पिघलती बर्फ, घटता क्रिल और बर्ड फ्लू से एम्परर पेंगुइन व सील प्रजातियां तेजी से विलुप्ति की ओर

आईयूसीएन की रिपोर्ट के मुताबिक, जलवायु परिवर्तन से अंटार्कटिका के पेंगुइन और सील प्रजातियों पर खतरा बढ़ गया है, इनकी संख्या तेजी से घट रही है और ये गंभीर संकट में हैं
एम्परर पेंगुइन और अंटार्कटिक फर सील को आईयूसीएन रेड लिस्ट में लुप्तप्राय घोषित किया गया, जलवायु परिवर्तन इसका मुख्य कारण
एम्परर पेंगुइन और अंटार्कटिक फर सील को आईयूसीएन रेड लिस्ट में लुप्तप्राय घोषित किया गया, जलवायु परिवर्तन इसका मुख्य कारणफोटो साभार: आईस्टॉक
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सारांश
  • एम्परर पेंगुइन और अंटार्कटिक फर सील को आईयूसीएन रेड लिस्ट में लुप्तप्राय घोषित किया गया, जलवायु परिवर्तन इसका मुख्य कारण

  • समुद्री बर्फ तेजी से पिघलने से पेंगुइन के प्रजनन पर असर पड़ा, कई चूजे समय से पहले समुद्र में गिरकर मर जाते हैं

  • समुद्र के बढ़ते तापमान से क्रिल गहरे पानी में चले गए, जिससे फर सील को पर्याप्त भोजन नहीं मिल पा रहा है

  • दक्षिणी हाथी सील पर बर्ड फ्लू का गंभीर प्रभाव पड़ा, कई क्षेत्रों में बड़ी संख्या में बच्चों और मादा सील की मृत्यु हुई

  • वैज्ञानिकों के अनुसार यदि तुरंत कदम नहीं उठाए गए, तो इन प्रजातियों की संख्या भविष्य में तेजी से घटकर विलुप्ति के करीब पहुंच सकती है

हाल ही में एक अहम रिपोर्ट सामने आई है जिसमें बताया गया है कि अंटार्कटिका के कुछ प्रमुख जीव अब गंभीर खतरे में हैं। अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संगठन (आईयूसीएन) की रेड लिस्ट के अनुसार एम्परर पेंगुइन और अंटार्कटिक फर सील को अब “लुप्तप्राय” श्रेणी में रखा गया है। इसके अलावा दक्षिणी हाथी सील भी अब खतरे में मानी जा रही है। यह खबर पूरी दुनिया के लिए एक चेतावनी है कि जलवायु परिवर्तन का असर तेजी से बढ़ रहा है।

एम्परर पेंगुइन पर खतरा

एम्परर पेंगुइन अंटार्कटिका का एक प्रसिद्ध पक्षी है जो बर्फ पर अपने बच्चों को पालता है। लेकिन अब समुद्री बर्फ तेजी से पिघल रही है। पेंगुइन को अपने बच्चों के लिए मजबूत बर्फ की जरूरत होती है। जब बर्फ जल्दी टूट जाती है, तो छोटे बच्चे समुद्र में गिरकर मर जाते हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर यही स्थिति जारी रही तो 2080 तक इनकी संख्या आधी हो सकती है। पिछले कुछ वर्षों में ही इनकी संख्या में काफी कमी देखी गई है।

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अंटार्कटिक फर सील की स्थिति

अंटार्कटिक फर सील की हालत भी बहुत खराब हो गई है। पहले इनकी संख्या बहुत ज्यादा थी, लेकिन अब यह आधे से भी कम रह गई है। इसका मुख्य कारण भोजन की कमी है। ये सील मुख्य रूप से क्रिल नामक छोटे समुद्री जीव खाते हैं। लेकिन समुद्र के तापमान बढ़ने से क्रिल गहरे पानी में चले जाते हैं। इससे सील को खाना नहीं मिल पाता और उनके बच्चे जीवित नहीं रह पाते।

दक्षिणी हाथी सील और बीमारी

दक्षिणी हाथी सील पर एक नई समस्या सामने आई है, जो है बीमारी। हाल के वर्षों में बर्ड फ्लू यानी एवियन इन्फ्लूएंजा तेजी से फैल रहा है। यह बीमारी अब समुद्री जानवरों तक भी पहुंच गई है। कई स्थानों पर इस बीमारी से 90 प्रतिशत तक छोटे सील मर गए हैं। खासकर मादा सील पर इसका ज्यादा असर पड़ा है, क्योंकि वे ज्यादा समय तट पर बिताती हैं।

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जलवायु परिवर्तन का प्रभाव

इन सभी समस्याओं का मुख्य कारण जलवायु परिवर्तन है। पृथ्वी का तापमान बढ़ रहा है, जिससे बर्फ पिघल रही है और समुद्र का संतुलन बिगड़ रहा है। अंटार्कटिका को “पृथ्वी का रक्षक” कहा जाता है, क्योंकि यह जलवायु को संतुलित रखने में मदद करता है। लेकिन जब यहां के जीव ही खतरे में हैं, तो यह पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय है।

पारिस्थितिकी तंत्र पर असर

इन जीवों की संख्या कम होने का असर पूरे समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ता है। पेंगुइन, सील और व्हेल जैसे जीव एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। अगर एक प्रजाति खत्म होती है, तो बाकी पर भी असर पड़ता है। इससे समुद्र का संतुलन बिगड़ सकता है और इसका प्रभाव अंततः इंसानों पर भी पड़ सकता है।

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भविष्य के लिए चेतावनी

विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति एक बड़ी चेतावनी है। अगर अभी कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में और भी प्रजातियां लुप्त हो सकती हैं। हमें ग्रीनहाउस गैसों को कम करना होगा और पर्यावरण की रक्षा करनी होगी। सरकारों और समाज को मिलकर काम करना होगा ताकि इन जीवों को बचाया जा सके।

अंटार्कटिका के ये जीव हमें यह दिखाते हैं कि प्रकृति में हो रहे बदलाव कितने गंभीर हैं। एम्परर पेंगुइन, अंटार्कटिक फर सील और दक्षिणी हाथी सील का खतरे में आना सिर्फ एक खबर नहीं है, बल्कि यह पूरी मानवता के लिए एक चेतावनी है। अगर हम अभी नहीं संभले, तो भविष्य में इसके परिणाम और भी खतरनाक हो सकते हैं।

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