

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 20 मई 2026 को देश के 242 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण में सामने आया है कि हरियाणा का चरखी दादरी लगातार तीसरे दिन सबसे प्रदूषित शहर रहा, जहां एक्यूआई 308 दर्ज किया गया।
यहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से 1,950 फीसदी अधिक दर्ज किया गया, जहां हवा में जहरीले महीन कण (पीएम2.5) पूरी तरह हावी हैं।
इसके विपरीत, कर्नाटक का मदिकेरी (एक्यूआई 14) देश में सबसे साफ शहर रहा, जिसकी तुलना में चरखी दादरी के हालात 22 गुणा बदतर हैं।
आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि देश के 45.5 फीसदी शहरों में वायु गुणवत्ता चिंताजनक बनी हुई है। शीर्ष 10 सबसे प्रदूषित शहरों में हरियाणा के 4 शहर (चरखी दादरी, यमुना नगर, पंचगांव, अंबाला) शामिल हैं, जबकि अंगुल (307) दूसरे और मेरठ (265) तीसरे स्थान पर हैं।
राहत की बात यह है कि दिल्ली की हवा में 40 अंकों का सुधार आया है, जिससे एक्यूआई 208 से घटकर 168 (मध्यम श्रेणी) पर आ गया। इसके उलट, पड़ोसी शहर फरीदाबाद में प्रदूषण बढ़ा है और एक्यूआई 210 (खराब श्रेणी) तक पहुंच गया है। कुल मिलाकर, देश के केवल 12 फीसदी (29 शहरों) को ही 'साफ हवा' नसीब हो रही है, जबकि 103 शहरों में स्थिति संतोषजनक है।
सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 20 मई 2026 को देश में एक बार फिर चरखी दादरी सबसे प्रदूषित शहर रहा। इस दौरान यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 308 दर्ज किया गया, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है। इससे पहले कल चरखी दादरी में सूचकांक 342 दर्ज किया गया। मतलब की कल से वहां प्रदूषण में 34 अंकों का सुधार आया है।
रुझानों में यह भी सामने आया है कि चरखी दादरी की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।
चरखी दादरी में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 1,950 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में मदिकेरी की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 14 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर चरखी दादरी की तुलना मदिकेरी से करें तो वहां स्थिति 22 गुणा खराब है।
राजधानी दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 208 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 168 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां सूचकांक में 40 अंकों की कमी दर्ज की गई। इसके साथ ही दिल्ली में आज वायु गुणवत्ता खराब से मध्यम श्रेणी में पहुंच गई है।
बता दें कि 2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 05 मई को दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई 86 पर पहुंच गया। वहीं 20 मार्च और आठ अप्रैल 2026 को एक्यूआई 93 रिकॉर्ड किया गया था। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।
दिल्ली के उलट फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 200 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 210 पर पहुंच गया। इसके साथ ही वहां आज वायु गुणवत्ता मध्यम से खराब श्रेणी में पहुंच गई है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 20 मई 2026 को 242 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 12 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 42.5 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 45.5 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।
कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 3.3 फीसदी की गिरावट आई है। इसी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में भी 1.9 फीसदी की कमी दर्ज की गई। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में कल से 20 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। वहीं खराब हवा वाले शहरों की गिनती में कल से 36.8 फीसदी का सुधार दर्ज किया गया, जोकि राहत की खबर है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में अंगुल (307) दूसरे जबकि मेरठ (265) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह मंडी गोबिंदगढ़ (257) चौथे स्थान पर है। श्री यमुना नगर- सिंगरौली में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 256 और 249 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
