डब्ल्यूएचओ की नई पहल: जलवायु, वायु प्रदूषण व ऊर्जा संकट में स्वास्थ्य को सबसे ऊपर रखने की योजना

जलवायु परिवर्तन, वायु प्रदूषण और ऊर्जा संकट से निपटने के लिए डब्ल्यूएचओ की नई वैश्विक योजना, स्वास्थ्य को केंद्र में रखकर अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने की पहल।
डब्ल्यूएचओ ने 2025-2028 के लिए नई योजना जारी की, जलवायु परिवर्तन और वायु प्रदूषण में स्वास्थ्य को केंद्र में रखा।
डब्ल्यूएचओ ने 2025-2028 के लिए नई योजना जारी की, जलवायु परिवर्तन और वायु प्रदूषण में स्वास्थ्य को केंद्र में रखा।फोटो साभार: आईस्टॉक
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सारांश
  • डब्ल्यूएचओ ने 2025-2028 के लिए नई योजना जारी की, जलवायु परिवर्तन और वायु प्रदूषण में स्वास्थ्य को केंद्र में रखा।

  • हर साल लगभग 70 लाख मौतें वायु प्रदूषण से होती हैं, स्वास्थ्य को जलवायु नीति में प्राथमिकता देने पर जोर दिया।

  • योजना देशों को जलवायु कार्य योजनाओं और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय तंत्र में स्वास्थ्य शामिल करने में तकनीकी मदद देती है।

  • डब्ल्यूएचओ विभिन्न क्षेत्रों जैसे ऊर्जा, शहरों और वित्त के साथ सहयोग बढ़ाकर जलवायु और स्वास्थ्य संकट से निपटने का लक्ष्य रखता है।

  • संगठन स्वास्थ्य सेवाओं को कार्बन-न्यूट्रल बनाने और 2030 तक कम प्रदूषण वाली स्वास्थ्य प्रणाली विकसित करने पर काम कर रहा है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने वर्ष 2025 से 2028 के लिए एक नई योजना जारी की है, जिसका उद्देश्य जलवायु परिवर्तन, वायु प्रदूषण और ऊर्जा गरीबी के मुद्दों में स्वास्थ्य को सबसे महत्वपूर्ण स्थान दिलाना है। इस योजना का नाम है “जलवायु परिवर्तन, वायु प्रदूषण और ऊर्जा गरीबी के प्रति स्वास्थ्य प्रतिक्रिया के केंद्र में डब्ल्यूएचओ (2025-2028)”. यह योजना सदस्य देशों द्वारा विश्व स्वास्थ्य सभा में लिए गए फैसलों को लागू करने के लिए तैयार की गई है।

क्यों जरूरी है यह योजना

आज दुनिया भर में वायु प्रदूषण एक गंभीर समस्या बन चुका है। अनुमान के अनुसार हर साल लगभग 70 लाख लोग केवल प्रदूषित हवा के कारण अपनी जान गंवा देते हैं। इसके साथ ही जलवायु परिवर्तन के कारण गर्मी, बाढ़, सूखा और तूफानों जैसी घटनाएं बढ़ रही हैं, जो सीधे तौर पर लोगों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही हैं।

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दूसरी ओर, स्वास्थ्य क्षेत्र भी जलवायु संकट में योगदान देता है। दुनिया के कुल ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन का लगभग पांच प्रतिशत स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ा हुआ है। इसके बावजूद, जलवायु वित्त का बहुत छोटा हिस्सा - लगभग 0.5 प्रतिशत - ऐसी परियोजनाओं में जाता है जो सीधे स्वास्थ्य की सुरक्षा पर केंद्रित हों। इसी अंतर को कम करना इस योजना का मुख्य लक्ष्य है।

