03 मई 2026 को जारी सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से देश में वायु प्रदूषण की गंभीर तस्वीर सामने आई है। 229 शहरों में से करीब 26 फीसदी शहरों की हवा चिंताजनक पाई गई, जिसमें हरियाणा का पानीपत सबसे प्रदूषित शहर बनकर उभरा। यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 298 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है और विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से करीब 1800 फीसदी अधिक है।
पानीपत की हवा में खासतौर पर पीएम2.5 कणों का दबदबा है, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक हैं।
दूसरी ओर, कर्नाटक का चिक्कमगलुरु देश का सबसे साफ शहर रहा, जहां एक्यूआई मात्र 21 दर्ज किया गया—यानी पानीपत की तुलना में स्थिति 14 गुणा बेहतर।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि जींद, हनुमानगढ़, बागपत, कैथल और गाजियाबाद जैसे शहर भी सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल हैं, जबकि टॉप-10 प्रदूषित शहरों में हरियाणा के चार शहर शामिल हैं। राजधानी दिल्ली में भी पिछले 24 घंटों में एक्यूआई 31 अंक बढ़कर 175 पहुंच गया, हालांकि यह अभी ‘मध्यम’ श्रेणी में है।
कुल मिलाकर, जहां 16.2 फीसदी शहरों में हवा साफ और 57.6 फीसदी में संतोषजनक है, वहीं खराब हवा वाले शहरों की संख्या में तेज बढ़ोतरी चिंता को और गहरा रही है।
सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 03 मई 2026 को देश में पानीपत सबसे अधिक प्रदूषित शहर रहा। इस दौरान यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 298 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। हालांकि कल सरकारी रुझानों में पानीपत का जिक्र नहीं था।
रुझानों में यह भी सामने आया है कि पानीपत की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है। पानीपत में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 1,800 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में चिक्कमगलुरु की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 21 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर पानीपत की तुलना चिक्कमगलुरु से करें तो वहां स्थिति 14 गुणा खराब है।
कल देश में सोनीपत की हवा सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 247 रिकॉर्ड किया गया था। हालांकि हैरानी की बात है कि आज सरकारी आंकड़ों में सोनीपत का जिक्र नहीं है।
राजधानी दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 144 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 175 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां सूचकांक में 31 अंकों का उछाल दर्ज किया गया। इसके साथ ही दिल्ली में वायु गुणवत्ता आज एक बार फिर मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
बता दें कि 2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 20 मार्च और आठ अप्रैल 2026 को दर्ज किया गया, जब एक्यूआई 93 पर पहुंच गया था। इसके बाद 01 अप्रैल को सूचकांक 113 दर्ज क्या गया। वहीं आज सूचकांक 114 रिकॉर्ड किया गया है। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।
दिल्ली के उलट फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 120 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 110 पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि वहां आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 03 मई 2026 को 229 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 16.2 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 57.6 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 26.2 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।
कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 5.7 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। दूसरी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 8.3 फीसदी की गिरावट आई है। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में कल से करीब 8.3 फीसदी का उछाल आया है। इसी तरफ खराब हवा वाले शहरों के आंकड़ों को देखें तो कल से उनकी गिनती में 33.3 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है, जोकि चिंता का विषय है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में जींद (256) दूसरे जबकि हनुमानगढ़ (227) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह बागपत (216) चौथे स्थान पर है। कैथल-गाजियाबाद में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 210 और 207 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
हिसार (207) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में मेरठ (205), श्री गंगानगर (198) और सवाई माधोपुर (197) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में हरियाणा के चार शहर (पानीपत, जींद, कैथल, हिसार) शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि पानीपत, जींद, कैथल, गाजियाबाद, मेरठ, पंचगांव, गुरुग्राम, दिल्ली, चरखी दादरी, करनाल, राजकोट, मानेसर, छपरा, चंद्रपुर, बर्नीहाट (असम), फरीदाबाद, मंडीदीप आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।
वहीं हनुमानगढ़, बागपत, हिसार, बाड़मेर, बठिंडा, सिरोही, उदयपुर, सिंगरौली, नारनौल, जैसलमेर, धुले, बल्लभगढ़, भिवाड़ी, ग्रेटर नोएडा, मुजफ्फरनगर, वातवा , जालोर, मेहसाणा, बुलंदशहर, कुरुक्षेत्र, प्रतापगढ़, बहादुरगढ़, जोधपुर, हापुड़, पीथमपुर, अंगुल, बर्नीहाट (मेघालय), विशाखापत्तनम, यमुना नगर, आगरा, जोरापोखर आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 16.2 फीसदी यानी 37 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में भिलाई, बक्सर, चामराजनगर, चिक्कमगलुरु, गुवाहाटी, हावड़ा, झांसी, कलबुर्गी, खन्ना, किशनगंज, कोहिमा, कोल्हापुर, कोलकाता, कोप्पल, मदिकेरी, मैहर, मंगुराहा, मोतिहारी, नागांव, पेरुंदुरई, रायरंगपुर, राजमहेंद्रवरम, ऋषिकेश, रोहतक, रूपनगर, शिवमोगा, सिलचर, श्रीनगर, तिरुवनंतपुरम, उल्हासनगर शामिल हैं।
इसी तरह देश के 132 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें बेंगलुरु, भागलपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवंडी, भिवानी, भोपाल, भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, बिलासपुर, बिलाईपाड़ा, बोइसर, ब्रजराजनगर, चंडीगढ़, चेन्नई, चिक्काबल्लापुर, चित्तौड़गढ़, चुरू, कोयंबटूर, कुड्डालोर, कटक, दौसा, देवास, धारवाड़, धौलपुर, डूंगरपुर, एलुरु, फिरोजाबाद, गया, गोरखपुर, गुम्मिडीपूंडी, गुंटूर, हाजीपुर, हल्दिया, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जयपुर, जालंधर, जलगांव, झालावाड़, कडप्पा, कल्याण, कन्नूर, कानपुर, करौली, कटिहार, कटनी, खुर्जा, कोटा, कुंजेमुरा, लातूर, लखनऊ, लुधियाना, मछलीपट्टनम, महाद, मालेगांव, मीरा-भायंदर, मुरादाबाद, मुंबई, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, मैसूरु, नागौर, नागपुर, नलबाड़ी, नांदेड़, नंदेसरी, नासिक, नवी मुंबई, नयागढ़, पलवल, पंचकुला, परभनी, पटियाला, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रयागराज, पुणे, पूर्णिया, रायपुर, राजसमंद, रामनगर, रतलाम, राउरकेला, सागर आदि शहर शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 52 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इनमें आगरा, अंगुल, बहादुरगढ़, बल्लभगढ़, बांसवाड़ा, बारबिल, बाड़मेर, बठिंडा, भरतपुर, भिवाड़ी, बुलंदशहर, बर्नीहाट (असम), बर्नीहाट (मेघालय), चंद्रपुर, चरखी दादरी, छपरा, दिल्ली, धनबाद, धुले, दुर्गापुर, फरीदाबाद, गांधीनगर, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम, ग्वालियर, हापुड़, जैसलमेर, जालोर, झुंझुनू, जोधपुर, जोरापोखर, करनाल, कुरुक्षेत्र, मंडीदीप, मानेसर, मेहसाणा, मुजफ्फरनगर, नारनौल, नोएडा, पंचगांव, पीथमपुर, प्रतापगढ़, पुदुचेरी, राजकोट, सवाई माधोपुर, सिंगरौली, सिरोही, श्री गंगानगर, उदयपुर, वातवा , विशाखापत्तनम, यमुना नगर आदि शामिल हैं।
इसी तरह देश में बागपत, गाजियाबाद, हनुमानगढ़, हिसार, जींद, कैथल, मेरठ, पानीपत में स्थिति ‘खराब’ है।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 229 में से महज 37 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 132 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 02 मई को यह आंकड़ा 144 दर्ज किया गया था।
