बड़े शहरों तक सीमित नहीं प्रदूषण: बिहार के औरंगाबाद में 382 पर पहुंचा एक्यूआई

औरंगाबाद की हवा में ओजोन पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है
देश के कई शहरों  में वायु गुणवत्ता न केवल इंसानों बल्कि दूसरे जीवों के लिए भी सुरक्षित नहीं है; फोटो: सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई)
देश के कई शहरों में वायु गुणवत्ता न केवल इंसानों बल्कि दूसरे जीवों के लिए भी सुरक्षित नहीं है; फोटो: सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई)
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सारांश
  • देश में वायु प्रदूषण अब सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि छोटे शहर भी तेजी से इसकी चपेट में आ रहे हैं।

  • 24 मार्च 2026 को बिहार के औरंगाबाद में एक्यूआई 102 अंकों से छलांग लगाकर 382 तक पहुंच गया, यानी महज 24 घंटे में 280 अंकों का खतरनाक उछाल दर्ज किया गया। इसके साथ ही वहां वायु गुणवत्ता बेहद खराब’ श्रेणी में पहुंच गई है।

  • चिंता की बात है कि ओजोन के प्रभुत्व ने हालात और गंभीर बना दिए हैं, जहां प्रदूषण स्तर सुरक्षित सीमा से 500 फीसदी अधिक दर्ज किया गया।

  • इसके उलट श्रीनगर में एक्यूआई 25 के साथ सबसे साफ हवा रही, जिससे दोनों शहरों के बीच 15 गुना का अंतर सामने आया।

  • आंकड़े बताते हैं कि देश के 250 में से महज 9.2 फीसदी शहरों में ही हवा साफ है, जबकि एक-तिहाई शहरों में हालात चिंताजनक हैं और खराब हवा वाले शहरों की संख्या में एक दिन में 100 फीसदी का उछाल दर्ज किया गया, जो संकेत है कि प्रदूषण का संकट तेजी से फैलता जा रहा है।

विश्लेषण के मुताबिक 24 मार्च 2026 को देश में बिहार का औरंगाबाद शहर सबसे अधिक प्रदूषित शहर रहा। यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 382 दर्ज किया गया, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है। गौरतलब है कि कल बिहार के इस शहर में वायु गुणवत्ता सूचकांक 102 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 280 अंकों का भारी उछाल आया है। 

रुझानों में सामने आया है कि औरंगाबाद की हवा में ओजोन पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है। औरंगाबाद में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 500 फीसदी अधिक है।

दूसरी तरफ देश में श्रीनगर की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 25 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर औरंगाबाद की तुलना श्रीनगर से करें तो वहां स्थिति 15 गुणा खराब है।

राजधानी दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 132 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 192 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में सूचकांक में 60 अंकों की वृद्धि दर्ज की गई। हालांकि दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।

दिल्ली की तरफ ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में इजाफा हुआ है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 180 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 201 पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता आज मध्यम से खराब श्रेणी में पहुंच गई है।     

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 24 मार्च 2026 को 250 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां महज 9.2 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 57.2 फीसदी में स्थिति संतोषजनक बनी हुई है, जबकि दूसरी तरफ 33.6 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।

बता दें कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 14.8 फीसदी की गिरावट आई है। दूसरी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 11.7 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की बात करें तो इनकी संख्या में भी कल से करीब 7.1 फीसदी का इजाफा हुआ है। खराब हवा वाले शहरों में कल से 100 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है, जोकि चिंता का विषय है।   

आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में ग्रेटर नोएडा (263) दूसरे जबकि बल्लभगढ़ (246) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह गाजियाबाद (227) चौथे स्थान पर है। गुरुग्राम-बारबिल में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो 224 और 220 अंकों के साथ पांचवें और छठे पायदान पर हैं।

नोएडा (218) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में हाजीपुर (209), फरीदाबाद (201) और सिंगरौली (200) भी शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में हरियाणा के तीन शहर (बल्लभगढ़, फरीदाबाद, गुरुग्राम) शामिल हैं।

विश्लेषण से यह भी पता चला है कि गाजियाबाद, गुरुग्राम, नोएडा, हाजीपुर, फरीदाबाद, अगरतला, रोहतक, मेरठ, वातवा, मुजफ्फरनगर, सोनीपत, महाड, बागपत, भिवाड़ी, बिलीपाड़ा, हापुड़, नंदेसरी, बर्नीहाट, पटना, कैथल, बेलापुर, चरखी दादरी, मानेसर, अररिया, नवी मुंबई, नारनौल, यमुना नगर, कोरबा, नलबाड़ी, गया, गुम्मिडीपूंडी, बेंगलुरु, करनाल, धारूहेड़ा, जयपुर आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।

