

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) द्वारा 30 जुलाई 2026 को जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि देश में वायु गुणवत्ता का परिदृश्य एक बार फिर तेजी से बदल रहा है।
राजस्थान का बांसवाड़ा लगातार सबसे प्रदूषित शहर बना हुआ है, जहां एक्यूआई 257 दर्ज किया गया। यह पिछले 24 घंटों में 175 से बढ़कर 257 पहुंच गया, यानी 82 अंकों की तेज छलांग लगाई है। यहां पीएम10 कणों का दबदबा है और प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से करीब 470 फीसदी अधिक है।
इसके विपरीत कर्नाटक का मदिकेरी महज 13 एक्यूआई के साथ देश का सबसे साफ शहर रहा, जिससे दोनों शहरों की हवा की गुणवत्ता में लगभग 20 गुणा का अंतर देखा गया।
राजधानी दिल्ली का एक्यूआई भी 96 से बढ़कर 107 और फरीदाबाद का 96 से 100 हो गया, जिससे दिल्ली मध्यम श्रेणी में पहुंच गई।
हालांकि देश के 247 शहरों में से 90 शहरों की हवा साफ और 123 शहरों की संतोषजनक रही, लेकिन मध्यम और खराब श्रेणी वाले शहरों की संख्या में बढ़ोतरी चिंता का संकेत है। खास तौर पर राजस्थान के पांच शहर देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल रहे, जो क्षेत्रीय स्तर पर बढ़ते प्रदूषण की गंभीर तस्वीर पेश करता है।
सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 30 जुलाई 2026 को देश में एक बार फिर बांसवाड़ा सबसे प्रदूषित रहा। इस दौरान वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 257 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। इससे पहले कल (29 जुलाई) को बांसवाड़ा में एक्यूआई 175 दर्ज किया गया था। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां प्रदूषण के स्तर में 82 अंकों का भारी उछाल आया है।
रुझानों में यह भी सामने आया है कि बांसवाड़ा की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम10) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।
बांसवाड़ा में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 470 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में मदिकेरी की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 13 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहरों बांसवाड़ा की तुलना मदिकेरी से करें तो वहां स्थिति 19.7 गुणा खराब है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 96 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 107 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता में 11 अंकों का उछाल आया है। इसके साथ ही दिल्ली में आज वायु गुणवत्ता संतोषजनक से मध्यम श्रेणी में पहुंच गई।
2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 29 जुलाई को दर्ज किया गया, जब एक्यूआई 48 रिकॉर्ड किया गया। इसी तरह 12 जून 2026 को सूचकांक 73 और 30 मई को 85 रिकॉर्ड किया गया। वहीं 05 मई को सूचकांक 86, जबकि 04 मई को 88 दर्ज हुआ। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 96 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 100 पर पहुंच गया। इसके साथ ही 4 अंकों के उछाल के बावजूद फरीदाबाद में आज भी वायु गुणवत्ता संतोषजनक बनी हुई है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 30 जुलाई 2026 को 247 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 36.4 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 49.8 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 13.8 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।
कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 19.6 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। दूसरी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों में भी 9.8 फीसदी की वृद्धि देखी गई। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में भी कल से 26.9 फीसदी का इजाफा हुआ है, जोकि चिंता का विषय है।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में गुरुग्राम (188) दूसरे जबकि भीलवाड़ा (179) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह श्री गंगानगर (178) चौथे स्थान पर है। चरखी दादरी (174) – ग्रेटर नोएडा (157) में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
