जलवायु नीति से 1.35 करोड़ जीवन बचाने का अवसर: न्याय और वायु गुणवत्ता का संतुलन

कैसे न्यायपूर्ण जलवायु नीतियां गरीब देशों के आर्थिक बोझ को कम कर सकती हैं, साथ ही वायु प्रदूषण घटाकर लाखों जीवन बचा सकती हैं
“समानता + वायु गुणवत्ता” मॉडल में बचाए गए पैसे को वायु प्रदूषण नियंत्रण में निवेश करके दोनों लाभ हासिल किए जा सकते हैं।
“समानता + वायु गुणवत्ता” मॉडल में बचाए गए पैसे को वायु प्रदूषण नियंत्रण में निवेश करके दोनों लाभ हासिल किए जा सकते हैं।फोटो साभार: आईस्टॉक
Published on
सारांश
  • जलवायु कार्रवाई से 2020-2050 में 1.35 करोड़ से अधिक लोगों की समयपूर्व मृत्यु वायु प्रदूषण कम करके रोकी जा सकती है।

  • सबसे कम लागत वाली नीति में गरीब देश अधिक उत्सर्जन घटाते हैं और वायु गुणवत्ता सुधार में सबसे बड़ा लाभ पाते हैं।

  • न्याय आधारित नीति में अमीर देश अधिक बोझ उठाते हैं, लेकिन गरीब देशों में लगभग 40 लाख जीवन कम बचते हैं।

  • “समानता + वायु गुणवत्ता” मॉडल में बचाए गए पैसे को वायु प्रदूषण नियंत्रण में निवेश करके दोनों लाभ हासिल किए जा सकते हैं।

  • अध्ययन दिखाता है कि जलवायु नीति और विकास नीति को एक साथ डिजाइन करना जीवन बचाने और न्याय सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण है।

हाल ही में द लैंसेट ग्लोबल हेल्थ में प्रकाशित एक अध्ययन ने दुनिया भर में जलवायु नीति और सार्वजनिक स्वास्थ्य के बीच छिपे हुए जटिल संबंध को उजागर किया है। यह अध्ययन बताता है कि विकासशील देशों को जलवायु नीतियों के आर्थिक बोझ से बचाने की कोशिश में हम कई लाखों जीवन खोने का खतरा पैदा कर सकते हैं।

इस अध्ययन में 178 देशों के लिए मॉडलिंग की गई और यह देखा गया कि विभिन्न जलवायु नीतियों का प्रभाव न केवल उत्सर्जन पर बल्कि वायु गुणवत्ता और स्वास्थ्य पर भी किस तरह पड़ता है।

यह भी पढ़ें
शारीरिक निष्क्रियता से हर साल 50 लाख मौतें, फिर भी लोग सक्रिय जीवनशैली क्यों नहीं अपनाते?
“समानता + वायु गुणवत्ता” मॉडल में बचाए गए पैसे को वायु प्रदूषण नियंत्रण में निवेश करके दोनों लाभ हासिल किए जा सकते हैं।

जलवायु और स्वास्थ्य का वैश्विक मॉडल

अध्ययन में कई देशों के वैज्ञानिकों ने यह मॉडल तैयार किया कि कैसे पेरिस समझौते के अनुसार तापमान बढ़ने को दो डिग्री सेल्सियस तक सीमित किया जा सकता है। इस दौरान उन्होंने उत्सर्जन, वायु गुणवत्ता, स्वास्थ्य और आर्थिक स्थिति पर नीतियों के प्रभाव का अनुमान लगाया।

अध्ययन के परिणाम बताते हैं कि अगर सभी देश मिलकर उत्सर्जन कम करें तो 2020 से 2050 के बीच 1.35 करोड़ से अधिक लोगों की समयपूर्व मृत्यु रोकी जा सकती है और इनमें से अधिकांश कम फायदा और मध्यम आय वाले देशों को मिलेगा। लेकिन, यह फायदा पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करता है कि उत्सर्जन कम करने की जिम्मेदारी कैसे बांटी जाती है।

यह भी पढ़ें
कॉप-30: बेलेम में स्वास्थ्य व जलवायु परिवर्तन-मानवता के लिए एक नया संकल्प: डब्ल्यूएचओ
“समानता + वायु गुणवत्ता” मॉडल में बचाए गए पैसे को वायु प्रदूषण नियंत्रण में निवेश करके दोनों लाभ हासिल किए जा सकते हैं।

