जलवायु संकट: तेजी से बढ़ने वाले पेड़ों से हो रही जैव विविधता की हानि

जलवायु परिवर्तन और मानवजनित गतिविधियों के कारण जंगलों में तेजी से बढ़ने वाले पेड़ों की प्रजातियां बढ़ रही हैं, जबकि धीरे बढ़ने वाले पेड़ खतरे में हैं
जलवायु परिवर्तन, जंगलों के काटे जाने और मानवजनित गतिविधियों से जंगल एकरूप होते जा रहे हैं, धीरे बढ़ने वाले पेड़ गायब हो रहे हैं।
जलवायु परिवर्तन, जंगलों के काटे जाने और मानवजनित गतिविधियों से जंगल एकरूप होते जा रहे हैं, धीरे बढ़ने वाले पेड़ गायब हो रहे हैं।फोटो साभार: आईस्टॉक
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सारांश
  • पेड़ सीओ2 अवशोषित करते हैं, हवा साफ करते हैं, मिट्टी बचाते हैं और जानवरों, पक्षियों और इंसानों के लिए जीवन आधार हैं।

  • जलवायु परिवर्तन, जंगलों के काटे जाने और मानवजनित गतिविधियों से जंगल एकरूप होते जा रहे हैं, धीरे बढ़ने वाले पेड़ गायब हो रहे हैं।

  • अकेसिया, पाइन, पॉपलर जैसी प्रजातियां तेजी से बढ़ती हैं, लेकिन कमजोर होती हैं और पारिस्थितिक संतुलन को कमजोर करती हैं।

  • विशेष रूप से उष्णकटिबंधीय और उप-उष्णकटिबंधीय जंगलों में धीरे बढ़ने वाले पेड़ सीमित क्षेत्रों में रहते हैं और उनके गायब होने का खतरा अधिक है।

  • जंगलों को स्थिर और जीवंत बनाए रखने के लिए धीरे बढ़ने वाली प्रजातियों का संरक्षण और नए जंगलों में शामिल करना जरूरी है।

पेड़ पृथ्वी पर जीवन के लिए बेहद जरूरी हैं। वे हवा से कार्बन डाइऑक्साइड (सीओ2) अवशोषित करते हैं और हमें ऑक्सीजन प्रदान करते हैं। पेड़ जानवरों, पक्षियों, कीड़ों और फसलों के लिए जीवन का आधार हैं। इनके जड़ें मिट्टी को बनाए रखती हैं और जल प्रणाली को संतुलित करती हैं। इसके अलावा, पेड़ लकड़ी, फल, छाया और मनोरंजन जैसी सुविधाएं भी प्रदान करते हैं।

लेकिन आज हमारे जंगलों पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। जलवायु परिवर्तन, जंगलों के काटे जाने और मानवजनित गतिविधियों के कारण जंगल तेजी से बदल रहे हैं।

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जंगलों में हो रही एकरूपता

हाल ही में नेचर प्लांट्स नामक पत्रिका में प्रकाशित एक अध्ययन में 31,000 से अधिक पेड़ों की प्रजातियों का विश्लेषण किया गया। इसमें पता चला कि जंगल अब पहले जैसे विविध नहीं रह गए हैं। तेजी से बढ़ने वाली प्रजातियां जंगल में अधिक हो रही हैं, जबकि धीरे बढ़ने वाली और विशेष प्रजातियां कम हो रही हैं।

जैव विविधता कम होने से जंगल कमजोर हो रहे हैं और उनका सीओ2 जमा करने की क्षमता घट रही है।

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धीमे बढ़ने वाले पेड़: जंगल की रीढ़

शोधकर्ताओं के अनुसार, सबसे खतरे में वे पेड़ हैं जो धीरे बढ़ते हैं और जिनकी जीवन शैली विशेष होती है। इन पेड़ों की पत्तियां मोटी और लकड़ी घनी होती है। ये लंबे समय तक जीवित रहते हैं और जंगल की स्थिरता बनाए रखते हैं।

ये पेड़ कार्बन संग्रह करने, प्राकृतिक आपदाओं का सामना करने और पूरे जंगल की जैविक संरचना को बनाए रखने में मदद करते हैं। इनके बिना जंगल कमजोर और अस्थिर हो जाते हैं।

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तेजी से बढ़ने वाले पेड़: प्रकृति के “धावक”

