर्यावरण सुरक्षा के बीच संतुलन की बड़ी चुनौती को भी उजागर करता है।

अमृतसर: एनजीटी ने ऐतिहासिक चबल रोड पर हो रही अवैध कचरा डंपिंग पर दी सख्त चेतावनी

एक अप्रैल 2026 को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने पंजाब सरकार को निर्देश दिया है कि वह अमृतसर के चबल रोड के पास रेलवे क्रॉसिंग के निकट नगर निगम कर्मचारियों द्वारा की जा रही ठोस कचरे की अवैध डंपिंग के संबंध में जवाब दाखिल करे। इस मामले में अमृतसर के जिला मजिस्ट्रेट, अमृतसर नगर निगम और पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भी नोटिस भेजकर जवाब मांगा गया है।

एनजीटी ने इन सभी से यह भी कहा कि वे प्राप्त शिकायतों की जांच करें और पर्यावरण नियमों के अनुसार एक महीने के भीतर उचित कार्रवाई करें। इन सभी को दो महीनों के भीतर अपने जवाब दाखिल करने होंगें। इसमें ठोस कचरा प्रबंधन नियम 2016/2025 और न्यायाधिकरण के निर्देशों के तहत किए गए या प्रस्तावित सभी उपायों की जानकारी, बजट, काम पूरा करने की समय-सीमा आदि शामिल होनी चाहिए।

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इस बारे में अदालत में दाखिल शिकायत में कहा गया है कि चबल रोड एक ऐतिहासिक मार्ग है। यहां सड़क पर कूड़े के ढेरों की वजह से प्रदूषण का लेवल खतरनाक स्तर तक पहुंच गया है।

इससे लोगों की सेहत पर बुरा असर पड़ रहा है। अमृतसर साहिब विधानसभा क्षेत्र घनी आबादी वाला है और बारिश में बदबू और बढ़ जाती है। रोड पर कई प्रमुख स्कूल स्थित हैं और बच्चों के स्वास्थ्य पर कचरे का नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।

एनजीटी का निर्देश इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, ताकि नगर निगम और संबंधित अधिकारी ठोस कचरा प्रबंधन में सख्त और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित कर सकें। 

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