

चार साल के अध्ययन में खुलासा, व्यक्तिगत पर्यावरणीय आदतें जलवायु नीतियों के समर्थन को कमजोर नहीं करतीं और बड़ी कार्रवाई में बाधा नहीं बनतीं।
करीब 2,800 ऑस्ट्रेलियाई लोगों पर शोध से पता चला, छोटे हरित कदम राजनीतिक भागीदारी और जलवायु जागरूकता को प्रभावित नहीं करते।
अध्ययन में रिसाइक्लिंग, सार्वजनिक परिवहन और हरित जीवनशैली अपनाने वाले लोग व्यापक जलवायु कार्रवाई के विरोधी नहीं पाए गए।
शोधकर्ताओं ने कहा, व्यक्तिगत प्रयास जरूरी हैं लेकिन ऊर्जा और उद्योगों में बड़े नीतिगत बदलावों का विकल्प नहीं हो सकते।
आर्थिक दबाव के कारण जलवायु नीतियों के समर्थन में कमी संभव, लेकिन इसका कारण व्यक्तिगत पर्यावरणीय कदम नहीं पाए गए।
जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए लोगों के छोटे-छोटे पर्यावरण अनुकूल कदम, जैसे कचरे का पुनर्चक्रण (रिसाइक्लिंग), दोबारा इस्तेमाल होने वाले कप और डिब्बों का उपयोग, सार्वजनिक परिवहन अपनाना, हरित आहार लेना और साइकिल से काम पर जाना, व्यापक जलवायु कार्रवाई के रास्ते में बाधा नहीं बनते बल्कि जलवायु परिवर्तन को कम करने में मदद करते हैं। एक नए शोध में यह बात सामने आई है।
ऑस्ट्रेलिया की यूनिवर्सिटी ऑफ न्यू साउथ वेल्स (यूएनएसडब्ल्यू) के व्यवहार वैज्ञानिकों और ग्रिफिथ यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने करीब 2,800 ऑस्ट्रेलियाई लोगों पर चार साल तक अध्ययन किया। यह अध्ययन नेशनल क्लाइमेट एक्शन सर्वे के माध्यम से किया गया, जिसमें साल 2021 से 2024 तक लोगों के व्यवहार और जलवायु संबंधी सोच को समझा गया। अध्ययन एनपीजे क्लाइमेट एक्शन नामक पत्रिका में प्रकाशित किया गया है।
शोधकर्ताओं ने पाया कि जो लोग रोजमर्रा की जिंदगी में पर्यावरण के लिए बेहतर विकल्प अपनाते हैं, वे बड़े स्तर पर जलवायु नीतियों और सामूहिक प्रयासों का समर्थन करने से पीछे नहीं हटते।
"छोटे कदम बड़ी कार्रवाई को नहीं रोकते"
लंबे समय से यह तर्क दिया जाता रहा है कि सरकारें और कंपनियां लोगों को छोटे व्यक्तिगत बदलावों पर ध्यान केंद्रित कराकर असली समस्या, यानी ऊर्जा व्यवस्था में बदलाव और बड़े उद्योगों पर नियंत्रण जैसे कदमों से ध्यान भटका सकती हैं। इस सोच के अनुसार, जब लोग खुद कुछ पर्यावरणीय काम कर लेते हैं तो वे बड़े बदलावों की मांग कम कर सकते हैं।
लेकिन इस शोध में ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला।
शोध में यूएनएसडब्ल्यू इंस्टीट्यूट फॉर क्लाइमेट रिस्क एंड रिस्पॉन्स के शोधकर्ता के हवाले से कहा गया है कि व्यक्तिगत जलवायु कार्रवाई न तो व्यापक जलवायु भागीदारी को बढ़ाती है और न ही उसे कमजोर करती है। उनके अनुसार, यह धारणा सही साबित नहीं हुई कि लोग छोटे व्यक्तिगत प्रयास करने के बाद यह मान लेते हैं कि उन्होंने अपनी जिम्मेदारी पूरी कर दी है और अब बड़े बदलावों की जरूरत नहीं है।
