डब्ल्यूएचओ ने जारी की नई गाइडलाइन : गर्भनिरोध के बढ़ेंगे विकल्प, पुरुषों के लिए भी नई उम्मीद

डब्ल्यूएचओ की नई गाइडलाइन से गर्भनिरोध के विकल्प बढ़ेंगे, महिलाओं को मिलेगी अधिक सुविधा, जबकि पुरुषों के लिए भी नए सुरक्षित गर्भनिरोधक विकल्प जल्द आने की उम्मीद
डब्ल्यूएचओ ने गर्भनिरोध के सुरक्षित विकल्प बढ़ाने की सिफारिश की, ताकि लोग अपनी जरूरत और सुविधा के अनुसार सही तरीका चुन सकें।
डब्ल्यूएचओ ने गर्भनिरोध के सुरक्षित विकल्प बढ़ाने की सिफारिश की, ताकि लोग अपनी जरूरत और सुविधा के अनुसार सही तरीका चुन सकें।फोटो साभार: आईस्टॉक
Published on
सारांश
  • डब्ल्यूएचओ ने गर्भनिरोध के सुरक्षित विकल्प बढ़ाने की सिफारिश की, ताकि लोग अपनी जरूरत और सुविधा के अनुसार सही तरीका चुन सकें।

  • गर्भनिरोधक इम्प्लांट अब पांच साल तक इस्तेमाल करने का विकल्प दे सकता है, जिससे बार-बार क्लिनिक जाने की जरूरत घटेगी।

  • मिफेप्रिस्टोन को आपातकालीन गर्भनिरोध के अतिरिक्त विकल्प के रूप में मान्यता मिली, जिसे असुरक्षित संबंध के पांच दिनों के भीतर लिया जा सकता है।

  • डब्ल्यूएचओ ने ओरमेलॉक्सिफीन पर अधिक शोध की जरूरत बताई, जबकि सीमित प्रमाण और गंभीर दुष्प्रभावों के कारण क्विनेस्ट्रोल से बचने की सलाह दी।

  • पुरुषों के लिए नए हार्मोनल और गैर-हार्मोनल गर्भनिरोधक विकसित हो रहे हैं, जो अगले पांच से दस वर्षों में उपलब्ध हो सकते हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने गर्भनिरोध के तरीकों को लेकर नई गाइडलाइन जारी की है। इसका उद्देश्य दुनिया भर में लोगों को गर्भनिरोध के अधिक सुरक्षित और प्रभावी विकल्प उपलब्ध कराना है। डब्ल्यूएचओ का कहना है कि गर्भनिरोध का कोई एक तरीका सभी लोगों के लिए सही नहीं हो सकता। इसलिए लोगों को अपनी जरूरत, सुविधा और स्वास्थ्य के अनुसार तरीका चुनने की आजादी मिलनी चाहिए।

डब्ल्यूएचओ के अनुसार करीब 16.4 करोड़ ऐसी महिलाएं हैं, जो गर्भधारण को टालना या रोकना चाहती हैं, लेकिन गर्भनिरोध के किसी तरीके का इस्तेमाल नहीं कर रही हैं। ऐसे में गर्भनिरोध के विकल्पों तक आसान पहुंच बढ़ाना जरूरी है।

यह भी पढ़ें
डब्ल्यूएचओ के नए दिशा-निर्देश: किशोरावस्था में गर्भधारण रोकने के नए उपाय अपनाएं
डब्ल्यूएचओ ने गर्भनिरोध के सुरक्षित विकल्प बढ़ाने की सिफारिश की, ताकि लोग अपनी जरूरत और सुविधा के अनुसार सही तरीका चुन सकें।

गर्भनिरोधक गोलियों के इस्तेमाल में बदलाव

नई गाइडलाइन में गर्भनिरोधक गोलियों के इस्तेमाल के कुछ नए तरीके बताए गए हैं। डब्ल्यूएचओ के अनुसार संयुक्त गर्भनिरोधक गोलियों का इस्तेमाल लगातार या लंबे समय तक किया जा सकता है। इन्हें छह महीने तक लंबे अंतराल वाले तरीके से या लगातार एक साल तक लेने का विकल्प भी दिया गया है।

