

12 अक्टूबर 2026 को देश के 261 शहरों की हवा में कहीं प्रदूषण का दबाव बना रहा, तो कहीं लोगों को राहत की सांस मिली।
सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण के मुताबिक, गुम्मिडीपूंडी 198 के वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) के साथ देश का सबसे प्रदूषित शहर रहा। हालांकि, यहां एक दिन पहले के मुकाबले एक्यूआई में 29 अंकों का सुधार दर्ज किया गया, लेकिन हवा में पीएम2.5 का बढ़ा स्तर अब भी चिंता का विषय है।
इसके उलट, गंगटोक महज 21 के एक्यूआई के साथ देश का सबसे साफ हवा वाला शहर रहा।
राजधानी दिल्ली में हवा की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार हुआ। यहां एक्यूआई 111 से गिरकर 83 पर आ गया, जिससे वायु गुणवत्ता मध्यम से संतोषजनक श्रेणी में पहुंच गई। फरीदाबाद में भी एक्यूआई 109 से घटकर 105 दर्ज किया गया, हालांकि वहां हवा अब भी मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
देशभर के आंकड़े भी राहत और चिंता, दोनों की तस्वीर दिखाते हैं। कुल 261 शहरों में से 30 में हवा साफ, 166 में संतोषजनक और 65 में मध्यम श्रेणी में दर्ज की गई। अच्छी बात यह रही कि किसी भी शहर में हवा खराब श्रेणी में नहीं पहुंची।
वहीं, मालेगांव, मंडीदीप और सतारा जैसे शहरों में प्रदूषण का स्तर चिंता का विषय बना रहा। कई शहरों में पीएम2.5 और पीएम10 की मौजूदगी हवा की गुणवत्ता को प्रभावित कर रही है।
ये आंकड़े बताते हैं कि हवा की स्थिति में सुधार के संकेत जरूर हैं, लेकिन प्रदूषण का खतरा अभी टला नहीं है। शहरों के बीच वायु गुणवत्ता में बड़ा अंतर इस बात की याद दिलाता है कि स्वच्छ हवा सुनिश्चित करने के लिए लगातार निगरानी और प्रभावी कदम उठाना जरूरी है।
सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 12 अक्टूबर 2026 को देश में एक बार फिर गुम्मिडीपूंडी सबसे प्रदूषित शहर रहा। इस दौरान वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 198 दर्ज किया गया, जो ‘मध्यम’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (11 अक्टूबर) को गुम्मिडीपूंडी में सूचकांक 227 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 29 अंकों का सुधार आया है।
रुझानों में यह भी सामने आया है कि गुम्मिडीपूंडी की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।
गुम्मिडीपूंडी में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 1,200 फीसदी अधिक है।
दूसरी तरफ देश में गंगटोक की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 21 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर गुम्मिडीपूंडी की तुलना गंगटोक से करें तो वहां स्थिति 9.4 गुणा खराब है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 111 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 83 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक में 28 अंकों का सुधार दर्ज किया गया। इसके साथ ही दिल्ली में आज वायु गुणवत्ता मध्यम से संतोषजनक श्रेणी में पहुंच गई है।
2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 09 जुलाई को दर्ज किया गया, जब एक्यूआई 48 रिकॉर्ड किया गया। इसी तरह 08 जुलाई 2026 को सूचकांक 59 और 06 सितम्बर को 55 रिकॉर्ड किया गया। वहीं 04 अगस्त और 22 जुलाई 2026 को सूचकांक 64 दर्ज हुआ। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में कमी आई है। फरीदाबाद में जहां कल एक्यूआई 109 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 105 दर्ज किया गया। मतबल की कल से वहां प्रदूषण में 4 अंकों का सुधार आया है। इसके साथ ही वहां आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 12 अक्टूबर 2026 को 261 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 11.5 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 63.6 फीसदी में स्थिति संतोषजनक, जबकि दूसरी तरफ 24.9 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।
कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 3.2 फीसदी की गिरावट आई है। दूसरी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 6.4 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। रुझानों के मुताबिक मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में कल से 8.5 फीसदी की कमी आई, जोकि राहत की खबर है। वहीं आज एक भी शहर में वायु गुणवत्ता खराब नहीं दर्ज की गई।
आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में मालेगांव (171) दूसरे जबकि मंडीदीप तीसरे स्थान पर है। इसी तरह सतारा (151) चौथे स्थान पर है। पीथमपुर (150) – भावनगर (149) में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो पांचवें और छठे पायदान पर हैं।
पारादीप (148) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में सासाराम (144), चुरू (143) और अगरतला (139) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में महाराष्ट्र के दो शहर (मालेगांव, सतारा) शामिल हैं।
विश्लेषण से यह भी पता चला है कि गुम्मिडीपूंडी, मंडीदीप, हिंगोली, नागपुर, हावड़ा, अहमदाबाद, कोटा, अररिया, वाराणसी, पुणे, सोनीपत, गांधीनगर, चित्तूर, जलगांव, जोधपुर, कोलकाता, मेहसाणा और हाजीपुर आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।
वहीं सतारा, पीथमपुर, भावनगर, पारादीप, सासाराम, अगरतला, नागौर, पिंपरी-चिंचवाड़, सीकर, वातवा, जैसलमेर, सवाई माधोपुर, बीकानेर, बूंदी, जोरापोखर, टोंक, अंकलेश्वर, ब्रजराजनगर, गुरुग्राम, फतेहपुर सीकरी, भरतपुर, चित्तौड़गढ़, जलना, काकीनाडा, महाद, अंगुल, फरीदाबाद, झुंझुनू, राजकोट, बेलापुर, छपरा, भोपाल, चंद्रपुर, उदयपुर, गोरखपुर, राजमहेंद्रवरम, विशाखापत्तनम और सूरत आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।
इन शहरों के विपरीत देश के 11.5 फीसदी यानी 30 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में देहरादून, फिरोजाबाद, गडग, गंगटोक, हनुमानगढ़, हावेरी, कैथल, कलबुर्गी, कोप्पल, कोरबा, कुरनूल, मदिकेरी, मंडीखेड़ा, मिलुपारा, मुरादाबाद, मुजफ्फरनगर, पंचकूला, पटियाला, ऋषिकेश, शामली, तिरुवनंतपुरम और विजयपुरा आदि शामिल हैं।
इसी तरह देश के 166 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, बिलासपुर, बिलीपाड़ा, बोइसर, बुलंदशहर, बर्नीहाट (असम), चेन्नई, छाल, कटक, दमोह, दौसा, दिल्ली, धारूहेड़ा, धारवाड़, धौलपुर, धुले, डोंबिवली, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलुरु, फतेहाबाद, गया, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुंटूर, गुवाहाटी, ग्वालियर, हल्दिया, हिसार, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जालंधर, जालोर, झालावाड़, झांसी, जींद, कडप्पा, कल्याण, कानपुर, करौली, करनाल, कारवार, कटिहार, क्योंझर, खैरथल, खन्ना, खोरा, खुर्जा, किशनगंज, कोहिमा, कोलार, कोल्हापुर, कुंजेमुरा, कुरुक्षेत्र, लातूर, लेह, लखनऊ, लुधियाना, मैहर, मानेसर, मंगलौर, मंगुराहा, मथुरा, मेरठ, मीरा-भायंदर, मोतिहारी, मुंबई, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, मैसूरु, नागांव, नलबाड़ी, नांदेड़, नारनौल, नासिक, नवी मुंबई, नयागढ़, नोएडा, पाली, पलवल, पंचगांव, परभणी, पटना, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुडुचेरी, पूर्णिया, रायबरेली, रायचूर, रायपुर, रायरंगपुर, राजगीर, राजसमंद, रतलाम, रोहतक, राउरकेला, रूपनगर, सागर, सहरसा, सांगली आदि शहर शामिल हैं।
इन शहरों के उलट आज देश के 65 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।
इनमें अगरतला, अहमदाबाद, अंगुल, अंकलेश्वर, अररिया, बेलापुर, भरतपुर, भावनगर, भोपाल, बीकानेर, ब्रजराजनगर, बूंदी, ब्यासनगर, चंद्रपुर, छपरा, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, चुरू, देवास, धनबाद, फरीदाबाद, फतेहपुर सीकरी, गजरौला, गांधीनगर, गोरखपुर, गुम्मिडीपूंडी, गुरुग्राम, हाजीपुर, हिंगोली, हावड़ा, जयपुर, जैसलमेर, जलगांव, जलना, झुंझुनू, जोधपुर, जोरापोखर, काकीनाडा, कोलकाता, कोटा, महाद, मालेगांव, मंडीदीप, मेहसाणा, नागौर, नागपुर, नंदेसरी, पारादीप, पिंपरी-चिंचवाड़, पीथमपुर, पुणे, राजमहेंद्रवरम, राजकोट, सासाराम, सतारा, सवाई माधोपुर, सीकर, सोनीपत, सूरत, टोंक, उदयपुर, वाराणसी, वातवा, विशाखापत्तनम और वृंदावन शामिल हैं।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 261 में से 30 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 166 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 11 अक्टूबर को यह आंकड़ा 156 दर्ज किया गया था।
65 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।
