

देश में वायु प्रदूषण से अब देश के पहाड़ी शहर भी सुरक्षित नहीं है। 15 अगस्त के दिन जब पूरा देश आजादी का उत्सव मना रहा है, उसी दिन पहाड़ों की हवा ने एक गंभीर चेतावनी दी है।
सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण में खुलासा हुआ है कि 15 अगस्त 2026 को लेह देश का सबसे प्रदूषित शहर रहा, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 184 दर्ज किया गया। लगातार दूसरे दिन एक जैसा एक्यूआई यह बताता है कि वहां प्रदूषण की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ।
लेह की हवा में कार्बन मोनोऑक्साइड का दबदबा रहा और प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से 4,400 फीसदी अधिक बताया गया। मेघालय का बर्नीहाट भी 133 एक्यूआई के साथ देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल रहा।
हालांकि देश की तस्वीर पूरी तरह निराशाजनक नहीं है। 256 शहरों में 115 की हवा साफ और 114 की संतोषजनक रही। मदिकेरी में एक्यूआई महज 15 दर्ज किया गया, जो लेह से करीब 13 गुणा बेहतर है।
दिल्ली और फरीदाबाद में भी पिछले 24 घंटों में प्रदूषण घटा है। आंकड़े बताते हैं कि हवा में सुधार के बावजूद देश के कई शहर अब भी प्रदूषण की चुनौती से जूझ रहे हैं।
सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 15 अगस्त 2026 को देश में लेह सबसे प्रदूषित रहा। इस दौरान वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 184 दर्ज किया गया, जो ‘मध्यम’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (14 अगस्त) भी लेह में भी सूचकांक 184 ही दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में कोई बदलाव नहीं आया है और स्थिति जस की तस है।
रुझानों में यह भी सामने आया है कि लेह की हवा में कार्बन मोनोऑक्साइड पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।
लेह में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 4,400 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में मदिकेरी की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 15 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर लेह की तुलना मदिकेरी से करें तो वहां स्थिति 13.1 गुणा खराब है।
इससे पहले कल देश में बड़ौत की हवा सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 220 दर्ज किया गया, हालांकि आज 126 अंकों के सुधार के साथ वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक घटकर 94 पर पहुंच गया है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 98 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 93 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता में 5 अंकों का सुधार आया है। इसके साथ ही दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता संतोषजनक बनी हुई है।
2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 09 जुलाई को दर्ज किया गया, जब एक्यूआई 48 रिकॉर्ड किया गया। इसी तरह 08 जुलाई 2026 को सूचकांक 59 और 07-15 अगस्त को 63 रिकॉर्ड किया गया। वहीं 04 अगस्त और 22 जुलाई 2026 को सूचकांक 64 दर्ज हुआ। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में कमी आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 144 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 115 पर पहुंच गया। इसके साथ ही 29 अंक के सुधार के साथ फरीदाबाद में आज भी एक्यूआई मध्यम श्रेणी में बना हुआ है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 15 अगस्त 2026 को 256 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 44.9 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 44.5 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 10.5 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा साफ है।
कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 3.6 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। वहीं दूसरी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में कोई बदलाव नहीं हुआ है। रुझानों के मुताबिक मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में कल से करीब 10 फीसदी का कमी आई है, जोकि राहत की खबर है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में अंबाला (165) दूसरे जबकि पाली (150) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह गुम्मिडीपूंडी (148) चौथे स्थान पर है। बल्लभगढ़ (145) – एलूर (141) में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
