प्रदूषित हवा से पुरुषों की प्रजनन क्षमता पर खतरा, शुक्राणुओं में बदलाव के संकेत

नई रिसर्च में खुलासा, प्रदूषित हवा से शुक्राणुओं के डीएनए में बदलाव का खतरा, पुरुषों की प्रजनन क्षमता और आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य पर चिंता बढ़ी।
2000 से अधिक पुरुषों पर शोध, प्रदूषित हवा के संपर्क से जीन गतिविधि में बदलाव के संकेत मिले, वैज्ञानिकों ने जताई चिंता।
2000 से अधिक पुरुषों पर शोध, प्रदूषित हवा के संपर्क से जीन गतिविधि में बदलाव के संकेत मिले, वैज्ञानिकों ने जताई चिंता।फोटो साभार: आईस्टॉक
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सारांश
  • नए शोध में खुलासा, वायु प्रदूषण से शुक्राणुओं के डीएनए में बदलाव संभव, पुरुषों की प्रजनन क्षमता पर असर का खतरा बढ़ा।

  • 2000 से अधिक पुरुषों पर शोध, प्रदूषित हवा के संपर्क से जीन गतिविधि में बदलाव के संकेत मिले, वैज्ञानिकों ने जताई चिंता।

  • ओजोन और नाइट्रोजन डाइऑक्साइड का असर ज्यादा, प्रदूषण से शुक्राणु विकास और स्वास्थ्य से जुड़े जीन प्रभावित होने की आशंका।

  • शुक्राणुओं में डीएनए बदलाव से गर्भावस्था और बच्चों के स्वास्थ्य पर संभावित प्रभाव, शोधकर्ताओं ने आगे अध्ययन की जरूरत बताई।

  • वायु प्रदूषण बना प्रजनन स्वास्थ्य के लिए नई चुनौती, वैज्ञानिकों ने स्वच्छ हवा को स्वस्थ भविष्य के लिए जरूरी बताया।

वायु प्रदूषण का असर अब केवल फेफड़ों और दिल तक सीमित नहीं माना जा रहा है। एक नई वैज्ञानिक रिपोर्ट में संकेत मिले हैं कि प्रदूषित हवा पुरुषों की प्रजनन क्षमता को भी प्रभावित कर सकती है। शोधकर्ताओं ने पाया है कि वायु प्रदूषण के संपर्क में आने से शुक्राणुओं (स्पर्म) के डीएनए में बदलाव हो सकते हैं, जिससे जीन के काम करने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

यह अध्ययन यूरोपियन सोसाइटी ऑफ ह्यूमन रिप्रोडक्शन एंड एम्ब्रियोलॉजी (ईएसएचआरई) की 42वीं वार्षिक बैठक में पेश किया गया। इसके निष्कर्ष मेडिकल जर्नल ह्यूमन रिप्रोडक्शन में प्रकाशित हुए हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह अध्ययन पुरुषों के स्वास्थ्य के साथ-साथ गर्भावस्था और आने वाली पीढ़ी के स्वास्थ्य को समझने में भी महत्वपूर्ण हो सकता है।

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2000 से ज्यादा पुरुषों पर हुआ अध्ययन

शोध अमेरिका के साल्ट लेक सिटी में 2013 से 2017 के बीच किया गया। इसमें 2,000 से अधिक पुरुषों को शामिल किया गया। इन पुरुषों से समय-समय पर शुक्राणुओं के नमूने लिए गए। छह महीने बाद 1,220 पुरुषों के नमूनों की विशेष जांच की गई।

वैज्ञानिकों ने शुक्राणुओं में डीएनए मिथाइलेशन नामक प्रक्रिया का अध्ययन किया। यह शरीर की एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, जिसमें डीएनए की संरचना बदले बिना जीन की गतिविधि को नियंत्रित किया जाता है। शोधकर्ताओं ने देखा कि क्या प्रदूषण के संपर्क से इस प्रक्रिया में कोई बदलाव आता है।

