

लक्षद्वीप के नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा के लिए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट संदेश दिया है कि पर्यटन प्रकृति की सीमाओं के भीतर ही स्वीकार्य होगा।
टेंट सिटी से लेकर कचरा प्रबंधन और पर्यटकों की आचार-संहिता तक, ट्रिब्यूनल ने सख्त निगरानी, तीसरे पक्ष के ऑडिट और ड्रोन सर्वे अनिवार्य कर दिए हैं। साफ कर दिया गया है कि विकास तभी संभव है जब पर्यावरण सर्वोच्च प्राथमिकता रहे।
लक्षद्वीप के नाज़ुक पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने सख्त रुख अपनाया है। 19 फरवरी 2026 को ट्रिब्यूनल ने लक्षद्वीप टूरिज्म डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन को स्पष्ट निर्देश दिया कि द्वीपों पर होने वाली हर पर्यटन गतिविधि उनकी वहन क्षमता के भीतर और कड़े पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों के साथ ही संचालित की जानी चाहिए।
जस्टिस पुष्पा सत्यनारायण की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि लक्षद्वीप के द्वीप, खासकर बंगाराम द्वीप, अपनी साफ समुद्री तटरेखाओं, नीले लैगून और समृद्ध समुद्री जैव विविधता के लिए जाने जाते हैं। ऐसे में इनका पारिस्थितिकी तंत्र बेहद संवेदनशील है और इसकी रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
टेंट सिटी पर सख्त नियंत्रण
ट्रिब्यूनल ने निर्देश दिया कि बांगाराम, थिन्नाकारा (उत्तर) और थिन्नाकारा (दक्षिण) में लगाए जाने वाले टेंटों की संख्या संबंधित द्वीपों की वहन क्षमता के अनुरूप ही सीमित रखी जाए।
साथ ही, लक्षद्वीप पॉल्यूशन कंट्रोल कमेटी (एलपीसीसी) को निर्देश दिया है कि वह व्यापक निरीक्षण कर उन सभी शर्तों के अनुपालन की विस्तृत रिपोर्ट पेश करे, जो ‘कंसेंट टू एस्टैब्लिश’ और ‘कंसेंट टू ऑपरेट’ के तहत प्रवेग लिमिटेड को दी गई थीं।
एनजीटी ने कहा कि टेंट सिटी के संचालन और द्वीपों की समग्र पर्यावरणीय स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जाए। इसके लिए कवरत्ती के जिला कलेक्टर, लक्षद्वीप पॉल्यूशन कंट्रोल कमेटी, लक्षद्वीप वन एवं पर्यावरण विभाग तथा लक्षद्वीप टूरिज्म डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एलटीडीसी) को जिम्मेदार ठहराया गया है।
ट्रिब्यूनल ने लक्षद्वीप आइलैंड में टेंट सिटी संचालित करने वाली संस्था को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि वह सुनिश्चित करे कि सभी गतिविधियां पर्यावरणीय नियमों और वैधानिक शर्तों के अनुरूप हों। नियमित अनुपालन रिपोर्ट लक्षद्वीप पॉल्यूशन कंट्रोल कमेटी को सौंपी जाए और कंपनी की वेबसाइट पर सार्वजनिक भी की जाए।
कचरा प्रबंधन पर विशेष जोर
ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट किया कि प्लास्टिक कचरा, ई-वेस्ट और अन्य ठोस अपशिष्ट को अधिकृत एजेंसियों तक पहुंचाकर कानून के अनुसार उसका निपटान किया जाए। इसकी अनुपालन रिपोर्ट भी वेबसाइट और लक्षद्वीप पॉल्यूशन कंट्रोल कमेटी के पास जमा करनी होगी।
इसके साथ ही हर छह महीने में तीसरे पक्ष से पर्यावरणीय ऑडिट कराना अनिवार्य होगा। ऑडिट रिपोर्ट, की गई कार्रवाई का विवरण और जियो-टैग्ड तस्वीरें एलपीसीसी को सौंपनी होंगी और सार्वजनिक डोमेन में भी उपलब्ध करानी होंगी।
पर्यटकों के लिए पर्यावरणीय आचार-संहिता
एनजीटी ने इस बात पर भी जोर दिया है कि लक्षद्वीप पॉल्यूशन कंट्रोल कमेटी के साथ मिलकर टेंट में ठहरने वाले पर्यटकों के लिए एक चेकलिस्ट/दिशानिर्देश तैयार किए जाएंगे। इसमें सिंगल-यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध, कचरा फैलाने पर रोक और जिम्मेदार व्यवहार को बढ़ावा देने जैसे प्रावधान होंगे।
अदालत ने यह भी सुझाव दिया कि चेक-इन के समय मेहमानों से एक उचित सुरक्षा जमा राशि ली जाए, जो पर्यावरणीय नियमों के पालन के बाद चेक-आउट पर लौटाई जा सकती है।
कवरत्ती के डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर को यह पक्का करने का निर्देश दिया गया कि प्रवेग लिमिटेड और दूसरी कंपनियों को दिए गए निर्देशों का पालन किया जाए। लक्षद्वीप टूरिज्म डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन को हर छह महीने में पूरे द्वीप का ड्रोन सर्वे कराने का निर्देश दिया गया है। साथ ही समय-समय पर पर्यावरणीय स्वच्छता और बहाली अभियान चलाए जाएं, ताकि द्वीपों की पारिस्थितिकीय अखंडता बनी रहे।
यदि सर्वे या अभियान के दौरान पर्यावरणीय क्षति या नियमों के उल्लंघन के मामले सामने आते हैं, तो तत्काल सुधारात्मक कदम उठाए जाने चाहिए और बिना देर किए सही उपाय किए जाने चाहिए। यह मामला बांगाराम द्वीप पर प्रवेग लिमिटेड द्वारा कथित रूप से किए जा रहे कचरे के अनुचित प्रबंधन से जुड़ा है।
कुल मिलाकर, यह आदेश सिर्फ एक कंपनी या टेंट सिटी तक सीमित नहीं है, बल्कि लक्षद्वीप जैसे संवेदनशील द्वीपों के भविष्य को सुरक्षित करने की चेतावनी है। ट्रिब्यूनल ने साफ कर दिया है कि विकास और पर्यटन तभी स्वीकार्य हैं, जब वे प्रकृति की सीमाओं का सम्मान करें। यदि नियमों की अनदेखी हुई तो कार्रवाई तय है।
लक्षद्वीप के लिए यह फैसला एक स्पष्ट संदेश है, यहां प्रकृति ही सबसे बड़ी पूंजी है, और उसकी कीमत पर किसी भी तरह का मुनाफा मंजूर नहीं होगा।