प्रदूषण का पलटवार: गुम्मिडीपूंडी-वातवा में बिगड़ी हवा, दिल्ली में 59 अंक गिरा एक्यूआई

गुम्मिडीपूंडी और वातवा में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 1,200 फीसदी अधिक है।
फोटो: आईस्टॉक
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सारांश
  • 16 अक्टूबर 2026 को देश में वायु प्रदूषण की तस्वीर में बड़ा उतार-चढ़ाव देखने को मिला।

  • गुम्मिडीपूंडी और वातवा में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 204 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। खासकर वातवा में एक दिन के भीतर एक्यूआई 73 अंक बढ़ने से प्रदूषण का खतरा बढ़ गया। यहां हवा में पीएम2.5 के महीन कणों का दबदबा है, जबकि प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन की सुरक्षित सीमा से करीब 1,200 फीसदी अधिक दर्ज किया गया।

  • इसके उलट, दिल्ली में एक्यूआई 59 अंक गिरकर 90 पर आ गया और फरीदाबाद में 25 अंकों के सुधार के साथ यह 91 दर्ज हुआ।

  • गजरौला में भी एक दिन में 140 अंकों की बड़ी गिरावट के बाद एक्यूआई 104 पर पहुंच गया।

  • केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के 264 शहरों के आंकड़ों के मुताबिक, 44 शहरों में हवा बेहतर, 154 में संतोषजनक और 64 में मध्यम श्रेणी में रही।

  • हालांकि, देश के 25 फीसदी शहरों में हवा अब भी चिंता का विषय बनी हुई है। ये आंकड़े बताते हैं कि कुछ शहरों में राहत के बावजूद प्रदूषण का खतरा लगातार बना हुआ है और हवा की सेहत में सुधार अभी अधूरा है।

सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि 16 अक्टूबर 2026 को देश में गुम्मिडीपूंडी और वातवा सबसे प्रदूषित शहर रहे। इस दौरान वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 204 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (15 अक्टूबर) को वातवा में सूचकांक 131 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 73 अंकों का भारी उछाल आया है।

रुझानों में यह भी सामने आया है कि वातवा की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) पूरी तरह हावी है। देखा जाए तो वहां फिजाओं में घुला जहर इतना ज्यादा है कि वो लोगों को बेहद बीमार बना देने के लिए काफी है।

गुम्मिडीपूंडी और वातवा में स्थिति किस कदर खराब है, इसी बात से समझा जा सकता है कि वहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 1,200 फीसदी अधिक है।

दूसरी तरफ देश में आइजोल की हवा सबसे साफ है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक महज 19 रिकॉर्ड किया गया। ऐसे में यदि देश के सबसे प्रदूषित शहर वातवा की तुलना आइजोल से करें तो वहां स्थिति 12.8 गुणा खराब है।

इससे पहले कल देश में गजरौला की हवा सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 244 दर्ज किया गया। हालांकि आज 140 अंकों के भारी सुधार के साथ गजरौला में सूचकांक घटकर 104 पर पहुंच गया है।

दिल्ली में कल से प्रदूषण में कमी आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 149 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 90 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक में 59 अंकों का सुधार दर्ज किया गया। इसके साथ ही दिल्ली में आज वायु गुणवत्ता मध्यम से संतोषजनक श्रेणी में पहुंच गई है।

2026 के दौरान दिल्ली में साल का सबसे साफ दिन 09 जुलाई को दर्ज किया गया, जब एक्यूआई 48 रिकॉर्ड किया गया। इसी तरह 08 जुलाई 2026 को सूचकांक 59 और 06 सितम्बर को 55 रिकॉर्ड किया गया। वहीं 04 अगस्त और 22 जुलाई 2026 को सूचकांक 64  दर्ज हुआ। दूसरी तरफ 18 जनवरी 2026 को दिल्ली में साल का सबसे प्रदूषित दिन दर्ज किया गया, जब एक्यूआई बढ़कर 440 तक पहुंच गया था।

दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। फरीदाबाद में जहां कल एक्यूआई 116 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 91 दर्ज किया गया। मतबल की कल से वहां प्रदूषण में 25 अंकों का सुधार आया है। इसके साथ ही वहां वायु गुणवत्ता आज संतोषजनक हो गई है।

प्रदूषण के बदलते समीकरण

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 16 अक्टूबर 2026 को 264 शहरों के लिए जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से जहां करीब 16.7 फीसदी शहरों में हवा साफ है। वहीं 58.3 फीसदी में स्थिति संतोषजनक, जबकि दूसरी तरफ 25 फीसदी शहरों में हालात चिंताजनक हैं। मतलब की देश के ज्यादातर शहरों में आज हवा संतोषजनक है।

