जलवायु परिवर्तन के कारण गर्म होते समुद्र के हिसाब से खुद को ढाल रही हैं व्हेलें

गर्म होते समुद्र और घटती आहार उपलब्धता के बीच फिन, हम्पबैक और मिन्की व्हेलें कैसे अपना जीवन ढाल रही हैं।
बदलते पर्यावरण का प्रभाव: समुद्र का तापमान बढ़ना और बर्फ पिघलना सेंट लॉरेंस की खाड़ी में व्हेलों के भोजन की उपलब्धता और संरचना को प्रभावित कर रहा है।
बदलते पर्यावरण का प्रभाव: समुद्र का तापमान बढ़ना और बर्फ पिघलना सेंट लॉरेंस की खाड़ी में व्हेलों के भोजन की उपलब्धता और संरचना को प्रभावित कर रहा है।फोटो साभार: विकिमीडिया कॉमन्स, व्हाइट वेल्स वेल्स 14
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सारांश
  • व्हेलों का आहार बदलना: फिन, मिन्की और हम्पबैक व्हेल गर्म होते समुद्र और कम क्रिल के कारण मछलियों पर निर्भर हो रही हैं।

  • संसाधन साझा करना: विभिन्न प्रजातियां अपने भोजन और स्थान को बांटकर आपस में प्रतियोगिता कम कर, सुरक्षित रूप से सह-अस्तित्व बनाए रख रही हैं।

  • बदलते पर्यावरण का प्रभाव: समुद्र का तापमान बढ़ना और बर्फ पिघलना सेंट लॉरेंस की खाड़ी में भोजन की उपलब्धता और संरचना को प्रभावित कर रहा है।

  • बबल-नेट फीडिंग: हम्पबैक व्हेल समूह में बुलबुले बनाकर मछलियों को एकत्र करती हैं, जिससे शिकार आसान और सामूहिक ज्ञान साझा होता है।

  • भविष्य और संरक्षण: व्हेल की अनुकूलन क्षमता और सांस्कृतिक व्यवहार समुद्री प्रबंधन और संरक्षण रणनीतियों के लिए महत्वपूर्ण उदाहरण प्रस्तुत करता है।

समुद्रों में हो रहे बदलाव और जलवायु परिवर्तन ने हमारी समुद्री दुनिया को तेजी से बदल दिया है। उत्तरी अटलांटिक महासागर में रहने वाली व्हेल मछलियां भी इन बदलावों से अछूती नहीं हैं। हाल ही में वैज्ञानिकों ने लगभग 30 वर्षों के आंकड़ों का अध्ययन करके यह पता लगाया है कि कैसे ये विशाल जीव अपने पर्यावरण के साथ तालमेल बिठा रहे हैं और नई परिस्थितियों में खुद को ढाल रहे हैं।

अध्ययन और उसका क्षेत्र

कनाडा की केसेंट लॉरेंस की खाड़ी (जीएसएल) में तीन प्रकार की व्हेल मछलियों - फिन व्हेल, हम्पबैक व्हेल और मिन्की व्हेल के आहार और जीवनशैली का अध्ययन किया गया। यह क्षेत्र उनके लिए मौसमी भोजन का मुख्य केंद्र है। अध्ययन में वैज्ञानिकों ने 1,000 से अधिक त्वचा के नमूने एकत्र किए। इन नमूनों को तीन अलग-अलग समय के अंतराल में लिया गया जिनमें 1992-2000, 2001-2010, 2011-2019 शामिल रहे। इन सालों में जलवायु और पर्यावरण में बदलाव जैसे कि समुद्र का तापमान बढ़ना और बर्फ का पिघलना देखा गया।

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व्हेलों के भोजन में बदलाव की कहानी

वैज्ञानिकों ने पाया कि इन वर्षों में व्हेल मछलियों का भोजन धीरे-धीरे बदल रहा है। यह बदलाव मुख्य रूप से भोजन की कमी और नई उपलब्धता के कारण हुआ।

