

30 नवंबर 2025 को कोयंबटूर में वायु गुणवत्ता सूचकांक 347 तक पहुंच गया, जो पिछले दिन से 205 अंकों की भारी वृद्धि है। यह स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से 2200 फीसदी अधिक है।
देश में शिलांग की हवा सबसे साफ रही, जबकि सोनीपत, बहादुरगढ़ और मंडी गोबिंदगढ़ भी गंभीर प्रदूषण वाले शहरों में शामिल हैं।
राजधानी दिल्ली की बात करें तो कल से प्रदूषण में गिरावट आई है, जहां एक्यूआई घटकर 279 दर्ज किया गया।
इसके साथ ही दिल्ली में वायु गुणवत्ता ‘बेहद खराब’ से खराब श्रेणी में पहुंच गई है, जहां प्रदूषण का स्तर डब्ल्यूएचओ मानकों से 1,700 फीसदी अधिक है
245 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां महज 6.5 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 30.6 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 62.9 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं।
फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता सूचकांक 176 रिकॉर्ड किया गया है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में सोनीपत (329) दूसरे जबकि बहादुरगढ़ (322) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह 307 अंकों के साथ मंडी गोबिंदगढ़ चौथे स्थान पर है।
अंगुल-हापुड़ में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 294 और 285 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
कोटा (280) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में दिल्ली (279), नोएडा (279) और भिवाड़ी (274) भी शामिल हैं।
आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 30 नवंबर 2025 को देश में कोयंबटूर की हवा सबसे ज्यादा खराब है, जब वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी एक्यूआई 347 पर पहुंच गया। गौरतलब है कि 29 नवंबर को कोयंबटूर में एक्यूआई 142 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण में 205 अंकों का भारी उछाल आया है।
इसके साथ ही कोयंबटूर में वायु गुणवत्ता मध्यम से ‘बेहद खराब’ श्रेणी में पहुंच गई है। रुझानों में सामने आया है कि कोयंबटूर की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) पूरी तरह हावी हैं। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।
कोयंबटूर से स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 2,200 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में शिलांग की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 16 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर कोयंबटूर की तुलना शिलांग से करें तो वहां स्थिति 21 गुणा खराब है।
बता दें कि 29 नवंबर को देश में सोनीपत की स्थिति सबसे खराब थी, जब एक्यूआई 329 दर्ज किया गया था। हालांकि 30 नवंबर को सोनीपत की स्थिति में कोई बदलाव नहीं हुआ है और स्थिति जस की तस बनी हुई है।
राजधानी दिल्ली की बात करें तो कल से प्रदूषण में गिरावट आई है, जहां एक्यूआई घटकर 279 दर्ज किया गया। इसके साथ ही दिल्ली में वायु गुणवत्ता ‘बेहद खराब’ से खराब श्रेणी में पहुंच गई है, जहां प्रदूषण का स्तर डब्ल्यूएचओ मानकों से 1,700 फीसदी अधिक है। गौरतलब है कि 11 नवंबर को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित शहर दिन दर्ज किया गया था, जब एक्यूआई बढ़कर 428 तक पहुंच गया था।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 30 नवंबर, 2025 को 245 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां महज 6.5 फीसदी शहरों में हवा साफ है।
वहीं 30.6 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 62.9 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज भी हवा चिंताजनक है। चिंता की बात यह है कि कल से देश में संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 2.6 फीसदी की गिरावट आई है।
दूसरी तरह आज साफ हवा वाले शहरों की गिनती में कल से करीब 60 फीसदी का इजाफा हुआ है। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इन शहरों की संख्या में कल से कोई बदलाव नहीं हुआ है और स्थिति जस की तस बनी हुई है। खराब वायु गुणवत्ता वाले शहरों से जुड़े आंकड़ों को देखें तो उनकी गिनती में करीब 10 फीसदी की गिरावट आई है।