वहीं, तेजी से बढ़ने वाली प्रजातियां जल्दी बढ़ती हैं लेकिन कमजोर होती हैं। इनकी पत्तियां हल्की और लकड़ी कम घनी होती है। उदाहरण के लिए, अकेसिया, पॉपलर, पाइन और युकलिप्टस जैसी प्रजातियां तेजी से बढ़ती हैं।

ये पेड़ सूखे, तूफान और कीटों के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं। इसलिए जंगल की स्थिरता और लंबे समय तक सीओ2 संग्रह करने की क्षमता पर इसका बुरा प्रभाव पड़ता है।

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प्राकृतिक और “अन्य क्षेत्र से आए” पेड़

अध्ययन में यह भी पता चला कि लगभग 41 प्रतिशत ऐसे पेड़ हैं जो किसी क्षेत्र में प्राकृतिक रूप से नहीं पाये जाते, लेकिन अब वहां जंगली रूप से उग रहे हैं। ये पेड़ अक्सर तेजी से बढ़ते हैं और बिगड़े हुए वातावरण में अच्छी तरह पनपते हैं।

हालांकि ये स्थानीय पेड़ प्रजातियों के समान भूमिका नहीं निभाते। ये स्थानीय पेड़ों के लिए संसाधनों पर दबाव डालते हैं और उनकी संख्या को और कम कर सकते हैं।

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उष्णकटिबंधीय क्षेत्र पर खतरा

विशेष रूप से उष्णकटिबंधीय और उप-उष्णकटिबंधीय क्षेत्र इस बदलाव से सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। यहां कई धीमे बढ़ने वाली पेड़ प्रजातियां सीमित क्षेत्रों में पाई जाती हैं। यदि ये प्रजातियां गायब हो गई, तो उनका स्थान किसी अन्य पेड़ नहीं ले सकता।

इसका अर्थ है कि जंगल की जैव विविधता कम होगी और पारिस्थितिकीय संतुलन बिगड़ेगा।

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बदलाव के मुख्य कारण

शोध के अनुसार, यह बदलाव मुख्य रूप से मानवजनित गतिविधियों के कारण हो रहा है। इनमें जलवायु परिवर्तन, पेड़ों के काटे जाने और जंगलों का विनाश अंधाधुंध कृषि और औद्योगिक गतिविधियां, पेड़ों की प्रजातियों का वैश्विक व्यापार आदि शामिल हैं।

तेजी से बढ़ने वाले पेड़ अक्सर आर्थिक रूप से फायदेमंद होते हैं, क्योंकि ये जल्दी लकड़ी और बायोमास देते हैं। लेकिन ये पर्यावरणीय रूप से कमजोर होते हैं और बीमारियों के प्रति संवेदनशील होते हैं।

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मजबूत प्रबंधन की जरूरत

शोधकर्ता कहते हैं कि जंगलों को भविष्य में मजबूत और जीवित बनाए रखने के लिए हमें सक्रिय कदम उठाने होंगे।

  • धीरे बढ़ने वाली और दुर्लभ प्रजातियों को प्राथमिकता देना

  • नए जंगल बनाने में इन पेड़ों को शामिल करना

  • संरक्षण और पुनर्स्थापना प्रयासों में इन पेड़ों को बढ़ावा देना

ये पेड़ अन्य जीवों के लिए भी महत्वपूर्ण हैं। बड़े जानवर और पक्षी धीरे बढ़ने वाले पेड़ों के साथ बेहतर ढंग से सहअस्तित्व में रहते हैं और जंगल की पारिस्थितिकी में योगदान देते हैं।

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जंगलों की सुरक्षा केवल पेड़ों की संख्या बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि उनकी विविधता और स्थिरता बनाए रखने के लिए भी जरूरी है। यदि हम केवल तेजी से बढ़ने वाले पेड़ों पर ध्यान देंगे, तो जंगल कमजोर होंगे और उनका पारिस्थितिक संतुलन बिगड़ेगा।

इसलिए, हमें धीरे बढ़ने वाली और दुर्लभ प्रजातियों को संरक्षित करना चाहिए और नए जंगलों की स्थापना में उनका योगदान सुनिश्चित करना चाहिए। यही तरीका है जंगलों को भविष्य में मजबूत, स्थिर और जीवनदायी बनाए रखने का।

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