व्यक्तिगत कदम और राजनीतिक भागीदारी का संबंध
शोध में यह भी देखा गया कि जो लोग पर्यावरण के प्रति अधिक जागरूक थे, वे आमतौर पर सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में भी ज्यादा सक्रिय थे। ऐसे लोग जलवायु से जुड़े अभियानों में भाग लेने, याचिकाओं पर हस्ताक्षर करने और जलवायु नीतियों का समर्थन करने की अधिक संभावना रखते थे।
हालांकि जब शोधकर्ताओं ने उन्हीं लोगों के व्यवहार में समय के साथ बदलाव देखा तो पाया कि किसी व्यक्ति द्वारा व्यक्तिगत पर्यावरणीय कदम बढ़ाने से अगले साल उसकी राजनीतिक भागीदारी अपने आप नहीं बढ़ी और न ही घटी।
यह अध्ययन इस धारणा को चुनौती देता है कि केवल रिसाइक्लिंग जैसे छोटे काम लोगों को बड़े जलवायु बदलावों से दूर कर देते हैं। लेकिन यह भी साबित नहीं करता कि छोटे व्यक्तिगत कदम अपने आप लोगों को सामाजिक आंदोलन या नीतिगत बदलाव की ओर ले जाएंगे।
व्यक्तिगत और बड़े स्तर की कार्रवाई दोनों जरूरी
शोधकर्ताओं का कहना है कि व्यक्तिगत प्रयास और बड़े स्तर पर होने वाले बदलाव एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं। लोगों की आदतों में बदलाव जरूरी है, लेकिन इसके साथ-साथ सरकारों और कंपनियों को भी ऊर्जा, परिवहन और उद्योगों में बड़े सुधार करने होंगे।
अध्ययन में कहा गया है कि यह चिंता सही हो सकती है कि कुछ कंपनियां केवल उपभोक्ताओं के व्यवहार में बदलाव पर जोर देकर अपनी बड़ी जिम्मेदारियों से बचने की कोशिश करती हैं। इसलिए व्यक्तिगत कदमों को व्यापक नीतिगत बदलावों का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।
आर्थिक दबाव का असर भी दिखा
अध्ययन के दौरान शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि 2021 से 2024 के बीच सामूहिक जलवायु कार्रवाई और जलवायु नीतियों के समर्थन में थोड़ी कमी आई। वहीं लोगों के व्यक्तिगत पर्यावरणीय व्यवहार लगभग स्थिर रहे।
शोधकर्ताओं के अनुसार, इसका एक कारण बढ़ती जीवन-यापन लागत हो सकती है। जब लोगों पर आर्थिक दबाव बढ़ता है तो उनके पास सामाजिक आंदोलनों में भाग लेने या ऐसी नीतियों का समर्थन करने के लिए कम समय और ऊर्जा बच सकती है, जिनसे उन्हें अतिरिक्त खर्च का डर लगता है।
कंपनियों के लिए भी महत्वपूर्ण संदेश
इस अध्ययन का संदेश उन कंपनियों के लिए भी महत्वपूर्ण है जो पर्यावरण से जुड़े कार्यक्रम चलाती हैं। कर्मचारियों या ग्राहकों को हरित आदतें अपनाने के लिए प्रेरित करना जलवायु कार्रवाई के समर्थन को नुकसान नहीं पहुंचाता, लेकिन इसे संगठनात्मक बदलावों का विकल्प नहीं बनाया जा सकता।
विशेषज्ञों के अनुसार, जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए व्यक्तिगत जिम्मेदारी और बड़े स्तर पर नीतिगत सुधार दोनों की जरूरत है। छोटे कदम लोगों की पर्यावरणीय सोच को दिखाते हैं, लेकिन पृथ्वी को बचाने के लिए व्यापक बदलाव भी उतने ही आवश्यक हैं।