प्रदूषण का हॉटस्पॉट बनता राजस्थान, 252 शहरों में पाली सबसे प्रदूषित, सीकर, दौसा में भी स्थिति चिंताजनक

दूसरी तरफ देश में आइजोल की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 14 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर पाली की तुलना आइजोल से करें तो वहां स्थिति 11 गुणा खराब है।
देश के कई शहरों  में वायु गुणवत्ता न केवल इंसानों बल्कि दूसरे जीवों के लिए भी सुरक्षित नहीं है; फोटो: सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट (सीएसई)
देश के कई शहरों में वायु गुणवत्ता न केवल इंसानों बल्कि दूसरे जीवों के लिए भी सुरक्षित नहीं है; फोटो: सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट (सीएसई)
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सारांश
  • 02 सितंबर 2026 को देश की हवा की तस्वीर में राजस्थान एक बार फिर प्रदूषण के हॉटस्पॉट के रूप में उभरा।

  • केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के विश्लेषण के मुताबिक 252 शहरों में पाली सबसे प्रदूषित रहा, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 157 दर्ज किया गया। यह पिछले दिन के मुकाबले 45 अंक अधिक है।

  • पाली के साथ सीकर (127), दौसा (124), भिवाड़ी (121), टोंक (121) और श्रीगंगानगर (119) भी देश के सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल रहे। यानी देश के 10 सबसे प्रदूषित शहरों में राजस्थान के पांच शहर हैं। इन शहरों में मुख्य रूप से पीएम10 का दबदबा रहा, जो हवा में मौजूद महीन कणों के बढ़ते प्रदूषण की ओर इशारा करता है।

  • हालांकि, देशभर में हवा की स्थिति में कुछ राहत भी दिखी। 252 शहरों में 90 शहरों की हवा बेहतर, 143 की संतोषजनक और 19 शहरों की हवा मध्यम श्रेणी में रही।

  • आइजोल महज 14 एक्यूआई के साथ सबसे साफ शहर रहा, जबकि पाली की हवा उससे 11.2 गुना अधिक प्रदूषित रही। दिल्ली में भी राहत मिली और एक्यूआई 113 से घटकर 85 पर आ गया। इसके बावजूद राजस्थान के कई शहरों में बढ़ता प्रदूषण साफ हवा की चुनौती को गंभीर बनाए हुए है।

सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 02 सितम्बर 2026 को देश में पाली सबसे प्रदूषित रहा। इस दौरान वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 157 दर्ज किया गया, जो ‘मध्यम’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (01 सितम्बर) पाली में वायु गुणवत्ता का स्तर 112 दर्ज किया गया था। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां प्रदूषण के स्तर में 45 अंकों का इजाफा हुआ है और वायु गुणवत्ता ‘मध्यम’ श्रेणी में बनी हुई है।

रुझानों में यह भी सामने आया है कि पाली की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम10) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।

पाली में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 240 फीसदी अधिक है।

दूसरी तरफ देश में आइजोल की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 14 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर पाली की तुलना आइजोल से करें तो वहां स्थिति 11.2 गुणा खराब है।

वहीं कल देश में बड़ौत की स्थिति सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 241 तक पहुंच गया था। हालांकि आज  में 163 अंकों के भारी सुधार के साथ बड़ौत में सूचकांक घटकर 78 पर आ गया है।

दिल्ली में कल से प्रदूषण में कमी आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 113 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 85 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक में 28 अंकों की गिरावट आई है। इसके साथ ही दिल्ली में आज वायु गुणवत्ता मध्यम से संतोषजनक श्रेणी में पहुंच गई।

2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 09 जुलाई को दर्ज किया गया, जब एक्यूआई 48 रिकॉर्ड किया गया। इसी तरह 08 जुलाई 2026 को सूचकांक 59 और 07-02 सितम्बर को 63 रिकॉर्ड किया गया। वहीं 04 अगस्त और 22 जुलाई 2026 को सूचकांक 64  दर्ज हुआ। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।

दिल्ली के उलट फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 139 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 142 पर पहुंच गया। इसके साथ ही 3 अंकों के उछाल के बावजूद फरीदाबाद में आज भी एक्यूआई मध्यम श्रेणी में बना हुआ है।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 02 सितम्बर 2026 को 252 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 35.7 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 56.7 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 7.5 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।

कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 15.4 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। इसी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में भी 9.2 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। रुझानों के मुताबिक मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में कल से करीब 50 फीसदी की गिरावट आई है, जोकि राहत की खबर है।

आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में फरीदाबाद (142) दूसरे जबकि सीकर (127) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह दौसा (124) चौथे स्थान पर है। भिवाड़ी – टोंक (121) में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो पांचवें और छठे पायदान पर हैं।