इसका उद्देश्य महिलाओं को हर महीने नियमित चक्र के अनुसार गोली लेने की बजाय अपनी जरूरत और डॉक्टर की सलाह के अनुसार अलग तरीका चुनने का विकल्प देना है। हालांकि किसी भी गर्भनिरोधक का इस्तेमाल शुरू करने या उसके तरीके में बदलाव करने से पहले स्वास्थ्यकर्मी से सलाह लेना जरूरी है।

यह भी पढ़ें
क्या नई पीढ़ी तेजी से बूढ़ी हो रही है? कम उम्र में कैंसर बढ़ने से वैज्ञानिक चिंतित
डब्ल्यूएचओ ने गर्भनिरोध के सुरक्षित विकल्प बढ़ाने की सिफारिश की, ताकि लोग अपनी जरूरत और सुविधा के अनुसार सही तरीका चुन सकें।

पांच साल तक काम कर सकता है इम्प्लांट

डब्ल्यूएचओ ने गर्भनिरोधक इम्प्लांट के इस्तेमाल को लेकर भी महत्वपूर्ण जानकारी दी है। संगठन के अनुसार, कुछ गर्भनिरोधक इम्प्लांट पांच साल तक इस्तेमाल किए जा सकते हैं। इससे बार-बार इम्प्लांट बदलवाने के लिए अस्पताल या क्लिनिक जाने की जरूरत कम हो सकती है।

इम्प्लांट महिलाओं के शरीर में लगाया जाने वाला छोटा उपकरण है, जो लंबे समय तक गर्भधारण रोकने में मदद करता है। लंबे समय तक चलने वाले ऐसे विकल्प उन लोगों के लिए उपयोगी हो सकते हैं जो रोजाना गर्भनिरोधक लेने की परेशानी से बचना चाहते हैं।

यह भी पढ़ें
पारंपरिक चिकित्सा पर शोध बढ़ाएगा डब्ल्यूएचओ, 2034 तक के लिए बनाई वैश्विक योजना
डब्ल्यूएचओ ने गर्भनिरोध के सुरक्षित विकल्प बढ़ाने की सिफारिश की, ताकि लोग अपनी जरूरत और सुविधा के अनुसार सही तरीका चुन सकें।

आपातकालीन गर्भनिरोध में मिफेप्रिस्टोन भी विकल्प

डब्ल्यूएचओ ने आपातकालीन गर्भनिरोध के लिए मिफेप्रिस्टोन को भी एक अतिरिक्त विकल्प के रूप में शामिल किया है। संगठन के अनुसार 10 से 50 मिलीग्राम की मात्रा में मिफेप्रिस्टोन असुरक्षित यौन संबंध के बाद पांच दिनों के भीतर लिया जा सकता है।

उपलब्ध प्रमाणों के अनुसार यह अन्य आपातकालीन गर्भनिरोधक तरीकों की तरह सुरक्षित और प्रभावी हो सकता है। इसे जितनी जल्दी लिया जाए, उतना बेहतर माना जाता है। हालांकि आपातकालीन गर्भनिरोध नियमित गर्भनिरोध का विकल्प नहीं है और इसके इस्तेमाल से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना उचित है।

यह भी पढ़ें
डब्ल्यूएचओ रिपोर्ट 2025: वैश्विक स्वास्थ्य में सुधार, लेकिन चुनौतियां बरकरार, लक्ष्य अभी कोसों दूर
डब्ल्यूएचओ ने गर्भनिरोध के सुरक्षित विकल्प बढ़ाने की सिफारिश की, ताकि लोग अपनी जरूरत और सुविधा के अनुसार सही तरीका चुन सकें।