वहीं ग्रेटर नोएडा, बल्लभगढ़, सिंगरौली, दिल्ली, बद्दी, नयागढ़, बीकानेर, सिरसा, भावनगर, धनबाद, बुलंदशहर, पीथमपुर, सवाई माधोपुर, भिवंडी, उल्हासनगर, कल्याण, टोंक, कुरुक्षेत्र, मालेगांव, मंडीदीप, ब्रजराजनगर, लुधियाना, पाली, नागपुर, मीरा-भायंदर, बदलापुर, सहरसा, अंकलेश्वर, आगरा, भोपाल, देवास, पुणे, सुआकाती, श्री गंगानगर, दौसा, नागौर, हिसार, मेहसाणा आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।

इन शहरों के विपरीत देश के 9.2 फीसदी यानी महज 23 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में चेन्नई, एलुरु, कलबुर्गी, कोहिमा, कोप्पल, मदिकेरी, नागांव, नाहरलागुन, नेल्लोर, पंपोर, पेरुंदुरई, पुदुचेरी, राजमहेंद्रवरम, राजगीर, शिवमोगा आदि शामिल हैं। 

आज देश के जिन 143 शहरों में वायु गुणवत्ता सन्तोषजनक है, उनमें बेगूसराय, भागलपुर, भीलवाड़ा, भिवानी, भुवनेश्वर, बीदर, बिहार शरीफ, बिलासपुर, बोइसर, बूंदी, बक्सर, चंडीगढ़, छाल, चिक्काबल्लापुर, चिक्कमगलुरु, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, चूरू, कटक, देहरादून, धौलपुर, धुले, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलूर, फतेहाबाद, फिरोजाबाद, गांधीनगर, गोरखपुर, गुंटूर, गुवाहाटी, हल्दिया, हनुमानगढ़, हावड़ा, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जैसलमेर, जालंधर, जलगांव, जलना, जालोर, झालावाड़, झांसी, झुंझुनू, जींद, जोधपुर, कडप्पा, कन्नूर, कानपुर, करौली, कटिहार, कटनी, क्योंझर, खन्ना, खुर्जा, किशनगंज, कोल्हापुर, कोलकाता, कोल्लम, कुंजेमुरा, लातूर, लखनऊ, मछलीपट्टनम, मैहर, मंडी गोबिंदगढ़, मंडीखेड़ा, मंगलौर, मंगुराहा, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुंबई, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, मैसूर, नांदेड़, नासिक, पलवल, पंचगांव, पंचकुला, परभनी, पटियाला, प्रतापगढ़, प्रयागराज, रायपुर, रायरंगपुर, राजकोट आदि शामिल हैं।

इन शहरों के उलट आज देश के 75 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

इन शहरों में अगरतला, आगरा, अंगुल, अंकलेश्वर, अररिया, बद्दी, बदलापुर, बागपत, बारां, बेलापुर, बेंगलुरु, भरतपुर, भावनगर, भिवाड़ी, भिवंडी, भोपाल, बीकानेर, बिलीपाड़ा, ब्रजराजनगर, बुलंदशहर, ब्यासनगर, बर्नीहाट, चंद्रपुर, चरखी दादरी, दौसा, दिल्ली, देवास, धनबाद, धारूहेड़ा, गया, गुम्मिडीपूंडी, ग्वालियर, हापुड़, हिसार, जयपुर, कैथल, कल्याण, करनाल, कोरबा, कोटा, कुरुक्षेत्र, लुधियाना, महाड, मालेगांव, मंडीदीप, मानेसर, मेरठ, मेहसाणा, मिलुपारा, मीरा-भायंदर, मुजफ्फरनगर, नागौर, नागपुर, नलबाड़ी, नंदेसरी, नारनौल, नवी मुंबई, नयागढ़, पाली, पटना, पिंपरी-चिंचवाड़, पीथमपुर, पुणे, रोहतक, सहरसा, सवाई माधोपुर, सिंगरौली, सिरसा, सोनीपत, श्री गंगानगर, सुआकाती, टोंक, उल्हासनगर, वातवा, यमुना नगर शामिल हैं।

इसी तरह बल्लभगढ़, बारबिल, फरीदाबाद, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम, हाजीपुर, नोएडा में वायु गुणवत्ता ‘खराब’ है।

क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 250 में से महज 23 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 143 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 23 मार्च को यह आंकड़ा 128 दर्ज किया गया था।

75 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।

दूसरे शहरों की तुलना में आज औरंगाबाद (बिहार) में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 382 दर्ज किया गया। वहीं कल औरंगाबाद में सूचकांक 102 रिकॉर्ड किया गया था। मतलब कि कल से प्रदूषण के स्तर में 280 अंकों का उछाल आया है।    