कल से देश में साफ हवा वाले शहरों की गिनती में 22.2 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। इसी तरह संतोषजनक हवा वाले शहरों की गिनती में 21.3 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। रुझानों के मुताबिक मध्यम वायु गुणवत्ता वाले शहरों की गिनती में कल से 31.9 फीसदी की गिरावट आई है, जोकि राहत की खबर है। वहीं आज दो शहरों में वायु गुणवत्ता खराब दर्ज की गई, जबकि कल इन शहरों की गिनती पांच रिकॉर्ड की गई थी।

आंकड़ों से पता चला है कि प्रदूषण के मामले में वातवा दूसरे जबकि हाजीपुर (188) तीसरे स्थान पर है। इसी तरह हिंगोली चौथे स्थान पर है। जैसलमेर (178) – समस्तीपुर (177) में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जो पांचवें और छठे पायदान पर हैं।

भिवंडी (169) सातवें स्थान पर हैं। इसी तरह दस सबसे प्रदूषित शहरों में सासाराम (155), सागर (153) और मंडीदीप (152) शामिल हैं। रुझानों में सामने आया है कि आज देश के दस सबसे प्रदूषित शहरों में बिहार के तीन शहर (हाजीपुर, समस्तीपुर, सासाराम) शामिल हैं।

विश्लेषण से यह भी पता चला है कि गुम्मिडीपूंडी, वातवा, हाजीपुर, हिंगोली, समस्तीपुर, भिवंडी, सागर, सूरत, उज्जैन, गया, नागपुर, जलना, अररिया, दमोह, अंकलेश्वर, नवी मुंबई, मुजफ्फरनगर, कानपुर, कटनी, पूर्णिया, खोरा, गाजियाबाद, भागलपुर, मोतिहारी, मेहसाणा और सिवान आदि शहरों की हवा में प्रदूषण के महीन कण (पीएम2.5) हावी हैं।

वहीं जैसलमेर, सासाराम, मंडीदीप, पिंपरी-चिंचवाड़, पीथमपुर, भावनगर, अहमदाबाद, औरंगाबाद (बिहार), पुणे, श्री गंगानगर, अहमदनगर, जालोर, भोपाल, गांधीनगर, चंद्रपुर, देवास, जोधपुर, जोरापोखर, बल्लभगढ़, मालेगांव, नागौर, जबलपुर, कोटा, सतारा, बेलापुर, वडोदरा, सोनीपत, बर्नीहाट (मेघालय), बाड़मेर, वाराणसी, मंडी गोबिंदगढ़, नासिक, पाली, बद्दी, बीकानेर, छपरा, अंबाला, झालावाड़ और अमरावती (महाराष्ट्र) आदि शहरों में पीएम10 से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

इसी तरह कुछ शहरों में कार्बन और ओजोन से स्थिति खराब है।

इन शहरों के विपरीत देश के 16.7 फीसदी यानी 44 शहरों में हवा साफ है। इन साफ हवा वाले शहरों में कटक, दावणगेरे, देहरादून, धौलपुर, फतेहाबाद, फिरोजाबाद, गंगटोक, हावेरी, जींद, कलबुर्गी, क्योंझर, कुरनूल, मथुरा, मैसूरु, नाहरलागुन, नांदेड़, नयागढ़, पंचकूला, रायरंगपुर, राजमहेंद्रवरम, रामनगर, ऋषिकेश, रूपनगर, श्रीनगर, सुआकाती, टेन्सा, तिरुवनंतपुरम आदि शामिल हैं।

इसी तरह देश के 154 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक दर्ज की गई। इनमें गुवाहाटी, ग्वालियर, हल्दिया, हनुमानगढ़, हापुड़, हिसार, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जयपुर, जालंधर, जलगांव, झांसी, झुंझुनू, कडप्पा, कैथल, कल्याण, कन्नूर, करौली, करनाल, कारवार, कटिहार, खन्ना, खुर्जा, किशनगंज, कोहिमा, कोल्हापुर, कोलकाता, कोप्पल, कोरबा, कुरुक्षेत्र, लातूर, लखनऊ, लुधियाना, महाद, मैहर, मंडीखेड़ा, मानेसर, मंगलौर, मंगुराहा, मेरठ, मिलुपारा, मीरा-भायंदर, मुरादाबाद, मुंबई, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, नागांव, नलबाड़ी, नारनौल, नेल्लोर, नोएडा, पलवल, पंचगांव, पारादीप, परभणी, पटियाला, पटना, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुडुचेरी, रायबरेली, रायचूर, रायपुर, राजगीर, राजकोट, राजसमंद, रतलाम, रोहतक, राउरकेला, सहरसा, सांगली, सतना, सवाई माधोपुर, शामली, शिलांग, शिवमोगा, सीकर, सिलचर, सिलीगुड़ी, सिरोही आदि शहर शामिल हैं।

