

वायु प्रदूषण से बने एरोसोल कोहरे की बूंदों की संख्या और आकार बढ़ाकर कोहरे को अधिक मोटा और गहरा बनाते हैं।
उपग्रह आंकड़ों से पता चला कि घना कोहरा एरोसोल की ऊंची परत के भीतर बनता और ऊपर की ओर फैलता है।
अधिक बूंदों से गुप्त ऊष्मा और विकिरण शीतलन बढ़ता है, जिससे कोहरे के अंदर तेज ऊर्ध्वाधर मिश्रण होता है।
रात के समय तापमान उलटाव नमी को फंसाता है, जिससे उच्च प्रदूषण की स्थिति में कोहरा 25 प्रतिशत तक मोटा होता है।
अध्ययन दर्शाता है कि वायु प्रदूषण नियंत्रण से घने कोहरे की तीव्रता, अवधि और उससे होने वाले आर्थिक नुकसान घटाए जा सकते हैं।
उत्तर भारत में सर्दियों के मौसम में घना कोहरा एक आम समस्या है। हर साल ठंड के महीनों में कोहरा इतना गाढ़ा हो जाता है कि सड़कों, रेल और हवाई यातायात पर बुरा असर पड़ता है। कई बार स्कूल बंद करने पड़ते हैं, ट्रेनें और उड़ानें रद्द होती हैं और आर्थिक नुकसान भी होता है। इस घने कोहरे का एक बड़ा कारण वायु प्रदूषण और हवा में मौजूद बहुत छोटे कण होते हैं, जिन्हें एरोसोल कहा जाता है।
हाल ही में साइंस एडवांसेज नामक पत्रिका में प्रकाशित एक नए अध्ययन ने यह समझाने की कोशिश की है कि वायु प्रदूषण किस तरह कोहरे को और ज्यादा घना तथा गाढ़ा बना देता है। यह अध्ययन उत्तर भारत के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
एरोसोल क्या हैं?
एरोसोल हवा में मौजूद बहुत छोटे कण होते हैं। ये धूल, धुआं, गाड़ियों से निकलने वाला धुआं, कारखानों का प्रदूषण और पराली जलाने से बनते हैं। सर्दियों में हवा शांत रहती है, जिससे ये कण वातावरण में लंबे समय तक बने रहते हैं।
वैज्ञानिकों ने क्या किया?
इस अध्ययन में वैज्ञानिकों ने 15 सालों के सैटेलाइट आंकड़ों का उपयोग किया। इसके लिए उन्होंने कैलिप्सो और मोडिस नाम के उपग्रहों से जानकारी ली। इन आंकड़ों की मदद से उन्होंने यह देखा कि कोहरे का गाढ़ापन कितना होता है और हवा में एरोसोल की मात्रा कितनी है। इसके साथ-साथ उन्होंने कंप्यूटर मॉडल की मदद से कोहरे के बनने और बढ़ने की प्रक्रिया का भी अध्ययन किया।
कोहरा कैसे घना होता है?
अध्ययन में पाया गया कि उत्तर भारत में कोहरा आमतौर पर लगभग 0.5 से 0.6 किमी गहरा होता है, लेकिन इसके ऊपर एरोसोल की एक परत 1.5 किलोमीटर तक फैली होती है। जब हवा में एरोसोल की मात्रा ज्यादा होती है, तो कोहरे की बूंदें आकार में बड़ी हो जाती हैं और उनमें पानी की मात्रा भी बढ़ जाती है।
एरोसोल पानी की बूंदों के बनने में मदद करते हैं। जितने ज्यादा एरोसोल होंगे, उतनी ही ज्यादा बूंदें बनेंगी। इससे कोहरे के ऊपर वाले हिस्से में ज्यादा पानी जमा हो जाता है।
ऊष्मा और कोहरे का संबंध
जब कोहरे में पानी की बूंदें बनती हैं, तो ऊष्मा निकलती है, जिसे गुप्त ऊष्मा (लेटेंट हीट) कहा जाता है। यह ऊष्मा कोहरे के कणों को हल्का बना देती है, जिससे वे ऊपर की ओर उठने लगते हैं। इसे वैज्ञानिक भाषा में “उत्प्लावन” कहा जाता है।
कोहरे के ऊपर वाले हिस्से से ऊष्मा बाहर निकलती है, जिसे दीर्घ तरंग विकिरण (लॉन्गवेव रेडिएशन) कहते हैं। जब बूंदों की संख्या ज्यादा होती है, तो यह ऊष्मा और तेजी से बाहर जाती है। इससे कोहरे का ऊपरी हिस्सा ठंडा हो जाता है, जबकि निचला हिस्सा अपेक्षाकृत गर्म रहता है। इस तापमान के अंतर से कोहरे के अंदर तेज हलचल (मिक्सिंग) होती है, जिससे कोहरा और ऊपर तक फैल जाता है।
एक सकारात्मक चक्र
अध्ययन के अनुसार, यह पूरी प्रक्रिया एक सकारात्मक चक्र की तरह काम करती है। ज्यादा एरोसोल - ज्यादा बूंदें - ज्यादा ऊष्मा - ज्यादा हलचल - और ज्यादा बूंदें। इस चक्र के कारण कोहरा लगातार गाढ़ा होता चला जाता है।
रात में कोहरा ज्यादा क्यों बढ़ता है?
रात के समय यह प्रभाव और भी ज्यादा मजबूत हो जाता है। अध्ययन में पाया गया कि रात में कोहरा 17 से 25 प्रतिशत तक ज्यादा गहरा हो सकता है। इसका कारण यह है कि रात में सूरज की गर्मी नहीं होती और कोहरे के ऊपर एक गर्म हवा की परत बन जाती है। यह परत नमी को नीचे फंसा लेती है और कोहरे को और घना बनने में मदद करती है।
सुबह सूरज निकलने के बाद कोहरा धीरे-धीरे पतला होने लगता है, लेकिन कई बार यह पूरी तरह नहीं छंटता।
अध्ययन की सीमाएं और भविष्य
वैज्ञानिकों ने माना है कि उनके मॉडल में कुछ सीमाएं हैं और कोहरे की मोटाई शायद वास्तविकता से कम दिखाई गई हो। फिर भी यह अध्ययन कोहरे और प्रदूषण के बीच के संबंध को समझने में एक महत्वपूर्ण कदम है।
भविष्य में बेहतर मॉडल और ज्यादा आंकड़ों की मदद से कोहरे की सटीक भविष्यवाणी की जा सकती है। इससे यातायात व्यवस्था, स्वास्थ्य और वायु गुणवत्ता प्रबंधन में सुधार हो सकता है।
यह अध्ययन साफ दिखाता है कि वायु प्रदूषण केवल स्वास्थ्य के लिए ही नहीं, बल्कि घने कोहरे जैसी समस्याओं के लिए भी जिम्मेदार है। यदि एरोसोल और प्रदूषण को कम किया जाए, तो उत्तर भारत में सर्दियों के खतरनाक कोहरे को भी काफी हद तक कम किया जा सकता है।