बर्नीहाट (मेघालय) (133) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में गोरखपुर (133), भागलपुर (123) और भीलवाड़ा (123) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में हरियाणा (अंबाला, बल्लभगढ़) और राजस्थान (पाली, भीलवाड़ा) के दो-दो शहर शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि पाली, गुम्मिडीपूंडी, बर्नीहाट (मेघालय), गोरखपुर, गुरुग्राम, फरीदाबाद, धारूहेड़ा आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं। वहीं अंबाला, बल्लभगढ़, भागलपुर, ग्रेटर नोएडा, मंडी गोबिंदगढ़, वातवा, छपरा, गडग, जोरापोखर, चिक्काबल्लापुर, सीकर, सिवान, सोनीपत, पलवल आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 44.9 फीसदी यानी 115 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में गंगटोक, गुवाहाटी, हाजीपुर, हल्दिया, हापुड़, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जलगांव, झालावाड़, झांसी, जींद, कैथल, काकीनाडा, कलबुर्गी, कल्याण, करौली, कारवार, कटनी, क्योंझर, किशनगंज, कोल्हापुर, कोलकाता, कोरबा, कोटा, कुंजेमुरा, कुरनूल, कुरुक्षेत्र, मदिकेरी, महाड, मैहर, मालेगांव, मंडीदीप, मीरा-भायंदर, मुरादाबाद, मुंबई, नागपुर, नाहरलागुन, नलबाड़ी, नांदेड़, नासिक, नवी मुंबई, पंचगांव, पंचकुला, परभणी, पटियाला, प्रयागराज, पुडुचेरी, रायपुर, रायरंगपुर, राजमहेंद्रवरम, राजकोट, राजसमंद, रामनगर, रतलाम, ऋषिकेश, रोहतक, राउरकेला, सागर, सहरसा, सांगली, सासाराम, शिलांग, शिवमोगा, सिलचर, शिवसागर आदि शामिल हैं।
इसी तरह देश के 114 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें अजमेर, अलवर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अंबरनाथ, अमृतसर, अनंतपुर, आरा, आसनसोल, बागपत, बहादुरगढ़, बांसवाड़ा, बारां, बड़ौत, बाड़मेर, बैरकपुर, बेगूसराय, बेलापुर, बेंगलुरु, भावनगर, भिवाड़ी, भिवंडी, भोपाल, भुवनेश्वर, बीकानेर, ब्रजराजनगर, बर्नीहाट (असम), चरखी दादरी, चेन्नई, चिक्कमगलुरु, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, चूरू, दौसा, दिल्ली, देवास, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलुरु, गजरौला, गांधीनगर, गया, गाजियाबाद, गुंटूर, ग्वालियर, हनुमानगढ़, हिंगोली, हिसार, जबलपुर, जयपुर, जैसलमेर, जालंधर, जलना, जालौर, झुंझुनू, जोधपुर, कडप्पा, कानपुर, करनाल, कटिहार, खैरथल, खुर्जा, कोहिमा, लातूर, लखनऊ, लुधियाना, मछलीपट्टनम, मानेसर, मैंगलोर, मंगुराहा, मथुरा, मेरठ, मेहसाणा आदि शहर शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 27 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इनमें अंबाला, अंगुल, बद्दी, बल्लभगढ़, भागलपुर, भीलवाड़ा, बर्नीहाट (मेघालय), छपरा, चिक्काबल्लापुर, धारूहेड़ा, एलूर, फरीदाबाद, गडग, गोरखपुर, ग्रेटर नोएडा, गुम्मिडीपूंडी, गुरुग्राम, जोरापोखर, लेह, मंडी गोबिंदगढ़, पाली, पलवल, सीकर, सिलीगुड़ी, सिवान, सोनीपत और वातवा आदि शामिल हैं।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 256 में से 115 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 114 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 14 अगस्त को भी यह आंकड़ा 114 दर्ज किया गया था।
27 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज लेह में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 184 दर्ज किया गया, जो ‘मध्यम’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (14 अगस्त) भी लेह में सूचकांक 184 ही दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में कोई बदलाव नहीं आया है।