श्री गंगानगर (119) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में भागलपुर (115), पानीपत (115), और पीथमपुर (114) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में राजस्थान के पांच शहर (पाली, सीकर, दौसा, टोंक, श्री गंगानगर) शामिल हैं।

विश्लेषण से यह भी पता चला है कि फरीदाबाद, वातवा और गुम्मिडीपूंडी आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं। वहीं पाली, सीकर, दौसा, भिवाड़ी, टोंक, श्री गंगानगर, भागलपुर, पानीपत, पीथमपुर, नारनौल, छपरा, अलवर, मथुरा और फतेहपुर सीकरी आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।

इन शहरों के विपरीत देश के 35.7 फीसदी यानी 90 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में धौलपुर, धुले, एलुरु, गया, हाजीपुर, हापुड़, हिंगोली, हुबली, इंदौर, जलगांव, काकीनाडा, कलबुर्गी, कल्याण, कानपुर, कारवार, कटनी, क्योंझर, खुर्जा, कोल्हापुर, कोरबा, कुंजेमुरा, कुरनूल, कुरुक्षेत्र, लातूर, लखनऊ, मदिकेरी, महाद, मेरठ, मीरा-भायंदर, मोदीनगर, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुंबई, मुजफ्फरनगर, मुजफ्फरपुर, नागांव, नागपुर, नाहरलागुन, नांदेड़, नासिक, नवी मुंबई, पंपोर, पंचकुला, परभणी, पटियाला, रायपुर, राजकोट, रामनगर, रतलाम, ऋषिकेश, राउरकेला, सहरसा आदि शामिल हैं।

इसी तरह देश के 143 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें अंबाला, अमृतसर, अनंतपुर, अंगुल, अंकलेश्वर, आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बद्दी, बहादुरगढ़, बल्लभगढ़, बांसवाड़ा, बारां, बड़ौत, बारबिल, बारीपाड़ा, बाड़मेर, बैरकपुर, बठिंडा, बेगूसराय, बेलापुर, बेंगलुरु, भरतपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवानी, भोपाल, भुवनेश्वर, बीकानेर, बिलीपाड़ा, ब्रजराजनगर, बुलंदशहर, बूंदी, ब्यासनगर, बर्नीहाट (असम), चंडीगढ़, चंद्रपुर, चरखी दादरी, चेन्नई, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, चूरू, कुड्डालोर, कटक, देहरादून, दिल्ली, देवास, धारवाड़, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलूर, गडग, गजरौला, गांधीनगर, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुंटूर, गुरुग्राम, गुवाहाटी, ग्वालियर, हल्दिया, हनुमानगढ़, हिसार, हावड़ा, हैदराबाद, जबलपुर, जयपुर, जैसलमेर, जालंधर, जलना, जालोर, झालावाड़, झुंझुनू, जींद, जोधपुर, जोरापोखर, कडप्पा, कैथल, कन्नूर, करौली, करनाल, कटिहार, खन्ना, खोरा, किशनगंज, कोहिमा, कोलकाता, कोटा आदि शहर शामिल हैं।

इन शहरों के उलट आज देश के 19 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

इनमें अलवर, भागलपुर, भिवाड़ी, छपरा, दौसा, धनबाद, फरीदाबाद, फतेहपुर सीकरी, गुम्मिडीपूंडी, मथुरा, नारनौल, पाली, पंचगांव, पानीपत, पीथमपुर, सीकर, श्री गंगानगर, टोंक और वातवा आदि शामिल हैं।

क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 252 में से 90 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 143 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 01 सितम्बर को भी यह आंकड़ा 131 दर्ज किया गया था।

19 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।

दूसरे शहरों की तुलना में आज पाली में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 157 दर्ज किया गया, जो ‘मध्यम’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (01 सितम्बर) पाली में वायु गुणवत्ता का स्तर 112 दर्ज किया गया था। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां प्रदूषण के स्तर में 45 अंकों का इजाफा हुआ है।

वहीं कल देश में बड़ौत की स्थिति सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 241 तक पहुंच गया था। हालांकि आज  में 163 अंकों के भारी सुधार के साथ बड़ौत में सूचकांक घटकर 78 पर आ गया है।

दिल्ली में कल से प्रदूषण में कमी आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 113 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 85 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक में 28 अंकों की गिरावट आई है। इसके साथ ही दिल्ली में आज वायु गुणवत्ता मध्यम से संतोषजनक श्रेणी में पहुंच गई। 

दिल्ली के उलट फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 139 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 142 पर पहुंच गया। इसके साथ ही 3 अंकों के उछाल के बावजूद फरीदाबाद में आज भी एक्यूआई मध्यम श्रेणी में बना हुआ है।

