प्रदूषण का पलटा पासा: 90 से 224 पर पहुंचा जालंधर में एक्यूआई, खन्ना-कैथल में स्थिति खराब

दूसरी तरफ देश में मधुबनी की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 10 रिकॉर्ड किया गया।
फोटो: सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट (सीएसई)
फोटो: सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट (सीएसई)
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सारांश
  • 31 अक्टूबर 2026 को देश में वायु प्रदूषण के बदलते रुझानों के बीच जालंधर की वायु गुणवत्ता में अचानक आई गिरावट ने चिंता बढ़ा दी है।

  • केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि महज 24 घंटे में जालंधर का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 90 से उछलकर 224 पर पहुंच गया। यानी हवा में प्रदूषण 134 अंक बढ़ गया और शहर देश का सबसे प्रदूषित शहर बन गया। यहां पीएम2.5 कणों का बढ़ता दबदबा स्थिति को और चिंताजनक बना रहा है।

  • जालंधर के बाद खन्ना (221), गुम्मिडीपूंडी (219) और कैथल (207) में भी हवा खराब श्रेणी में दर्ज की गई।

  • इस बीच दिल्ली की हवा में भी प्रदूषण बढ़ा है। यहां एक्यूआई 60 से बढ़कर 117 पर पहुंच गया और हवा संतोषजनक से मध्यम श्रेणी में आ गई। इसके उलट फरीदाबाद में कुछ राहत मिली, जहां एक्यूआई घटकर 73 दर्ज किया गया।

  • देश के 268 शहरों के आंकड़ों के मुताबिक 82 शहरों में हवा साफ, 152 में संतोषजनक और 30 में मध्यम श्रेणी में रही, जबकि चार शहरों में हवा खराब दर्ज की गई।

  • दूसरी तरफ बिहार के मधुबनी में एक्यूआई महज 10 रहा और यह देश का सबसे साफ शहर बना। जालंधर और मधुबनी के बीच प्रदूषण का यह अंतर बताता है कि देश के अलग-अलग हिस्सों में हवा की गुणवत्ता कितनी तेजी से बदल रही है।

सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 31 अक्टूबर 2026 को देश में जालंधर सबसे प्रदूषित शहर रहा। इस दौरान वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 224 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। हालांकि कल (30 अक्टूबर) को जालंधर में सूचकांक 90 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 134 अंकों का भारी उछाल आया है।

रुझानों में यह भी सामने आया है कि जालंधर की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।

जालंधर में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 1,390 फीसदी अधिक है।

दूसरी तरफ देश में मधुबनी की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 10 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर जालंधर की तुलना मधुबनी से करें तो वहां स्थिति 22 गुणा खराब है।

इससे पहले कल बीकानेर में एक्यूआई 196 दर्ज किया गया था। हालांकि आज 20 अंकों के सुधार के साथ बीकानेर में सूचकांक घटकर 176 पर पहुंच गया। मतलब कि सुधार के बावजूद वहां वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है। 

दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 60 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 117 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक में 57 अंकों का उछाल आया है। इसके साथ ही दिल्ली में आज वायु गुणवत्ता संतोषजनक से मध्यम श्रेणी में पहुंच गई है।  

2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 09 जुलाई को दर्ज किया गया, जब एक्यूआई 48 रिकॉर्ड किया गया। इसी तरह 08 जुलाई 2026 को सूचकांक 59 और 06 सितम्बर को 55 रिकॉर्ड किया गया। वहीं 04 अगस्त और 22 जुलाई 2026 को सूचकांक 64  दर्ज हुआ। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।

दिल्ली के उलट फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में कमी आई है। फरीदाबाद में जहां कल एक्यूआई 94 रिकॉर्ड किया गया था, जो आज घटकर 73 दर्ज किया गया। मतबल की कल से वहां प्रदूषण में 21 अंकों का सुधार आया है। इसके साथ ही वहां वायु गुणवत्ता आज भी संतोषजनक श्रेणी में बनी हुई है।

प्रदूषण के बदलते समीकरण

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 31 अक्टूबर 2026 को 268 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 30.6 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 56.7 फीसदी में स्थिति संतोषजनक, जबकि दूसरी तरफ 12.7 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।

कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 3.8 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। इसी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 7 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। रुझानों के मुताबिक मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में कल से 14 फीसदी से अधिक की कमी आई है, जोकि राहत की खबर है। वहीं आज देश के चार शहरों में वायु गुणवत्ता खराब दर्ज की गई।

आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में खन्ना (221) दूसरे जबकि गुम्मिडीपूंडी (219) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह कैथल (207) चौथे स्थान पर है। लेह (198) – बर्नीहाट (मेघालय) (185) में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो पांचवें और छठे पायदान पर हैं।

श्री गंगानगर (180) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में हनुमानगढ़ (178), बीकानेर (176) और बल्लभगढ़ (169) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में राजस्थान के तीन शहर (श्री गंगानगर, हनुमानगढ़, बीकानेर) शामिल हैं।

