जलवायु में बदलाव के बीच सूती कपड़ों से सामने आया जमीन की सेहत का राज

स्विट्जरलैंड में सूती कपड़ों से मिट्टी की जांच, बगीचों की जमीन सबसे सक्रिय, लॉन की मिट्टी सबसे शांत मिली, यह पानी को संभालती है, कार्बन जमा करती है व कई जरूरी पोषक तत्वों को बनाए रखती है।
अध्ययन में बगीचों की मिट्टी सबसे ज्यादा सक्रिय मिली, जहां सूती कपड़े अन्य स्थानों की तुलना में तेजी से गले।
अध्ययन में बगीचों की मिट्टी सबसे ज्यादा सक्रिय मिली, जहां सूती कपड़े अन्य स्थानों की तुलना में तेजी से गले।फोटो साभार: आईस्टॉक
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सारांश
  • स्विट्जरलैंड में वैज्ञानिकों ने मिट्टी की जैविक गतिविधि जांचने के लिए हजारों सूती कपड़े जमीन में दबाए।

  • अध्ययन में बगीचों की मिट्टी सबसे ज्यादा सक्रिय मिली, जहां सूती कपड़े अन्य स्थानों की तुलना में तेजी से गले।

  • लॉन की मिट्टी में जैविक गतिविधि सबसे कम रही, जबकि खेत और घास के मैदान बीच की स्थिति में पाए गए।

  • जमीन के इस्तेमाल का मिट्टी की सेहत पर सबसे बड़ा असर दिखा, जबकि तापमान और नमी ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

  • वैज्ञानिकों ने मिट्टी की गतिविधि समझाने के लिए कपड़े का इंडेक्स प्रस्तावित किया, जिससे आम लोग मिट्टी को आसानी समझ सकें।

स्विट्जरलैंड में वैज्ञानिकों ने मिट्टी की सेहत और उसमें मौजूद जीवों की गतिविधि को समझने के लिए एक अनोखा प्रयोग किया। इसके लिए उन्होंने देशभर की अलग-अलग जगहों पर हजारों जोड़ी सूती कपड़े जमीन में दबाए। करीब दो महीने बाद इन्हें बाहर निकाला गया और देखा गया कि वे कितनी तेजी से गल चुके हैं। इस प्रयोग से वैज्ञानिकों को मिट्टी में मौजूद जीवों की गतिविधि के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिली।

प्लांट्स, पीपल, प्लैनेट पत्रिका में प्रकाशित इस अध्ययन में सामने आया कि अलग-अलग तरह की जमीन में सूती कपड़े के गलने की गति काफी अलग थी। सबसे ज्यादा सक्रिय मिट्टी निजी बगीचों में मिली, जबकि घास वाले मैदान यानी लॉन में मिट्टी की जैविक गतिविधि सबसे कम थी।

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1,000 लोगों ने लिया हिस्सा

यह अनोखा प्रयोग साल 2021 में ज्यूरिख विश्वविद्यालय और स्विट्जरलैंड के कृषि अनुसंधान केंद्र एग्रोस्कोप ने शुरू किया था। इसे ‘प्रूफ बाय अंडरपैंट्स’ नाम दिया गया।

इस परियोजना में करीब 1,000 आम लोगों ने हिस्सा लिया। उन्होंने स्विट्जरलैंड की लगभग 1,000 जगहों पर 2,000 से ज्यादा जोड़ी सूती कपड़ा जमीन में दबाए। इसके अलावा करीब 12,000 टी बैग भी जमीन में दबाए गए। दो महीने बाद लोगों ने इन कपड़ों और टी बैग को जमीन से निकाला। उनकी तस्वीरें ली गईं और मिट्टी के नमूनों के साथ वैज्ञानिकों को भेजा गया। इस तरह वैज्ञानिकों को देश के अलग-अलग हिस्सों की मिट्टी के बारे में बड़े स्तर पर जानकारी मिली।

कपड़ा जितना जल्दी गला, मिट्टी उतनी सक्रिय

वैज्ञानिकों ने पाया कि जिन जगहों की मिट्टी में जीवाणु, फंगस, केंचुए और दूसरे छोटे जीव ज्यादा सक्रिय थे, वहां सूती कपड़े तेजी से गल गए । इसके उलट कम सक्रिय मिट्टी में कपड़ा काफी हद तक बचा रहा।