इससे पहले कल देश में बड़ौत की हवा सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 220 दर्ज किया गया, हालांकि आज 126 अंकों के सुधार के साथ वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक घटकर 94 पर पहुंच गया है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 98 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 93 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता में 5 अंकों का सुधार आया है। इसके साथ ही दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता संतोषजनक बनी हुई है।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में कमी आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 144 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 115 पर पहुंच गया। इसके साथ ही 29 अंक के सुधार के साथ फरीदाबाद में आज भी एक्यूआई मध्यम श्रेणी में बना हुआ है।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 15 अगस्त को गुम्मिडीपूंडी (148) चौथे स्थान पर है, वहीं अंबाला (165) दूसरे, जबकि पाली (150) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 61, गाजियाबाद में 84, गुवाहाटी में 50, गुरूग्राम में 121, नोएडा में 85, ग्रेटर नोएडा में 119 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 38 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘बेहतर‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 58, चेन्नई में 87, चंडीगढ़ में 42, हैदराबाद में 49, जयपुर में 81 और पटना में 71 दर्ज किया गया।
इन शहरों में साफ रही हवा
देश के जिन 115 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा। इन शहरों में अगरतला, अहमदनगर, आइजोल, अकोला, अमरावती (महाराष्ट्र), अंकलेश्वर, अररिया, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बदलापुर, बालासोर, बारबिल, बरेली, बारीपदा, बठिंडा, बीड, बेलगाम, बेतिया, भरतपुर, भिलाई, बोइसर, बुलंदशहर, बूंदी, ब्यासनगर, चामराजनगर, चंडीगढ़, चंद्रपुर, छाल, कोयंबटूर, कुड्डालोर, कटक, दमोह, दावणगेरे, देहरादून, धौलपुर, धुले, डोंबिवली, फतेहाबाद, फतेहपुर सिकरी, फिरोजाबाद, गंगटोक, गुवाहाटी, हाजीपुर, हल्दिया, हापुड़, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जलगांव, झालावाड़, झांसी, जींद, कैथल, काकीनाडा, कलबुर्गी, कल्याण, करौली, कारवार, कटनी, क्योंझर, किशनगंज, कोल्हापुर, कोलकाता, कोरबा, कोटा, कुंजेमुरा, कुरनूल, कुरुक्षेत्र, मदिकेरी, महाड, मैहर, मालेगांव, मंडीदीप, मीरा-भायंदर, मुरादाबाद, मुंबई, नागपुर, नाहरलागुन, नलबाड़ी, नांदेड़, नासिक, नवी मुंबई, पंचगांव, पंचकुला, परभणी, पटियाला, प्रयागराज, पुडुचेरी, रायपुर, रायरंगपुर, राजमहेंद्रवरम, राजकोट, राजसमंद, रामनगर, रतलाम, ऋषिकेश, रोहतक, राउरकेला, सागर, सहरसा, सांगली, सासाराम, शिलांग, शिवमोगा, सिलचर, शिवसागर, सोलापुर, श्रीनगर, टेन्सा, ठाणे, तिरुवनंतपुरम, उल्हासनगर, विजयपुरा, विरार और यादगीर शामिल हैं।
वहीं आगरा, अहमदाबाद, अजमेर, अलवर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अंबरनाथ, अमृतसर, अनंतपुर, आरा, आसनसोल, बागपत, बहादुरगढ़, बांसवाड़ा, बारां, बड़ौत, बाड़मेर, बैरकपुर, बेगूसराय, बेलापुर, बेंगलुरु, भावनगर, भिवाड़ी, भिवंडी, भोपाल, भुवनेश्वर, बीकानेर, ब्रजराजनगर, बर्नीहाट (असम), चरखी दादरी, चेन्नई, चिक्कमगलुरु, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, चूरू, दौसा, दिल्ली, देवास, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलुरु, गजरौला, गांधीनगर, गया, गाजियाबाद, गुंटूर, ग्वालियर, हनुमानगढ़, हिंगोली, हिसार, जबलपुर, जयपुर, जैसलमेर, जालंधर, जलना, जालौर, झुंझुनू, जोधपुर, कडप्पा, कानपुर, करनाल, कटिहार, खैरथल, खुर्जा, कोहिमा, लातूर, लखनऊ, लुधियाना, मछलीपट्टनम, मानेसर, मैंगलोर, मंगुराहा, मथुरा, मेरठ, मेहसाणा, मोदीनगर, मोतिहारी, मुंगेर, मुजफ्फरनगर, मुजफ्फरपुर, मैसूर, नागांव, नागौर, नंदेसरी, नारनौल, नेल्लोर, नोएडा, पानीपत, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, पीथमपुर, प्रतापगढ़, पुणे, पूर्णिया, रायबरेली, सतारा, सतना, सवाई माधोपुर, सिरोही, सिरसा, श्री गंगानगर, श्रीकाकुलम, सूरत, तिरुमाला, तिरुपति, टोंक, उदयपुर, उज्जैन, वडोदरा, वापी, वाराणसी, विजयवाड़ा, विशाखापत्तनम, वृंदावन और यमुना नगर आदि 114 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
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