प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 02 सितम्बर को दौसा (124) चौथे स्थान पर है, वहीं फरीदाबाद (142) दूसरे, जबकि सीकर (127) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 78, गाजियाबाद में 62, गुवाहाटी में 70, गुरूग्राम में 79, नोएडा में 80, ग्रेटर नोएडा में 100 पर पहुंच गया है।

इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 43 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘बेहतर‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 41, चेन्नई में 71, चंडीगढ़ में 58, हैदराबाद में 52, जयपुर में 90 और पटना में 57 दर्ज किया गया।

इन शहरों में साफ रही हवा

देश के जिन 90 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा। इन शहरों में अहमदनगर, आइजोल, अकोला, अंबरनाथ, अमरावती (महाराष्ट्र), अररिया, बदलापुर, बागपत, बालासोर, बरेली, बीड, भिलाई, भिवंडी, बिलासपुर, बोइसर, बर्नीहाट (मेघालय), चामराजनगर, छाल, चिक्काबल्लापुर, चिक्कमगलुरु, दमोह, धौलपुर, धुले, एलुरु, गया, हाजीपुर, हापुड़, हिंगोली, हुबली, इंदौर, जलगांव, काकीनाडा, कलबुर्गी, कल्याण, कानपुर, कारवार, कटनी, क्योंझर, खुर्जा, कोल्हापुर, कोरबा, कुंजेमुरा, कुरनूल, कुरुक्षेत्र, लातूर, लखनऊ, मदिकेरी, महाद, मेरठ, मीरा-भायंदर, मोदीनगर, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुंबई, मुजफ्फरनगर, मुजफ्फरपुर, नागांव, नागपुर, नाहरलागुन, नांदेड़, नासिक, नवी मुंबई, पंपोर, पंचकुला, परभणी, पटियाला, रायपुर, राजकोट, रामनगर, रतलाम, ऋषिकेश, राउरकेला, सहरसा, सांगली, शिलांग, शिवमोगा, सिलचर, सिलीगुड़ी, सोलापुर, सूरत, टेन्सा, ठाणे, तिरुवनंतपुरम, तुमडीह, उल्हासनगर, वापी, वाराणसी, विजयपुरा, विरार और यादगीर शामिल हैं।

वहीं अगरतला, आगरा, अहमदाबाद, अजमेर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अंबाला, अमृतसर, अनंतपुर, अंगुल, अंकलेश्वर, आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बद्दी, बहादुरगढ़, बल्लभगढ़, बांसवाड़ा, बारां, बड़ौत, बारबिल, बारीपाड़ा, बाड़मेर, बैरकपुर, बठिंडा, बेगूसराय, बेलापुर, बेंगलुरु, भरतपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवानी, भोपाल, भुवनेश्वर, बीकानेर, बिलीपाड़ा, ब्रजराजनगर, बुलंदशहर, बूंदी, ब्यासनगर, बर्नीहाट (असम), चंडीगढ़, चंद्रपुर, चरखी दादरी, चेन्नई, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, चूरू, कुड्डालोर, कटक, देहरादून, दिल्ली, देवास, धारवाड़, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलूर, गडग, गजरौला, गांधीनगर, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुंटूर, गुरुग्राम, गुवाहाटी, ग्वालियर, हल्दिया, हनुमानगढ़, हिसार, हावड़ा, हैदराबाद, जबलपुर, जयपुर, जैसलमेर, जालंधर, जलना, जालोर, झालावाड़, झुंझुनू, जींद, जोधपुर, जोरापोखर, कडप्पा, कैथल, कन्नूर, करौली, करनाल, कटिहार, खन्ना, खोरा, किशनगंज, कोहिमा, कोलकाता, कोटा, मछलीपट्टनम, मैहर, मालेगांव, मंडीदीप, मंडी गोबिंदगढ़, मंडीखेड़ा, मंगुराहा, मेहसाणा, मैसूरु, नागौर, नलबाड़ी, नंदेसरी, नयागढ़, नोएडा, पलवल, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुडुचेरी, पुणे, पूर्णिया, रायबरेली, रायरंगपुर, राजमहेंद्रवरम, राजसमंद, रोहतक, रूपनगर, सागर, सासाराम, सतारा, सतना, सवाई माधोपुर, शामली, सिंगरौली, सिरोही, सिरसा, शिवसागर, सिवान, सोनीपत, श्रीकाकुलम, श्रीनगर, तालचेर, थूथुकुडी, तिरुमाला, तिरुपति, उज्जैन, वडोदरा, विजयवाड़ा, वृंदावन और यमुना नगर आदि 143 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।

क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक

देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।

इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।

यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।

ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।

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