पाली (148) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में खोरा (147), सीकर (140) और गांधीनगर (130) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में राजस्थान के पांच शहर (बांसवाड़ा, भीलवाड़ा, श्री गंगानगर, पाली और सीकर) शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि गुरुग्राम, चरखी दादरी, खोरा, गुम्मिडीपूंडी, बर्नीहाट (मेघालय) आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं। वहीं बांसवाड़ा, भीलवाड़ा, श्री गंगानगर, ग्रेटर नोएडा, पाली, सीकर, गांधीनगर, पानीपत, बद्दी, धौलपुर, वातवा, बागपत, अहमदाबाद, चित्तौड़गढ़, जालोर, विशाखापत्तनम, जोधपुर, दिल्ली, फतेहाबाद, बीकानेर, नोएडा, अजमेर, नागौर, पीथमपुर आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 36.4 फीसदी यानी 90 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में कटक, दमोह, देहरादून, डोंबिवली, दुर्गापुर, फतेहपुर सीकरी, फिरोजाबाद, गुंटूर, गुवाहाटी, ग्वालियर, हाजीपुर, हल्दिया, हिंगोली, हावड़ा, हुबली, जलगांव, जलना, झालावाड़, झांसी, कलबुर्गी, कन्नूर, कानपुर, करौली, कारवार, क्योंझर, किशनगंज, कोल्हापुर, कोलकाता, कोरबा, कोटा, कुंजेमुरा, मछलीपट्टनम, मदिकेरी, मिलुपारा, मीरा-भायंदर, मुजफ्फरपुर, नागपुर, नांदेड़, पंचगांव, पंचकुला, परभणी, पटियाला, पुडुचेरी, रायबरेली, रायपुर, रायरंगपुर, रामनगर आदि शामिल हैं।
इसी तरह देश के 123 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें भागलपुर, भावनगर, भिवाड़ी, भिवानी, बिलासपुर, बिलीपाड़ा, बोइसर, बुलंदशहर, चंद्रपुर, चेन्नई, छाल, छपरा, चिक्काबल्लापुर, चित्तूर, चूरू, दौसा, देवास, धारूहेड़ा, धारवाड़, धुले, डूंगरपुर, एलुरु, फरीदाबाद, गजरौला, गया, गाजियाबाद, हनुमानगढ़, हापुड़, हिसार, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जयपुर, जैसलमेर, जालंधर, जोरापोखर, कडप्पा, कैथल, काकीनाडा, कल्याण, कटिहार, कटनी, खन्ना, खुर्जा, कोहिमा, कुरुक्षेत्र, लातूर, लखनऊ, लुधियाना, महाद, मैहर, मंडीदीप, मंडी गोबिंदगढ़, मंडीखेड़ा, मानेसर, मथुरा, मेरठ, मेहसाणा, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुंबई, मुजफ्फरनगर, मैसूरु, नागांव, नंदेसरी, नारनौल, नासिक, नवी मुंबई, नेल्लोर, पलवल, पंपोर, पटना आदि शहर शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 33 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इनमें अहमदाबाद, अजमेर, बद्दी, बागपत, भीलवाड़ा, बीकानेर, बर्नीहाट (मेघालय), चरखी दादरी, चित्तौड़गढ़, दिल्ली, धनबाद, धौलपुर, फतेहाबाद, गांधीनगर, ग्रेटर नोएडा, गुम्मिडीपूंडी, गुरुग्राम, जालोर, झुंझुनू, जोधपुर, करनाल, खोरा, नागौर, नोएडा, पाली, पानीपत, पीथमपुर, सीकर, सिलीगुड़ी, श्री गंगानगर, टेन्सा, वातवा, विशाखापत्तनम आदि शामिल हैं। वहीं बांसवाड़ा (257) में स्थिति 'खराब' है।
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 247 में से 90 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 123 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 29 जुलाई को यह आंकड़ा 112 दर्ज किया गया था।