विश्लेषण से यह भी पता चला है कि जालंधर, खन्ना, गुम्मिडीपूंडी, कैथल, श्री गंगानगर, हनुमानगढ़, लुधियाना, मंडी गोबिंदगढ़, सोनीपत, अंबाला, मुजफ्फरनगर, बागपत, पानीपत, यमुनानगर, बुलंदशहर, पटियाला, ग्रेटर नोएडा, दिल्ली, गाजियाबाद और नोएडा आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।

वहीं बर्नीहाट (मेघालय), बीकानेर, बल्लभगढ़, बद्दी, पीथमपुर, जैसलमेर, भिवंडी, अगरतला, अमृतसर, शामली, रायचूर और रामनगर आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।

इन शहरों के विपरीत देश के 30.6 फीसदी यानी 82 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में बक्सर, ब्यासनगर, चामराजनगर, दमोह, दरभंगा, देहरादून, धारूहेड़ा, धौलपुर, डूंगरपुर, गंगटोक, गया, गोपालगंज, हाजीपुर, हल्दिया, इंदौर, जमुई, झालावाड़, कलबुर्गी, कानपुर, करनाल, कारवार, कटनी, क्योंझर, किशनगंज, कोलकाता, कोरबा, कुंजेमुरा, लखनऊ, मधुबनी, मदिकेरी, मंगलौर, मिलुपारा, मोदीनगर, मुरादाबाद, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, नागपुर, नयागढ़, पलवल, पंचकूला, प्रयागराज, रायबरेली, राजगीर, राजसमंद, रतलाम, ऋषिकेश, राउरकेला, सागर, शिलांग, शिवमोगा आदि शामिल हैं।

इसी तरह देश के 152 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें छपरा, चिक्काबल्लापुर, चिक्कमगलुरु, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, चूरू, कटक, दौसा, दावणगेरे, देवास, धारवाड़, धुले, डोंबिवली, दुर्गापुर, एलूर, फरीदाबाद, फतेहपुर सीकरी, फिरोजाबाद, गडग, गांधीनगर, गोरखपुर, गुरुग्राम, गुवाहाटी, ग्वालियर, हापुड़, हिंगोली, हिसार, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, जबलपुर, जयपुर, जलगांव, जालना, जालौर, झांसी, झुंझुनू, जींद, जोधपुर, जोरापोखर, कल्याण, कन्नूर, करौली, कटिहार, खैरथल, खोरा, खुर्जा, किऊल, कोहिमा, कोल्हापुर, कोप्पल, कोटा, कुरनूल, कुरुक्षेत्र, लातूर, मछलीपट्टनम, महाड, मैहर, मालेगांव, मंडीदीप, मानेसर, मंगुराहा, मेरठ, मेहसाणा, मीरा-भायंदर, मोतिहारी, मुंबई, मैसूर, नागांव, नागौर, नाहरलागुन, नांदेड़, नारनौल, नासिक, नवी मुंबई, नेल्लोर, ओंगोल, पाली, पंपोर, पारादीप, परभणी, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रतापगढ़, पुडुचेरी, पुणे, पूर्णिया, रायपुर आदि शहर शामिल हैं।

इन शहरों के उलट आज देश के 30 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

इनमें अगरतला, अंबाला, अमृतसर, बद्दी, बागपत, बल्लभगढ़, भिवंडी, बीकानेर, बुलंदशहर, बर्नीहाट (मेघालय), दिल्ली, गजरौला, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, हनुमानगढ़, जैसलमेर, लेह, लुधियाना, मंडी गोबिंदगढ़, मुजफ्फरनगर, नोएडा, पानीपत, पटियाला, पीथमपुर, रायचूर, रामनगर, शामली, सोनीपत, श्री गंगानगर और यमुनानगर शामिल हैं।

वहीं चार शहरों जालंधर (224), खन्ना (221), गुम्मिडीपूंडी (219) और कैथल (207) में स्थिति खराब है।

क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 268 में से 82 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 152 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 30 अक्टूबर को यह आंकड़ा 142 दर्ज किया गया था।

30 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।

दूसरे शहरों की तुलना में आज जालंधर में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 224 दर्ज किया गया, जोकि ‘खराब’ श्रेणी में आता है। हालांकि कल (30 अक्टूबर) को जालंधर में सूचकांक 90 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 134 अंकों का भारी उछाल आया है।

इससे पहले कल बीकानेर में एक्यूआई 196 दर्ज किया गया था। हालांकि आज 20 अंकों के सुधार के साथ बीकानेर में सूचकांक घटकर 176 पर पहुंच गया। मतलब कि सुधार के बावजूद वहां वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है। 

दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 60 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 117 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक में 57 अंकों का उछाल आया है। इसके साथ ही दिल्ली में आज वायु गुणवत्ता संतोषजनक से मध्यम श्रेणी में पहुंच गई है।

दिल्ली के उलट फरीदाबाद में कल से प्रदूषण में कमी आई है। फरीदाबाद में जहां कल एक्यूआई 94 रिकॉर्ड किया गया था, जो आज घटकर 73 दर्ज किया गया। मतबल की कल से वहां प्रदूषण में 21 अंकों का सुधार आया है। इसके साथ ही वहां वायु गुणवत्ता आज भी संतोषजनक श्रेणी में बनी हुई है।

