बड़ी भीड़ वाले आयोजनों में गर्मी बनी नया खतरा, तैयारी से बचाई जा सकती हैं जानें: डब्ल्यूएचओ

बढ़ती गर्मी के बीच बड़े आयोजनों में स्वास्थ्य जोखिम बढ़ा, डब्ल्यूएचओ ने समय पर तैयारी, पानी, छाया और बेहतर चिकित्सा व्यवस्था को बताया जरूरी उपाय
डब्ल्यूएचओ की समीक्षा में बड़े आयोजनों में गर्मी से जुड़ी 22 हजार से अधिक बीमारियों के मामले सामने आए।
डब्ल्यूएचओ की समीक्षा में बड़े आयोजनों में गर्मी से जुड़ी 22 हजार से अधिक बीमारियों के मामले सामने आए।फोटो साभार: आईस्टॉक
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सारांश
  • डब्ल्यूएचओ की समीक्षा में बड़े आयोजनों में गर्मी से जुड़ी 22 हजार से अधिक बीमारियों के मामले सामने आए।

  • अच्छी चिकित्सा व्यवस्था होने पर 90 प्रतिशत से अधिक मरीजों का इलाज आयोजन स्थल पर ही संभव है।

  • सुरक्षित पानी, छाया, ठंडक और कार्यक्रम के समय में बदलाव से गर्मी का खतरा काफी कम किया जा सकता है।

  • भीड़ प्रबंधन, कर्मचारियों की सुरक्षा और लगातार स्वास्थ्य निगरानी बड़े आयोजनों में गर्मी से बचाव के लिए जरूरी है।

  • जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ती गर्मी को आयोजकों को स्वास्थ्य और सुरक्षा की योजना में प्रमुखता देनी होगी।

तेज गर्मी अब बड़े खेल, धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों के लिए भी एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बनती जा रही है। हजारों या लाखों लोगों की भीड़, लंबे समय तक धूप में रहना, पानी की कमी और गर्म मौसम मिलकर लोगों के लिए खतरनाक स्थिति पैदा कर सकते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की नई समीक्षा में कहा गया है कि उचित तैयारी और समय पर कार्रवाई के जरिए गर्मी से होने वाली ज्यादातर बीमारियों को रोका जा सकता है।

डब्ल्यूएचओ के अनुसार, आयोजन स्थल पर चिकित्सा व्यवस्था मजबूत हो तो गर्मी से प्रभावित 90 प्रतिशत से अधिक लोगों का इलाज वहीं किया जा सकता है। इससे अस्पतालों और एंबुलेंस सेवाओं पर अचानक बढ़ने वाला दबाव भी कम किया जा सकता है।

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1980 से 2025 तक के अध्ययनों की समीक्षा

डब्ल्यूएचओ ने वर्ष 1980 से 2025 के बीच प्रकाशित अध्ययनों की समीक्षा की है। इसमें दुनिया भर में आयोजित बड़े कार्यक्रमों के दौरान करीब पांच लाख चिकित्सा मामलों को देखा गया। इनमें 22 हजार से अधिक मामले गर्मी से जुड़ी बीमारियों के थे।

रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि बड़े आयोजनों में गर्मी से होने वाली समस्याओं के लिए पहले से तैयारी करना बेहद जरूरी है। केवल आपात स्थिति आने के बाद इलाज की व्यवस्था करना पर्याप्त नहीं है। आयोजन शुरू होने से पहले ही संभावित खतरे की पहचान और उससे निपटने की योजना बनानी चाहिए।

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भीड़ और धूप बढ़ाते हैं परेशानी

बड़े आयोजनों में लोगों को कई घंटे खुले स्थानों में रहना पड़ सकता है। गर्मी और तेज धूप के बीच लगातार खड़े रहने या चलने से शरीर पर दबाव बढ़ता है। बड़ी भीड़ के कारण हवा का आवागमन भी प्रभावित हो सकता है।