दूसरी तरह देश में बेहद खराब वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में करीब 43 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई, जोकि राहत की खबर है। फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता सूचकांक 176 रिकॉर्ड किया गया है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में सोनीपत (329) दूसरे जबकि बहादुरगढ़ (322) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह 307 अंकों के साथ मंडी गोबिंदगढ़ चौथे स्थान पर है। अंगुल-हापुड़ में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 294 और 285 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
कोटा (280) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में दिल्ली (279), नोएडा (279) और भिवाड़ी (274) भी शामिल हैं। गौरतलब है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में उत्तर प्रदेश के दो (हापुड़, नोएडा) और हरियाणा के दो शहर (सोनीपत, बहादुरगढ़) शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि कोयंबटूर, सोनीपत, बहादुरगढ़, मंडी गोबिंदगढ़, अंगुल, हापुड़, कोटा, दिल्ली, नोएडा, भिवाड़ी, टोंक, धारूहेड़ा, भिवानी, बल्लभगढ़, गाजियाबाद, बुलंदशहर, मानेसर, झालावाड़, सिंगरौली, बागपत, गुरुग्राम, जलगांव, सांगली, जयपुर, बूंदी, चरखी दादरी, कोल्लम, मंगलौर, जालोर, आसनसोल, परभनी, कटक, डूंगरपुर, मंडीदीप, बारां, बालासोर, पीथमपुर, फतेहाबाद, हल्दिया, कोलकाता, तालचेर, कडप्पा, पाली, भीलवाड़ा, जींद, नारनौल, कटनी, मुजफ्फरनगर, अररिया, नंदेसरी, फरीदाबाद, काशीपुर, सागर आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।
वहीं ग्रेटर नोएडा, पानीपत, बीकानेर, हनुमानगढ़, मेरठ, पुणे, ग्वालियर, सीकर, भोपाल, चंद्रपुर, सासाराम, बाड़मेर, कल्याण, झुंझुनू, पिंपरी-चिंचवाड़, रतलाम, सवाई माधोपुर, किशनगंज, कोल्हापुर, दुर्गापुर, आगरा, सोलापुर, देवास, धनबाद, सिरसा, जोधपुर, प्रयागराज, राउरकेला, बांसवाड़ा, बिलीपाड़ा, अमरावती (महाराष्ट्र), लुधियाना, आरा, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), गुवाहाटी, बदलापुर, खन्ना, नवी मुंबई, उल्हासनगर, गोरखपुर, धुले, क्योंझर, जैसलमेर, पटना, तुमडीह, बेलापुर, अंकलेश्वर, कुरुक्षेत्र, बेतिया, कानपुर, सूरत, वृंदावन, मुंबई, रायपुर, भागलपुर आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है। इन शहरों के विपरीत देश के 6.5 फीसदी यानी महज 16 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में चेन्नई, चिक्कमगलुरु, कुड्डालोर, दमोह, गंगटोक, मदुरै, पलकलाईपेरुर, पुडुचेरी, रामनाथपुरम, शिलांग, थूथुकुडी, तिरुमाला, तिरुनेलवेली आदि शामिल हैं।
आज देश के जिन 75 शहरों में वायु गुणवत्ता सन्तोषजनक है, उनमें देहरादून, फिरोजाबाद, गांधीनगर, गया, हिसार, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, झांसी, कैथल, कलबुर्गी, कन्नूर, करूर, कटिहार, कोहिमा, कोप्पल, कोरबा, कुंजेमुरा, मालेगांव, मंडीखेड़ा, मंगुराहा, मिलुपारा, मुरादाबाद, मोतिहारी, नासिक, नयागढ़, ऊटी, पलवल, पंचगांव, पंचकुला, पटियाला, पेरुंदुरई, पुडुकोट्टई, पूर्णिया, रायरंगपुर, राजमहेंद्रवरम, राजगीर, ऋषिकेश, रूपनगर, सहरसा, सलेम, समस्तीपुर आदि शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 114 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इन शहरों में अगरतला, आगरा, अहमदाबाद, अहमदनगर, अजमेर, अंबाला, अमरावती (महाराष्ट्र), अंकलेश्वर, अररिया, आरा, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बद्दी, बदलापुर, बांसवाड़ा, बारबिल, बारीपदा, बाड़मेर, बैरकपुर, बेलापुर, बेतिया, भागलपुर, भरतपुर, भीलवाड़ा, भिवंडी, भोपाल, भुवनेश्वर, बिलीपाड़ा, बक्सर, ब्यासनगर, चंडीगढ़, चंद्रपुर, चित्तौड़गढ़, दौसा, दावनगेरे, देवास, धनबाद, धौलपुर, धुले, दुर्गापुर, फरीदाबाद, फतेहाबाद, गोरखपुर, गुम्मिडीपूंडी, गुवाहाटी, ग्वालियर, हाजीपुर, हल्दिया, हनुमानगढ़, हावड़ा, जबलपुर, जैसलमेर, जालंधर, झुंझुनू, जींद, जोधपुर, कडप्पा, कल्याण, कानपुर, करौली, करनाल, काशीपुर, कटनी, क्योंझर, खन्ना, खुर्जा, किशनगंज, कोल्हापुर, कोलकाता, कुरुक्षेत्र, लातूर, लखनऊ, लुधियाना, मदिकेरी, महाड, मेरठ, मुंबई, मुंगेर, मुजफ्फरनगर, मुजफ्फरपुर, नागौर, नागपुर, नाहरलागुन, नलबाड़ी, नांदेड़, नंदेसरी, नारनौल, नवी मुंबई, पाली, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुणे, रायपुर, राजसमंद, रतलाम, राउरकेला, सागर, सासाराम, सवाई माधोपुर, सीकर, सिलीगुड़ी, सिरोही, सिरसा, सोलापुर, सूरत, तालचेर, तिरुपुर, तुमडीह, उदयपुर, उल्हासनगर, वातवा, वृंदावन, यादगीर शामिल हैं।