बगीचों की मिट्टी में कपड़ा सबसे तेजी से खराब हुआ। इन जगहों की मिट्टी में जैविक पदार्थ भी ज्यादा पाया गया। जैविक पदार्थ मिट्टी में रहने वाले कई जीवों के लिए भोजन और रहने की अच्छी स्थिति बनाता है। इसके विपरीत लॉन की मिट्टी में कपड़ा सबसे धीमी गति से टूटा। खेतों और घास के प्राकृतिक मैदानों में मिट्टी की गतिविधि इन दोनों के बीच रही।

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जमीन का इस्तेमाल मिट्टी की सेहत पर डालता है असर

शोधकर्ताओं के अनुसार, जमीन का इस्तेमाल किस तरह किया जाता है, साथ जलवायु परिवर्तन, बढ़ती गर्मी आदि का मिट्टी की सेहत पर बड़ा असर पड़ता है। बगीचे, खेत, घास के मैदान और लॉन में मिट्टी की स्थिति अलग-अलग मिली।

शोध पत्र में शोधकर्ता के हवाले से कहा गया है कि मिट्टी का सही तरीके से प्रबंधन करने से मिट्टी में रहने वाले जीवों और उसकी गुणवत्ता पर अच्छा असर पड़ सकता है। स्वस्थ मिट्टी खेती, पौधों की वृद्धि और पोषक तत्वों के चक्र के लिए बहुत जरूरी है।

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मिट्टी को स्वस्थ रखने के लिए जमीन को लंबे समय तक खुला नहीं छोड़ना, उसमें जैविक खाद या कंपोस्ट डालना, अलग-अलग फसलें उगाना और जरूरत से ज्यादा रासायनिक खाद तथा कीटनाशकों का इस्तेमाल कम करना मददगार हो सकता है।

ज्यादा तेजी से गलना हमेशा अच्छा नहीं

हालांकि वैज्ञानिकों ने यह भी बताया कि कपड़े का बहुत तेजी से गलना हर जगह अच्छी मिट्टी का संकेत नहीं है। खेती वाली जमीन में ज्यादा जैविक गतिविधि फायदेमंद हो सकती है, लेकिन जंगल जैसे प्राकृतिक क्षेत्रों में बहुत अधिक पोषक तत्व असंतुलन का संकेत हो सकते हैं।

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बगीचों में भी अगर कपड़ा बहुत तेजी से गल रहा है, तो इसका मतलब यह हो सकता है कि मिट्टी में जरूरत से ज्यादा खाद डाली गई है। ऐसी स्थिति में खाद का इस्तेमाल कम करना बेहतर हो सकता है। मिट्टी की गतिविधि पर तापमान और नमी का भी बड़ा असर पड़ता है। बहुत ठंडी या बहुत सूखी मिट्टी में जीवों की गतिविधि काफी कम हो जाती है।

बना ‘कपड़े का इंडेक्स’

इस प्रयोग के आधार पर वैज्ञानिकों ने मिट्टी की जैविक गतिविधि को समझाने के लिए ‘कपड़े का इंडेक्स’ का विचार सामने रखा है। इसका उद्देश्य वैज्ञानिकों के साथ-साथ आम लोगों को भी यह समझाना है कि जमीन के नीचे क्या हो रहा है।

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वैज्ञानिकों का मानना है कि मिट्टी केवल पौधों को उगाने वाली जमीन नहीं है। यह पानी को संभालती है, कार्बन जमा करती है और कई जरूरी पोषक तत्वों को बनाए रखती है। पृथ्वी की बड़ी मात्रा में जैव विविधता मिट्टी के नीचे मौजूद है।

आम लोगों की मदद से हुआ बड़ा अध्ययन

इस परियोजना ने यह भी दिखाया कि आम लोग वैज्ञानिक शोध में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। करीब 1,000 जगहों से मिले आंकड़ों ने स्विट्जरलैंड की मिट्टी की जैविक गतिविधि की बड़ी तस्वीर सामने रखी। इस अध्ययन में करीब 240 नागरिकों को सह-लेखक के रूप में भी शामिल किया गया।

वैज्ञानिकों ने प्रतिभागियों को उनकी मिट्टी के बारे में जानकारी और उसे बेहतर बनाने के सुझाव भी दिए। इस अनोखे प्रयोग का संदेश साफ है-मिट्टी भले ही हमारे पैरों के नीचे छिपी हो, लेकिन हमारे भोजन, पर्यावरण और भविष्य के लिए उसका स्वस्थ रहना बेहद जरूरी है।

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