पीने का पानी आसानी से उपलब्ध न होना स्थिति को और गंभीर बना सकता है। दूसरे शहरों या देशों से आने वाले लोगों को स्थानीय मौसम की आदत नहीं होती। लंबी यात्रा की थकान भी गर्मी के असर को बढ़ा सकती है। ऐसी परिस्थितियों में लोगों को कमजोरी, चक्कर, सिरदर्द और शरीर में पानी की कमी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। गंभीर स्थिति में हीट स्ट्रोक जानलेवा भी हो सकता है।

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जलवायु परिवर्तन से बढ़ रहा जोखिम

डब्ल्यूएचओ ने कहा है कि अत्यधिक गर्मी की घटनाएं दुनिया के कई हिस्सों में पहले की तुलना में अधिक बार और अधिक तीव्र हो रही हैं। जलवायु परिवर्तन के साथ आने वाले वर्षों में गर्मी का खतरा और बढ़ने की आशंका है।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 1990 के दशक के बाद से गर्मी से जुड़ी मौतों में अनुमानित 63 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। वर्ष 2012 से 2021 के बीच हर साल औसतन करीब 5.46 लाख मौतें गर्मी से जुड़ी थीं।

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पानी और ठंडी जगह जरूरी

डब्ल्यूएचओ की गाइडलाइन में आयोजन स्थलों पर सुरक्षित और पर्याप्त पीने का पानी उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है। इसके साथ पर्याप्त शौचालय, छायादार स्थान और लोगों को गर्मी से राहत देने वाली सुविधाएं भी होनी चाहिए।

जरूरत के अनुसार कार्यक्रमों के समय में बदलाव किया जा सकता है। दिन के सबसे गर्म समय में लंबे कार्यक्रमों से बचना और भीड़ की आवाजाही को व्यवस्थित रखना भी गर्मी के जोखिम को कम कर सकता है।

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कर्मचारियों की सुरक्षा भी जरूरी

गर्मी से केवल दर्शक और श्रद्धालु ही प्रभावित नहीं होते। आयोजन में काम करने वाले कर्मचारी, सुरक्षाकर्मी और स्वयंसेवक भी लंबे समय तक गर्म वातावरण में रहते हैं। इसलिए उन्हें नियमित आराम, पानी और गर्मी से बचने की सुविधाएं देना जरूरी है।

आयोजन स्थल पर स्वास्थ्य संबंधी घटनाओं की लगातार निगरानी भी महत्वपूर्ण है। इससे किसी इलाके में अचानक बढ़ रही गर्मी से जुड़ी बीमारी या स्वास्थ्य समस्या का समय रहते पता लगाया जा सकता है।

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मजबूत चिकित्सा व्यवस्था से कम होगा दबाव

डब्ल्यूएचओ के मुताबिक, आयोजन स्थल पर प्रशिक्षित चिकित्सा कर्मचारियों और जरूरी चिकित्सा सुविधाओं की मौजूदगी बेहद महत्वपूर्ण है। बीमार व्यक्ति की जल्द पहचान और तत्काल उपचार से उसकी हालत बिगड़ने से रोकी जा सकती है।

वहीं, गंभीर मरीजों के लिए एंबुलेंस और नजदीकी अस्पतालों के साथ पहले से समन्वय होना चाहिए। इससे जरूरत पड़ने पर मरीज को बिना देरी के अस्पताल पहुंचाया जा सकेगा।

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पूरे आयोजन की जिम्मेदारी

डब्ल्यूएचओ ने गर्मी से निपटने के लिए पूरे आयोजन को एक साथ देखने की जरूरत बताई है। केवल पानी या चिकित्सा केंद्र की व्यवस्था पर्याप्त नहीं है। आयोजन स्थल की डिजाइन, परिवहन, भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा, संचार और कर्मचारियों की व्यवस्था भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

बढ़ते तापमान के दौर में बड़े आयोजनों की योजना बनाते समय गर्मी को एक प्रमुख स्वास्थ्य और सुरक्षा जोखिम के रूप में शामिल करना जरूरी हो गया है। समय पर तैयारी, सही जानकारी और मजबूत चिकित्सा व्यवस्था के जरिए गर्मी से होने वाली गंभीर घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है।

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