33 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज एक बार फिर बांसवाड़ा में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 257 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (29 जुलाई) को बांसवाड़ा में एक्यूआई 175 दर्ज किया गया था। मतलब कि पिछले 24 घंटों में वहां प्रदूषण के स्तर में 82 अंकों का भारी उछाल आया है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 96 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 107 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता में 11 अंकों का उछाल आया है। इसके साथ ही दिल्ली में आज वायु गुणवत्ता संतोषजनक से मध्यम श्रेणी में पहुंच गई।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 96 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 100 पर पहुंच गया। इसके साथ ही 4 अंकों के उछाल के बावजूद फरीदाबाद में आज भी वायु गुणवत्ता संतोषजनक बनी हुई है।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 30 जुलाई को श्री गंगानगर (178) चौथे स्थान पर है, वहीं गुरुग्राम (188) दूसरे, जबकि भीलवाड़ा (179) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 50, गाजियाबाद में 90, गुवाहाटी में 49, गुरूग्राम में 188, नोएडा में 104, ग्रेटर नोएडा में 157 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 62 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘संतोषजनक‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 61, चेन्नई में 87, चंडीगढ़ में 43, हैदराबाद में 52, जयपुर में 97 और पटना में 56 दर्ज किया गया।
इन शहरों में साफ रही हवा
देश के जिन 90 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें अगरतला, आइजोल, अकोला, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अमरावती (महाराष्ट्र), अररिया, आसनसोल, बदलापुर, बालासोर, बारबिल, बरेली, बारीपाड़ा, बैरकपुर, बेतिया, भरतपुर, भिलाई, भिवंडी, भोपाल, भुवनेश्वर, ब्रजराजनगर, बूंदी, ब्यासनगर, चामराजनगर, चंडीगढ़, चिक्कमगलुरु, कुड्डालोर, कटक, दमोह, देहरादून, डोंबिवली, दुर्गापुर, फतेहपुर सीकरी, फिरोजाबाद, गुंटूर, गुवाहाटी, ग्वालियर, हाजीपुर, हल्दिया, हिंगोली, हावड़ा, हुबली, जलगांव, जलना, झालावाड़, झांसी, कलबुर्गी, कन्नूर, कानपुर, करौली, कारवार, क्योंझर, किशनगंज, कोल्हापुर, कोलकाता, कोरबा, कोटा, कुंजेमुरा, मछलीपट्टनम, मदिकेरी, मिलुपारा, मीरा-भायंदर, मुजफ्फरपुर, नागपुर, नांदेड़, पंचगांव, पंचकुला, परभणी, पटियाला, पुडुचेरी, रायबरेली, रायपुर, रायरंगपुर, रामनगर, रतलाम, ऋषिकेश, राउरकेला, सहरसा, समस्तीपुर, सांगली, सवाई माधोपुर, शिलांग, सिलचर, सिंगरौली, त्रिशूर, तुमडीह, वापी, वाराणसी, विजयपुरा, विरार, वृंदावन शामिल हैं।
वहीं आगरा, अहमदनगर, अलवर, अंबाला, अंबरनाथ, अमृतसर, अनंतपुर, अंगुल, अंकलेश्वर, आरा, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बागलकोट, बहादुरगढ़, बल्लभगढ़, बारां, बाड़मेर, बठिंडा, बेगूसराय, बेलापुर, बेंगलुरु, भागलपुर, भावनगर, भिवाड़ी, भिवानी, बिलासपुर, बिलीपाड़ा, बोइसर, बुलंदशहर, चंद्रपुर, चेन्नई, छाल, छपरा, चिक्काबल्लापुर, चित्तूर, चूरू, दौसा, देवास, धारूहेड़ा, धारवाड़, धुले, डूंगरपुर, एलुरु, फरीदाबाद, गजरौला, गया, गाजियाबाद, हनुमानगढ़, हापुड़, हिसार, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जयपुर, जैसलमेर, जालंधर, जोरापोखर, कडप्पा, कैथल, काकीनाडा, कल्याण, कटिहार, कटनी, खन्ना, खुर्जा, कोहिमा, कुरुक्षेत्र, लातूर, लखनऊ, लुधियाना, महाद, मैहर, मंडीदीप, मंडी गोबिंदगढ़, मंडीखेड़ा, मानेसर, मथुरा, मेरठ, मेहसाणा, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुंबई, मुजफ्फरनगर, मैसूरु, नागांव, नंदेसरी, नारनौल, नासिक, नवी मुंबई, नेल्लोर, पलवल, पंपोर, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुणे, पूर्णिया, राजमहेंद्रवरम, राजकोट, राजसमंद, रोहतक, सागर, सतारा, सतना, शामली, सिरोही, सिरसा, सोलापुर, श्रीनगर, सूरत, तालचेर, ठाणे, तिरुवनंतपुरम, थूथुकुडी, तिरुमाला, टोंक, तुमकुरु, उदयपुर, उज्जैन, उल्हासनगर, वडोदरा, विजयवाड़ा, यमुना नगर आदि 123 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
देश में वायु गुणवत्ता की ताजा जानकारी आप डाउन टू अर्थ के एयर क्वालिटी ट्रैकर से प्राप्त कर सकते हैं