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ओजोन और नाइट्रोजन डाइऑक्साइड का ज्यादा असर

शोधकर्ताओं ने कई तरह के वायु प्रदूषकों का अध्ययन किया, जिनमें ओजोन, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड और पीएम2.5 जैसे छोटे कण शामिल थे।

अध्ययन में पाया गया कि इन प्रदूषकों के संपर्क से शुक्राणुओं के डीएनए में 39 जगहों पर बदलाव जुड़े हुए थे। इनमें ओजोन और नाइट्रोजन डाइऑक्साइड का प्रभाव सबसे अधिक दिखाई दिया। ये प्रदूषक आमतौर पर बड़े शहरों में वाहनों के धुएं और ईंधन जलने के कारण ज्यादा पाए जाते हैं।

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जीन में बदलाव से बढ़ी चिंता

शोधकर्ताओं के अनुसार, प्रदूषण से जुड़े बदलाव उन जीन में मिले हैं जो शुक्राणु बनने, गुणसूत्रों की व्यवस्था और कोशिकाओं की सुरक्षा जैसी जरूरी प्रक्रियाओं में भूमिका निभाते हैं।

इनमें जीएनएएस नामक जीन में बदलाव सबसे ज्यादा ध्यान देने वाला रहा। यह जीन भ्रूण के शुरुआती विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पहले के शोध में भी इसे शुक्राणु की गुणवत्ता और बच्चे के विकास से जोड़ा गया है।

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वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर पिता के शुक्राणुओं में इस तरह के बदलाव होते हैं तो यह सवाल उठता है कि क्या इसका असर केवल गर्भधारण तक सीमित रहता है या बच्चे के स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है। हालांकि, इस संबंध को साबित करने के लिए अभी और शोध की जरूरत है।

आगे क्या?

शोध पत्र में शोधकर्ता के हवाले से कहा गया है कि शुरुआती निष्कर्ष बताते हैं कि शुक्राणु बनने के समय प्रदूषण का संपर्क डीएनए में बदलाव से जुड़ा हो सकता है। लेकिन यह जानना जरूरी है कि इन बदलावों का वास्तविक रूप से पुरुषों की प्रजनन क्षमता और गर्भावस्था पर कितना असर पड़ता है।

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उन्होंने कहा कि आगे के अध्ययनों में अलग-अलग शहरों और देशों के लोगों पर इस शोध को दोहराने की जरूरत है। साथ ही घर के अंदर की हवा और रोजाना होने वाले व्यक्तिगत प्रदूषण संपर्क का भी अध्ययन किया जाना चाहिए।

स्वच्छ हवा केवल सांस के लिए नहीं, प्रजनन स्वास्थ्य के लिए भी जरूरी

विशेषज्ञों के अनुसार, वायु प्रदूषण आज दुनिया के सामने बड़ी स्वास्थ्य चुनौती है। पहले ही कई अध्ययनों में इसे हृदय और फेफड़ों की बीमारियों से जोड़ा जा चुका है। अब इसके प्रजनन स्वास्थ्य पर असर को लेकर भी वैज्ञानिकों का ध्यान बढ़ रहा है।

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ईएसएचआरई के शोधकर्ता ने कहा कि यह शोध प्रदूषण और प्रजनन समस्याओं के बीच संबंध को समझने में एक और महत्वपूर्ण कड़ी है। उनके अनुसार, प्रदूषण के कारण गर्भधारण में परेशानी के पीछे कई कारण हो सकते हैं और शुक्राणुओं में होने वाले बदलाव उनमें से एक हो सकते हैं।

वैज्ञानिकों का मानना है कि बेहतर हवा न केवल वर्तमान पीढ़ी के स्वास्थ्य के लिए जरूरी है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के बेहतर भविष्य के लिए भी महत्वपूर्ण है।

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