जलवायु नीति में न्याय और जीवन बचाने के बीच संघर्ष

अध्ययन में दो मुख्य नीति दृष्टिकोणों की तुलना की गई -

1. सबसे कम लागत वाली नीति

  • उत्सर्जन को सबसे सस्ते तरीके से कम किया जाता है

  • अक्सर कम विकास वाले देश ज्यादा उत्सर्जन घटाते हैं

परिणाम: वायु गुणवत्ता में सुधार और सबसे ज्यादा जीवन बचाना

यह भी पढ़ें
ध्रुवीय क्षेत्रों में बदलती जलवायु का दुनिया भर में स्वास्थ्य पर पड़ रहा है गहरा असर: शोध
“समानता + वायु गुणवत्ता” मॉडल में बचाए गए पैसे को वायु प्रदूषण नियंत्रण में निवेश करके दोनों लाभ हासिल किए जा सकते हैं।

2. न्याय आधारित नीति

  • अमीर देश ज्यादा जिम्मेदारी लेते हैं

  • गरीब देश कम उत्सर्जन घटाते हैं

शोध से पता चलते है कि गरीब देशों में लगभग 40 लाख जीवन कम बचते हैं, क्योंकि वहां वायु प्रदूषण अधिक रहता है। इसका मतलब है कि न्यायपूर्ण नीति अपनाने से आर्थिक रूप से सही हो सकता है, लेकिन स्वास्थ्य को कम फायदा हो सकता है।

यह भी पढ़ें
कॉप-27: जलवायु परिवर्तन से बढ़ेंगी बीमारियां, हर साल 2.50 लाख अतिरिक्त मौतों के आसार
“समानता + वायु गुणवत्ता” मॉडल में बचाए गए पैसे को वायु प्रदूषण नियंत्रण में निवेश करके दोनों लाभ हासिल किए जा सकते हैं।

“न्याय + वायु गुणवत्ता” का समाधान

अध्ययनकर्ताओं ने इसका एक समाधान सुझाया, जो “समानता + वायु गुणवत्ता” मॉडल है। अमीर देश ज्यादा उत्सर्जन कम करें (न्यायपूर्ण)। गरीब देश जो पैसे बचाते हैं, उसे वायु प्रदूषण कम करने में लगाएं। उदाहरण - फिल्टर, धुआं हटाने वाली तकनीक, सल्फर डाइऑक्साइड नियंत्रण करना।

जिसके चलते न्याय भी बना रहता है और गरीब देशों में ज्यादा जीवन बचते हैं। अध्ययन के अनुसार, गरीब देशों के लिए यह खर्च उनकी बचत से पूरा किया जा सकता है।

यह भी पढ़ें
जलवायु संकट से सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में मानसिक स्वास्थ्य का बढ़ रहा है संकट
“समानता + वायु गुणवत्ता” मॉडल में बचाए गए पैसे को वायु प्रदूषण नियंत्रण में निवेश करके दोनों लाभ हासिल किए जा सकते हैं।

क्या कहते हैं आंकड़े?

अगर सभी देश मिलकर उत्सर्जन कम करें तो 1.35 करोड़ समयपूर्व होने वाली मौतों से बचा जा सकता है। पर यह फायदा नीतियों के डिजाइन पर निर्भर करता है, न केवल उत्सर्जन कम करने पर।

नीति और वैश्विक वार्ता के लिए महत्व

यह अध्ययन दिखाता है कि जलवायु वार्ता में केवल उत्सर्जन और लागत पर ध्यान देने से काम नहीं चलता। हमें इस बात पर भी गौर करना होगा कि विकासशील देशों में वायु गुणवत्ता में सुधार हो, लोगों के स्वास्थ्य पर ध्यान दिया जाए तथा उत्सर्जन कटौती और न्याय के बीच संतुलन बनाय जाए। यदि नीतियां सही ढंग से तैयार की जाएं, तो हम जलवायु न्याय और जीवन रक्षा दोनों हासिल कर सकते हैं।

यह भी पढ़ें
वैश्विक स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा खतरा बना जलवायु परिवर्तन: डब्ल्यूएचओ
“समानता + वायु गुणवत्ता” मॉडल में बचाए गए पैसे को वायु प्रदूषण नियंत्रण में निवेश करके दोनों लाभ हासिल किए जा सकते हैं।

अध्ययन यह साफ करता है कि अब हमें “न्याय बनाम जीवन बचाना” के पुराने संघर्ष को अलग तरीके से देखना होगा। “समानता + वायु गुणवत्ता” मॉडल से गरीब देशों को आर्थिक रूप से सुरक्षित रखते हुए उनके लोगों की जान भी बचाई जा सकती है।

यह एक सकारात्मक, व्यवहारिक और जीवन-रक्षक नीति नजरिया है, जिसे भविष्य की जलवायु वार्ताओं में अपनाया जा सकता है।

Related Stories

No stories found.
Down to Earth- Hindi
hindi.downtoearth.org.in