फिन व्हेल: 1990 के दशक में मुख्य रूप से क्रिल खाते थे। 2000 के दशक में उन्होंने कैपेलिन, हेरिंग और मैकेरल जैसी मछलियां खाना शुरू किया। 2010 के दशक में उनका आहार सैंड लांस और नॉर्दर्न क्रिल की तरफ झुक गया।

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मिन्की व्हेल: मुख्य रूप से पैलेजिक मछलियों पर निर्भर रही, लेकिन बाद में क्रिल का सेवन बढ़ा।

हम्पबैक व्हेल: हमेशा कुछ विशेष मछलियों जैसे कैपेलिन, हेरिंग और मैकेरल पर निर्भर रही।

इन बदलावों से पता चलता है कि व्हेल मछलियां अपनी भूख और उपलब्ध भोजन के अनुसार खुद को ढाल रही हैं।

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संसाधनों को साझा करना

वैज्ञानिकों ने यह भी देखा कि इन व्हेलों ने खाद्य और जगह को साझा करने की कला सीख ली है। इसे संसाधनों को साझा करना कहते हैं। इसका मतलब है कि अलग-अलग प्रजातियां अपने भोजन और रहने की जगह को बांटकर आपस में प्रतियोगिता को कम करती हैं।

पहले जहां एक ही क्षेत्र में सभी व्हेल एक ही भोजन की ओर आकर्षित होती थीं, अब उन्होंने अपने खाने का समय, स्थान और प्रकार बदल लिया है। इससे सभी प्रजातियां सुरक्षित रूप से एक साथ रह सकती हैं।

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सांस्कृतिक और सामाजिक रणनीतियां: बबल-नेट फीडिंग

केवल भोजन बदलना ही नहीं, कुछ व्हेलों ने नई शिकार तकनीकें भी सीख ली हैं। हम्पबैक व्हेल की सबसे रोचक तकनीक है बबल-नेट फीडिंग। इसमें व्हेल्स समूह में मिलकर पानी में बुलबुले छोड़ती हैं। बुलबुले छोटी मछलियों को घेर लेते हैं और मछलियां एक जगह इकट्ठा हो जाती हैं। इसके बाद व्हेल आसानी से उन्हें खा लेती हैं।

वैज्ञानिकों के अनुसार यह केवल शिकार की तकनीक नहीं है, बल्कि एक साझा ज्ञान और संस्कृति का हिस्सा है। इससे पूरे व्हेल समुदाय की बचे रहने और मजबूत होने की संभावना बढ़ जाती है।

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भविष्य और महत्व

फ्रंटियर्स इन मरीन साइंस में प्रकाशित यह अध्ययन हमें यह सिखाता है कि व्हेलें जलवायु परिवर्तन और मानव गतिविधियों के बावजूद अपने आप को ढाल सकती हैं। उनका व्यवहार, भोजन और सामाजिक रणनीतियां यह दर्शाती हैं कि प्राकृतिक दुनिया में जीव अद्भुत अनुकूलन क्षमता रखते हैं।

वैज्ञानिकों का कहना है कि हमें जानवरों की संस्कृति और व्यवहार को समुद्री प्रबंधन में शामिल करना चाहिए। जैसे-जैसे मानवजनित गतिविधियां बढ़ेंगी, यह समझना जरूरी होगा कि समुद्री जीव कैसे प्रतिक्रिया देते हैं और उनका संरक्षण कैसे किया जा सकता है।

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सेंट लॉरेंस की खाड़ी में रहने वाली फिन, मिन्की और हम्पबैक व्हेल ने यह साबित कर दिया है कि प्रकृति में जीवन जीने की कला सिर्फ जीवित रहने में नहीं, बल्कि सीखने और साझा करने में भी है।

ये विशाल समुद्री जीव अपने आहार और सामाजिक व्यवहार को बदलकर नई परिस्थितियों के अनुकूल हो रहे हैं। यही सीख हमें यह समझाती है कि पर्यावरण संरक्षण केवल हमारे लिए ही नहीं, बल्कि समुद्र के विशाल जीवन के लिए भी जरूरी है।

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