इससे पहले कल देश में (23 मार्च) को हाजीपुर में वायु गुणवत्ता सबसे खराब थी, जब एक्यूआई 237 दर्ज किया गया था। हालांकि आज वहां वायु गुणवत्ता में 28 अंकों का सुधार आया है।

दिल्ली में कल से प्रदूषण में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 132 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 192 पर पहुंच गया। मतलब कि पिछले 24 घंटों में सूचकांक में 60 अंकों की वृद्धि दर्ज की गई। हालांकि दिल्ली में आज भी वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में बनी हुई है।

दिल्ली की तरफ ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में इजाफा हुआ है। फरीदाबाद में जहां कल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 180 दर्ज किया गया था, जो आज बढ़कर 201 पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि फरीदाबाद में वायु गुणवत्ता आज मध्यम से खराब श्रेणी में पहुंच गई है।     

प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 24 मार्च को गाजियाबाद चौथे स्थान पर है, वहीं ग्रेटर नोएडा (263) दूसरे, जबकि बल्लभगढ़ (246) तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 138, गाजियाबाद में 227, गुवाहाटी में 57, गुरूग्राम में 224, नोएडा में 218, ग्रेटर नोएडा में 263 पर पहुंच गया है।

इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 95 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘संतोषजनक‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 90, चेन्नई में 38, चंडीगढ़ में 78, हैदराबाद में 81, जयपुर में 101 और पटना में 136 दर्ज किया गया।

इन शहरों में साफ रही हवा

देश के जिन 23 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा, उनमें आइजोल, अमरावती (आंध्रप्रदेश), बगलकोट, बेतिया, भिलाई, चामराजनगर, चेन्नई, एलुरु, कलबुर्गी, कोहिमा, कोप्पल, मदिकेरी, नागांव, नाहरलागुन, नेल्लोर, पंपोर, पेरुंदुरई, पुदुचेरी, राजमहेंद्रवरम, राजगीर, शिवमोगा, श्रीनगर, थूथुकुडी शामिल हैं।

वहीं अहमदाबाद, अहमदनगर, अजमेर, अकोला, अलवर, अंबाला, अंबरनाथ, अमरावती (महाराष्ट्र), अमृतसर, अनंतपुर, आरा, आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बालासोर, बांसवाड़ा, बरेली, बारीपदा, बाड़मेर, बैरकपुर, बठिंडा, बेगूसराय, भागलपुर, भीलवाड़ा, भिवानी, भुवनेश्वर, बीदर, बिहार शरीफ, बिलासपुर, बोइसर, बूंदी, बक्सर, चंडीगढ़, छाल, चिक्काबल्लापुर, चिक्कमगलुरु, चित्तूर, चित्तौड़गढ़, चूरू, कटक, देहरादून, धौलपुर, धुले, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलूर, फतेहाबाद, फिरोजाबाद, गांधीनगर, गोरखपुर, गुंटूर, गुवाहाटी, हल्दिया, हनुमानगढ़, हावड़ा, हैदराबाद, इंदौर, जबलपुर, जैसलमेर, जालंधर, जलगांव, जलना, जालोर, झालावाड़, झांसी, झुंझुनू, जींद, जोधपुर, कडप्पा, कन्नूर, कानपुर, करौली, कटिहार, कटनी, क्योंझर, खन्ना, खुर्जा, किशनगंज, कोल्हापुर, कोलकाता, कोल्लम, कुंजेमुरा, लातूर, लखनऊ, मछलीपट्टनम, मैहर, मंडी गोबिंदगढ़, मंडीखेड़ा, मंगलौर, मंगुराहा, मुरादाबाद, मोतिहारी, मुंबई, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, मैसूर, नांदेड़, नासिक, पलवल, पंचगांव, पंचकुला, परभनी, पटियाला, प्रतापगढ़, प्रयागराज, रायपुर, रायरंगपुर, राजकोट, राजसमंद, रामनगर, रतलाम, ऋषिकेश, राउरकेला, रूपनगर, सागर, सासाराम, सतना, शिलांग, सीकर, सिलचर, सिलीगुड़ी, सिरोही, शिवसागर, सोलापुर, सूरत, तालचेर, टेन्सा, ठाणे, तिरुवनंतपुरम, त्रिशूर, तिरुमाला, तिरुपति, तुमडीह, उदयपुर, उडुपी, उज्जैन, वडोदरा, वापी, वाराणसी, विजयवाड़ा, विरार, विशाखापत्तनम, वृंदावन, यादगीर आदि 143 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।

क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक

देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।

इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।

यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।

ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।

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