ग्रेटर नोएडा (246) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में गाजियाबाद (243), पंचगांव (234) और अंबाला (226) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में हरियाणा के चार शहर (चरखी दादरी, यमुना नगर, पंचगांव, और अंबाला) शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि चरखी दादरी, मंडी गोबिंदगढ़, यमुना नगर, पंचगांव, अंबाला, फरीदाबाद, पानीपत, बर्नीहाट (असम), बल्लभगढ़, मंडीदीप, राजकोट, हाजीपुर, भिवानी, पंचकुला, धारूहेड़ा, मानेसर, जींद, बहादुरगढ़, लखनऊ, करनाल, खन्ना, बेगूसराय, किशनगंज आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।
वहीं अंगुल, मेरठ, सिंगरौली, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, मुजफ्फरनगर, बद्दी, नोएडा, बुलंदशहर, श्री गंगानगर, हापुड़, बागपत, दौसा, मंगुराहा, बाड़मेर, रायबरेली, विशाखापत्तनम, कुरुक्षेत्र, दिल्ली, गुरुग्राम, उदयपुर, प्रतापगढ़, बारबिल, मुरादाबाद, दमोह, कटनी, सवाई माधोपुर, जोरापोखर, ग्वालियर, कटक, टोंक, वातवा, नयागढ़, चंद्रपुर, रतलाम, चूरू, मिलुपारा, करौली, कानपुर, जयपुर, हनुमानगढ़, पाली, सोलापुर, देहरादून, सीकर, भीलवाड़ा, खुर्जा, जैसलमेर, भिवाड़ी, बांसवाड़ा, बारां, ब्यासनगर, सुआकाती, पीथमपुर, आगरा, भोपाल, धौलपुर, झुंझुनू, पटियाला, गया, फतेहाबाद, सहरसा, गांधीनगर, लुधियाना, मेहसाणा, जबलपुर, अमरावती महाराष्ट्र), सागर, कोटा, कुंजेमुरा, सिरोही, देवास, फिरोजाबाद, जोधपुर, वाराणसी, अकोला, नागपुर, गोरखपुर, अमृतसर, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), नागौर, पटना, भरतपुर, चित्तौड़गढ़ आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 12 फीसदी यानी 29 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में बागलकोट, चामराजनगर, चिक्काबल्लापुर, कोयंबटूर, कुड्डालोर, गडग, गंगटोक, हुबली, कलबुर्गी, कोहिमा, कोल्हापुर, मदिकेरी, मंडीखेड़ा, मीरा-भायंदर, मुंबई, नेल्लोर, पेरुंदुरई, रामनगर, रूपनगर, समस्तीपुर, शिलांग, शिवमोगा, सूरत, टेन्सा, तिरुवनंतपुरम आदि शामिल हैं।
इसी तरह देश के 103 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलुरु, गुम्मिडीपूंडी, गुंटूर, गुवाहाटी, हल्दिया, हावड़ा, हैदराबाद, इंदौर, जालंधर, जलगांव, जालोर, झालावाड़, झांसी, कडप्पा, कल्याण, कन्नूर, कटिहार, कोलकाता, कोल्लम, कोरबा, लातूर, मछलीपट्टनम, महाड, मालेगांव, मोतिहारी, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, मैसूर, नागांव, नाहरलागुन, नांदेड़, नंदेसरी, नारनौल, नासिक, नवी मुंबई, पलवल, पंपोर, परभणी, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रयागराज, पुडुचेरी, पुणे, पूर्णिया, रायपुर, रायरंगपुर, राजमहेंद्रवरम, राजगीर, राजसमंद, ऋषिकेश, राउरकेला, सासाराम, सतना, सिलचर, सिरसा, शिवसागर आदि शहर शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 96 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इनमें आगरा, अहमदाबाद, अकोला, अमरावती (महाराष्ट्र), अमृतसर, औरंगाबाद (बिहार), औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बागपत, बहादुरगढ़, बल्लभगढ़, बांसवाड़ा, बारां, बारबिल, बाड़मेर, बेगूसराय, भरतपुर, भीलवाड़ा, भिवाड़ी, भिवानी, भोपाल, बुलंदशहर, ब्यासनगर, बर्नीहाट (असम), चंद्रपुर, चित्तौड़गढ़, चूरू, कटक, दमोह, दौसा, देहरादून, दिल्ली, देवास, धनबाद, धारूहेड़ा, धौलपुर, फतेहाबाद, फिरोजाबाद, गांधीनगर, गया, गोरखपुर, गुरुग्राम, ग्वालियर, हाजीपुर, हनुमानगढ़, हापुड़, जबलपुर, जयपुर, जैसलमेर, झुंझुनू, जींद, जोधपुर, जोरापोखर, कानपुर, करौली, करनाल, कटनी, खन्ना, खुर्जा, किशनगंज, कोटा, कुंजेमुरा, कुरुक्षेत्र, लखनऊ, लुधियाना, मंडीदीप, मानेसर, मंगुराहा, मेहसाणा, मिलुपारा, मुरादाबाद, नागौर, नागपुर, नयागढ़, नोएडा, पाली, पंचकुला, पटियाला, पटना, पीथमपुर, प्रतापगढ़, रायबरेली, राजकोट, रतलाम, सागर, सहरसा, सवाई माधोपुर, सीकर, सिरोही, सोलापुर, श्री गंगानगर, सुआकाती, टोंक, उदयपुर, वाराणसी, वातवा, विशाखापत्तनम आदि शामिल हैं।