दूसरे शहरों की तुलना में आज एक बार फिर गुम्मिडीपूंडी में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 198 दर्ज किया गया, जोकि ‘मध्यम’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (11 अक्टूबर) को गुम्मिडीपूंडी में सूचकांक 227 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 29 अंकों का सुधार आया है।
दिल्ली में कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 111 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 83 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक में 28 अंकों का सुधार दर्ज किया गया। इसके साथ ही दिल्ली में आज वायु गुणवत्ता मध्यम से संतोषजनक श्रेणी में पहुंच गई है।
दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में कमी आई है। फरीदाबाद में जहां कल एक्यूआई 109 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 105 दर्ज किया गया। मतबल की कल से वहां प्रदूषण में 4 अंकों का सुधार आया है। इसके साथ ही वहां आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।
प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 12 अक्टूबर को सतारा (151) चौथे स्थान पर है, वहीं मालेगांव (171) दूसरे, जबकि मंडीदीप तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 96, गाजियाबाद में 75, गुवाहाटी में 75, गुरूग्राम में 116, नोएडा में 74, ग्रेटर नोएडा में 86 पर पहुंच गया है।
इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 81 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘संतोषजनक‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 66, चेन्नई में 87, चंडीगढ़ में 36, हैदराबाद में 69, जयपुर में 113 और पटना में 82 दर्ज किया गया।
देश के जिन 30 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा। इन शहरों में आइजोल, बागपत, बेतिया, बक्सर, चामराजनगर, चंडीगढ़, चरखी दादरी, चिक्कमगलुरु, देहरादून, फिरोजाबाद, गडग, गंगटोक, हनुमानगढ़, हावेरी, कैथल, कलबुर्गी, कोप्पल, कोरबा, कुरनूल, मदिकेरी, मंडीखेड़ा, मिलुपारा, मुरादाबाद, मुजफ्फरनगर, पंचकूला, पटियाला, ऋषिकेश, शामली, तिरुवनंतपुरम और विजयपुरा शामिल हैं।
वहीं आगरा, अहमदनगर, अजमेर, अकोला, अलवर, अमरावती (आंध्रप्रदेश), अंबाला, अंबरनाथ, अमरावती (महाराष्ट्र), अमृतसर, आरा, आसनसोल, औरंगाबाद (बिहार), औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बद्दी, बदलापुर, बहादुरगढ़, बालासोर, बल्लभगढ़, बांसवाड़ा, बारां, बड़ौत, बारबिल, बरेली, बारीपदा, बाड़मेर, बैरकपुर, बठिंडा, बीड, बेंगलुरु, भागलपुर, भिलाई, भीलवाड़ा, भिवाड़ी, भिवंडी, भिवानी, भुवनेश्वर, बिहार शरीफ, बिलासपुर, बिलीपाड़ा, बोइसर, बुलंदशहर, बर्नीहाट (असम), चेन्नई, छाल, कटक, दमोह, दौसा, दिल्ली, धारूहेड़ा, धारवाड़, धौलपुर, धुले, डोंबिवली, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलुरु, फतेहाबाद, गया, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुंटूर, गुवाहाटी, ग्वालियर, हल्दिया, हिसार, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जालंधर, जालोर, झालावाड़, झांसी, जींद, कडप्पा, कल्याण, कानपुर, करौली, करनाल, कारवार, कटिहार, क्योंझर, खैरथल, खन्ना, खोरा, खुर्जा, किशनगंज, कोहिमा, कोलार, कोल्हापुर, कुंजेमुरा, कुरुक्षेत्र, लातूर, लेह, लखनऊ, लुधियाना, मैहर, मानेसर, मंगलौर, मंगुराहा, मथुरा, मेरठ, मीरा-भायंदर, मोतिहारी, मुंबई, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, मैसूरु, नागांव, नलबाड़ी, नांदेड़, नारनौल, नासिक, नवी मुंबई, नयागढ़, नोएडा, पाली, पलवल, पंचगांव, परभणी, पटना, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुडुचेरी, पूर्णिया, रायबरेली, रायचूर, रायपुर, रायरंगपुर, राजगीर, राजसमंद, रतलाम, रोहतक, राउरकेला, रूपनगर, सागर, सहरसा, सांगली, सतना, शिलांग, शिवमोगा, सिलचर, सिरोही, सिरसा, शिवसागर, सिवान, सोलापुर, श्री गंगानगर, श्रीनगर, सुआकाती, टेन्सा, ठाणे, थूथुकुडी, त्रिशूर, तिरुमाला, तिरुपति, तुमडीह, उज्जैन, उल्हासनगर, वडोदरा, वापी, विजयवाड़ा, विरार, यादगीर और यमुना नगर आदि 166 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।
देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।
इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।
यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।
ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।
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