

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के 28 जुलाई 2026 के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि रायबरेली एक बार फिर देश का सबसे प्रदूषित शहर बनकर उभरा है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 500 दर्ज किया गया। यह स्तर ‘गंभीर’ श्रेणी में आता है और दर्शाता है कि शहर की हवा में सांस लेना भी स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा बन चुका है।
रायबरेली की हवा में पीएम10 कणों का दबदबा है और प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की सुरक्षित सीमा से करीब 10 गुना अधिक पहुंच गया है।
इसके विपरीत आइजोल और मदिकेरी देश के सबसे स्वच्छ शहर रहे, जहां एक्यूआई केवल 14 दर्ज किया गया।
प्रदूषण के मामले में बांसवाड़ा (230) दूसरे और सोनीपत (187) तीसरे स्थान पर रहे।
हालांकि देशभर की तस्वीर कुछ राहत देने वाली रही। 240 शहरों में से 110 शहरों की हवा ‘बेहतर’ और 108 शहरों की ‘संतोषजनक’ श्रेणी में दर्ज की गई।
दिल्ली में भी पिछले 24 घंटों में 35 अंकों का सुधार हुआ और एक्यूआई 101 से घटकर 66 पर पहुंच गया। वहीं फरीदाबाद में प्रदूषण बढ़कर 117 दर्ज किया गया।
विश्लेषण से यह भी स्पष्ट हुआ कि कई शहरों में पीएम2.5 और पीएम10 प्रदूषण का प्रमुख कारण बने हुए हैं, जिससे स्वास्थ्य संबंधी जोखिम लगातार बढ़ रहे हैं।
सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 28 जुलाई 2026 को देश में एक बार फिर रायबरेली सबसे प्रदूषित रहा। इस दौरान वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 500 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। इससे पहले कल (27 जुलाई) को रायबरेली में एक्यूआई 500 दर्ज किया गया था। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां प्रदूषण के स्तर में 224 अंकों का भारी सुधार आया है।
रुझानों में यह भी सामने आया है कि रायबरेली की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम10) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।
रायबरेली में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 10 गुणा अधिक है।
दूसरी तरफ देश में आइजोल-मदिकेरी की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 14 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहरों रायबरेली की तुलना आइजोल-मदिकेरी से करें तो वहां स्थिति 35 गुणा खराब है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 101 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 66 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता में 35 अंकों का सुधार आया है। इसके साथ ही दिल्ली में आज वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी से एक बार फिर संतोषजनक हो गई है।
2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 27 जुलाई को दर्ज किया गया, जब एक्यूआई 48 रिकॉर्ड किया गया। इसी तरह 12 जून 2026 को सूचकांक 73 और 30 मई को 85 रिकॉर्ड किया गया। वहीं 05 मई को सूचकांक 86, जबकि 04 मई को 88 दर्ज हुआ। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।
दिल्ली के उलट फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 111 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 117 पर पहुंच गया। इसके साथ ही 6 अंकों के उछाल के साथ फरीदाबाद में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 28 जुलाई 2026 को 240 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 45.8 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 45 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 9.2 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।
कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 12.2 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। वहीं दूसरी तरफ संतोषजनक हवा वाले शहरों में 12.9 फीसदी की गिरावट आई है। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में भी कल से 9.1 फीसदी का कमी रिकॉर्ड की गई है, जोकि राहत की खबर है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में बांसवाड़ा (230) दूसरे जबकि सोनीपत (187) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह बर्नीहाट (मेघालय) (168) चौथे स्थान पर है। पाली (150) – पानीपत (139) में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
चरखी दादरी (138) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में बद्दी (130), गुम्मिडीपूंडी (128) और खोरा (119) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में हरियाणा के तीन शहर (सोनीपत, पानीपत, और चरखी दादरी) शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि बर्नीहाट (मेघालय), पाली, चरखी दादरी, गुम्मिडीपूंडी, खोरा, धौलपुर, फरीदाबाद, गुरुग्राम, नारनौल आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं। वहीं रायबरेली, बांसवाड़ा, सोनीपत, पानीपत, बद्दी, मंडी गोबिंदगढ़, फतेहाबाद, गुवाहाटी, मैहर, सिवान, दौसा आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 45.8 फीसदी यानी 110 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में भोपाल, भुवनेश्वर, बिलासपुर, बिलाईपाड़ा, ब्रजराजनगर, बुलंदशहर, बूंदी, चंडीगढ़, चंद्रपुर, चिक्काबल्लापुर, चिक्कमगलुरु, चूरू, कुड्डालोर, कटक, दमोह, दावनगेरे, डोंबिवली, दुर्गापुर, फतेहपुर सिकरी, फिरोजाबाद, गडग, गंगटोक, गुंटूर, हल्दिया, हापुड़, हावड़ा, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जलगांव, जलना, काकीनाडा, कानपुर, करौली, काररवार, कटनी, क्योंझर, किशनगंज, कोल्हापुर, कोलकाता, कोरबा, कोटा, कुंजेमुरा, लातूर, मछलीपट्टनम, मदिकेरी, महाद, मंगलौर, मोदीनगर, मुरादाबाद, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, मैसूरु, नागपुर, नाहरलागुन, नंदेसरी, नासिक, नवी मुंबई, पंचगांव, परभणी, पटियाला, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रयागराज आदि शामिल हैं।
इसी तरह देश के 108 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें बीकानेर, बोइसर, ब्यासनगर, बर्नीहाट (असम), चेन्नई, चित्तौड़गढ़, दिल्ली, देवास, धारवाड़, धुले, डूंगरपुर, एलुरु, गांधीनगर, गया, गाजियाबाद, गोरखपुर, ग्रेटर नोएडा, ग्वालियर, हाजीपुर, हनुमानगढ़, हिसार, हुबली, जयपुर, जैसलमेर, जालंधर, जालौर, झालावाड़, झांसी, झुंझुनू, जोधपुर, जोरापोखर, कैथल, कल्याण, करनाल, कटिहार, खन्ना, खुर्जा, कोहिमा, कुरुक्षेत्र, लखनऊ, लुधियाना, मालेगांव, मंडीदीप, मंडीखेड़ा, मानेसर, मथुरा, मेरठ, मेहसाणा, मुंबई, मुजफ्फरनगर, नागांव, नागौर, नलबाड़ी, नेल्लोर, नोएडा, पलवल, पंचकुला, पटना, पीथमपुर, प्रतापगढ़, पूर्णिया, राजमहेंद्रवरम, राजगीर, राजकोट, राजसमंद, राउरकेला, रूपनगर, सतना, सीकर, सिलचर आदि शहर शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 20 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इनमें बद्दी, बर्नीहाट (मेघालय), चरखी दादरी, दौसा, धनबाद, धौलपुर, फरीदाबाद, फतेहाबाद, गुम्मिडीपूंडी, गुरुग्राम, गुवाहाटी, खोरा, मैहर, मंडी गोबिंदगढ़, नारनौल, पाली, पानीपत, सिलीगुड़ी, सिवान, सोनीपत आदि शामिल हैं। वहीं बांसवाड़ा (230) में स्थिति खराब, जबकि रायबरेली (500) में गंभीर दर्ज की गई है।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 240 में से 110 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 108 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 27 जुलाई को यह आंकड़ा 124 दर्ज किया गया था।
20 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज एक बार फिर रायबरेली में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 500 दर्ज किया गया, जो ‘गंभीर’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (27 जुलाई) को रायबरेली में एक्यूआई 276 दर्ज किया गया था। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां प्रदूषण के स्तर में 224 अंकों का भारी उछाल आया है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 101 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 66 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता में 35 अंकों का सुधार आया है। इसके साथ ही दिल्ली में आज वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी से एक बार फिर संतोषजनक हो गई है।