इसी तरह देश में अंबाला, बद्दी, फरीदाबाद, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, मंडी गोबिंदगढ़, मेरठ, मुजफ्फरनगर, पंचगांव, पानीपत, सिंगरौली, यमुना नगर में स्थिति ‘खराब’ है। वहीं चरखी दादरी (308) और अंगुल (307) में स्थिति बेहद खराब है।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 242 में से 29 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 103 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 19 मई को यह आंकड़ा 105 दर्ज किया गया था।
96 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज फिर चरखी दादरी में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 308 दर्ज किया गया। इससे पहले कल चरखी दादरी में सूचकांक 342 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण में 34 अंकों की गिरावट आई है। हालांकि आज भी चरखी दादरी में वायु गुणवत्ता ‘बेहद खराब’ बनी हुई है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 208 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 168 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां सूचकांक में 40 अंकों की कमी दर्ज की गई। इसके साथ ही दिल्ली में आज वायु गुणवत्ता खराब से मध्यम श्रेणी में पहुंच गई है।
दिल्ली के उलट फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 200 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 210 पर पहुंच गया। इसके साथ ही वहां आज वायु गुणवत्ता मध्यम से खराब श्रेणी में पहुंच गई है।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 20 मई को मंडी गोबिंदगढ़ चौथे स्थान पर है, वहीं अंगुल (307) दूसरे, जबकि मेरठ (265) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 148, गाजियाबाद में 243, गुवाहाटी में 77, गुरूग्राम में 165, नोएडा में 200, ग्रेटर नोएडा में 247 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘बेहतर‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 141, चेन्नई में 60, चंडीगढ़ में 89, हैदराबाद में 77, जयपुर में 128 और पटना में 102 दर्ज किया गया।
इन शहरों में साफ रही हवा
देश के जिन 29 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें अंबरनाथ, बागलकोट, चामराजनगर, चिक्काबल्लापुर, कोयंबटूर, कुड्डालोर, गडग, गंगटोक, हुबली, कलबुर्गी, कोहिमा, कोल्हापुर, मदिकेरी, मंडीखेड़ा, मीरा-भायंदर, मुंबई, नेल्लोर, पेरुंदुरई, रामनगर, रूपनगर, समस्तीपुर, शिलांग, शिवमोगा, सूरत, टेन्सा, तिरुवनंतपुरम, थूथुकुडी, उल्हासनगर, विरुधुनगर शामिल हैं।
वहीं अगरतला, अहमदनगर, अजमेर, अलवर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अंकलेश्वर, अररिया, आरा, आसनसोल, बदलापुर, बालासोर, बरेली, बारीपदा, बैरकपुर, बठिंडा, बेलापुर, बेलगाम, बेंगलुरु, भागलपुर, भावनगर, भिलाई, भिवंडी, भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, बीकानेर, बिलासपुर, बोइसर, ब्रजराजनगर, बूंदी, बक्सर, चंडीगढ़, चेन्नई, चित्तूर, धारवाड़, धुले, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलुरु, गुम्मिडीपूंडी, गुंटूर, गुवाहाटी, हल्दिया, हावड़ा, हैदराबाद, इंदौर, जालंधर, जलगांव, जालोर, झालावाड़, झांसी, कडप्पा, कल्याण, कन्नूर, कटिहार, कोलकाता, कोल्लम, कोरबा, लातूर, मछलीपट्टनम, महाड, मालेगांव, मोतिहारी, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, मैसूर, नागांव, नाहरलागुन, नांदेड़, नंदेसरी, नारनौल, नासिक, नवी मुंबई, पलवल, पंपोर, परभणी, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रयागराज, पुडुचेरी, पुणे, पूर्णिया, रायपुर, रायरंगपुर, राजमहेंद्रवरम, राजगीर, राजसमंद, ऋषिकेश, राउरकेला, सासाराम, सतना, सिलचर, सिरसा, शिवसागर, सिवान, श्रीनगर, ठाणे, त्रिशूर, तिरुमाला, तिरुपति, तुमडीह, उज्जैन, वडोदरा, वापी, विजयवाड़ा आदि 103 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
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