इन शहरों के उलट आज देश के 64 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में है।

इनमें अहमदाबाद, अहमदनगर, अंबाला, अमरावती (महाराष्ट्र), अंकलेश्वर, अररिया, औरंगाबाद (बिहार), बद्दी, बल्लभगढ़, बाड़मेर, बेलापुर, भागलपुर, भावनगर, भिवंडी, भोपाल, बीकानेर, बर्नीहाट (मेघालय), चंद्रपुर, छपरा, दमोह, देवास, गजरौला, गांधीनगर, गया, गाजियाबाद, हाजीपुर, हिंगोली, जबलपुर, जैसलमेर, जलना, जालोर, झालावाड़, जोधपुर, जोरापोखर, कानपुर, कटनी, खोरा, कोटा, मालेगांव, मंडीदीप, मंडी गोबिंदगढ़, मेहसाणा, मोतिहारी, मुजफ्फरनगर, नागौर, नागपुर, नासिक, नवी मुंबई, पाली, पिंपरी-चिंचवाड़, पीथमपुर, पुणे, पूर्णिया, सागर, समस्तीपुर, सासाराम, सतारा, सिवान, सोनीपत, श्री गंगानगर, सूरत, उज्जैन, वडोदरा और वाराणसी शामिल हैं।

इसी तरह गुम्मिडीपूंडी और वातवा (204) में स्थिति खराब दर्ज की गई है।

क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 264 में से 44 शहरों में हवा 'बेहतर' है। 154 शहरों में वायु गुणवत्ता का स्तर 'संतोषजनक' (51-100 के बीच) रिकॉर्ड किया गया, गौरतलब है कि 15 अक्टूबर को यह आंकड़ा 127 दर्ज किया गया था।

64 शहरों में वायु गुणवत्ता 'मध्यम' श्रेणी में (101-200 के बीच) बनी हुई है।

दूसरे शहरों की तुलना में आज गुम्मिडीपूंडी और वातवा में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 204 दर्ज किया गया, जोकि ‘खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं कल (15 अक्टूबर) को वातवा में सूचकांक 131 दर्ज किया गया था। मतलब कि कल से वहां प्रदूषण के स्तर में 73 अंकों का भारी उछाल आया है।

इससे पहले कल देश में गजरौला की हवा सबसे ज्यादा खराब थी, जब एक्यूआई 244 दर्ज किया गया। हालांकि आज 140 अंकों के भारी सुधार के साथ गजरौला में सूचकांक घटकर 104 पर पहुंच गया है।

दिल्ली में कल से प्रदूषण में कमी आई है। दिल्ली में जहां कल एक्यूआई 149 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 90 पर पहुंच गया। मतलब की पिछले 24 घंटों में वहां वायु गुणवत्ता सूचकांक में 59 अंकों का सुधार दर्ज किया गया। इसके साथ ही दिल्ली में आज वायु गुणवत्ता मध्यम से संतोषजनक श्रेणी में पहुंच गई है।

दिल्ली की तरह ही फरीदाबाद में भी कल से प्रदूषण में गिरावट आई है। फरीदाबाद में जहां कल एक्यूआई 116 दर्ज किया गया था, जो आज घटकर 91 दर्ज किया गया। मतबल की कल से वहां प्रदूषण में 25 अंकों का सुधार आया है। इसके साथ ही वहां वायु गुणवत्ता आज संतोषजनक हो गई है।

प्रदूषण में उतार-चढ़ाव का दौर लगातार जारी है। प्रदूषण के मामले में 16 अक्टूबर को हिंगोली (188) चौथे स्थान पर है, वहीं वातवा (204) दूसरे, जबकि हाजीपुर तीसरे स्थान पर है। अन्य प्रमुख शहरों से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्वालियर में इंडेक्स 99, गाजियाबाद में 105, गुवाहाटी में 74, गुरूग्राम में 89, नोएडा में 83, ग्रेटर नोएडा में 77 पर पहुंच गया है।

इसी तरह मुंबई में वायु गुणवत्ता सूचकांक 99 दर्ज किया गया, जो प्रदूषण के ‘संतोषजनक‘ स्तर को दर्शाता है, जबकि लखनऊ में यह इंडेक्स 89, चेन्नई में 77, चंडीगढ़ में 44, हैदराबाद में 67, जयपुर में 74 और पटना में 91 दर्ज किया गया।