कुछ तरीकों पर अभी पर्याप्त प्रमाण नहीं

डब्ल्यूएचओ ने यह भी स्पष्ट किया है कि हर गर्भनिरोधक तरीके को तुरंत व्यापक इस्तेमाल के लिए मंजूरी नहीं दी जा सकती। संगठन ने ओरमेलॉक्सिफीन पर और शोध की जरूरत बताई है, क्योंकि इसकी सुरक्षा को लेकर उपलब्ध प्रमाण अभी सीमित हैं।

वहीं, क्विनेस्ट्रोल वाली गर्भनिरोधक गोलियों को राष्ट्रीय परिवार नियोजन कार्यक्रमों में शामिल करने की सिफारिश नहीं की गई है। इसकी वजह सीमित वैज्ञानिक प्रमाण और गंभीर दुष्प्रभावों की रिपोर्ट है।

यह भी पढ़ें
मोटापा एक वैश्विक चुनौती: डब्ल्यूएचओ ने जारी की उपचार पर पहली मार्गदर्शिका
डब्ल्यूएचओ ने गर्भनिरोध के सुरक्षित विकल्प बढ़ाने की सिफारिश की, ताकि लोग अपनी जरूरत और सुविधा के अनुसार सही तरीका चुन सकें।

पुरुषों के लिए नए गर्भनिरोधक की तैयारी

अब तक पुरुषों के पास गर्भनिरोध के अपेक्षाकृत कम विकल्प हैं। इनमें मुख्य रूप से कंडोम, नसबंदी और यौन संबंध के दौरान बाहर वीर्य निकालने की विधि शामिल हैं। डब्ल्यूएचओ के अनुसार इसके बावजूद करीब 30 प्रतिशत दंपति किसी न किसी पुरुष-नियंत्रित गर्भनिरोधक तरीके पर निर्भर हैं।

अब वैज्ञानिक पुरुषों के लिए नए और लंबे समय तक काम करने वाले गर्भनिरोधक विकसित करने पर काम कर रहे हैं। डब्ल्यूएचओ के शोध में शामिल 75 प्रतिशत से अधिक दंपतियों ने कहा कि वे नए पुरुष गर्भनिरोधक का इस्तेमाल करने के लिए तैयार होंगे। वहीं, 85 प्रतिशत से अधिक महिलाओं ने कहा कि वे गर्भनिरोध की जिम्मेदारी लेने वाले अपने पुरुष साथी पर भरोसा करेंगी।

यह भी पढ़ें
डब्ल्यूएचओ की नई पहल: क्लिनिकल ट्रायल्स में पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर
डब्ल्यूएचओ ने गर्भनिरोध के सुरक्षित विकल्प बढ़ाने की सिफारिश की, ताकि लोग अपनी जरूरत और सुविधा के अनुसार सही तरीका चुन सकें।

अगले कुछ वर्षों में आ सकते हैं नए विकल्प

डब्ल्यूएचओ ने पुरुष गर्भनिरोधकों के लिए पहली बार एक ‘टारगेट प्रोडक्ट प्रोफाइल’ भी तैयार की है। इसमें बताया गया है कि भविष्य में बनने वाले पुरुष गर्भनिरोधकों में सुरक्षा, प्रभावशीलता, लोगों की स्वीकार्यता और कम लागत जैसी विशेषताएं होनी चाहिए।

कई हार्मोनल और गैर-हार्मोनल पुरुष गर्भनिरोधक अभी शोध और क्लिनिकल ट्रायल के दौर में हैं। डब्ल्यूएचओ के अनुसार आने वाले पांच से दस वर्षों में कुछ नए और वापस बंद किए जा सकने वाले पुरुष गर्भनिरोधक बाजार में आ सकते हैं।

नई गाइडलाइन का मुख्य उद्देश्य लोगों को ज्यादा विकल्प देना है, ताकि वे अपनी जरूरत और परिस्थिति के अनुसार गर्भनिरोध का तरीका चुन सकें। डब्ल्यूएचओ का मानना है कि सही जानकारी और सुरक्षित विकल्पों तक पहुंच परिवार नियोजन को अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

Down to Earth- Hindi
hindi.downtoearth.org.in