52 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज पानीपत में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 298 दर्ज किया गया। मतलब कि वायु गुणवत्ता खराब दर्ज की गई है। हैरानी की बात है कि इससे पहले कल सरकारी आंकड़ों में पानीपत का जिक्र नहीं था।
कल देश में सोनीपत की हवा सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 247 रिकॉर्ड किया गया था। हालांकि आज सरकारी आंकड़ों में सोनीपत का जिक्र नहीं है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 144 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 175 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां सूचकांक में 31 अंकों का उछाल दर्ज किया गया। इसके साथ ही दिल्ली में वायु गुणवत्ता आज एक बार फिर मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
दिल्ली के उलट फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 120 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 110 पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि वहां आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 03 मई को बागपत चौथे स्थान पर है, वहीं जींद (256) दूसरे, जबकि हनुमानगढ़ (227) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 145, गाजियाबाद में 207, गुवाहाटी में 45, गुरूग्राम में 186, नोएडा में 148, ग्रेटर नोएडा में 130 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 55 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘संतोषजनक‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 73, चेन्नई में 68, चंडीगढ़ में 73, हैदराबाद में 69, जयपुर में 92 और पटना में 92 दर्ज किया गया।
इन शहरों में साफ रही हवा
देश के जिन 37 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें अंबरनाथ, अररिया, बरेली, बारीपाड़ा, बैरकपुर, बेलगाम, भिलाई, बक्सर, चामराजनगर, चिक्कमगलुरु, गुवाहाटी, हावड़ा, झांसी, कलबुर्गी, खन्ना, किशनगंज, कोहिमा, कोल्हापुर, कोलकाता, कोप्पल, मदिकेरी, मैहर, मंगुराहा, मोतिहारी, नागांव, पेरुंदुरई, रायरंगपुर, राजमहेंद्रवरम, ऋषिकेश, रोहतक, रूपनगर, शिवमोगा, सिलचर, श्रीनगर, तिरुवनंतपुरम, उल्हासनगर, विजयपुरा शामिल हैं।
वहीं अगरतला, अहमदाबाद, अहमदनगर, अजमेर, अकोला, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अंबाला, अमरावती (महाराष्ट्र), अमृतसर, अनंतपुर, अंकलेश्वर, आरा, आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बद्दी, बदलापुर, बागलकोट, बालासोर, बारां, बेगूसराय, बेलापुर, बेंगलुरु, भागलपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवंडी, भिवानी, भोपाल, भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, बिलासपुर, बिलाईपाड़ा, बोइसर, ब्रजराजनगर, चंडीगढ़, चेन्नई, चिक्काबल्लापुर, चित्तौड़गढ़, चुरू, कोयंबटूर, कुड्डालोर, कटक, दौसा, देवास, धारवाड़, धौलपुर, डूंगरपुर, एलुरु, फिरोजाबाद, गया, गोरखपुर, गुम्मिडीपूंडी, गुंटूर, हाजीपुर, हल्दिया, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जयपुर, जालंधर, जलगांव, झालावाड़, कडप्पा, कल्याण, कन्नूर, कानपुर, करौली, कटिहार, कटनी, खुर्जा, कोटा, कुंजेमुरा, लातूर, लखनऊ, लुधियाना, मछलीपट्टनम, महाद, मालेगांव, मीरा-भायंदर, मुरादाबाद, मुंबई, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, मैसूरु, नागौर, नागपुर, नलबाड़ी, नांदेड़, नंदेसरी, नासिक, नवी मुंबई, नयागढ़, पलवल, पंचकुला, परभनी, पटियाला, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रयागराज, पुणे, पूर्णिया, रायपुर, राजसमंद, रामनगर, रतलाम, राउरकेला, सागर, सहरसा, सासाराम, सतना, सीकर, सिलीगुड़ी, शिवसागर, सिवान, सोलापुर, सुआकाती, सूरत, तालचेर, ठाणे, त्रिशूर, तिरुपति, टोंक, तुमडीह, उज्जैन, वडोदरा, वापी, वाराणसी, विजयवाड़ा, विरार, वृंदावन, यादगीर आदि 132 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
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