आंकड़ों में यह भी सामने आया है कि आज देश के 36 शहरों में वायु गुणवत्ता खराब है। इन शहरों में अंगुल, आसनसोल, बागपत, बालासोर, बल्लभगढ़, बारां, भिवाड़ी, भिवानी, बीकानेर, बुलंदशहर, बूंदी, चरखी दादरी, कटक, दिल्ली, धारूहेड़ा, डूंगरपुर, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम, हापुड़, जयपुर, जलगांव, जालोर, झालावाड़, कोल्लम, कोटा, मंडीदीप, मानेसर, मंगलौर, नोएडा, पानीपत, परभनी, पीथमपुर, सांगली, सिंगरौली, टोंक शामिल हैं।
इसी तरह आज देश के चार शहरों में वायु गुणवत्ता बेहद खराब है। इन शहरों में बहादुरगढ़, कोयंबटूर, मंडी गोबिंदगढ़, सोनीपत शामिल हैं।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 245 में से महज 16 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 75 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 29 नवंबर 2025 को यह आंकड़ा 77 दर्ज किया गया था।
114 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज कोयंबटूर (347) में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां एक्यूआई 350 के करीब पहुंच गया। बता दें कि कल कोयंबटूर में सूचकांक 142 रिकॉर्ड किया गया था। मतलब की आज वहां प्रदूषण के स्तर में 205 अंकों का भारी उछाल आया है। इसके साथ ही कोयंबटूर में वायु गुणवत्ता सूचकांक मध्यम से 'बेहद खराब' श्रेणी में पहुंच गया है।
गौरतलब है कि 29 नवंबर देश में सोनीपत की हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित थी, जब वायु गुणवत्ता सूचकांक 329 दर्ज किया गया था। सोनीपत में आज वायु गुणवत्ता में कोई बदलाव नहीं हुआ है और स्थिति जस की तस बनी हुई है।
राजधानी दिल्ली की बात करें तो कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। इसके साथ ही दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक घटकर 279 पर पहुंच गया। इसी तरफ फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में गिरावट आई है, जहां 36 अंकों के सुधार के साथ एक्यूआई घटकर 176 रिकॉर्ड किया गया। मतलब की फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता आज 'खराब' से मध्यम श्रेणी में पहुंच गई है।
गौरतलब है कि पिछले दो-तीन महीनों में जून, जुलाई और अगस्त के दौरान दिल्ली की वायु गुणवत्ता ज्यादातर दिन संतोषजनक रही। वहीं जनवरी, फरवरी, मार्च और अप्रैल 2025 में एक भी दिन ऐसा नहीं रहा जब दिल्ली की हवा साफ कही जा सके। नवंबर में आठ दिन दिल्ली में वायु गुणवत्ता का स्तर 'गंभीर' दर्ज किया गया। इसी तरह दिसंबर 2024 में भी छह दिन वायु गुणवत्ता गंभीर दर्ज की गई थी। इस दौरान हवा में प्रदूषण का स्तर इतना ज्यादा था कि लोगों के लिए सांस लेना तक मुश्किल हो गया।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 30 नवंबर को मंडी गोबिंदगढ़ चौथे स्थान पर है, वहीं सोनीपत (329) दूसरे, जबकि बहादुरगढ़ (322) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 176, गाजियाबाद में 256, गुवाहाटी में 115, गुरूग्राम में 245, नोएडा में 279, ग्रेटर नोएडा में 268 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 103 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘मध्यम‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 133, चेन्नई में 40, चंडीगढ़ में 109, हैदराबाद में 99, जयपुर में 231 और पटना में 107 दर्ज किया गया।
इन शहरों में साफ रही हवा
देश के जिन 16 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें अरियालुर, चामराजनगर, चेन्नई, चिक्कमगलुरु, कुड्डालोर, दमोह, गंगटोक, मदुरै, पलकलाईपेरुर, पुडुचेरी, रामनाथपुरम, शिलांग, थूथुकुडी, तिरुमाला, तिरुनेलवेली, वेल्लोर शामिल हैं।
वहीं अकोला, अलवर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अमृतसर, अनंतपुर, बागलकोट, बरेली, बठिंडा, बेगूसराय, बेलगाम, बेंगलुरु, भिलाई, बिहार शरीफ, बिलासपुर, बोइसर, ब्रजराजनगर, बर्नीहाट, छाल, चित्तूर, देहरादून, फिरोजाबाद, गांधीनगर, गया, हिसार, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, झांसी, कैथल, कलबुर्गी, कन्नूर, करूर, कटिहार, कोहिमा, कोप्पल, कोरबा, कुंजेमुरा, मालेगांव, मंडीखेड़ा, मंगुराहा, मिलुपारा, मुरादाबाद, मोतिहारी, नासिक, नयागढ़, ऊटी, पलवल, पंचगांव, पंचकुला, पटियाला, पेरुंदुरई, पुडुकोट्टई, पूर्णिया, रायरंगपुर, राजमहेंद्रवरम, राजगीर, ऋषिकेश, रूपनगर, सहरसा, सलेम, समस्तीपुर, सतना, शिवमोगा, सिलचर, शिवसागर, टेन्सा, ठाणे, तिरुवनंतपुरम, त्रिशूर, वापी, वाराणसी, विजयवाड़ा, विरार, विरुधुनगर, विशाखापत्तनम आदि 75 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
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सोनीपत बना देश का सबसे प्रदूषित शहर, हवा में घुला जहर सुरक्षित सीमा से 2,000 फीसदी अधिक