सदस्य देशों की भूमिका और लक्ष्य

यह योजना सदस्य देशों को व्यवहारिक सहायता प्रदान करेगी। इसके तहत देशों को ऐसे संदेश और तकनीकी मार्गदर्शन दिए जाएंगे, जिनसे वे संयुक्त राष्ट्र (यूएन) की बैठकों और जलवायु वार्ताओं में स्वास्थ्य के मुद्दों को मजबूत तरीके से रख सकें।

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इसके अलावा, देशों को अपने राष्ट्रीय जलवायु कार्य योजनाओं और अनुकूलन योजनाओं में स्वास्थ्य को शामिल करने में मदद दी जाएगी। साथ ही, ग्रीन क्लाइमेट फंड और अन्य अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों से धन प्राप्त करने के रास्ते भी आसान किए जाएंगे।

जनता और विभिन्न क्षेत्रों को जोड़ने की कोशिश

इस योजना का उद्देश्य केवल सरकारों तक सीमित नहीं है। इसमें डॉक्टरों, शोधकर्ताओं, शहरों के प्रशासकों, वित्तीय संस्थानों, नागरिक समाज और अन्य संगठनों को भी एक साथ जोड़ने की बात कही गई है।

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डब्ल्यूएचओ का मानना है कि जब अलग-अलग क्षेत्रों के लोग एक साझा लक्ष्य के लिए काम करते हैं, तो जलवायु परिवर्तन के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों को कम किया जा सकता है और समाज अधिक सुरक्षित बन सकता है।

चार प्रमुख रणनीतिक क्षेत्र

इस नई योजना को चार मुख्य हिस्सों में बांटा गया है। पहला, डब्ल्यूएचओ को जलवायु परिवर्तन, स्वच्छ हवा और ऊर्जा स्वास्थ्य के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्वकर्ता के रूप में मजबूत करना। इसके लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग और तकनीकी मार्गदर्शन को बढ़ाया जाएगा।

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दूसरा, जलवायु और स्वास्थ्य के बारे में लोगों में जागरूकता बढ़ाना है। इसके लिए नए संचार अभियान और साझेदारी कार्यक्रम चलाए जाएंगे, ताकि जनता को समझाया जा सके कि जलवायु परिवर्तन सीधे उनके स्वास्थ्य को कैसे प्रभावित करता है।

तीसरा, ऊर्जा, शहरी विकास, वित्त और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों के साथ सहयोग बढ़ाना है, ताकि नीतियाँ अलग-अलग विभागों में बंटी न रहें बल्कि एक साथ मिलकर काम करें।

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चौथा, स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल बनाना है। इसके तहत डब्ल्यूएचओ अपने कामकाज को 2030 तक कार्बन-न्यूट्रल बनाने का लक्ष्य रखता है और देशों को भी कम प्रदूषण वाली स्वास्थ्य प्रणाली अपनाने में मदद करेगा।

विशेषज्ञों की राय

रिपोर्ट में डब्ल्यूएचओ के जलवायु और वायु गुणवत्ता विभाग के प्रमुख डॉ. डायर्मिड कैंपबेल-लेंड्रम के हवाले से कहा गया है कि जलवायु संकट के समाधान पहले से मौजूद हैं और वे लोगों की जान बचा सकते हैं। उनका कहना है कि सही जानकारी लोगों तक पहुंचाना बेहद जरूरी है ताकि वे बदलाव के लिए प्रेरित हो सकें।

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अन्य विशेषज्ञों ने भी कहा कि जलवायु परिवर्तन अब केवल पर्यावरण का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह एक बड़ा स्वास्थ्य संकट बन चुका है, जिसे सभी क्षेत्रों के साथ मिलकर हल करना होगा।

आगे की दिशा

डब्ल्यूएचओ ने सभी देशों और साझेदार संगठनों से इस योजना को लागू करने में सहयोग देने की अपील की है। संगठन का मानना है कि यदि सभी मिलकर काम करें, तो जलवायु परिवर्तन से होने वाले स्वास्थ्य नुकसान को कम किया जा सकता है और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित और स्वस्थ दुनिया बनाई जा सकती है।

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