प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 31 अक्टूबर को कैथल (207) चौथे स्थान पर है, वहीं खन्ना (221) दूसरे, जबकि गुम्मिडीपूंडी (219) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 69, गाजियाबाद में 110, गुवाहाटी में 64, गुरूग्राम में 88, नोएडा में 106, ग्रेटर नोएडा में 120 पर पहुंच गया है।

इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 64 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘संतोषजनक‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 43, चेन्नई में 83, चंडीगढ़ में 68, हैदराबाद में 59, जयपुर में 81 और पटना में 63 दर्ज किया गया।

इन शहरों में साफ रही हवा

देश के जिन 82 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा। इन शहरों में आइजोल, अजमेर, अकोला, अमरावती (महाराष्ट्र), आसनसोल, औरंगाबाद (बिहार), बदलापुर, बालासोर, बारबिल, बरेली, बारीपाड़ा, बैरकपुर, बीड, बेगूसराय, बेतिया, भागलपुर, भिलाई, भिवानी, भुवनेश्वर, बिलीपाड़ा, ब्रजराजनगर, बक्सर, ब्यासनगर, चामराजनगर, दमोह, दरभंगा, देहरादून, धारूहेड़ा, धौलपुर, डूंगरपुर, गंगटोक, गया, गोपालगंज, हाजीपुर, हल्दिया, इंदौर, जमुई, झालावाड़, कलबुर्गी, कानपुर, करनाल, कारवार, कटनी, क्योंझर, किशनगंज, कोलकाता, कोरबा, कुंजेमुरा, लखनऊ, मधुबनी, मदिकेरी, मंगलौर, मिलुपारा, मोदीनगर, मुरादाबाद, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, नागपुर, नयागढ़, पलवल, पंचकूला, प्रयागराज, रायबरेली, राजगीर, राजसमंद, रतलाम, ऋषिकेश, राउरकेला, सागर, शिलांग, शिवमोगा, सिलीगुड़ी, सिरोही, सीतामढ़ी, श्रीनगर, सुआकाती, तालचेर, थूथुकुडी, तुमडीह, वाराणसी, विजयपुरा और वृंदावन शामिल हैं।

वहीं आगरा, अहमदाबाद, अहमदनगर, अलवर, अमरावती (आंध्र प्रदेश), अंबरनाथ, अनंतपुर, अंगुल, अंकलेश्वर, अनपरा, अररिया, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बागलकोट, बहादुरगढ़, बारां, बड़ौत, बाड़मेर, बठिंडा, बेलापुर, बेंगलुरु, भरतपुर, भावनगर, भीलवाड़ा, भिवाड़ी, भोपाल, बोइसर, बूंदी, बर्नीहाट (असम), चंडीगढ़, चंद्रपुर, चरखी दादरी, चेन्नई, छाल, छपरा, चिक्काबल्लापुर, चिक्कमगलुरु, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, चूरू, कटक, दौसा, दावणगेरे, देवास, धारवाड़, धुले, डोंबिवली, दुर्गापुर, एलूर, फरीदाबाद, फतेहपुर सीकरी, फिरोजाबाद, गडग, गांधीनगर, गोरखपुर, गुरुग्राम, गुवाहाटी, ग्वालियर, हापुड़, हिंगोली, हिसार, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, जबलपुर, जयपुर, जलगांव, जालना, जालौर, झांसी, झुंझुनू, जींद, जोधपुर, जोरापोखर, कल्याण, कन्नूर, करौली, कटिहार, खैरथल, खोरा, खुर्जा, किऊल, कोहिमा, कोल्हापुर, कोप्पल, कोटा, कुरनूल, कुरुक्षेत्र, लातूर, मछलीपट्टनम, महाड, मैहर, मालेगांव, मंडीदीप, मानेसर, मंगुराहा, मेरठ, मेहसाणा, मीरा-भायंदर, मोतिहारी, मुंबई, मैसूर, नागांव, नागौर, नाहरलागुन, नांदेड़, नारनौल, नासिक, नवी मुंबई, नेल्लोर, ओंगोल, पाली, पंपोर, पारादीप, परभणी, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रतापगढ़, पुडुचेरी, पुणे, पूर्णिया, रायपुर, राजमहेंद्रवरम, राजकोट, रोहतक, सांगली, सतारा, सतना, सवाई माधोपुर, सीकर, सिलचर, सिंगरौली, सिरसा, शिवसागर, सिवान, सोलापुर, श्रीकाकुलम, सूरत, ठाणे, तिरुवनंतपुरम, त्रिशूर, तिरुमाला, तिरुपति, टोंक, उडुपी, उज्जैन, उल्हासनगर, वडोदरा, वातवा, विजयवाड़ा, विरार, विशाखापत्तनम और यादगीर आदि 152 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।

क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक

देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।

इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।

यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।

ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।

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