मेरठ में अवैध निर्माण पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, यूपी आवास विकास परिषद को लगाई फटकार

सुप्रीम कोर्ट ने मेरठ में अवैध निर्माण पर सुस्त कार्रवाई को लेकर यूपी आवास विकास परिषद को कड़ी फटकार लगाते हुए ठोस एक्शन प्लान मांगा है।
प्रतीकात्मक तस्वीर: सीएसई
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सारांश
  • सुप्रीम कोर्ट और केरल उच्च न्यायालय के दो अहम आदेशों ने साफ संदेश दिया है कि अब कानून के उल्लंघन पर सिर्फ औपचारिक कार्रवाई नहीं, बल्कि जमीन पर ठोस और जवाबदेह कदम जरूरी हैं।

  • मेरठ में अवैध निर्माण के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने यूपी आवास विकास परिषद की ढिलाई और निष्क्रियता पर तीखी टिप्पणी करते हुए उसकी रिपोर्ट को भ्रामक बताया और समयबद्ध ठोस कार्ययोजना पेश करने का अंतिम मौका दिया।

  • अदालत ने यह भी संकेत दिया कि अवैध निर्माण को किसी भी हाल में वैध बनाने की कोशिशें स्वीकार नहीं होंगी।

  • वहीं, केरल उच्च न्यायालय ने चुनावी प्रचार में प्लास्टिक के बढ़ते इस्तेमाल पर चिंता जताते हुए निर्वाचन आयोग को सख्त निगरानी और कार्रवाई के निर्देश दिए।

  • अदालत के इस कदम से साफ है कि पर्यावरणीय जिम्मेदारी और स्वच्छ चुनाव अब प्राथमिकता बन चुके हैं। दोनों फैसले मिलकर यह संदेश देते हैं कि प्रशासनिक लापरवाही और नियमों की अनदेखी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जवाबदेही हर हाल में तय होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने 2 अप्रैल 2026 को अवैध निर्माण और रिहायशी इलाकों में चल रही अनधिकृत व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद को कड़ी फटकार लगाई है। मामला मेरठ के शास्त्री नगर सेंट्रल मार्केट का है।

अदालत ने परिषद की कार्रवाई पर गंभीर नाराजगी जताते हुए उसकी स्टेटस रिपोर्ट को ‘सिर्फ आंखों में धूल झोंकने वाला’ बताया। याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने अदालत को जानकारी दी कि परिषद ने अवैध निर्माण गिराने को लेकर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है।

860 अवैध संपत्तियां, कार्रवाई सिर्फ एक पर

परिषद ने अपनी रिपोर्ट में 860 अवैध संपत्तियों की पहचान की बात कही, लेकिन अब तक केवल एक ही अवैध निर्माण हटाया गया है।

अदालत ने कहा कि रिपोर्ट से सिर्फ यह दिखाने की कोशिश की गई है कि रिहायशी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियां रोकने के कदम उठाए गए हैं, जबकि वास्तविक कार्रवाई नहीं हुई।

अदालत ने यह भी कहा कि कई लोगों ने अब अपनी प्रॉपर्टी के इस्तेमाल के कन्वर्जन के लिए अप्लाई करना शुरू कर दिया है। हालांकि परिषद के चेयरमैन खुद मान चुके हैं कि ये सभी निर्माण अवैध हैं।

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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि रिपोर्ट के अनुसार हाउसिंग बोर्ड को मेरठ मंडल के कमिश्नर के 27 अक्टूबर 2025 के आदेश से कोई लेना-देना नहीं है। उस आदेश में कहा गया था कि सेंट्रल मार्केट क्षेत्र में दुकानों को आगे नहीं तोड़ा जाएगा और मास्टर प्लान में संशोधन करके इन दुकानों को “मार्केट स्ट्रीट” का दर्जा देने का प्रस्ताव है।

कोर्ट ने मांगी स्वीकृत नक्शों की पूरी जानकारी

जस्टिस जे बी पारदीवाला और जस्टिस के वी विश्वनाथन की बेंच ने इस आदेश पर गहरी चिंता जताई। कोर्ट ने उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद को आखिरी मौका देते हुए निर्देश दिया कि वह एक विस्तृत हलफनामा दाखिल करे, जिसमें अब तक की गई कार्रवाई, आगे की ठोस कार्ययोजना और समयसीमा बताई जाए, जिसके भीतर सभी अवैध निर्माण हटाए जाएंगे।

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सुप्रीम कोर्ट ने यह भी पूछा है कि क्या स्वीकृत नक्शे कानून के अनुसार पास किए गए थे और क्या निर्माण स्वीकृत नक्शे के अनुसार हुए हैं? साथ ही कोर्ट ने यह भी स्पष्ट जानकारी मांगी है कि कितनी इमारतें स्वीकृत प्लान के अनुरूप हैं।

इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट की सख्ती ने साफ कर दिया है कि अवैध निर्माण पर अब सिर्फ कागजी कार्रवाई नहीं, जमीन पर भी एक्शन दिखना चाहिए।

चुनावी प्रचार में प्लास्टिक पर सख्ती: केरल उच्च न्यायालय का बड़ा आदेश

केरल में चुनावी प्रचार के दौरान प्लास्टिक बैनर और फ्लेक्स के इस्तेमाल पर बड़ा कदम सामने आया है। केरल उच्च न्यायालय ने 1 अप्रैल 2026 को एक अहम निर्देश जारी करते हुए भारतीय निर्वाचन आयोग और केरल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को आदेश दिया कि चुनाव से पहले पीवीसी फ्लेक्स और अन्य गैर-रीसायकल प्लास्टिक सामग्री के इस्तेमाल पर आई शिकायतों की जांच की जाए।

यह फैसला मुख्य न्यायाधीश सौमेन सेन और न्यायमूर्ति श्याम कुमार की बेंच ने सुनाया।

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सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग और केरल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की ओर से बताया गया कि आचार संहिता के उल्लंघन को लेकर पहले ही कार्रवाई शुरू की जा चुकी है। खास तौर पर पीवीसी फ्लेक्स, पॉलिएस्टर, नायलॉन, कोरियन कपड़े और प्लास्टिक-कोटेड प्रचार सामग्री के उपयोग, छपाई, भंडारण और बिक्री पर निगरानी रखी जा रही है।

इसके साथ ही अधिकारियों के जवाब से संतुष्ट होकर उच्च न्यायालय ने जनहित याचिका (पीआईएल) का निपटारा कर दिया।

उच्च न्यायालय के इस कदम के बाद उम्मीद है कि चुनावी प्रचार में प्लास्टिक के इस्तेमाल पर सख्ती बढ़ेगी और इससे स्वच्छ व जिम्मेदार चुनाव की दिशा में नई शुरुआत होगी।

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