इन शहरों में साफ रही हवा

देश के जिन 44 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 या उससे नीचे यानी 'बेहतर' रहा। इन शहरों में आइजोल, अमरावती (आंध्र प्रदेश), बालासोर, बारबिल, बारीपदा, बेतिया, भिवानी, भुवनेश्वर, बक्सर, ब्यासनगर, चामराजनगर, चंडीगढ़, चिक्काबल्लापुर, कुड्डालोर, कटक, दावणगेरे, देहरादून, धौलपुर, फतेहाबाद, फिरोजाबाद, गंगटोक, हावेरी, जींद, कलबुर्गी, क्योंझर, कुरनूल, मथुरा, मैसूरु, नाहरलागुन, नांदेड़, नयागढ़, पंचकूला, रायरंगपुर, राजमहेंद्रवरम, रामनगर, ऋषिकेश, रूपनगर, श्रीनगर, सुआकाती, टेन्सा, तिरुवनंतपुरम, थूथुकुडी, विजयपुरा और विशाखापत्तनम शामिल हैं।

वहीं अगरतला, आगरा, अजमेर, अकोला, अलवर, अंबरनाथ, अमृतसर, अनंतपुर, अंगुल, आरा, आसनसोल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र), बदलापुर, बागलकोट, बागपत, बहादुरगढ़, बांसवाड़ा, बारां, बड़ौत, बरेली, बैरकपुर, बठिंडा, बीड, बेगूसराय, बेंगलुरु, भरतपुर, भिलाई, भीलवाड़ा, भिवाड़ी, बिहार शरीफ, बिलासपुर, बिलीपाड़ा, बोइसर, ब्रजराजनगर, बुलंदशहर, बूंदी, बर्नीहाट (असम), चरखी दादरी, चेन्नई, छाल, चित्तौड़गढ़, चुरू, दौसा, दिल्ली, धारूहेड़ा, धारवाड़, धुले, डोंबिवली, डूंगरपुर, दुर्गापुर, एलूर, एलुरु, फरीदाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुंटूर, गुरुग्राम, गुवाहाटी, ग्वालियर, हल्दिया, हनुमानगढ़, हापुड़, हिसार, हावड़ा, हुबली, हैदराबाद, इंदौर, जयपुर, जालंधर, जलगांव, झांसी, झुंझुनू, कडप्पा, कैथल, कल्याण, कन्नूर, करौली, करनाल, कारवार, कटिहार, खन्ना, खुर्जा, किशनगंज, कोहिमा, कोल्हापुर, कोलकाता, कोप्पल, कोरबा, कुरुक्षेत्र, लातूर, लखनऊ, लुधियाना, महाद, मैहर, मंडीखेड़ा, मानेसर, मंगलौर, मंगुराहा, मेरठ, मिलुपारा, मीरा-भायंदर, मुरादाबाद, मुंबई, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, नागांव, नलबाड़ी, नारनौल, नेल्लोर, नोएडा, पलवल, पंचगांव, पारादीप, परभणी, पटियाला, पटना, प्रतापगढ़, प्रयागराज, पुडुचेरी, रायबरेली, रायचूर, रायपुर, राजगीर, राजकोट, राजसमंद, रतलाम, रोहतक, राउरकेला, सहरसा, सांगली, सतना, सवाई माधोपुर, शामली, शिलांग, शिवमोगा, सीकर, सिलचर, सिलीगुड़ी, सिरोही, शिवसागर, सोलापुर, श्रीकाकुलम, तालचेर, ठाणे, त्रिशूर, तिरुमाला, टोंक, तुमडीह, उडुपी, उल्हासनगर, वापी, विजयवाड़ा, विरार, यादगीर और यमुना नगर आदि 154 शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक रही, जहां सूचकांक 51 से 100 के बीच दर्ज किया गया।

क्या दर्शाता है वायु गुणवत्ता सूचकांक

देश में वायु प्रदूषण के स्तर और वायु गुणवत्ता की स्थिति को आप इस सूचकांक से समझ सकते हैं जिसके अनुसार यदि हवा साफ है तो उसे इंडेक्स में 0 से 50 के बीच दर्शाया जाता है। इसके बाद वायु गुणवत्ता के संतोषजनक होने की स्थिति तब होती है जब सूचकांक 51 से 100 के बीच होती है।

इसी तरह 101-200 का मतलब है कि वायु प्रदूषण का स्तर माध्यम श्रेणी का है, जबकि 201 से 300 की बीच की स्थिति वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को दर्शाती है। वहीं यदि सूचकांक 301 से 400 के बीच दर्ज किया जाता है जैसा दिल्ली में अक्सर होता है तो वायु गुणवत्ता को बेहद खराब की श्रेणी में रखा जाता है।

यह वो स्थिति है जब वायु प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य को गंभीर और लम्बे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद 401 से 500 की केटेगरी आती है जिसमें वायु गुणवत्ता की स्थिति गंभीर बन जाती है।

ऐसी स्थिति होने पर वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो जाती है कि वो स्वस्थ इंसान को भी नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पहले से ही बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए तो यह जानलेवा हो सकती है।

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