दिल्ली के उलट फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 111 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 117 पर पहुंच गया। इसके साथ ही 6 अंकों के उछाल के साथ फरीदाबाद में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 28 जुलाई को बर्नीहाट (मेघालय) (168) चौथे स्थान पर है, वहीं बांसवाड़ा (230) दूसरे, जबकि सोनीपत (187) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 56, गाजियाबाद में 70, गुवाहाटी में 115, गुरूग्राम में 111, नोएडा में 93, ग्रेटर नोएडा में 78 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 64 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘संतोषजनक‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 63, चेन्नई में 79, चंडीगढ़ में 49, हैदराबाद में 38, जयपुर में 75 और पटना में 68 दर्ज किया गया।
इन शहरों में साफ रही हवा
देश के जिन 110 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें अगरतला, अहमदनगर, आइजोल, अकोला, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अमरावती (महाराष्ट्र), अररिया, आसनसोल, बदलापुर, बालासोर, बारबिल, बरेली, बारीपाड़ा, बाड़मेर, बैरकपुर, बीड, बेगूसराय, बेलापुर, बेंगलुरु, भागलपुर, भिलाई, भिवानी, भोपाल, भुवनेश्वर, बिलासपुर, बिलाईपाड़ा, ब्रजराजनगर, बुलंदशहर, बूंदी, चंडीगढ़, चंद्रपुर, चिक्काबल्लापुर, चिक्कमगलुरु, चूरू, कुड्डालोर, कटक, दमोह, दावनगेरे, डोंबिवली, दुर्गापुर, फतेहपुर सिकरी, फिरोजाबाद, गडग, गंगटोक, गुंटूर, हल्दिया, हापुड़, हावड़ा, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जलगांव, जलना, काकीनाडा, कानपुर, करौली, काररवार, कटनी, क्योंझर, किशनगंज, कोल्हापुर, कोलकाता, कोरबा, कोटा, कुंजेमुरा, लातूर, मछलीपट्टनम, मदिकेरी, महाद, मंगलौर, मोदीनगर, मुरादाबाद, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, मैसूरु, नागपुर, नाहरलागुन, नंदेसरी, नासिक, नवी मुंबई, पंचगांव, परभणी, पटियाला, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रयागराज, पुडुचेरी, पुणे, रायपुर, रायरंगपुर, रामनगर, ऋषिकेश, रोहतक, सागर, सहरसा, समस्तीपुर, सांगली, सतारा, सवाई माधोपुर, शामली, शिलांग, सिंगरौली, शिवसागर, सोलापुर, श्रीकाकुलम, सुआकाती, ठाणे, उल्हासनगर, वापी, विजयपुरा, विरार शामिल हैं।
वहीं आगरा, अहमदाबाद, अजमेर, अलवर, अंबाला, अंबरनाथ, अमृतसर, अनंतपुर, अंगुल, आरा, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बागलकोट, बागपत, बहादुरगढ़, बल्लभगढ़, बारां, बठिंडा, भरतपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवाड़ी, बीकानेर, बोइसर, ब्यासनगर, बर्नीहाट (असम), चेन्नई, चित्तौड़गढ़, दिल्ली, देवास, धारवाड़, धुले, डूंगरपुर, एलुरु, गांधीनगर, गया, गाजियाबाद, गोरखपुर, ग्रेटर नोएडा, ग्वालियर, हाजीपुर, हनुमानगढ़, हिसार, हुबली, जयपुर, जैसलमेर, जालंधर, जालौर, झालावाड़, झांसी, झुंझुनू, जोधपुर, जोरापोखर, कैथल, कल्याण, करनाल, कटिहार, खन्ना, खुर्जा, कोहिमा, कुरुक्षेत्र, लखनऊ, लुधियाना, मालेगांव, मंडीदीप, मंडीखेड़ा, मानेसर, मथुरा, मेरठ, मेहसाणा, मुंबई, मुजफ्फरनगर, नागांव, नागौर, नलबाड़ी, नेल्लोर, नोएडा, पलवल, पंचकुला, पटना, पीथमपुर, प्रतापगढ़, पूर्णिया, राजमहेंद्रवरम, राजगीर, राजकोट, राजसमंद, राउरकेला, रूपनगर, सतना, सीकर, सिलचर, सिरोही, सिरसा, श्रीनगर, सूरत, तिरुवनंतपुरम, थूथुकुडी, तिरुपति, टोंक, उदयपुर, उज्जैन, वडोदरा, वाराणसी, विजयवाड़ा, विशाखापत्तनम, वृंदावन, यादगीर, यमुना नगर आदि 108 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
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